• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Should Gairsain Be Capital? - क्या उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण होनी चाहिए?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2007, 12:23:04 PM

Do you feel that the Capital of Uttarakhand should be shifted Gairsain ?

Yes
97 (71.3%)
No
26 (19.1%)
Yes But at later stage
9 (6.6%)
Can't say
5 (3.7%)

Total Members Voted: 136

Voting closed: March 21, 2024, 12:04:57 PM

पंकज सिंह महर

उत्तराखण्ड के हितैषी बनने वाले राजनीतिक दल और राजनेताओं में गिनती के लोग ही हैं, जो खुलकर गैरसैंण के पक्ष में हैं। कांग्रेस पार्टी के दो सांसद श्री सतपाल महाराज तथा प्रदीप टम्टा जी ने खुलकर गैरसैंण को उत्तराखण्ड की स्थाई राजधानी बनाने के लिये बयान जारी किये हैं। जिसका मेरा पहाड़ स्वागत करता है।
इनके अलावा उत्तराखण्ड क्रान्ति दल, सी०पी०आई०, उ०प०पा०, उ०जन०पा० के अलावा मुख्य राजनैतिक दलों कांग्रेस और भाजपा ने इसपर अभी तक चुप्पी साध रखी है। जो कि गंभीर बात है और सोचनीय विषय यह भी है कि २०१२ के चुनावों के लिये कमर कस रहे यह राजनैतिक दल और इनके नेता उत्तराखण्ड के सबसे मुख्य, तात्कालिक, अविलम्बनीय, लोक महत्व और भावनात्मक विषय पर अपनी सोच तय नहीं कर पाये हैं, जो कि दुभाग्यपूर्ण है।

Devbhoomi,Uttarakhand

महर जी नमस्कार, एक बात समझ मैं नहीं आई कि- जो राजनैतिक पार्टियाँ इस मुद्दे पर छुपी साधे हुए हैं और बात को टाल देते हैं क्या कोई जनता हैं कि ये पार्टिया कहाँ उत्तराखंड कि राजधानी चाहते हैं

और क्यूँ !क्या कभी इन पार्टियों ने कोई बात कि या नहीं ,महर जी ये पार्टियाँ सहद ही चाहते होंगी कि उत्तराखंड कि राजधानी गैरसैण हो,क्यों कि इनकी जेबें तो देहरादून मैं गरम हो जाती हैं और सायद इनको गैरसैण राजधानी बनाने से लोग ठेंगा दिका दें !

Pooran Chandra Kandpal

चारू जी के लेख उत्तराखंड के धरातल से जुड़े होते हैं. में कई बार चारू जी से मिला हूँ.
        उनके मन मस्तिष्क सदैव राज्य की पीडा रहती है. २ अक्टूबर २००९ को भी मुझे चारू जी जंतर मंतर
     पर मिले थे.  हम सब कई लोग एक साथ शहीदों की श्रधांजलि सभा में सम्मिलित हुए.  सभा का आयोजन
     प्यारा उत्तराखंड के संपादक देव सिंह रावत जी ने किया था.  इस सभा में उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण
     बनाने की बात बड़ी प्रखरता से उठाई गयी. गाँधी जी और उत्तराखंड के शहीदों  को याद करते हुए सभा में
     आये सभी लोगों ने काले रिबन बाँध कर रोष प्रकट किया.

                                                     03/10/2009                                        पूरन  चन्द्र कांडपाल




एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Let us see the resolution of UKD.
-----------------------------------

राजधानी के लिए निर्णायक आंदोलन करेगा उक्रांद

बागेश्वर। उत्ताराखंड क्रांति दल प्रदेश की स्थायी राजधानी गैरसैण बनाये जाने की मांग को लेकर निर्णायक आंदोलन करेगा। रविवार को हुए जिला अधिवेशन में आंदोलन की रणनीति तैयार की गयी। जिलाध्यक्ष हीरा बल्लभ भट्ट की अध्यक्षता में आयोजित अधिवेशन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रदेश मीडिया प्रभारी हरीश पाठक ने कहा कि राज्य गठन के साथ ही गैरसैण राजधानी बनाने के लिए राज्य के लोगों ने संघर्ष किया था लेकिन गठन के नौ साल बाद भी स्थायी राजधानी के मुद्दे को भुलाया जा रहा है। लेकिन उक्रांद जनता के साथ गैरसैण के लिए निर्णायक आंदोलन की रणनीति बना रहा है। उन्होंने दीक्षित आयोग की कड़ी निंदा करते हुए टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग, स्पष्ट रोजगार नीति बनाने, औद्योगिक नीति, राज्य आंदोलनकारियों का सही चिह्निकरण करने, प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित करने, रीमा व कांडा में अवैध खड़िया खनन पर रोक लगाने की मांग की।

Devbhoomi,Uttarakhand

वरिस्थ समाजसेवी एवं उत्तराखंड क्रांति दल के भूतपूर्व अद्यक्ष  श्री भगत सिंह शाह द्वारा मुंबई  esa  राजधानी गैरसेन ही आन्दोलन की सुरुवात !  कल जारी  विज्ञप्ति  उत्तराखंडी मुंबई कर से सहयोग तथा भागीदारी की अपील !

