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Nainital - नैनीताल

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 03, 2007, 10:07:50 AM

राजेश जोशी/rajesh.joshee

Mahar ji,
Very good information about Nanital from begining to present time, Thanks a lot.  But information about Bhimtal lake is not correct.

पंकज सिंह महर

(यह ग़ज़ल कवि बल्ली सिंह चीमा की है |२ सितम्बर १९५२ को अमृतसर जिले के चीमाखुर्द गांव में जन्मे बल्ली भाई किसान कवि हैं | उनके तीन कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं|वे नैनीताल की तराई में रहते हैं | उनके तीसरे संग्रह 'तय करो किस ओर हो'के फ्लैप पर सुप्रसिद्ध आलोचक अवधेश प्रधान ने लिखा है-" वह अपनी धरती को बेहद चाहने वाला कवि है ; नैनीताल और तराई का सहज नैसर्गिक सौन्दर्य और उसके प्रति कवि का गहरा लगाव गजलों में उतर आया है|"

अब यहां पल में वहां कब किस पे बरसें क्या खबर ,
बदलियां भी हैं फरेबी यार नैनीताल की |

लोग रोनी सूरतें लेकर यहां आते नहीं ,
रूठना भी है मना वादी में नैनीताल की |

अर्द्धनंगे जिस्म हैं या रंगबिरंहगी तितलियां ,
पूछती है आप ही से 'माल'* नैनीताल की |

ताल तल्ली हो कि मल्ली चहकती है हर जगह,
मुस्कराती और लजाती शाम नैनीताल की |

चमचमाती रोशनी में रात थी नंगे बदन ,
झिलमिलाती , गुनगुनाती झील नैनीताल की |

खूबसूरत जेब हो तो हर नगर सुन्दर लगे ,
जेब खाली हो तो ना कर बात नैनीताल की |

हेम पन्त

वाह! क्या बात है!!! बल्ली सिंह चीमा जी की कुछ रचनाएं में भी एकत्र कर रहा हूँ...जल्दी ही फोरम पर पेश करूंगा...

Quote from: पंकज सिंह महर/P. S. MAHAR on March 18, 2008, 10:39:44 AM
(यह ग़ज़ल कवि बल्ली सिंह चीमा की है |२ सितम्बर १९५२ को अमृतसर जिले के चीमाखुर्द गांव में जन्मे बल्ली भाई किसान कवि हैं | उनके तीन कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं|वे नैनीताल की तराई में रहते हैं | उनके तीसरे संग्रह 'तय करो किस ओर हो'के फ्लैप पर सुप्रसिद्ध आलोचक अवधेश प्रधान ने लिखा है-" वह अपनी धरती को बेहद चाहने वाला कवि है ; नैनीताल और तराई का सहज नैसर्गिक सौन्दर्य और उसके प्रति कवि का गहरा लगाव गजलों में उतर आया है|"

अब यहां पल में वहां कब किस पे बरसें क्या खबर ,
बदलियां भी हैं फरेबी यार नैनीताल की |

लोग रोनी सूरतें लेकर यहां आते नहीं ,
रूठना भी है मना वादी में नैनीताल की |

अर्द्धनंगे जिस्म हैं या रंगबिरंहगी तितलियां ,
पूछती है आप ही से 'माल'* नैनीताल की |

