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Poem Written by Harda "Rahi)- हरदा राही की कविताएं

Started by adhikari harish dhoura, July 28, 2011, 11:06:43 AM

adhikari harish dhoura

aajkal पहाड़ में कतुवेके लूग भगवानो नाम पर ठगी ले करंग फगी, य कविताक माध्यमल में लोगो के सचेत करउनु , म्यार मकसद केके ठेठ पह्चुं नाहिअते , पहड़ोक भोली भाल जनता के जागरूक करून छू. यदि केके गलत लगी तो वीक  लिजी माफ़ी दिदिया................


चाव्गौव्क गुद, मासकं दाडं,
मसक दाडून भेम हराडं,
दाड़ी दिकेहे गन्तु केई
वील क लाफि रो मसान .


जरा सूडो कास छू य मसान,
पाड़ी बिन रारो तिसांड
सात दिनों कोओल करार
न तेरी याक छुटी जाल परांड


काव मॉस काव मुर्गी
काव रंगक ल्याया  हिल्वाड
काव-काव काव्हे हुन्द्चें
काव रंगक ल्याया निसाड.


द्वि चार अतेरक गाठी ल्याया
एक  ल्याया बौताव सराब
विल्श दाब सिगरेट हुड्चें
नतेरी पूज है जली ख़राब .


                हरदा "राही"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


हरदा बहुत सुंदर... कविता लिखा है आपने ... जारी rakhiyega.



हेम पन्त

कविता भौत भली लागे... आई लखिया... इंतज़ार रोल...

adhikari harish dhoura

चेली हगे घर में ,
पड़ी दाड़ा-डाड़.
सास कुने खड्ड हेलो तके,
सोओर कुनो बघे दियो गाड़,
चेली हगे घर में ................

चेली हगे घर में ,
आब क्येक दाव भात ,
मेस कुनो द्वी पैली छन,
आब ख्वार पड़ी गे रात .

चेली हगे घर में ,
हघे गों बखोई सुगबुकाट,
खिमु-खिमुलिक चेली हरे ,
लोगोंक हरो छट पताट.

चेली हगे जाड़ी के जै हगो
जाड़ी हगेओ अभिशाप ,
चेली के छू जरा सुहुंड ल्यो ,
किले कनेछा तुम य पाप .

चेली सानिया चेली सायना,
चेली कल्पना चौहान छू .
चेली लिवेर संसार चली रो ,
चेली कटु महान छू .

"जै भारत  जै उत्तराखंड "

हरदा "राही"

adhikari harish dhoura

        शराबी
माल बखोई बुबू वा,
आज हई भे पार्टी.
केके मुख पवु-अद्ध,
केले मुख लगाई भे पूरी बाल्टी.

केके आघिल्बे नुंडे डोई,
केके आघिल्बे प्याजक गाठ,
केके खुट ठाड़ लागी भे
कैले लग्हैभे अग्गास भाट.

सराबक जोरा-जोर हाइभे
सिकारक लुछा-लुछ ,
लड़ेक चुचकार हाइभे
घरपानक नि भे सूझ-बुझ.


     हरदा "राही"




विनोद सिंह गढ़िया

Quote from: adhikari harish dhoura on July 30, 2011, 12:40:47 PM
चेली हगे घर में ,
पड़ी दाड़ा-डाड़.
सास कुने खड्ड हेलो तके,
सोओर कुनो बघे दियो गाड़,
चेली हगे घर में ................

चेली हगे घर में ,
आब क्येक दाव भात ,
मेस कुनो द्वी पैली छन,
आब ख्वार पड़ी गे रात .

चेली हगे घर में ,
हघे गों बखोई सुगबुकाट,
खिमु-खिमुलिक चेली हरे ,
लोगोंक हरो छट पताट.

चेली हगे जाड़ी के जै हगो
जाड़ी हगेओ अभिशाप ,
चेली के छू जरा सुहुंड ल्यो ,
किले कनेछा तुम य पाप .

चेली सानिया चेली सायना,
चेली कल्पना चौहान छू .
चेली लिवेर संसार चली रो ,
चेली कटु महान छू .