डॉ. अशोक (मुंबई) 

MANOJPUNDIR


गैरसैंण समर्थकों के हौंसले बुलंद

देहरादून (एसएनबी)। गैरसैंण को राज्य की स्थायी राजधानी बनाने का सपना देखने वालों के हौसले बुलंद हैं। वजह अब तक के कार्यक्रम की सफलता या विफलता नहीं है बल्कि अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार पाने वाले प्रोफेसर आ॓स्ट्रम की कामयाबी है। गैरसैंण समर्थकों का कहना है कि प्रो. आ॓स्ट्रम को मिले इस पुरस्कार से अन्तरराष्ट्रीय मंच पर हिमालयी सरोकारों की पैरवी को स्वीकार्यता मिल गयी है और गैंरसैंण को राजधानी बनाने की मांग के पीछे मूल कारण हिमालय व उसकी सभ्यता को बचाना ही सबसे बड़ी वजह है। इस सबसे उत्साहित राज्य आंदोलनकारियों ने राज्य का नौंवां स्थापना दिवस इस बार गैरसैंण में ही मनाने का फैसला लिया है। इसके लिए संयुक्त मोर्चा की एक बैठक भी स्थापना दिवस से पहले ही गैरसैंण में करने और उसके बाद व्यापक जनसम्पर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। मोर्चे ने ऐलान किया है कि अगले चरण में विधायकों का पहाड़ से बहिष्कार किया जाएगा। बुधवार को होटल द्रोण में गैरसैंण राजधानी संयुक्त संघर्ष मोर्चा द्वारा आयोजित एक पत्रकार वार्ता में मोर्चा से जुड़े कई आंदोलनकारियों ने सीधा आरोप लगाया कि माफिया की शह पर राजधानी को देहरादून में ही रखने की साजिश की जा रही है। मीडिया से इसका पर्दाफाश करने की अपील करते हुए मोर्चा की संयोजक कमला पंत, वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन शाह, डा. शमशेर सिंह बष्टि, वीरेन्द्र पैन्यूली, सीपीएम नेता सुरेन्द्र सिंह सजवाण व प्रीतम सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस राज्य की मांग के पीछे सीधी सोच थी कि राज्य का भला होगा, लेकिन राजधानी देहरादून बना देने से सारे सपने चकनाचूर हो गये। आज राज्य के 95 फीसद वासिंदे यह कहने में संकोच नहीं करते कि इससे तो लखनऊ में ही अच्छे थे। मोर्चा ने कहा है कि इस बार नौ नवम्बर को राज्य का स्थापना दिवस गैरसैंण में मनाया जाएगा। सरकारी कार्यक्रम भले ही देहरादून में हों, लेकिन आम आदमी का कार्यक्रम गैरसैंण में ही होगा। सभी आंदोलनकारी रामलीला मैदान में सुबह 10 बजे एकत्र होकर एक विशाल रैली निकालेंगे और उसके बाद जनसभा करेंगे। इसमें राज्य को अब तक हुए नुकसान से अवगत कराया जाएगा। गैरसैंण के लिए संघर्षरत लोगों की एक बैठक 25 अक्टूबर को गैरसैंण में की जाएगी। उसके बाद संघर्ष से जुड़े सभी नेता राज्यभर में जनसम्पर्क करके इस मुहिम को गति देंगे। राजीव लोचन शाह ने कहा कि नौ वर्षों के सफर में राज्य का वासिंदा हर मोड़ पर हताश हुआ है। इसलिए राज्य के पुनर्निर्माण की एक लड़ाई और शुरू करनी होगी। उन्होंने कहा कि मीडिया इस मामले में भी राज्य आंदोलन की तरह सहयोगी रूख अपनाए तो यह अभियान सफल होगा और पहाड़ की राजधानी पहाड़ में ही बनाने के लिए राजनीतिक दलों को मजबूर कर देगा। पत्रकार वार्ता में मौजूद सभी लोगों ने कहा कि गत 2 अक्टूबर को गैरसैंण के समर्थन में बंद पर्वतीय अंचलों में काफी हद तक सफल रहा। टिहरी की प्रीतम सिंह ने कहा कि देहरादून से सटे उत्तरकाशी और टिहरी के लोग भी गैरसैंण को ही राजधानी बनाने के पक्ष में आ रहे हैं।

Pooran Chandra Kandpal

                                                     03/10/2009                                        पूरन  चन्द्र कांडपाल

चारू जी के लेख उत्तराखंड के धरातल से जुड़े होते हैं. में कई बार चारू जी से मिला हूँ.
        उनके मन मस्तिष्क सदैव राज्य की पीडा रहती है. २ अक्टूबर २००९ को भी मुझे चारू जी जंतर मंतर
     पर मिले थे.  हम सब कई लोग एक साथ शहीदों की श्रधांजलि सभा में सम्मिलित हुए.  सभा का आयोजन
     प्यारा उत्तराखंड के संपादक देव सिंह रावत जी ने किया था.  इस सभा में उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण
     बनाने की बात बड़ी प्रखरता से उठाई गयी. गाँधी जी और उत्तराखंड के शहीदों  को याद करते हुए सभा में
     आये सभी लोगों ने काले रिबन बाँध कर रोष प्रकट किया.


pooran chandra kandpal

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


No doubt at all Kandpal ji..

