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System Of One Day Marriages In Uttarakhand - पहाड़ मे एक दिवसीय शादी का प्रचलन

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 12, 2007, 03:59:11 PM

पहाड़ मे एक दिवसीय शादी का प्रचलन आपके दृष्टि से कैसा है ?

अच्छा है
20 (35.7%)
सही नही है
16 (28.6%)
संस्कृति के खिलाफ
15 (26.8%)
कह नही सकते
5 (8.9%)

Total Members Voted: 56

Voting closes: February 07, 2106, 11:58:15 AM

राजेश जोशी/rajesh.joshee

कई बार १ दिवसीय शादी करना मजबूरी भी हो जाती है जैसे मेरे भाई की शादी पिथौरागढ़ से तय हुयी तो, भीमताल से पिथौरागढ़ तक बारात लेकर जाना और फ़िर वहां से दूसरे दिन बारात लेकर आना काफ़ी मुशकिल था इसलीए अल्मोड़ा में चितई गोलू देवता के मन्दिर में एक दिनी शादी की रस्में हुयी।  पर वैसे शादी का समारोह पूरे चार दिन चला पहले दिन महिला संगीत फ़िर सुवाल पथाई, दूसरे दिन स्नान और ह्ल्दी के रस्म, तीसरे दिन बारात (करीब साठ सत्तर लोग) मंदिर में और चौथे दिन रिशेप्सन जिसमें लन्च और नाचने गाने का प्रोग्राम था।  अब बताईये इस शादी को आप किस श्रेणी में रखेंगे?
हां मन्दिर की शादी के बारे में एक बात जरुर कहना चाहुन्गा कि शादी की रस्में मन्दिर के मुख्य परिसर से बाहर होनी चाहिये, क्योंकि शादियों के दौरान मन्दिर की प्रतिष्ठा में कमी आ सकती है।  यह बात मैं अपने निजी अनुभव से कह रहा हुं, मेरे भाई की शादी में जब मै चितई गोलू मन्दिर में था तो इतने प्रतिष्ठित मन्दिर का वातावरण एक मन्दिर की बजाय एक बैक्वेट हौल काम्प्लेक्स जैसा ज्यादा लग रहा था क्योंकि उस समय वहां एक दिन में ही ३ - ४ शादियां हो रही थी।  एक बात आपको माननी पड़ेगी कि शादी में लोग किसी और मानसिकता के साथ जाते हैं मतलब एक समारोह में सम्मिलित होना और किसी प्रतिष्ठित मंदिर में काफ़ी श्रद्धा और आस से जाने में काफ़ी फ़र्क है। 
मेहता जी चाहें तो इस सम्बन्ध में एक थ्रेड शुरु कर सकते हैं कि क्या मन्दिरों में होने वाली शादियों के लिए भी कोई कोड होना चाहिये जिससे मन्दिर की प्रतिष्ठा को ठेस ना पहुंचे।  मंदिर समितियां तो इस सम्बन्ध में बिल्कुल लापरवाह नजर आती हैं इसलिए मंदिरों को बैंक्वेट हौल बनने से रोका जाना होगा।

Risky Pathak

Marriage seas0n has startd again.

People residing in rem0te areas are prefrng 1day marriages over 2day

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




आज से दस साल पहले लगता है... अगर कोई एक दिन की शादी कर रहा हो तो बहुत जी अजीब सा.. लेकिन आज बिलकुल उल्टा हो गया है पहाडो में! २ दिन की शादी.. बिलकुल ना के बराबर दिखने को मिलता है!

मानो ना मानो - एक दिवसीय शादी २० - २० क्रिकेट की तरह है! 

खीमसिंह रावत

जोशी जी आपका कथन बिलकुल ठीक है |  की मंदिर को बैन्कवेत हाल न बनाया जाय |
पहले मंदिर में शादी करने का मतलब होता था की लड़की वाले गरीब हैं| मुश्किल से २०-२५ लोग इकठ्ठा होते थे किन्तु समय बदल गया है जब सरकार ही बदरीनाथ , केदारनाथ, गगोत्री व् यमुनोत्री तीर्थ स्थलों को पर्यटन स्थल बना कर पेश कर रही है| फिर पुजारियों , मंदिर समितियों को पैसा मिल रहा है वे लोग क्यों मना करेंगें |


Anil Arya / अनिल आर्य

I feel the idea of one day marraige would have taken from one day cricket, as it became popular after 1983/85. Concept is good in today's scenerio to control heavy expenses, darubaaji, fights etc. etc. But these marraiges are not adhering the vedic rules.

Another revised version may be released shortly which will be like 20-20 cricket in pahad.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Two Days marriage system has almost converted into "One Day Marriage" now in pahad.

Some benefits... some inconveniences.



Non-pahadi marriages are taking places in Metro Cities mostly.

Can't say exactly whether these marriages are successful. It depends upon the understanding.

But when it comes understanding / adopting the culture, there may be some kind of gap.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Mahi Mehta