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Election 2012 in Uttarakhand Vs Development-उत्तराखंड में चुनाव २०११ बनाम विकास

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 10, 2011, 02:23:58 AM


हेम पन्त

वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली और सफलता-असफलता पर बहुत कुछ कहा जा चुका है. लेकिन मुझे यह लगता है कि निशंक साहब के पास पहाड़ के लोगों को दिखाने के लिये कोई भी उपलब्धि नहीं है. कुम्भ या 108 की घिसी-पिटी बातें अब जनता के लिये पुरानी पड़ चुकी हैं. आंकड़े जनता के समझ में नहीं आते और धरातल पर कोई ठोस काम दिखायी नहीं दे रहा है.

जनता सिर्फ इतना ही जानती है कि अगली बरसात आने वाली है लेकिन पिछली बरसात में हुए नुकसान की भरपाई अभी नहीं हो पायी है. भ्रष्टाचार के नये-नये मामले सामने आते जा रहे हैं. बिजली-पानी के बिना जनता का हाल बेहाल है. सरकारी नौकरियों के लिये निकाले गये फार्म गरीब जनता की पहुंच से बाहर हैं. पहाड़ों में रोजगार सृजन के लिये कोई पहल नहीं हुई है...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


बिलकुल मै हेम दा के विचार से सहमत हूँ !

मुझे नहीं लगता इस आधार पर वर्तमान सरकार जनता को वोट मागने जायेगी!  उपलब्धि दिखाने के लिए है क्या !

जनता को हर बार बेकूफ बनाना संभव नहीं!  सब समय है हर क्षेत्र के एम् एल का का भी यहाँ पर स्कोर कार्ड की चर्चा हूँ!  किस नेता ने इस क्षेत्र में क्या क्या काम करवाए है !

जनता को जागरूक होना जरुरी है !
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मै अपनी तरफ से यह बात स्पष्ट कर दूं कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण मैदानी भागो के नहीं हुवा था ! पहाड़ी क्षेत्र हर समय समय विकास की दृष्टि पिछड़ा हुवा है !  पहाड़ी क्षेत्र की अभी भी कोई ख़ास विकास नहीं हुवा है !

दर्द सबसे बड़ा यह है !


हुक्का बू

भारत के माहालेखाकार ने कुम्भ मेले में ४३ करोड़ रुपये का व्यय गलत ढंग से होने की बात अपनी रिपोर्ट (कैग) में कही है, यह तो मोटा अनुमान ठैरा, अभी यह कयास लगाये जा रहे हैं कि लगभग १००-२०० करोड़ रुपये का गड़बड़झाला हुआ है करके। इसी के लिये सी०एम० सैप नोबल पुरस्कार मांग रहे थे, यह दिया भी जाना चाहिये, क्योंकि संसार के सबसे बड़े आस्था के समागम में जो घोटाला कर दे और भगवान के काम में भी कमीशन खाये, उसके लिये तो नोबल से भी बड़ा पुरस्कार दिया जाना चाहिये।

रही बात १०८ की, जिसके बारे में चिल्ला-चिल्ला कर यह कहा जाता है कि यह संजीवनी के समान है, इसमें ६७ हजार महिलाओं ने प्रसव किया है। तो यह बात गर्व की नहीं शर्म की है और घोर शर्म की है कि आजादी के इतने सालों के बाद और उत्तराखण्ड बनने के १० साल बाद भी हमारी सरकारें आज प्रत्येक गांव में यह सुविधा नहीं दे पायी कि हम महिलाओं का सुरक्षित प्रसव करा सकें। यह दुर्भाग्य है कि उत्तराखण्ड की महिलाओं को प्रसव भी एम्बुलेंस में कराना पड़ रहा है। इसका सीधा-सीधा अर्थ यह है कि उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रुप से असफल है, जिस प्रसव को पहले गांव की दाईयां सरलता से करा देती थीं, उसके लिये आज एम्बुलेंस बुलानी पड़ती है, हां हमारे राज्य को पुरस्कार दिया जाना चाहिये क्योंकि हमारे यहां प्रसव कराने के लिये भी एम्बुलेंस बुलानी पड़ती है। स्वास्थ्य विभाग इतने सालों बाद आज ग्राम स्तर पर एक ए०एन०एम० की नियुक्ति करने में असमर्थ है, आशा कार्यकत्री की नियुक्ति नहीं कर पा रही है, इसलिये हमें एम्बुलेंस बुलाकर डिलीवरी करनी पड़ती है।

हमारी सरकारों को कुछ बोलने से पहले उसका निगेटिव-पाजीटिव भी देख लेना चाहिये। सी०एम० सैप तो आज तक जिन भी चीजों पर सभाओं में गर्व महसूस कराते हैं, मुझे तो उन सब पर लगभग शर्म ही आती है। परसों ही उनका एक और बयान था कि चूंकि गंगा उत्तराखण्ड से निकलती है इसलिये गंगासागर तक के खनन-चुगान में से हमें हिस्सा मिलना चाहिये। अगर यही बात बिहार, उ०प्र० और प० बंगाल वाले भी कह दें कि उत्तराखण्ड से आने वाली गंगा से हमारे यहां बाढ़ आती है और भू-कटाव होता है, इसकी क्षतिपूर्ति उत्तराखण्ड करे तो ?