ताल तल्ली हो कि मल्ली चहकती है हर जगह,
मुस्कराती और लजाती शाम नैनीताल की |

चमचमाती रोशनी में रात थी नंगे बदन ,
झिलमिलाती , गुनगुनाती झील नैनीताल की |

खूबसूरत जेब हो तो हर नगर सुन्दर लगे ,
जेब खाली हो तो ना कर बात नैनीताल की |


हलिया


पंकज सिंह महर


पंकज सिंह महर

अक्‍टूबर वर्ष 1891 में नैनीताल को जनपद मुख्‍यालय का दर्जा मिला । आजादी के बाद वर्ष 1947 से 1957 तक नैनीताल जनपद का कार्यभार अपर जिला अधिकारियों द्वारा संभाला गया। वर्ष 1957 में कुमारी कुसुम लता मित्‍तल को नैनीताल जिले की प्रथम जिलाधिकारी होने का गौरव प्राप्‍त हुआ । वर्ष 2001 की जनगणनानुसार जनपद की कुल जनसंख्‍या 7,62,912 हैं, जिसमें पुरूष 4,00,336 तथा महिला 3,62,576 हैं।
जनपद की 4,93,122 जनसंख्‍या ग्रामीण क्षेत्रों में तथा 2,69,790 नगरीय क्षेत्रों में निवास करती हैं। कुल साक्षरों 5,26,130 में 2,99,750 पुरूष एवं 2,26,380 महिलाएं साक्षर हैं। जनपद में जनसंख्‍या का घनत्‍व 223 प्रति वर्ग किमी है। नैनीताल को प्रशासनिक दषटि से 8 तहसीलों मे विभक्‍त किया गया है। राज्‍य गठन के बाद लालकुंआ, कालाढुंगी, बेतालघाट तहसील का गठन, तथा रामनगर उप तहसील का उच्‍चीकरण किया गया । जनपद में 8 विकासखण्‍ड, 44 न्‍याय पंचायतें, 450 ग्राम सभाएं, 1062 आबाद ग्राम, 26 गैर आबाद ग्राम, 33 वन ग्राम, 4 नगर पालिकाएं, 3 नगर पंचायतें, 1 छावनी क्षेत्र, 1 ग्रामीण एवं 8 नगरीय पुलिस थानें, 14 कानूनगो क्षेत्र तथा 105 पटवारी क्षेत्र हैं।

पंकज सिंह महर

इतिहास

नैनीताल अंग्रेज़ी भारत के कुमायूं मण्डल का एक भाग था । मध्य काल में यहाँ पहले कत्यूरी और फिर चन्द्र राजाओं का शासन था । उस समय नैनीताल शहर तो नहीं था, पर काशीपुर (जो अब उधमसिहं नगर में है) एक विकसित शहर था और कुमायूं के राजाओं की शरद काल की राजधानी था ।

18 वी सदी के अंत में यहाँ गोरखों का साम्राज्य स्थापित हो गया था और उन्होंने सन् 1804 तक गढ़वाल को भी कब्जे में ले लिया था । गढ़वाल के राजा के अनुरोध पर ईस्ट इंडिया कम्पनी ने हस्तक्षेप किया और 1914 में गोरखों को देहरादून में पराजित किया । उसके बाद अंग्रेज़ कुमायूं में घुस गए तथा सन् 1915 में गोरखा सेना को अल्मोड़ा के निकट पूरी तरह पराजित कर दिया । उन्होने गढ़वाल का काफी भाग और पूरा कुमायूं अपने अधिकार में ले लिया । यह पूरा क्षेत्र गढ़वाल, कूमायूं और तराई के जिलो में बाँट दिया गया । अंग्रेज़ो ने भीमताल के इलाके में 1930 के आसपास चाय के बगीचे लगाये ।

उस समय नैनीताल पूरा जंगल था और चरवाहे उसको चारागाह और विश्राम के लिए उपयोग में लाते थे । यह स्थान पुराणों में त्रि-ऋषि-सरोवर के नाम से जाना जाता था और इसको शक्ति पीठ में भी मान्यता मिली हुई थी । यहाँ नेनादेवी और पाषाण देवी के मंदिर भी स्थापित थे । 1939 ईसवी में एक अंग्रेज़ व्यापारी बैरन शिकार खेलते हुये यहां पहुँचे । वह यहां के सौन्दर्य से इतने प्रभावित हुये कि व्यापार को छोड़कर यहां एक शहर बसाने के प्रयास में लग गये । अल्मोड़ा के व्यापारियों को यहां मकान बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया । पहली बार 1941 में कलकता के "इंगलिश मैन" में अल्मोड़ा के पास एक सुन्दर ताल के पता लगने का समाचार छपा ।

