• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Should Gairsain Be Capital? - क्या उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण होनी चाहिए?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2007, 12:23:04 PM

Do you feel that the Capital of Uttarakhand should be shifted Gairsain ?

Yes
97 (71.3%)
No
26 (19.1%)
Yes But at later stage
9 (6.6%)
Can't say
5 (3.7%)

Total Members Voted: 136

Voting closed: March 21, 2024, 12:04:57 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


POST FROM :

santosh mathpal <mathpal_sk@yahoo.co.in>
reply-tokumaoni-garhwali@yahoogroups.com

tokumaoni-garhwali@yahoogroups.com

dateWed, Jul 15, 2009 at 2:40 PM
subjectRe: [Kumauni-Garhwali] UTTARAKHAND CAPITAL ISSUE
mailing list<kumaoni-garhwali.yahoogroups.com> Filter messages from this mailing list
mailed-byreturns.groups.yahoo.com
signed-byyahoogroups.com

hide details 2:40 PM (17 minutes ago) Reply



Images are not displayed.
Display images below - Always display images from mathpal_sk@yahoo.co.in



   SIR JI,

   KAHI  BHI  HO  LEKIN  HO  PAHARON  KE  BEECH  ME  TAAKI,  MAJBOORI ME HI SAHI  NETA  AUR  BUROCATES  WAHAN  JAYENGE  TABHI  O  JAMINI  HAKIKAT  (SADAK/PANI/BIJLI/NAUKRI )    SE  RUBRU HONGE.


REGARDS,
MATHPAL

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


कल उत्तराखंड के सदन में उत्तराखंड क्रांति दल के युवा विधायक श्री पुष्पेश त्रिपाठी जी ने राजधानी आयोग की रिपोर्ट को सदन मे ही पहाड़ कर अपने गुसे का इजहार किया !  मेरे हिसाब से त्रिपाठी जी का यह कदम बिलकुल सही था, इसके लिए उनको विशेष धन्यवाद दिया जाना चाहिए ! पहाड़ की जनता की जन भावना के साथ खेलने पर किसी का भी गुस्सा फूट सकता है !


Dr Sushil Kumar Joshi

main mathpal ji ki baton se poori tarah sahmat hoon uttarakhand banane ki mool bhawna me mattha dala ja raha hai Jo log Lucknow me baith kar Pahadon ko loot rahe the wo dehradoon aa ke baith gaye hain jab tak pahadon per gaon gadheron per aa kar inko rahana nahin padega uttarakhand ka bhala nahin hone wala hai

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

frompushpa dangi <pdangi_1984@yahoo.co.in>
reply-tokumaoni-garhwali@yahoogroups.com

tokumaoni-garhwali@yahoogroups.com

dateWed, Jul 15, 2009 at 4:02 PM
subjectRe: [Kumauni-Garhwali] UTTARAKHAND CAPITAL ISSUE
mailing list<kumaoni-garhwali.yahoogroups.com> Filter messages from this mailing list


hide details 4:02 PM (36 minutes ago) Reply


I THINK  RANIKHET IS ALSO GOOD. THE AREA OF RANIKHET TO ALMORA SUITABLE


--- On Wed, 15/7/09, arvind upreti <arvind1965@yahoo.com> wrote:

पंकज सिंह महर

देहरादून, जागरण ब्यूरो : स्थायी राजधानी के मसले पर बने दीक्षित आयोग की रिपोर्ट को लेकर कांग्रेसी विधायकों से खासा हंगामा करते हुए सरकार पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। सत्ता में सहयोगी उक्रांद के एक विधायक तो इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ वेल में आ गए और रिपोर्ट की प्रति सदन में ही फाड़ डाली। दो बार स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही उक्रांद विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने राजधानी आयोग की रिपोर्ट के बारे में सदन में चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि सदन में पेश दस्तावेज में आयोग का कहीं कोई जिक्र नहीं है। दिल्ली के एक स्कूल की रिपोर्ट सदन में रखकर सरकार गुमराह कर रही है। विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर ने इसे ग्राह्य नहीं किया तो नेता प्रतिपक्ष ने भी इस पर चर्चा की मांग की। इस बीच कांग्रेसी विधायक वेल में आ गए और नारेबाजी करने लगे। बसपा विधायकों ने भी इनका साथ दिया। उक्रांद विधायक पहले तो अपनी सीट पर खड़े होकर ही सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते रहे। बाद में विधायक श्री त्रिपाठी खुद भी वेल में आ गए और नारेबाजी के बीच रिपोर्ट की प्रति फाड़ डाली। सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि राजधानी आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत मिली शक्तियों के तहत किया गया है। इसकी रिपोर्ट शासन को दी गई थी। शासन ने विधानसभा के सम्मान को ध्यान में रखकर ही इसे पटल पर रखा है। इस रिपोर्ट के पहले दो और चौथा व अंतिम हिस्सा विधानसभा अध्यक्ष के पास रखवा दिया गया है। तीसरे हिस्से में रिपोर्ट का जिस्ट है। लिहाजा इसे ही सदन में रखा गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि अगर कोई विधायक चाहे तो उनके दफ्तर में रखे रिपोर्ट के शेष तीन हिस्से देख सकता है। संसदीय कार्य मंत्री के जवाब से विपक्षी विधायक संतुष्ट नहीं हुए। विपक्षी विधायकों के साथ ही सत्तारूढ़ उक्रांद के विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने भी सदन से बहिर्गमन किया। खास बात यह रही कि उक्रांद कोटे के मंत्री दिवाकर भट्ट और एक अन्य विधायक ओम गोपाल रावत ने अपने साथी विधायक के सरकार पर गुमराह करने के आरोप से इत्तेफाक नहीं किया और अपनी सीटों पर ही बैठे रहे।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



