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Kumaoni-Garwali Words Getting Extinct-कुमाउनी एव गढ़वाली के विलुप्त होते शब्द

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 27, 2011, 03:56:06 AM

Bhishma Kukreti

Garhwali Words, Now Getting Extinct -21


                                   Presented by Bhishm Kukreti






Sources : 1-Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Beena Benjwal , Garhwali Shabdkosh, Vinsar Publishing co. Dehradun

2- Late Kanhyaa Lal Ji . Dandriyal Garhwali shabd Kosh (Series in Shailvani, Kotdwara )

3- Abodh Bandhu Bahuguna , Garhwali Vyakaran ki Rup Rekha

4- Rajni Kukreti , Garhwali Vyakaran                                       



फडींग  =धान काटने बाद लगाया गया हाल

फणकण =नाराज होना

फदौण =झूटी बात कह कर विश्वास में लेना

फफंड =ढोंग, पाखण्ड

फफंडि =ढोंगी

फफराण =उत्साह में आकार काम करना

फबटेणु = ठोकर खाना

फरजंट = चालाक, चतुर , कार्यकुशल

फरडि =झंडी

फरोड़ा = बलि , न्यौछावर

फळसु= अवरोध, बाड़

फिड़फिड़ी = दया का भाव , करूणा का भाव     

फिफड़ाण = दुखी या वथित होना

फैमाळ =रुकावट, बाधा

फुन्द्या, फोंद्या = मुखिया, चतुर चालाक

फ्यानकु =आँचल

फौंसा =गीदड़ भभकी 




कृपया ध्यान दें :



गढ़वाली व्याकरणनुसार व्यंजनान्त में बडी ई की मात्रा अधिकतर वर्जित ही है

क, का, को भी गढ़वाली व्याकरण सम्मत नही है

ष भी प्रयोग नही होता था प्राचीन काल में ष को ख पढ़ते थे


Curtsey to all

1-Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Beena Benjwal , Garhwali Shabdkosh, Vinsar Publishing co. Dehradun
2- Late Kanhyaa Lal Ji . Dandriyal Garhwali shabd Kosh (Series in Shailvani, Kotdwara )

3- Abodh Bandhu Bahuguna , Garhwali Vyakaran ki Rup Rekha

4- Rajni Kukreti , Garhwali Vyakaran

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                                Presented by Bhishm Kukreti


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2- Late Kanhyaa Lal Ji . Dandriyal Garhwali shabd Kosh (Series in Shailvani, Kotdwara )

3- Abodh Bandhu Bahuguna , Garhwali Vyakaran ki Rup Rekha

4- Rajni Kukreti , Garhwali Vyakaran



बिजोरि= बीज के रखा ग्या बीज

भ्नकर = खलियान में सूखने रखा अनाज

भंगेल्डु  =गौरैया

भकेंड = किसी हथियार पर लगा हत्था 

भगन= बर्बाद, उत्तरदायित्यहीन   

भगनमास = नष्ट भ्रष्ट

भटास = प्यास की अनुभूति

भणकाण्या = बाध्य होकर

भणनु =बखान करणा

भताड़ = निट्ठला पति

भतेड़ा = व्यर्थ का परिश्रम, कष्ट

भन्क्या =मजबूरी में /मजबूर होकर

भमाण =उदासीनता, उदासी, सूनापन

भम्वार =उठाव , जोश

भांचण =बन्द करणा, इनकार

भानण = तोड़ना, नष्ट करना

भिंदु = पत्ते या फल का वृंत

भिट्टू = सीढ़ीनुमा खेतों में दो खेतों के बीच की दीवार

भिड़ासौड़ = बहुत सारे लोगों का जोर शोर से कार्य करना

भिदौण =निशाना मरना, भेदना

भीन = परहेज, भेदभाव , अंतर

भुकोल = सांयकाल

भुचकु =झाडी, झाड़ीनुमा पौधा

भुन्नु = जंगली सुअर

भूमंडु  = एक ही  तल वाला मकान (तल मंजिला)

भुड़था =बकरियों की देखभाल करने वाला व्यक्ति

भुरतु  =सेवक

भेतको = मिटटी का छोटा सा तीला

भेलकु = अनैतिक गर्भ ठहरना

भेलगाळी =बिना किसी का नाम लिए गाली देना

भैरगडडू =व्यर्थ घुमने वाला

भौंतरेण =आपे से बाहर होंना

भ्युंरि  = आँखों के आगे  छाने  वाला अन्धेरा

भ्वींता  =लकड़ी या रस्सी का पुल

भ्वींजु  =पूर्व परिचित





कृपया ध्यान दें :



गढ़वाली व्याकरणनुसार व्यंजनान्त में बडी ई की मात्रा अधिकतर वर्जित ही है

क, का, को भी गढ़वाली व्याकरण सम्मत नही है

ष भी प्रयोग नही होता था प्राचीन काल में ष को ख पढ़ते थे


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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


ठौर  - जगह

वौड़  - पहाडो में दो खेतो विभाजित करने के लिए पत्थर, जिसे स्थानीय भाषा में वौड़ कहते है! इस पत्थर से खेतो की सीमा निर्धारित होती है!

