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Ved Vyas Cave in Uttarakhand- वेद व्यास गुफा, जहाँ लिखी गयी थी महाभारत

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, December 31, 2010, 03:59:50 AM


Devbhoomi,Uttarakhand

माणा गांव के अन्तिम छोर पर व्यास गुफा के पास इस बोर्ड को देखकर हर सैलानी या तीर्थयात्री इस दुकान में चाय पीने जरुर जाता है। श्री चन्द्र सिंह बड़वाल इस दुकान के संचालक हैं, पिछले २५ वर्षों से वे इसका संचालन कर रहे हैं। इस दुकान में आपको साधारण चाय से लेकर माणा में पी जाने वाली नमकीन गरम चाय, वन तुलसी की चाय आदि भी मिल जायेगी।






Devbhoomi,Uttarakhand

व्यास गुफा बड़े क्षेत्र में फैली है। इस गुफा में वेद व्यास की प्रतिमा है। व्यास गुफा सरस्वती नदी के तट पर स्थित है। इसके समीप अलकनंदा और सरस्वती नदी का संगम है। यह स्थान केशव प्रयाग कहलाता है। माणां गांव के ऊपरी क्षेत्र में स्थित हिमनद से सरस्वती का उद्गम माना जाता है। यह माणां गांव के पास से गुजरती हुई केशव प्रयाग में अलकनंदा से मिल जाती है।
सरस्वती नदी का जल साफ और नीला दिखाई देता है। मान्यता है कि वेदव्यास ने सरस्वती नदी के किनारे पर महाभारत के साथ ही श्रीमद्भागवत और १८ पुराणों की रचना की। जो एक दिव्य और अद़भुत कार्य था, जो देवीय कृपा के बिना संभव नहीं था। यह शक्ति उनको माता सरस्वती के आशीर्वाद से प्राप्त हुई। जिसे ज्ञान, विद्या और बुद्धि की देवी माना जाता है। इसलिए यहां पर माता सरस्वती के रुप में सरस्वती नदी और उसके तट पर व्यास गुफा का स्थित होना धार्मिक आस्था बढ़ाता है। यही वह स्थान है, जहां से ज्ञान और अध्यात्म का उजाला पूरे जगत में फैला।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Vyasa Cave

Vyasa Cave is situated on a mountain near Kalapani in Pithoragarh District. It is located at an altitude of 3,600 m. Legends say that Veda Vyasa had stayed here. This region is also known as Byans. Kalapani Spring, Kali Temple, Gunji and Budhi are the nearby attractions. It is surrounded by pine and juniper forests. The place provides an enchanting view of the snow clad mountains all around. Rock climbing equipments are required to reach here. Para gliding, hand gliding and trekking are arranged by the Department of Tourism, Uttarakhand.

Pawan Pathak

सौ मीटर लंबी और तीन मंजिली है गुफा
अलौकिक है भाटी गांव में मिली गुफा

पिथौरागढ़। एक पखवाड़ पहले जिला मुख्यालय के नजदीकी क्षेत्र भाटीगांव में मिली गुफा को लोगों ने लटेश्वर महादेव गुफा नाम दिया गया है। गुफा तीन मंजिली है। सौ मीटर लंबी गुफा में तमाम आकर्षक आकृतियां बनी हैं। गुफा को देखने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। क्षेत्र के लोगों ने सरकार से गुफा के विकास के लिए कदम उठाने की मांग की है।
जिला मुख्यालय 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भाटीगांव में गुफा मिलने का किस्सा भी रोचक है। आज से ६ साल पहले भाटीगांव के प्राचीन लटेश्वर महादेव मंदिर में धर्मशाला निर्माण में काम करते वक्त एक मजदूर की कुल्हाड़ एक गड्ढे में गिर गई। इस गड्ढे को भालू उड्यार नाम से जाना जाता था। मजदूर किसी प्रकार गड्ढे में उतर कर कुल्हाड़ तो ले आया लेकिन अंदर के दृश्य देखकर वह काफी अचंभित हो गया। बाहर आकर उसने साथी मजदूरों को गड्ढे के भीतर गुफा होने की बात बताई।
धीरेधीरे यह बात पूरे क्षेत्र में फैल गई। भाटीगांव के साहसी युवाओं ने गड्ढे के मुहाने से झाड़यों को साफ कर अंदर प्रवेश किया तो उन्हें एक अलौकिक गुफा दिखाई पड़। गुफा में शंख, चक्र, गदा, शिवलिंग, अष्टकमलदल समेत तमाम आकृतियां बनी हुई हैं। गुफा तीन मंजिला है। गुफा के भीतर जलकुंड और जमीन में बनी सांपों की आकृतियां इसका मुख्य आकर्षण हैं। क्षेत्र के डीएन भट्ट और लीलाधर भट्ट ने बताया कि गुफा के विकास के लिए स्थानीय स्तर पर कमेटी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। गुफा के विकास का मामला प्रदेश के पर्यटन मंत्रालय के सामने रखा जाएगा।


Source-http://earchive.amarujala.com/svww_zoomart.php?Artname=20090401a_005115004&ileft=129&itop=822&zoomRatio=137&AN=20090401a_005115004