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Trijuginarayan Shiv Parvati Marriage place- त्रियुगीनारायण शिव पार्वती विवाह

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 13, 2010, 11:18:08 PM

Devbhoomi,Uttarakhand



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


  वर्षो से जल रही अखंड धूनी ! जहाँ धरती से स्वयं आग जलती रहती है






Devbhoomi,Uttarakhand

Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on October 14, 2010, 08:10:17 AM

  वर्षो से जल रही अखंड धूनी ! जहाँ धरती से स्वयं आग जलती रहती है






त्रेतायुग से प्रज्ज्वलित है यहां अग्नि
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रुद्रप्रयाग। हिमालय को भगवान शंकर का वास माना गया है। यही कारण है कि यहां के कण-कण में श्रद्धालु भगवान शंकर का रूप देखते है और उनकी पूजा करते हैं। हिमालय क्षेत्र में शंकर के मंदिरों की गिनती करना कठिन कार्य है। यहां भगवान शंकर से जुड़ी अनेकों कथाएं आज भी प्रचलित हैं। मान्यता है कि भगवान शंकर ने हिमालय के मंदाकिनी क्षेत्र के त्रियुगीनारायण में पार्वती से विवाह किया था। खास बात यह है कि मंदिर में जल रही अखंड अग्निज्योत को भगवान शिव व पार्वती के विवाह वेदी की अग्नि ही माना जाता है। बताया जाता है कि यह अग्नि त्रेतायुग से जल रही है। यही वजह है कि हर वर्ष यहां सैकड़ों जोड़े विवाह बंधन में बंधते हैं।

त्रेतायुग में संपन्न हुए शिव व पार्वती के विवाह का स्थल जिले का सीमांत गांव त्रियुगीनारायण मंदिर आज भी श्रद्धा व भक्ति के अटूट आस्था का केंद्र है। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनप्रयाग से 12 किमी मोटरमार्ग का सफर तय कर यहां पहुंचा जाता है। मंदिर क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर शिव और पार्वती की शादी के साक्ष्य स्पष्ट नजर आते है। यहां पर आज भी अग्नि कुंड के साथ अखण्ड ज्योति, धर्म शिला मौजूद है। शादी के दौरान देवताओं ने विभिन्न शक्तियों से वेदी में विवाह अग्नि पैदा की थी, जिसे धंनजय नाम दिया गया। यह अग्नि आज भी निरंतर जल रही है। इस अग्नि की राख को आज भी लोग अपने घरों में ले जाते हैं, जिसे शुभ माना जाता है। वेद पुराणों के उल्लेख के अनुसार यह मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है, जबकि केदारनाथ व बदरीनाथ द्वापरयुग में स्थापित हुए। यह भी मान्यता है कि इस स्थान पर विष्णु भगवान ने वामन देवता का अवतार लिया था। पौराणिक उल्लेख के अनुसार बलि को इन्द्रासन पाने के लिए सौ यज्ञ करने थे, इनमें 99 यज्ञ वह पूरे कर चुका था, लेकिन सौवें यज्ञ से पूर्व विष्णु भगवान ने वामन अवतार लेकर उसे रोक दिया और बलि का यज्ञ संकल्प भंग हो गया। इस दिन से यहां भगवान विष्णु की वामन के रूप में पूजा होती है। मंदिर के प्रबंधक परशुराम गैरोला बताते हैं कि आज भी इस मंदिर के प्रति लोगों में भारी श्रद्धा है। वर्ष भर बड़ी संख्या में भक्त आकर मंदिर के दर्शन करते हैं। भगवान शिव व पार्वती का विवाह स्थल होने के कारण त्रियुगीनारायण का विवाह कामना रखने वाले युगलों के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। हर साल यहां सैकड़ों की संख्या में जोड़े विवाह करते हैं। ऐसा ही एक जोड़ा है ललित मोहन रयाल व रुचि का। ये दोनों पीसीएस अधिकारी हैं। ललित मोहन रयाल वर्तमान में अल्मोड़ा जिले में एसडीएम के पद पर तैनात हैं। श्री रयाल बताते हैं कि वह इस स्थान से इतना प्रभावित हुए कि वैवाहिक जीवन यहीं से शुरू करने का फैसला किया।

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केदारनाथ से 19 किमी पहले गंगोतरी, बूढ़ाकेदार सोनप्रयाग के रास्ते के निकट त्रियुगी नारायण नाम से प्रसिद्ध एक धार्मिक स्थल है। मंदिर के गर्भगृह में नारायण भगवान की सुंदर मूर्ति है। अन्य मूर्तियों में भू-देवी तथा लक्ष्मी की मूर्तियाँ उल्लेखनीय हैं। यहाँ अनेक कुंड भी हैं। इनके नाम ब्रह्म कुंड, रुद्र कुंड और सरस्वती कुंड हैं। इस मंदिर में अखंड धूनी जलती रहती है।

किंवदंती है कि यह वही अग्नि है, जिसकी साक्षी कर शिव ने पार्वती से विवाह किया था। पार्वती का मायका अर्थात हिमालय नरेश का निवास (संभवतः ग्रीष्म निवास) भी यही बताया जाता है। यह तीनों युगों (द्वापर, त्रेता, कलियुग) में पूजित रहने के कारण त्रियुगीनारायण बना तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 रुद्रप्रयाग स्थित  ' जय श्री त्रियुगीनारायण मंदिर ' को शिव -पार्वती के  विवाह स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है  ....कौन महिला नहीं चाहेगी  कि उसका पति महादेव और कौन पुरुष नहीं चाहेगा कि उसकी पत्नी पार्वती जैसी हो .....लिहाजा यहाँ इस कामना के साथ हर साल सैकड़ों लोग परिणय सूत्र में बंधते हैं ...आर्य समाज के बाद अब उत्तराखंड में इसी तरह अन्य मंदिरों में भी लोग बाग़ विवाह करने लगे हैं ....मसलन अल्मोड़े का चितई मंदिर ...यह दहेज़ मुक्ति तथा  किफायती एवं  सफल वैवाहिक जीवन की दिशा में अनायास बढ़ रहा एक अच्छा कदम है ....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सभी मित्रो को महा शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये ! 

This is the place where Lord Shiva & Parvati got married.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi

हाव दगाड़ आपण अभिलाषा भेजणयूं,
फेशबुकाक बाट तुमुहै संदेशा भेजणयूं।
मौक मिललौ तो यकें मंजूर करिलिया,
तुमुहैं शिवरातिक शुभकामना भेजणयूं॥