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मगर ---------पनघट

मंग्याळ = पकती , कटार

मंडुल़ा =छोटे छोटे मन्दिर

मन्था = संसार

मकड़ =अधिक, भरा पुरा

मड़ापति =मठाधिपति

मडि = मरा /शव

मणख्याळु = मनुष्य के साथ रहें वाला पालतू पशु

मांदण =मथनी

ममका = घुड़की, बंदर भगाने के लिए घुड़की

माळ =मैदानी क्षेत्र /तराई वाला भाग

मुखाणि =मृतक के यंहा जाकर दी जाने वाली संवेदना

मुन्याळ =उद्गम

मुयाळी =लावारिस सम्पति

मेवाळ= काई

मोंळार्त  = कई लोगों द्वारा एक साथ किसी के यहाँ गोबर डालने का काम




कृपया ध्यान दें :



गढ़वाली व्याकरणनुसार व्यंजनान्त में बडी ई की मात्रा अधिकतर वर्जित ही है

क, का, को भी गढ़वाली व्याकरण सम्मत नही है

ष भी प्रयोग नही होता था प्राचीन काल में ष को ख पढ़ते थे


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यकच्वट्या  = एक इ चोट मा,  एक प्रहार में

यकसौंडाळ - समतल

यक्लग - निरंतर

यखरौण  = ओखली में धान को एकी बार कुटना

रंगसाळेण = चौंकना, खुसी से अचंभित होंना

रंगाळि = गप्पें, बध चढ़ कर की गई बातें

रगड़घोस = व्यर्थ , बेकार

रग ताडू = भूस्खलन से बाना उबड़ खाबड़

रतकाळि =बड़े सुबह , उषा काल से पहले

रमदैलि = सभी चीजों भात, दाळ सब्जी को एक साथ मिला देना

रीस = इर्ष्या


                                           



कृपया ध्यान दें :



गढ़वाली व्याकरणनुसार व्यंजनान्त में बडी ई की मात्रा अधिकतर वर्जित ही है

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लंक/लंख  = बहुत दूर

लंकोदय = उषाकाल

लंगलंगी =पतली व लम्बी

लंगसंग   =संगति का प्रभाव

लंगोडि =ऐसा खेत जो चुअदा कम लम्बा अधिक हो

लन्ज्जन= लांछन , कलंक

लंठ =बदमाश/उत्तर्दायित्व्हीन

लग्गा = गाँव की सीमा के अन्दर मुख्य गाँव से हटकर वसे कुछ परिवार   

लग्द - बग्द= जल्दी जल्दी

लग्यार =  लगाव

लदेरू = लड्डू पशु

लपराळ =आग की लपट

लमाळा =फते पुराने वस्त्र

लींजी /लेंजी = चिपचिपापन

लौल्याट =जोर की खुजली

ल्वीणि =असह्य दर्द





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वंग - उनग, ओंग,

वंस - ओस

वगाण = फूलना ९रोति आदि)

वथ्यार = व्श्राम का कार्य खासकर बकरियों से समन्धित

वअण = बड़ा छेद

विखळाण/ विकुळ   =अरुचि

वीटा= उलटा

वीणा= जागृत स्तिथि

वीर्यौण   =किसी कार्य को शुरु करना

संगेठण =समेटना

संदौण =छोटे बच्चों को तेल मालिश कर गरम हाथों से सेकना

संतेण = घाव भरना

संवार = सामने

स्क्यावान = शक्तिशाली

सगळो =पूरा/समूचा

सगाती = सगोत्री

सतरौण =व्यवस्थित करना

सिनक्वाळ  = अन्धेरा होने से पूर्व

समसूत= रात्री का सन्नाटा

सळकि  =डींग

सांवा = कर्ज के रूप में दी गयी राशी

सिंगताळ = दो सींगो के बीच का भाग , माथा

सुकरौड़ =एकदम सुखा पड़ना

सुरता = इच्छा, आकांक्षा

सुराळि =रिश्ता, नाता

सुळया =कामुक

सेंजडि  =हमउम्र

स्यमता =ऐसी इच्छा जो पूरी होना कठिन हो

हितराड़ =डांट

हुर्स्यौण  =चिढाना

हेवार = पंक्ति

हेसणु =कष्ट भोगना

होकड़  = होड़, बाजी

होतिल = समृद्ध

ह्युंर =ग्लेशियर





कृपया ध्यान दें :

गढ़वाली व्याकरणनुसार व्यंजनान्त में बडी ई की मात्रा अधिकतर वर्जित ही है

क, का, को भी गढ़वाली व्याकरण सम्मत नही है

ष भी प्रयोग नही होता था प्राचीन काल में ष को ख पढ़ते थे


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indubisht85

 :) ओ इज्जा ........हे मां ये तो बिलकुल गायब हो गया है ....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


बाटुली मतलब  याद आना - लोग अब इस शब्द को कम इस्तेमाल कर रहे है आम बोलचाल की भाषा में!



indubisht85

 ;D
गढ़ायेरम धारणा , तेरी जवानी ढे जो , तेरी झगुली ली जाल बामना चयल आदि दी जाने वाली प्रिय और समुधुर गालियाँ हहहहः  :D :D :D :D :D :D :D :D :D :D