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Facts Freedom Struggle & Uttarakhand Year wise- आजादी की लडाई एव उत्तराखंड तथ्य

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, August 31, 2011, 02:09:43 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dosto,

During Freedom Uttarakhad thousands of people from of Uttarakhand scarified their lives for motherland. We are going sharing information here year-wise details of Freedom Struggle and role of people from Devbhoomi.

1804 - खुड़बुड़ा यु( में नेपाली गोरखाओं की गढ़वाली सेना पर जीत। गढ़वाल नरेश प्रद्युम्नशाह को वीरगति।

1804-15- गढ़वाल पर नेपाली गोरखाओं का शासन।

1815 - गढ़वाल के निर्वासित राजा सुदर्शनशाह के अनुरोध पर ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा गढ़वाल से नेपाली गोरखाओं को खदेड़ कर मुक्त किया। सुदर्शनशाह द्वारा कम्पनी को यु( व्यय अदान करने पर गढ़वाल का एक हिस्सा कम्पनी को दिया, जो ब्रिटिश गढ़वाल कहलाया। प्रशासन की दृष्टि से इसे कुमाