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Lyrics Of Uttarakhandi Songs - कुमाऊंनी एवं गढ़वाली गीतों के बोल

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 17, 2007, 11:18:07 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali song lyrics
January 22
रुनझुन रुनझुन बरखा सी ...
हाय ..गाटी मेरी भीजे जा ..
रुनमुन झुनमुन बरखा सी ...
हाय ..गाटी मेरी भीजे जा ..
रुनमुन झुनमुन बरखा सी ...
हाय ..गाटी मेरी भीजे जा ..
हे लठ्याली एय जा ..लगुली जनि एय के
तू
मैं मा लिटे जा..
लगुली जनि एय के तू
मैं मा लिटे जा..
लुपक छुपक जून सी , समनी मेरा दिखे
जा ..
लुपक छुपक जून सी , समनी मेरा दिखे
जा ..
लुपक छुपक जून सी , समनी मेरा दिखे
जा ..
हे लठयाला एय जा , कुवेडी जनि एय के तू , मैं मा तू
भीटे जा ..
कुवेडी जनि एय के तू , मैं मा तू भीटे जा ..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मालु ग्विरालू का बीच
खिलनी ....देखिनी अहा !
मालु ग्विरालू का बीच खिलनी .....
गोरी मुखड़ी मा लाल
होंठुड़ी जनी .....
बांज अँयारूं का बौंण फुल्युं बुरांस कनु
बै फुल्युं बुरांस कनु ......
हैरि साड़ी मा बिलोज लाल पैर्युं हो जनु
हैरि साड़ी मा बिलोज लाल पैर्युं हो जनु .........
मालु ग्विरालू का बीच
खिलनी ....देखिनी अहा !
मालु ग्विरालू का बीच खिली .....
गोरी मुखड़ी मा लाल
होंठुड़ी जनी .....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

न दोड़sss - न दोड़ तै उन्दरी का बाटा
उन्दारीयु का बाटाssssss

उन्दरी कु सुख द्वि -चार घड़ी को
उकळी को दुःख सदनी को सुख लाटाsssss

सौन्गु (आसन ) चितेंद अर दोडे भी जांद
पर उन्दरी को बाटा उन्द जांद मनखी
खैरी त आन्द पर उत्याडू (ठोकर) नि लगदु
उबू (उपर) उठ्द मनखी उकाल चडी की

न दोड़sss - न दोड़ तै उन्दरी का बाटा
उन्दारीयु का बाटाssssss

ऍच गोंउ मुख मा ज्वा गंगा पवित्र
उन्दरियो मा दनकीक कोजाल ह्वे गे

गदनीयू मा मिलगे जो हियूं उन्द बौगीssss
जो रेगे हिमालय म वी चमकणुच आsssss

न दोड़sss - न दोड़ तै उन्दरी का बाटा
उन्दारीयु का बाटाssssss

बरखा बातोणियो मा भी उन्द नी रडनी जू
तुक पहुची गनी खैरी खै-खै की
जोल नी बोटी धरती माँ पर अंग्वाल
उन्द बौगी गनी अपणी खुशीयून

न दोड़sss - न दोड़ तै उन्दरी का बाटा
उन्दारीयु का बाटाssssss

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रयाग पाण्डे
पर्यावरण संरक्षण को लेकर बहुत पुराना कुमाऊँनी लोक गीत :-

पारा रे भीडा को छै घस्यारी
मालू वे तू मालू नी काट ।
पारा रे भीडा मैं छूं घस्यारी
मालू वे तू मालू काटण दे ।
तौ मालू काट्यो पाप लांगछ
मालू वे तू मालू नी काट ।
भैंसी रे छ , थोरी है रै छ
मालू वे तू मालू काटण दे ।
तौ भैंसी कणी भ्योव घुरै दे
मालू वे तू मालू नी काट ।
भैंसी छ भागी मैं कणी प्यारी
थोरी छ भागी दीदी कें प्यारी
के छ वे तेरे दीदी को नाम
वीक मरद की करों काम ।
दीदी क नाम प्यारी दुलारी
धनसिंहाँ भीना तेरी अन्वारी ।
पारा रे भीडा को छै घस्यारी
मालू वे तू मालू नी काट ।
तौ मालू काट्यो पाप लांगछ
मालू वे तू मालू नी काट ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रयाग पाण्डे