"जै भारत  जै उत्तराखंड "

हरदा "राही"


'चेली हैगे घर में'
बहुत ही सुन्दर कविता लिखी है हरदा राही जी आपने .......कृपया इसी तरह लिखते रहिएगा .

adhikari harish dhoura

         गणेश बंदना
       
श्री गणेशा , में त्यारा आदेशा
में मानी ल्युना रे, में मानी ल्युना रे
भले देशा छोड़ी परदेशा ज्युना रे
तुम जाती जस कोला, में उस करुला रे
भले देशा .............

ओ गज़ा धारी,में तेरो आभारी
तुम बता दिया रे ,तुम बता दिया रे
बुराई बाटी मइके हटा दिया रे
तुम जाती जस कोला, में उस करुला रे
भले देशा ......................

मुशक सवारी तुमेरी, जग छ आसारी
तुम सिखा दिया रे, तुम सिखा दिया रे
गरीबो की सेवा में मइके लगा दिया रे
तुम जाती जस कोला में उस करुला रे
भले देशा ...............................

adhikari harish dhoura

  pukar

bula raha hain
koi aaj mujhko
badi jor se awaaj dekar
sunkar mere kaan fate ja rahe hain.......


ea pathik
tere kadmoin ke nisaan
aaj bhi taza hain mujh par
lout aa dekh ye mitne hi wale hain........


ha ha tumse
tumko hi bol raha hoon
pichhe mudkar kise dkhte ho "rahi"
tumahari kadmoin ki aahat se pahchan gya hoon.......



kho gye
koho gye ho ya kahi tum
ananjaan ban rahe ho mujhe dhool samjhakar
mein mitti hoon is pavitr  pahad ki kai maan gye hain.......


mujhe yaki hai
mujhe yaki hain ki ek din
tujhmein jaroor lout ke aayega
fir se tere kadmo ke nishan mujh par honge........


mein raah hoon
mein raah hoon ea rahi
jo chale gye hain unke intzaar mein
kya kabhi firse meharban mujh par honge.......


ea mere
ea mere bachpan ke sathi
yowan ke lamhe bhi mere sang guzar
budhape ki kahani bhi mujhko hi sunana.........


sabhi bhatak
raah chhodakar ja rahe ho
lout aao aaj himalay ki parchhai mein   
is pahaad ki yadoin ko na bhulana, na bhulana.........

adhikari harish dhoura

पैस

कास जमान आ हो दाज्यू
डबलक जे जे कार हरे
घर बखोई शहर छोड़ी बहर
परदेश में मारा-मार हरे.i

एअकेले करी हेलो ईल मइके
यातेरी म्यार परिवार हाभेर
इज बाज्यू नान नानतिन
परदेश ल्यागो सब छोडिभेर i

याद आगे घर पहड़ेक
य डबल नि जाड़ी दिने
यातु अत्त्याचार कार भेर
फिर ले नि खाड़ दिने i

खाड़ पीड़ में कार हेलो अधिकार
लात कपड़क में ले यक कब्ज
कासी छुडो याखाती पल आब
येल पकड़ी हाले नब्ज i

डबल जे के हगो भगवन हगो
डाबलेकी राजपाट हरो
सारी दुंडी नचा रखे त्युल
त्यारे आज ठाटबाट हरे i

हरदा "राही"





adhikari harish dhoura

               
  गीत
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अन्नू मेरी अनीता तू भली हुनेली
य बाता जिगरा चिट्टी में करिए
प्यारी ओ पराड़ी तू कशी हुनेली
य बाता जिगरा चिट्टी में करिए


खिड़की में बैठी होली
खोली भेर कीताबा
कौपी में पेन घुमेली
थोव में गुलाबा
में लौटी घर उनो तू आस धरिये
य बाता जिगरा चिट्टी में करिए

नानी भो की लेटी बडाये
ठुल्के स्कूल लगाये
मेरी प्यारी आशु नि खेडिये
नन्तिनके तू पढाए
राम कसम प्यारी में जल्दी ए जूनो
य बाता जिगरा चिति में करिए

र हाटे की ताना अनु
र हाटे की ताना
तेरी जैसी क्वे नि होली
कुमावु में बाना
मेरी प्यारी बाना में लौटी एजुनो
य बात जिगरा.......................ii