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Medical First or Devta & Bhoot Pooja First- इलाज पहले या भूत पूजा ?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, March 17, 2010, 12:04:08 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dosto,


जैसे की आपको ज्ञात होगा उत्तराखंड की देव भूमि जहाँ पग पर मंदिर है और देवी देवताओ का प्रभाव भी यहाँ काफी देखा गया है ! लेकिन जब भी किसी को किसी प्रकार ही बिमारी होती है लोग पहले जगरिया या अपने पूछ करने वाले के पास जाते है!  क्या सत्य है ?

पहला पहलू :

लेकिन कई बारे देखा गया है लोग अन्ध्विवास में अपने कीमती समय खोकर अन्तः में अपनी जिंदगी तक खो देते  है क्योंकी उनका अटूट विवास है कि देवी देवता या किसी भूत कि पूजा करने से उनकी बीमारी का निदान हो जायेगा!

दूसरा पहलू :

जैसे कि मैंने पहले भी लिखा है हमारे लोगो कि भगवान् पर अटूट आस्था है और कई बार बहुत चमत्कार भी देखे गए है, लगभग मरा हुवा व्यक्ति फिर से भी जीवित हो उठता है! और कई बार देखा गया है लोग हॉस्पिटल में तमाम इलाज करने के बाबजूद उन्हें कोई फायदा नहीं होता है और अंत में भगवान् या किसी भूत की पूजा करके उन्हें किसी बिमारी से निदान मिली हो!

पर यहाँ पर केवल वो लोग इस बात को सत्य समझेंगे जिस पर यह बीती हो और जिसको फायदा हुवा हो और अन्य लोगो को यह केवल अंधविश्वास ही नजर आएगा!

देश के सर्वश्रेष्ट न्यूज़ चैनल आजतक ने एक न्यूज़ उत्तराखंड इस विषय पर बनाई है! कुछ विडियो यहाँ पर आज तक से सौजन्य से डाल रहे है! आप इन विडियो को देखिये इस विषय पर अपना राय दे !

एम् एस मेहता



This is the first video.

Ghost murder. Part 1 of 4

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Friends,

The way Aaj tak has made a coverage, it is totally a Superstition. I would say people must take medical help   

सत्यदेव सिंह नेगी


मेहता जी आपने यहाँ आजतक के विडियो को दिखा के अच्छा काम किया है मेरी तरफ से आपको बहुत बहुत धन्यबाद  हम ऐसे वक़्त में पैदा हुए हैं जिसमे हमने बीते हुए उत्तराखंड और वर्तमान उत्तराखंड दोनों को देखा ही नहीं भुगता भी है . मेरे ताउजी स्वर्गीय श्री बुद्धि सिंह जी आर्य ने कलकत्ता पुलिस से रिटायर होके हमारे बचपन के दिनों में ( करीब १९७२-७३ ) में आर्यसमाज ज्वाइन किया था तथा स्यून्सीनगर  में  श्री शांतिप्रकाशप्रेमप्रभाकर जी के साथ आर्यसमाज मंदिर की स्थापना की हमारा बचपन उनके पवन सानिद्ध्य में बीता भजन कीर्तन सत्संग में हम उनके साथ सभी जगह जाते थे भूत पिच्चास को वे लोग भी नहीं मानते थे
पर मेरा इस मामले में अलग ही अनुभव रहा है और मै स्वीकारता हूँ की भूत पिचास देवी देवता होते हैं और उनमे मेरी पूर्ण श्रद्धा एवं आस्था है आजतक मीडिया हाउस है और उसके भी अपना काम किया है इस बारे में मुझे भी उनसे कोइ गिला नहीं है मैंने कई केसेस में देखा है की दवा काम नहीं करती कर ये सब चल जाता है

सत्यदेव सिंह नेगी


हाँ ये जरूर है की जिन लोगों को इस बारे में ज्यादा जानकारी न हो और उनके किसी प्रियजन को बुरा वक़्त देखना पड़ा हो या किसी बीमार की हालत सुधर न रही हो तो मै उन्हें सुझाव दूंगा की एक बार इसे भी आजमा लें शायद सुधार हो जाये

Bhopal Singh Mehta


We appreciate the effort of Aaj Tak to make a coverage on this issue but the way prominent news channel has totally made it a supersitution, i don't agree with this.

It is generally seen in hill area due to poor health facilities people prefer to take devine help rather than visiting Doctor.  But do not agree that this fully supertitution.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



आज तक हमारे देश का सबसे प्रमुख न्यूज़ चैनल है लेकिन जिस तरह से उन्होंने इस न्यूज़ को अपने वारदात प्रोग्राम में दिखाया है वह उसकी जगह नहीं है ! यह कोई वारदात नहीं है, भगवान् की पूजा करना वारदात नहीं है ! जहाँ तक  बकरी का बलिदान दिखाया गया है वो सारे देश होता है! आस्था के नाम पर हर जगह बकरिया और भैसों कटते है वह आम बात है तो यह वारदात नहीं है!

दूसरी तरफ हमारे उत्तराखंड में जगह जगह पर देवी देवताओ की अलग-२ पूजा की जाती है! उसमे कई प्रेत आत्माओ को दूर करने के लिए बलि देने की प्रथा है ! मानो तो देवता ना मानो तो पत्थर!

मै किसी भी प्रकार से अंधविश्वास के हक़ में नहीं हूँ आज का समाज पड़ा लिखा है लेकिन यह भी सत्य है लोग देवी देवताओ याह मसान के पूजने से भी बीमारियों से छुटकारा मिलता है !

मेरे सामने कई अनगिनत किस्से है जहाँ पर लोग इलाज के लिए कई महानगरो में जाते है और लाखो रूपये खर्च करने के बाद अन्तः में अपने घर के पूजा पाठ एव किसी भी प्रकार पूजा करने से भी ठीक हुए है! इसमें इन्हें नाकारा भी नहीं जा सकता है !

जहाँ तक ही मेडिकल की बात है !

पहाड़ के दूर दारज के जगहों पर हॉस्पिटल की कोई सुविधा नहीं है और किसी भी प्रकार के इलाज के लिए एक बार लोग जरुर देवी देवता वाला पहलू को भी देखते है! देखिये अगर किसी का हाथ कटा है और हड्डी टूट गयी है तो इसके लिए कोई जागर या पूजा पाठ नहीं कराएगा! अगर कोई किसी बीमारी से काफी लम्बे समय से छुटकारा नहीं पा रहा है तो वह एक बार देवता की शरण में जरुर जाता है ! या भूत पिचाश वाला भी देखता है

मेरा माना है कि आजतक की टीम केवल एक बार किसी के साथ यह न्यूज़ बनाने के लिए वहां गयी होगी अगर किसी मीडिया वाले को अगर किसी प्रकार का भूत या देवता का छल लगता है तो वह जरुर इसके बारे में सोचता!

मै यही कहूँगा.. देवी देवता का अभी भी पहाड़ में चमत्कार देखे गए है इसे पूर्ण रूप से अन्धविश्वास करार देना उचित नहीं होगा! हाँ वही दूसरी तरफ छोटी-२ बातो में भी देवी देवताओ के रहस्य के साथ भी जोड़ना उचित नहीं !




एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


यह बहुत बड़ा बहस का विषय है, विज्ञान  मेडिकल साइंस का अपना मत है लेकिन हमारे पहाड़ में कई बार एसे-२ चमत्कार हुए है जहाँ पर लोगो की आस्था इस विषय पर बड जाती है!

इस विषय पर अपनी राय आप यहाँ दे सकते है !