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Hydro Power Scam in Uttarakhand - उत्तराखंड में बिजली घोटाले

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 04, 2010, 11:14:34 PM

हलिया

इन सब घोटालाबाजों को पकड़ कर सिसून लगाओ हो और नहीं तो यहाँ भेज दो हम यहाँ पर इनको अपने बल्दों के जगह हल में जोतेंगे तब इनको पता चलेगा कितने बिस्सी सैकड़ा होते हैं करके |

हलिया

आजतक ने बहुत ही बढ़िया काम किया है|  ये धीरेन्द्र पुंडीर भाई जी भी तो अपने उत्तराखंड के ही हैं शायद.  ऐसे होते हैं सपूत बहुत अच्चा धीरेन्द्र जी पूरा उत्तराखंड तो क्या पूरा देश को आपके इस काम पर नाज है. 

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

अब अगर u k d  मैं जरा भी सरम बाकी है तो तुरंत समर्थन छोड़ देना चाहिए , और डॉ निशंक को भी तुरंत स्तीफा देना चाहिए, जिस संपन्न उत्तराखंड का सपना लोगो ने देखा था उसको इन लोगो ने कंगाल कर दिया अब तो हद ख़तम हो गए है बेसरम बनकर खुलेआम देबभूमि  को बेच रहे है, उर्जा प्रदेश मैं आम लोगो को तो उर्जा मिल नहीं रही है ये घोटाले पे घोटाले सामने आ रहे है, ये तो पकडे गए है और भी कई घोटाले हुंगे जो सामने नहीं आये हैं,   

हलिया

ओ हो महाराज! इन बेशर्मों को शर्म कहाँ से आएगी.  सब एक ही थैले के हैं.  क्या - क्या जो सोचा था अपना राज्य बनेगा, अपने बच्चे तरक्की करेंगे घर छोड़ कर परदेश नहीं जायेंगे यहीं पर कुछ ना कुछ रोजगार का बंदोबस्त हो जायेगा, पढाई लिखाई अच्छी होगी, बिजली, पानी सब मिलेगा सब गुड गोबर कर दिया हो इन स्वार्थी लोगों ने|  कहने को तो सभी अपने हैं, भोट के टैम पर आ जायेंगे गाँव-गाँव घर घर और दादा-दीदी-भुला-भूली-आमा-बुबू-काका-काखी सब याद आ जाते हैं इन को फिर जीत कर लग जाते हैं अपना घर भरने में अपनों का ही हक़ मार कर. 

सत्यदेव सिंह नेगी

यहाँ मै ये भी जोड़ना चाहूँगा की हमारे पहाड़ की जनता ने श्री नरेद्र सिंह नेगी जी को हमेश से सिर आंखों पर बिठाया मेरा पहाड़ पोर्टल ने भी इनकी इज्जत अफजाई में
कोई कमी नहीं छोड़ी फिर भी इन्होने नौछमी नारायण पुरस्कार देके भाजपा को चुनावी बैतरनी पार लगवा दी, नजाने किस भाव, ये तो मेरी समझ से परे है पर नुक्सान
तो उस भोली भली जनता का ही हुआ जिसने अपने पेट काट काट के इनके कैसेट और सीडी खरीदे आज वो कलाकार कहाँ छुपा है क्या हम सभी को एक बार फिर से इस
एल्बम को दूसरे चश्मे से नहीं देखना चाहिए ,इस मामले में भी चर्चा होने की सख्त आवश्यकता है

हलिया

महाराज, सत्यदेव ज्यू आप लोग ठहरे पड़े लिखे शहरों में रहने वाले लोग और मैं ठहरा एक  गॉव का हालिया|  आप जरूर गुणी बात करते होगे अब मैं आपके बराबर  सोच वाला तो नहीं ठहरा इसलिए मैं जो कहूं बुरा नहीं मानना महाराज. 
नरेन्द्र सिंह नेगी ठहरे एक कलाकार उन्होंने किसी की सरकार को उखाड़ने और किसी की बैतरणी पार लगाने का ठेका जो क्या ले रखा है (जैसा की निशंख जी ने ले रखा है अपने चहेतों को मालामाल करने का)  नेगी जी ने उस समय जो देखा उसको अपनी कला के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया मेरा ख्याल है अब जो देख रहे हैं वो भी जरूर उनके ह्रदय से बाहर निकलेगा. 
अब आज की सरकार क्या कर रही है इसका दोष नौछाम्मी नारायण के रचयिता को कैसे दे सकते हैं हो महाराज?  भोट देने वाले तो हम खुद ही ठैरे नेगी ने हमसे आकर ये थोड़ी ही कहा की इस को भोट दो उसको नहीं. 