सच्चे महीने मे उत्तराखंड क्रांति दल के अन्दर ही हमेशा मतभेद रहे है जिसके कारण राज्य निर्माण की अगवाई करने वाली पार्टी को अब अपना अस्तितव बचाना ही मिस्कुल हो रहा है! उत्तराखंड क्रांति दल के नेता दिवाकर भट्ट जी इस विषय चुप रहना कुछ और ही बया करता है !  ये सब सत्ता के भोग में लिप्त हो गए है और राज्य के विकास के मुद्दे भूल गए है !

Quote from: पंकज सिंह महर on July 15, 2009, 04:45:06 PM
देहरादून, जागरण ब्यूरो : स्थायी राजधानी के मसले पर बने दीक्षित आयोग की रिपोर्ट को लेकर कांग्रेसी विधायकों से खासा हंगामा करते हुए सरकार पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। सत्ता में सहयोगी उक्रांद के एक विधायक तो इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ वेल में आ गए और रिपोर्ट की प्रति सदन में ही फाड़ डाली। दो बार स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही उक्रांद विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने राजधानी आयोग की रिपोर्ट के बारे में सदन में चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि सदन में पेश दस्तावेज में आयोग का कहीं कोई जिक्र नहीं है। दिल्ली के एक स्कूल की रिपोर्ट सदन में रखकर सरकार गुमराह कर रही है। विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर ने इसे ग्राह्य नहीं किया तो नेता प्रतिपक्ष ने भी इस पर चर्चा की मांग की। इस बीच कांग्रेसी विधायक वेल में आ गए और नारेबाजी करने लगे। बसपा विधायकों ने भी इनका साथ दिया। उक्रांद विधायक पहले तो अपनी सीट पर खड़े होकर ही सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते रहे। बाद में विधायक श्री त्रिपाठी खुद भी वेल में आ गए और नारेबाजी के बीच रिपोर्ट की प्रति फाड़ डाली। सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि राजधानी आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत मिली शक्तियों के तहत किया गया है। इसकी रिपोर्ट शासन को दी गई थी। शासन ने विधानसभा के सम्मान को ध्यान में रखकर ही इसे पटल पर रखा है। इस रिपोर्ट के पहले दो और चौथा व अंतिम हिस्सा विधानसभा अध्यक्ष के पास रखवा दिया गया है। तीसरे हिस्से में रिपोर्ट का जिस्ट है। लिहाजा इसे ही सदन में रखा गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि अगर कोई विधायक चाहे तो उनके दफ्तर में रखे रिपोर्ट के शेष तीन हिस्से देख सकता है। संसदीय कार्य मंत्री के जवाब से विपक्षी विधायक संतुष्ट नहीं हुए। विपक्षी विधायकों के साथ ही सत्तारूढ़ उक्रांद के विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने भी सदन से बहिर्गमन किया। खास बात यह रही कि उक्रांद कोटे के मंत्री दिवाकर भट्ट और एक अन्य विधायक ओम गोपाल रावत ने अपने साथी विधायक के सरकार पर गुमराह करने के आरोप से इत्तेफाक नहीं किया और अपनी सीटों पर ही बैठे रहे।

anupam

Hi
I would like to share an interesting 'vakya' with honorable minister saheb Diwakar Bhatt. One senior journalist once suggested him to operate his office from Gairsan, if not regularly then atleast in 15 days. It was also suggested that he must ask senior officials to attend meeting in Gairsain. But he did not took the idea 'seriously'. One must say saying and acting on the same are do different things....Is any UKDite listening! 

मेरा पहाड़ / Mera Pahad

from   pankaj bhatt <pankajbbb2003@yahoo.com>:

I am agree with your views. Capital should be in HILLS.
Because then only everyone would be knowing that what type of problems we are facing here.
The origin of "UTTARAKHAND" is not enough for this State. It means development.

Regards,

PK Bhatt

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

from   prakash farswan <prakash_niam@yahoo.com>:

Hello group members,
hope all of you enjoying rains, at least lower temprature.
coming to topic.....dear how many MLAs are from hills and plane...its inabitable...as long as our reprasantative start thinking about hills or any under/undeveloped areas hill or plane will not serve the purpose......
location of capital can not make a difference to whole state until and unless the people in it start making difference....other wise....it will be again a electin issue and on and on and on ...and we will forget the main development points...

note: its immaterial where is the capital, until and unless it works as a state representative.......
tc enjoy rains

Prakash Singh Farswan
Gurgaon
9312690656

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

from   Gaurav Negi <gaurav_singh_negi@yahoo.com>:

Dehradun is much better capital than any other city in Uttrakhand.
Before UK came into existance, most of the land of Gairsain was bought by many politicians of UP. (D.P. Yadav was one such).

All I believe is we aall should work now to root our problems of UK, instead of fighting for the capital.