I salute Charu da.. I am speechless to say anything about him.However, i can say i hav never met a guy like him who has profound love for Uttarahkand. Charu da has been associated with Uttarakhand State Struggle.

He just can't not see the pain of Uttarakhand and uttrakhandi.. Still he is doing his best for capital issue..

In fact Uttarakhand at present scenario needs guys like him.

Jai Uttarakhand.

Quote from: Pooran Chandra Kandpal on October 20, 2009, 07:47:16 PM
                                                     03/10/2009                                        पूरन  चन्द्र कांडपाल

चारू जी के लेख उत्तराखंड के धरातल से जुड़े होते हैं. में कई बार चारू जी से मिला हूँ.
        उनके मन मस्तिष्क सदैव राज्य की पीडा रहती है. २ अक्टूबर २००९ को भी मुझे चारू जी जंतर मंतर
     पर मिले थे.  हम सब कई लोग एक साथ शहीदों की श्रधांजलि सभा में सम्मिलित हुए.  सभा का आयोजन
     प्यारा उत्तराखंड के संपादक देव सिंह रावत जी ने किया था.  इस सभा में उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण
     बनाने की बात बड़ी प्रखरता से उठाई गयी. गाँधी जी और उत्तराखंड के शहीदों  को याद करते हुए सभा में
     आये सभी लोगों ने काले रिबन बाँध कर रोष प्रकट किया.


pooran chandra kandpal

MANOJPUNDIR

गैरसैंण में ही मनाएंगे स्थापना दिवस

देहरादून: गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग करते हुए विभिन्न आंदोलकारियों ने गांधी पार्क के गेट पर धरना दिया। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे इस वर्ष गैरसैंण में ही राज्य स्थापना दिवस संयुक्त रूप से मनाएंगे। उन्होंने कहा कि जनता आंदोलन के समय ही गैरसैण को स्थायी राजधानी मान चुकी थी, सरकार जनता की आवाज को अनसुना कर रही है। गुरुवार को गांधी पार्क पर धरने के दौरान उत्तराखंड महिला मंच की जिला संयोजक निर्मला बिष्ट ने कहा कि गैरसैंण राजधानी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वन पर तमाम आंदोलनकारी संगठन संयुक्त रूप से नौ नवंबर को गैरसैंण में स्थापना दिवस मनाएंगे। उन्होंने कहा कि जनता की भावना को समझते हुए सरकार को तत्काल गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित कर देनी चाहिए। गंगा सिंह रावत ने कहा कि दो अक्टूबर बंद के बाद नौ नवंबर को गरसैंण में स्थापना दिवस मनाकर आंदोलनकारी अपनी भावनाएं जता रहे हैं। धरने पर बैठने वालों में पदमा गुप्ता सरला रावत, सीपी आर्य, ऊषा डोभाल आदि थे।

MANOJPUNDIR

गैरसैंण में ही मनाएंगे स्थापना दिवस

देहरादून: गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग करते हुए विभिन्न आंदोलकारियों ने गांधी पार्क के गेट पर धरना दिया। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे इस वर्ष गैरसैंण में ही राज्य स्थापना दिवस संयुक्त रूप से मनाएंगे। उन्होंने कहा कि जनता आंदोलन के समय ही गैरसैण को स्थायी राजधानी मान चुकी थी, सरकार जनता की आवाज को अनसुना कर रही है। गुरुवार को गांधी पार्क पर धरने के दौरान उत्तराखंड महिला मंच की जिला संयोजक निर्मला बिष्ट ने कहा कि गैरसैंण राजधानी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वन पर तमाम आंदोलनकारी संगठन संयुक्त रूप से नौ नवंबर को गैरसैंण में स्थापना दिवस मनाएंगे। उन्होंने कहा कि जनता की भावना को समझते हुए सरकार को तत्काल गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित कर देनी चाहिए। गंगा सिंह रावत ने कहा कि दो अक्टूबर बंद के बाद नौ नवंबर को गरसैंण में स्थापना दिवस मनाकर आंदोलनकारी अपनी भावनाएं जता रहे हैं। धरने पर बैठने वालों में पदमा गुप्ता सरला रावत, सीपी आर्य, ऊषा डोभाल आदि थे।