ऋतु औनी रौली भंवर उडला बलि,
हमारा मुलुका भंवर उडला बलि |
दै खायो पात मे भंवर उडला बलि,
के भलो मानी छो भंवर उडला बलि,
ज्यूनाली रात मे भंवर उडला बलि,
के भलो मानी छो भंवर उडला बलि,
है जा मेरी भैया भंवर उडला बलि,
यो गैली पातला भंवर उडला बलि,
पंछी वांसनया भंवर उडला बलि,
है जा मेरी भैया भंवर उडला बलि,
कविता की लेख भंवर उडला बलि,
सुणो भाई बन्दों भंवर उडला बलि,
मिली रया एक भंवर उडला बलि,
सुणो भाई बन्दों भंवर उडला बलि,
ऋतु औनी रौली भंवर उडला बलि,
हमारा मुलुका भंवर उडला बलि |

-मोहन सिंह रीठागाड़ी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रयाग पाण्डे
February 18
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
चमकनी गिलास सुवा रमकनी चाहा छ |
तेरी - मेरी पिरीत को दुनिये ड़ाहा छ |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
जाई फ़ुली , चमेली फुली, देणा फुली खेत |
तेरो बाटो चानै - चानै उमर काटी मेता |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
गाडा का गडयार मारा दैत्या पिसचे ले |
मैं यो देख दुबली भ्यूं तेरा निसासे लै |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
तेरा गावा मूंगे की माला मेरा गावा जंजीरा |
तेरी - मेरी भेंट होली देबी का मंदीरा |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
अस्यारी को रेट सुवा अस्यारी को रेट |
यो दिन यो मास आब कब होली भेंट |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |

भावार्थ :
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |
चमकते गिलास में तेज रंग की चाय रही हुई है |
तुम्हारे , मेरे प्रेम से सभी लोग ईर्ष्या करने लगे हैं |
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |
जाई और चमेली के फूल खिले हैं , खेतों में सरसों फूली है |
तुम्हारी राह देखते - देखते मैंने अपनी सारी उम्र मायके में ही बिता दी है |
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |
दैत्य- पिचास ने छोटी नदी की मछलियाँ मार डाली हैं |
देखा , तुम्हारे विरह में कितनी दुर्बल हो गई हूँ |
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |
तुम्हारे गले में मूंगे की माला है और मेरे गले में जंजीर |
तुम्हारे और मेरी भेंट होगी देवी के मन्दिर में |
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |
असेरी (स्थानीय माप का बर्तन )का घेरा |
आज के दिन , इस माह ,हम मिले , अब कब भेंट होगी ?
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर |

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रयाग पाण्डे

बेटी की विदाई के समय गिदारों द्वारा गए जाने वाला कुमांऊनी संस्कार गीत -------

हरियाली खड़ो मेरे द्वार , इजा मेरी पैलागी ,इजा मेरी पैलागी |
छोडो -छोडो ईजा मेरी अंचली,छोडो -छोडो काखी मेरी अंचली ,
मेरी बबज्यु लै दियो कन्यादान , मेरा ककज्यु लै दियो सत्यबोल ,
इजा मेरी पैलागी |
इजा मेरी पैलागी |
छोडो -छोडो बोजी मेरी अंचली , छोडो -छोडो बहिना ,मेरी अंचली ,
मेरे भाई लै दियो कन्यादान , मेरे भिना लै दियो सत्यबोल,
इजा मेरी पैलागी |
इजा मेरी पैलागी |
छोडो -छोडो मामी मेरी अंचली , मेरे मामा लै दियो कन्यादान ,
इजा मेरी पैलागी ,इजा मेरी पैलागी |

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रयाग पाण्डे
February 10
पति का पत्र पत्नी के नाम--
"स्वस्ति श्री सर्वोपमा
तरुवे ईजा ,परुली आमाँ,
यां कुशल छ , तां चानू |
नौकरी कत्ती न पानू,
चार जोड़ी ,चौद खानू,
यो से रयो त द्वि - चार दिन में घर आनु "|
पत्नी का उत्तर ---
"स्वस्ति श्री सर्वोपमा योग्य -
तरुवा बोज्यू ,परुली बूबू |
यां कुशल छ तां चानू|
भाकरन नाई चारेक धान छन ,
जब जाणेक छन , तब जाणेक खानू ,
फिरि दुसाराक घर - बार न्है जानू|"

- - नन्द कुमार उप्रेती