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ON-LINE KAVI SAMMELAN - ऑनलाइन कवि सम्मेलन दिखाए, अपना हुनर (कवि के रूप में)

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, March 11, 2010, 11:45:47 AM

dramanainital


सत्यदेव सिंह नेगी

टूटा है कहर कुदरत का शोकाकुल है पूरा पहाड़
पर अब जीना भी है मित्रो करो आगे का जुगाड़
न बैठो इस तरह कविगण तुम हाथ बांध चुप
बिखेगो तुम प्रकाश रचना का अँधेरा अभी है घुप्प
कुछा लिखो शासन पर कुछ मदद की करो गुहार
कुछ मीडिया में जाओ करो स्थिति का प्रचार
बनें भागीदार हम राहत में कुछ तुम करो उपाय
सुध आगे की लो भी समझो तुम मेरा अभिप्राय

dramanainital

taaja taaja jai ban rau.

बखतक दगिड़ हिटौ.

पछिनैं छूट जाला,बखतक दगिड़ हिटौ,
नान्तरी पछताला,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैकि सारी माया,बखतैकि धूप छाया,
बखतक हँसी आँसू,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैली घाव करौ,बखतैली घाव भरौ,
बखतैकीं कैल जितौ,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैल राज बणाईं,बखतैल रंक करौ,
बखतैल राज करौ,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैल भगत देखौ,भगतैल बखत देखौ,
अफ़ुँ लै बखत देखौ,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैल न्योल गाई,बखतैल झ्वाड़ लगाईं,
बखत 'कमीना' गानौ,बखतक दगिड़ हिटौ. 

सत्यदेव सिंह नेगी

बगत का दगड़ी कनिकै हिटण , कोच जू बथों बाटू
यख ता छि नेता बिरणा, कोच अपुरु कैमा जा यु लाटू
स्कोल छी पर नि छि गुरूजी, छीं जू हुयां वू टुन्ड पैकी
कु व्हालू कख भटी ल्यों गुरु, व्हेली आत्मा बचीं जैकी
सब्य छीं पर अफ अफ खणि, क्वी नि रूंदु पहाड़ कु
लाटा व्हे सबी मिजणी भोल, क्या कला सबी खाणा कु
ब्वाद नेगी नरेंदर "ना काटा   तों डाल्युं" न कटा कैका जाड़ा
लाग्यां छि सबी कटण पर सब्युंकि भोल कुडयों माँ राला क्याड़ा

दीपक पनेरू

क्या बात है धरम जी .....बहुत खूब

Quote from: dramanainital on August 20, 2010, 03:42:55 PM
taaja taaja jai ban rau.

बखतक दगिड़ हिटौ.

पछिनैं छूट जाला,बखतक दगिड़ हिटौ,
नान्तरी पछताला,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैकि सारी माया,बखतैकि धूप छाया,
बखतक हँसी आँसू,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैली घाव करौ,बखतैली घाव भरौ,
बखतैकीं कैल जितौ,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैल राज बणाईं,बखतैल रंक करौ,
बखतैल राज करौ,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैल भगत देखौ,भगतैल बखत देखौ,
अफ़ुँ लै बखत देखौ,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैल न्योल गाई,बखतैल झ्वाड़ लगाईं,
बखत 'कमीना' गानौ,बखतक दगिड़ हिटौ. 


दीपक पनेरू

नेगी जी गढ़वाली समझ में नहीं आती है मेरी...पर जो भी आपने लिखा होगा अति सुंदर लिखा होगा.......

Quote from: सत्यदेव सिंह नेगी on August 20, 2010, 04:37:00 PM
बगत का दगड़ी कनिकै हिटण , कोच जू बथों बाटू
यख ता छि नेता बिरणा, कोच अपुरु कैमा जा यु लाटू
स्कोल छी पर नि छि गुरूजी, छीं जू हुयां वू टुन्ड पैकी
कु व्हालू कख भटी ल्यों गुरु, व्हेली आत्मा बचीं जैकी
सब्य छीं पर अफ अफ खणि, क्वी नि रूंदु पहाड़ कु
लाटा व्हे सबी मिजणी भोल, क्या कला सबी खाणा कु
ब्वाद नेगी नरेंदर "ना काटा   तों डाल्युं" न कटा कैका जाड़ा
लाग्यां छि सबी कटण पर सब्युंकि भोल कुडयों माँ राला क्याड़ा