उसके बाद विकास बहुत तेजी से हुआ । नैनीताल शीघ्र ही एक लोकप्रिय सैरगाह बन गया और 1950 में यहां नगरपरिषद भी स्थापित हो गई । कुमायूं और तराई के जिले अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों में पुन: गठित कर दिये गये । नैनीताल जिला हाल ही में नैनीताल और उधमसिहं नगर में बाटँ दिया गया है ।

1962 में नैनीताल, संयुक्त प्रान्त की ग्रीष्म कालीन राजधानी बन गया । इसका विकास और तेजी से होने लगा । आज नैनीताल शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है । यहां कुमायूं विश्वविद्यालय का मुख्यालय और उत्तराखण्ड का उच्च न्यायालय भी स्थित है । यह पूरा क्षेत्र तालों तथा प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए जग प्रसिद्ध है 

पंकज सिंह महर

भूगोल
उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊं मण्डल का सुरम्य पर्वतीय जनपद नैनीताल 20 डिग्री 23 अंश उत्तर से 79 डिग्री 27 अंश पूर्व में 3422 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके उत्तर में अल्मोड़ा, पूर्व में चम्पावत , दक्षिण में ऊधमसिंह नगर, पश्चिम में पौड़ी तथा उत्तर प्रदेश की सीमाएं मिलती हैं। मैदानी एवं पर्वतीय भू-भाग में फैला कृषि योग्य क्षेत्रफल 52 हजार है तथा सकल सिंचित क्षेत्रफल 45 हजार हेक्टेयर है। कृषि उत्पादन 135.25 हजार मीट्रीक टन है। गन्ने का उत्पादन 415.59 हजार मीट्रिक टन , तिलहन 3.48 हजार मीट्रिक टन एवं आलू 91 हजार मीट्रिक टन है। अधिक ऊंचाई वाले स्थानों में सेब, नाशपाती, आड़ू, खुमानी आदि फलों एवं गेहूँ, मंडुआ, मक्का, जौ, झंगोरा, कौणी, भट्ट, तोर आदि फसलों का उत्पादन तथा मैदानी क्षेत्रों में आम, अमरूद, पपीता आदि फलों एवं गेहूँ धान, गन्ना,चना, मटर, सोयाबीन, आदि फसलों का उत्पादन होता है।                                                                   

जनपद के मैदानी क्षेत्रों का तापमान अधिकतम लगभग 48 डिग्री सेल्सियस पर्वतीय एवं न्यूनतम 0.1 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। नैनीताल जनपद का पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश में महत्वपूर्ण स्थान है। ब्रिटिश काल में यह क्षेत्र छरवाता परगना कहलाता था, जिसका अर्थ होता है 60 झीलों का क्षेत्र। नैनीताल, भीमताल नौकुचियाताल, गरुड़ताल, रामताल, सीताताल, लक्ष्मणताल, नलदमयन्तीताल, सूखाताल, मलवाताल, खुर्पाताल, सड़ियाताल आदि ताल (झील) ही इसके अनुपम सौन्दर्य को बड़ा रहा हैं। जनपद में सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला नैनापीक है, जिसकी ऊँचाई 2611 मीटर है| यहाँ से हिमालय की मनोरम छ्टा दिखाई देती है। इसके अतिरिक्त स्नोव्यू 2270 मीटर, डोरोथी सीट 2292 मीटर, लैण्डसएंड 2118 मीटर, किलवरी 2194 मीटर तथा मुक्तेश्वर 2286 मीटर ऊँची पर्वत श्रृंखलाएं हैं। नैनीताल से 108 किलोमीटर दूर विश्व प्रसिद्ध जिम कार्बेट नेशनल पार्क स्थित है। बाघ एवं वन्य जीवों को संरक्षण प्रदान करता हुआ विस्तृत भू-भाग में फैला वन क्षेत्र यहाँ का मुख्य अभ्यारण्य है। जहाँ बाघ, तेंदुआ, भालू, हाथी, चीतल, बारहसिंघा, नीलगाय आदि जंगली पशु पाए जाते हैं। कोसी इस जनपद में बहने वाली प्रमुख नदी है।

पंकज सिंह महर


पंकज सिंह महर

मां नंदादेवी मंदिर, नैनीताल