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Folk Gods Of Uttarakhand - उत्तराखण्ड के स्थानीय देवी-देवता

Started by पंकज सिंह महर, November 02, 2007, 02:18:53 PM

Risky Pathak

छुरमल देवता किसी किसी स्थान पर चहरमल नाम से भी जाने जाते है|
बेरीनाग क्षेत्र के  गड्यार गाँव मे ये नागिमल नाम से भी जाने जाते है|     
Quote from: पंकज सिंह महर on June 11, 2008, 12:28:22 PM
छुरमल

छुरमल भी उत्तराखण्ड के लोक देवता हैं, कई जगह इनके मंदिर हैं। इनको सूर्यपुत्र भी कहा जाता है, इसके पीछे यह कहा जाता है कि यह कासिन जी के लड़्के थे और कासिन इनको अपना लड़का नहीं मानते थे, लेकिन छुरमल जी ने जब कहा कि मैं आपका ही लड़का हूं तो कासिन जी ने इनसे कहा कि "अगर तुम जिन्दा शेर को पकड़कर ले आये, तो मैं मान जाऊंगा कि तुम मेरे ही पुत्र हो" इस पर छुरमल जी एक शेर को जिन्दा पकड़ लाये, फिर भी कासिन जी ने उन्हें अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया। इनकी वीरता देखकर सूर्य भगवान ने इनको अपना पुत्र मान लिया। कासिन जी से इनकी हमेशा खट-पट ही रही, इसलिये इनके मंदिर भे एक साथ नहीं होते।


हेम पन्त

Pankaj da aapko Gangnath aur Bhana ki kahani bhi jarur gyat hogi... Kriapaya forum par upalabdh karayein...

Rajen

हेम जी, गंगनाथ जागर की एक लाइव सी.डी. मैने तैयार की थी जो कि मेरे गांव में है। चूंकि इस बार परिस्थितियां प्रतिकूल थी, मैं उसे अपने साथ नहीं ला पाया। अगली बार अवश्य ही लाउंगा और यहां प्रस्तुत करुंगा।

Quote from: H. Pant on June 11, 2008, 12:33:56 PM
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पंकज सिंह महर

Quote from: H. Pant on June 11, 2008, 12:33:56 PM
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गंगनाथ

हेम दा, मेरी जानकारी के अनुसार गंगनाथ जी भी लोक देवता हैं, ये पश्चिमी नेपाल के डोटी अंचल के राजा वैभव चंद के पुत्र थे। युवाकाल में इन्हें किसी ब्राह्मण (जोशी) स्त्री, भाना से प्यार हो गया, तब राजा वैभव चंद ने इन्हें राजकुमार की पदवी से वंचित कर दिया और उन्हें डोटी छोड़्ने के निर्देश दिया। भाना के पिता या पति ने गंगनाथ जी की हत्या कर दी थी।

हेम पन्त

पहाड में दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाली चीजों को मह्त्व दिया जाता है. जल श्रोत नौला को भी देवरूप में पूजा जाता है. ऐसा ही एक नौलाथान हमारे गांव में भी है. गांव में पशुओं को मुंहपका-खुर्पका रोग हो जाने पर इस जगह गांव के लोगो द्वारा सामुहिक पूजा की जाती है


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आचरि परी

आचरी परी भी हिमालय क्षेत्र मे निवास करती है और ये भगवती माता के साथ ही रहती है! उत्तराखंड के विभिब्न्न सथानो मे इनकी पूजा की जाती है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


विलेश्वर महादेव

विलेश्वर महादेव का मन्दिर पिथोरागढ़ से लगभग ९ कम की दूरी पर विषाड ग्राम मे है. जहाँ पर विलेश्वर महादेव का मन्दिर है. इस मन्दिर मे शेषशायी विष्णु का पट्ट है ! ८०० से ९०० वर्ष पुरानी मूर्तिया है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गुवाल्दी

यह भी एक प्रकार का देवता का नाम है ! जो जानवरों के देवता से संभंधित है ! पहले लोग गुवाल्दी की पूजा करते थे लेकिन यह कम देखने को मिलता है !


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



NARSING DEVTA

The temple is situated in the heart of Joshimath on the old route to Badrinath through the Bazaar area. Of all the temples in Joshimath the Narasingha temple is the most magnificent. Carved from the Shaligram it was supposedly crafted in the eighth century during the reign of king Lalitaditya Yukta Pida of Kashmir. The Narasingha legend is fascinating one. Hiranyakashipu, the demon king worshiped Vishnu and received from him a boon that made him invincible and invulnerable to both man  and beast. The boon also protected him from death, during day and night, indoor and outdoor.

        Thus assured of immortality, the demon king showed his true color and declared himself to be a God. To end his tyranny Vishnu assumed the form of Narasingha , Half Man and Hal Lion. He then slew Hiranyakashipu when the sun had just half set, hence the time was neither day nor night. The act was done at the threshold, making it neither indoor nor outdoor. People believe  that one day the hand of the idol will finally fall off and it is supposed that Badrinath shrine then shift to Bhavishya Badri.