सत्यदेव सिंह नेगी

हालिया जी आपने मेरे लिखे पर प्रतिक्रिया दी इसे मै अपने लिए एक शिक्षा ही मानता हूँ आप सच में गुणी लोग हैं , पर यहाँ पर मै अपने बारे में इतना कहूँगा की मै भी
गाँव से पला पढ़ा और पेट भरने शहर में आया हूँ अभी तक जो भी कमा रहा हूँ उसके पीछे पहाड़ की पढ़ाई और श्री नरेंदर सिंह नेगी जी के गीत ही सब कुछ है मै
भी श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी को आपकी ही तरह से प्रेम करता रहा हूँ आपका दिल दुखाने के लिए मै आपसे माफ़ी चाहता हूँ पर क्या इस सबसे सच बदल जायेगा ,
क्या श्री नारायण दत्त तिवारी के अलावा आपके सारे सांसद , विधायक ,मंत्री दूध के धुले हैं सिर्फ नौछमी नारायण बनाने के पीछे की मनसा पर भी एक बार सोच लेना
चाहिए इसमें हर्ज क्या है मैंने बहुत सारे फोरम चाहे वो ऑरकुट , फेसबुक  , rediifmail ,timesofindia  के कमेंट्स में महसूस किया है की किस तरह से इलेक्ट्रोनिक मीडिया
में लोग किसी दल विशेष के लिए काम करते है, आपकी बात सोलह आने सच है कि भोट देने वाले तो हम ही ठहरे पर भ्रमित भी तो हम ही  होते हैं न और जब भर्मित
कराने वाले वो हों जिन्हें जनता अपना आदर्श मानती है तो आप ही बताइए मेरा दर्द कहा से बुरा है , मैंने लाइव चाट में मेरा पहाड़ पोर्टल पर श्री नरेंदर सिंह नेगी जी से
भी यही सवाल पूछा था तब उन्होने सरल सब्दों में मुझे जो जबाब दिया था सब रिकॉर्ड में मौजूद है आप एक बार गौर फर्माइयेगा 

हेम पन्त

इस मसले पर उत्तराखण्ड के विरोधी दलों (मुख्यत: कांग्रेस व बसपा) ने भी सही रूख नहीं अपनाया. विधानसभा में 1-2 दिन हंगामा करने के बाद ये लोग शान्त हो गये.

क्या इन परियोजनाओं को संचालन के लिये स्थानीय लोगों की सहकारी समितियों को नही दिया जा सकता था?

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

मैंने तो हमेशा ये देखा है कि नेगी जी अपने गीत हमेशा समाज से उठाते हैं जाहे वह विकाश के लिए हो, डामो के लिए हो, गैरसैण राजधानी के लिए हो  या फिर आन्दोलन के गीत उन्होंने अपने गीतू के माद्यम से समाज को सन्देश ही दिया है उस गाने मैं भी उन्होंने बी ज प के बारे मैं भी कहा है जहाँ तक मैं जनता हू नेगी जी किसी पार्टी बिशेष से भी जुड़े नहीं हैं, फिर इन घोटालू या किसी के चरित्र हनन के लिए नेगी जी के गीतू को दोष देना  ठीक नहीं है बिरोध जाताना सबका अधिकार है चाहे वह गीतों के माध्यम से हो या फिर लेखन के माध्यम से, 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



जनता को इस मुद्दे पर शांत नहीं होना चाहिए! यह तो एक घोटाला सामने आया है!

उत्तराखंड में बहुत और बहुत घोटाले होंगे !