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Garjiya Devi and Sati Ansuiya Devi temple Uttarakhand,देवी मंदिर उत्तराखंड

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, August 30, 2010, 12:28:45 AM

Devbhoomi,Uttarakhand


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रामनगर की स्थापना और बसासत वहां के आयुक्त एच रामसे द्वारा १८५६-१८८४  में की गयी थी। ये क़स्बा कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का प्रवेश द्वार भी है  जहाँ प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक आते है। उत्तर भारत के  प्रसिद्द हिल स्टेशन नैनीताल से निकट होने के कारण भी यहाँ बहुत से पर्यटक  आते हैं। रामनगर, हल्द्वानी के साथ-साथ उत्तराखंड के कुमांऊ मंडल का  प्रवेश द्वार भी है।
रामनगर रेल और सड़क दोनों से पहुंचा जा सकता है। राजधानी दिल्ली से  चलने वाली रानीखेत एक्सप्रेस २२.३५ (रात्रि १०.३५) बजे प्रस्थान करती है  और रात भर की यात्रा के बाद प्रातः ४.५५ पर रामनगर पहुँच जाती है। रामनगर  से लगभग १५ किमी की दुरी पर स्थित है गर्जिया देवी मंदिर जो यहाँ का एक  प्रसिद्द मंदिर भी है। ये मंदिर कोसी नदी के तट पर बसा है और एक छोटी  पहाडी पर स्थित है।

http://hi.wikipedia.org



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उत्तराखंड मैं देवी- देवताओं के कुछ मंद्जिरों की जानकारी के लिए इस लिंक को देखें

http://www.merapahadforum.com/religious-places-of-uttarakhand/famous-temples-of-bhagwati-mata/75/

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                         सती अनसूइया मन्दिर, उत्तराखण्ड
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सती अनसूइया मन्दिर  उत्तराखण्ड राज्य के चमोली जिले में स्थित है। नगरीय कोलाहल से दूर प्रकृति के बीच हिमालय  के उत्तुंग शिखरों पर स्थित इन स्थानों तक पहुँचने में आस्था की वास्तविक  परीक्षा तो होती ही है साथ ही आम पर्यटकों के लिए भी ये यात्रा किसी  रोमांच से कम नहीं होती। यह मन्दिर हिमालय की ऊँची दुर्गम पहडियो पर स्थित है इसलिये यहाँ तक पहुँचने के लिये पैदल चढाई करनी पड़ती है।

मन्दिर तक पहुँचने के लिए चमोली के मण्डल नामक स्थान तक मोटर मार्ग है। ऋषिकेश तक आप रेल या बस से पहुँच सकते हैं। उसके बाद श्रीनगर और गोपेश्वर  होते हुए मण्डल पहुँचा जा सकता है। मण्डल से माता के मन्दिर तक पांच  किलोमीटर की खडी चढाई है जिसपर श्रद्धालुओं को पैदल ही जाना होता है।  मन्दिर तक जाने वाले रास्ते के आरंभ में पडने वाला मण्डल गांव फलदार पेडों  से भरा हुआ है।

यहां पर पहाडी फल माल्टा बहुतायत में होता है। गाँव के पास  बहती कलकल छल छल करती नदी पदयात्री को पर्वत शिखर तक पहुँचने को उत्साहित  करती रहती है। अनसूइया मन्दिर तक पहुँचने के रास्ते में बांज, बुरांस और  देवदार के वन मुग्ध कर देते हैं। मार्ग में उचित दूरियों पर विश्राम स्थल  और पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता है जो यात्री की थकान मिटाने के लिए  काफी हैं।

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