सत्यदेव सिंह नेगी

 दीपक जी समझ आ जाएगी थोडा वक़्त लग सकता है जैसे की अब मै कुमाउनी  समझ लेता हूँ
Quote from: दीपक पनेरू on August 20, 2010, 04:51:09 PM

नेगी जी गढ़वाली समझ में नहीं आती है मेरी...पर जो भी आपने लिखा होगा अति सुंदर लिखा होगा.......

Quote from: सत्यदेव सिंह नेगी on August 20, 2010, 04:37:00 PM
बगत का दगड़ी कनिकै हिटण , कोच जू बथों बाटू
यख ता छि नेता बिरणा, कोच अपुरु कैमा जा यु लाटू
स्कोल छी पर नि छि गुरूजी, छीं जू हुयां वू टुन्ड पैकी
कु व्हालू कख भटी ल्यों गुरु, व्हेली आत्मा बचीं जैकी
सब्य छीं पर अफ अफ खणि, क्वी नि रूंदु पहाड़ कु
लाटा व्हे सबी मिजणी भोल, क्या कला सबी खाणा कु
ब्वाद नेगी नरेंदर "ना काटा   तों डाल्युं" न कटा कैका जाड़ा
लाग्यां छि सबी कटण पर सब्युंकि भोल कुडयों माँ राला क्याड़ा


दीपक पनेरू

हाँ जी सर कोशिश करूँगा सीखने की........

Quote from: सत्यदेव सिंह नेगी on August 20, 2010, 04:53:58 PM
दीपक जी समझ आ जाएगी थोडा वक़्त लग सकता है जैसे की अब मै कुमाउनी  समझ लेता हूँ
Quote from: दीपक पनेरू on August 20, 2010, 04:51:09 PM

नेगी जी गढ़वाली समझ में नहीं आती है मेरी...पर जो भी आपने लिखा होगा अति सुंदर लिखा होगा.......

सत्यदेव सिंह नेगी

वेसे मैंने लिखना ये चाहा था कि
मै वक़्त के साथ कैसे चलूँ कौन है जो मुझे राह बताएगा
यहाँ तो नेता भी पराये हैं मै कम अकल किसके पास जाऊं
स्कुल हैं पर गुरु नहीं हैं जो हैं वे पी कर चित हैं
कौन है कहाँ से लाऊं मै वो गुरु जिसकी आत्मा जिन्दा है
हैं तो सभी पर हैं खुद के लिए इस पहाड़ के लिए कोइ नहीं रोता
सभी कम अकल हो गए हैं कल जाके क्या खायेंगे
नरेंदर सिंह नेगी ने गया "ना काटा तों डाल्युं" नहीं काटो दुसरे कि जड़
सबी लगें हैं एक दुसरे कि खोदने कल जाके सबके घर बंजर हो जायेंगे

दीपक पनेरू

बहुत खूब श्रीमान अच्छी सोच है......नेगी जी के इस गाने की अहमियत शायद अब सभी के समझ में आ जाएगी........

Quote from: सत्यदेव सिंह नेगी on August 20, 2010, 05:02:03 PM
वेसे मैंने लिखना ये चाहा था कि
मै वक़्त के साथ कैसे चलूँ कौन है जो मुझे राह बताएगा
यहाँ तो नेता भी पराये हैं मै कम अकल किसके पास जाऊं
स्कुल हैं पर गुरु नहीं हैं जो हैं वे पी कर चित हैं
कौन है कहाँ से लाऊं मै वो गुरु जिसकी आत्मा जिन्दा है
हैं तो सभी पर हैं खुद के लिए इस पहाड़ के लिए कोइ नहीं रोता
सभी कम अकल हो गए हैं कल जाके क्या खायेंगे
नरेंदर सिंह नेगी ने गया "ना काटा तों डाल्युं" नहीं काटो दुसरे कि जड़
सबी लगें हैं एक दुसरे कि खोदने कल जाके सबके घर बंजर हो जायेंगे