खैर भगवान इनको सदबुद्धि दे।----------------------

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Only annoucement will not work out.

We need need development at Ground Level. Such news is appended below.

I can recall even during the Lok Sabha Election similiar announcements were made by Ex CM Khanduri ji but hardly any work has started.

This is just a poltic only.
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कोरी घोषणाएं कर रहे हैं मुख्यमंत्रीMay 18, 10:16 pmबताएं

,गंगोलीहाट: अल्मोड़ा के विधायक मनोज तिवारी बुधवार को गंगोलीहाट पहुंचे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस मौके पर प्रदेश सरकार के मुखिया पर कोरी घोषणाएं करने का आरोप लगाया।

कार्यकर्ताओं की बैठक लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक तिवारी ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार कांग्रेस के शासनकाल में स्वीकृत योजनाओं का ही लोकार्पण कर रही है। हेलीकॉप्टर से क्षेत्रों में जाकर शासन की उपलब्धियों को गिना रहे मुख्यमंत्री जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। जबकि सरकार को यह धनराशि नए रोजगार सृजन के क्षेत्र में खर्च करनी चाहिए थी। यदि रोजगार देने की नीति बनी होती तो कांग्रेस भी सरकार का पूरा साथ देती। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर बार बजट का रोना रोते हुए केन्द्र पर उपेक्षा का आरोप लगाती है जबकि केन्द्र सरकार ने 78 करोड़ का वार्षिक बजट दिया है। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के लोकार्पण में कांग्रेस विधायकों को भी दूर रखने की निंदा की। कहा कि आम जनता को भाजपा की कथनी और करनी का अंतर समझ में आ गया है। इस मौके पर पूर्व विधायक नारायण राम आर्य, पुष्कर खाती, संजय साह, तारा चन्द्र जोशी, विन्दू रौतेला, देवेन्द्र सिंह, गणेश बोरा, मनोज मेहरा आदि मौजूद थे।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7744343.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

इतने सारे भ्रष्टाचार के मुद्दे सामने आने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी की हाई कमान आँख मूदे हुयी है !
और जनता के बीच वोट मागने जायेगी!

यह राज्य मुद्दों से भरा हुवा है ! यहाँ समस्याओं का भण्डार है पर निदान नहीं है !

प्रवासी उत्तराखंडी समाज वहां रहने वालो लोगो से ज्यादे चिंतित है अपने राज्ये के विकास के लिए! उत्तराखंड के परवासियो के कई संगठन उत्कर्ष्ठ कार्य कर रहे है !

Quote from: हुक्का बू on May 18, 2011, 08:26:46 AM
भारत के माहालेखाकार ने कुम्भ मेले में ४३ करोड़ रुपये का व्यय गलत ढंग से होने की बात अपनी रिपोर्ट (कैग) में कही है, यह तो मोटा अनुमान ठैरा, अभी यह कयास लगाये जा रहे हैं कि लगभग १००-२०० करोड़ रुपये का गड़बड़झाला हुआ है करके। इसी के लिये सी०एम० सैप नोबल पुरस्कार मांग रहे थे, यह दिया भी जाना चाहिये, क्योंकि संसार के सबसे बड़े आस्था के समागम में जो घोटाला कर दे और भगवान के काम में भी कमीशन खाये, उसके लिये तो नोबल से भी बड़ा पुरस्कार दिया जाना चाहिये।

रही बात १०८ की, जिसके बारे में चिल्ला-चिल्ला कर यह कहा जाता है कि यह संजीवनी के समान है, इसमें ६७ हजार महिलाओं ने प्रसव किया है। तो यह बात गर्व की नहीं शर्म की है और घोर शर्म की है कि आजादी के इतने सालों के बाद और उत्तराखण्ड बनने के १० साल बाद भी हमारी सरकारें आज प्रत्येक गांव में यह सुविधा नहीं दे पायी कि हम महिलाओं का सुरक्षित प्रसव करा सकें। यह दुर्भाग्य है कि उत्तराखण्ड की महिलाओं को प्रसव भी एम्बुलेंस में कराना पड़ रहा है। इसका सीधा-सीधा अर्थ यह है कि उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रुप से असफल है, जिस प्रसव को पहले गांव की दाईयां सरलता से करा देती थीं, उसके लिये आज एम्बुलेंस बुलानी पड़ती है, हां हमारे राज्य को पुरस्कार दिया जाना चाहिये क्योंकि हमारे यहां प्रसव कराने के लिये भी एम्बुलेंस बुलानी पड़ती है। स्वास्थ्य विभाग इतने सालों बाद आज ग्राम स्तर पर एक ए०एन०एम० की नियुक्ति करने में असमर्थ है, आशा कार्यकत्री की नियुक्ति नहीं कर पा रही है, इसलिये हमें एम्बुलेंस बुलाकर डिलीवरी करनी पड़ती है।

हमारी सरकारों को कुछ बोलने से पहले उसका निगेटिव-पाजीटिव भी देख लेना चाहिये। सी०एम० सैप तो आज तक जिन भी चीजों पर सभाओं में गर्व महसूस कराते हैं, मुझे तो उन सब पर लगभग शर्म ही आती है। परसों ही उनका एक और बयान था कि चूंकि गंगा उत्तराखण्ड से निकलती है इसलिये गंगासागर तक के खनन-चुगान में से हमें हिस्सा मिलना चाहिये। अगर यही बात बिहार, उ०प्र० और प० बंगाल वाले भी कह दें कि उत्तराखण्ड से आने वाली गंगा से हमारे यहां बाढ़ आती है और भू-कटाव होता है, इसकी क्षतिपूर्ति उत्तराखण्ड करे तो ?

खैर भगवान इनको सदबुद्धि दे।----------------------


हलिया

अरे बूबू आप ठीक कह रहे हो हो महाराज!  108 का इतना ढोल क्यौं पीट रहे ठैरे ये लोग.  एक सुबिधा है ठीक है लेकिन ये बताओ जो गांव रोड से 15-20 मील दूर है वहां 108 उड कर जायेगी क्या?  फुल पेज के बिग्यापन छप रहे हैं वो भी रंगीन लाखों रुपया लुटा दिया अरे इस रुपये से कुछ बिकाश करो बिकाश.  गावों में इलाज की सुबिधा दो.  रोड नहीं है तो पैदल मार्ग ठीक करो कितने काम हैं करने को लेकिन इनको तो अपनी फोटो छपवाने से मतलब ठैरा गरीब सीमांत गांव वाले जाये भाड में चुनाव के टैम पर इनके चेले चपाटे आ जायेंगे कुछ ठर्री-सर्री लेकर और बहका फुसला कर निकाल लेंगे अपना काम फिर तो ठाट ठैरी.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


आज इस प्रकार क्षेत्रीय पार्टियों का बोल बाला चल रहा है चाहे ममता बैनर्जी का त्रिमूल कांग्रेस, जाया ललिता की पार्टी और अलग -२ राज्यों में अन्य क्षेत्रीय पार्टिया, लेकिन उत्तराखंड के लिए यह दुर्भाग्य की बात है यहाँ एक एक मात्र नामी गिरामी पार्टी अंतिम सासे ली रही है !

मुझे लगता है उत्तराखंड में भी परिवर्तन की सख्त जरुरत है ! दोनों की राष्टीय पार्टियां कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड में राज्य कर लिए लेकिन कोई भी पार्टी विकास नहीं कर पायी !

अभी तक कोई भी येसा नेता सामने नहीं आया जिसका उत्तराखंड राज्ये को विकसित करने के लिए कोई अगेंडा हो विजिन हो !

मेरे हिसाब से क्षेत्रे पार्टी का मजबूत होना जरुरी है. जो एक बिकल्प के रूप में भी सामने आये !


पंकज सिंह महर

उत्तराखण्ड की विकास दर राष्ट्रीय विकास दर से ज्यादा होने का दावा करने वाली सरकार को आज उन्हीं की पार्टी के सांसदों के दल ने आईना दिखाया है। दल के मुखिया सांसद तरुण विजय का कहना है कि सीमान्त ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सड़क, संचार, बिजली की सुविधा से कोसों दूर है। निशंक जी क्या इसे स्वीकार करेंगे?


२० मई को हिन्दुस्तान में प्रकाशित एक खबर-

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व राज्य सभा सांसद ने बताया कि पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी से लगे सीमावर्ती गांव मरतोली के बाशिंदे बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। यहां के अधिकांश लोग पलायन कर चुके हैं और जो बुजुर्ग यहां बचे है, उन्हें चावल ५० रुपये और नमक ६० रुपये प्रति किलो खरीदना पड़ रहा है। भाजपा से सीमा दर्शन अभियान के ३५ सदस्यीय दल का नेतृत्व कर रहे तरुण विजय ने गुरुवार को आईटीबीपी के सेटेलाइट फोन के जरिये पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश तिवारी को यह जानकारी दी। देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की दशा और उनकी समस्याओं का अध्ययन करने १५ मई को हल्द्वानी से रवाना हुआ अब तक मुनस्यारी से लगे अति दुर्गम गांवों का भ्रमण कर चुका है। तरुण विजय ने बताया कि सीमान्त इलाकों में बसे गांव आज भी सड़क, संचार, बिजली की सुविधा से कोसों दूर हैं। क्षेत्र का तो यहां बुरा हाल है। क्षेत्र में एक भी हाईस्कूल या इंटर कालेज नहीं है। क्षेत्र में पहली दफा किसी सांसद को देखकर ग्रामीण बेहद खुश नजर आये। उन्होंने बता्या कि चीन ने तिब्बत-भारत सीमा तक सड़कें और हवाई अड्डे बना लिये हैं। जब कि भारतीयों को सीमा तक जाने के लिये १७५ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। दल शुक्रवार को मिलम ग्लेशियर पहुंचेगा।

source- hukka boo from facebook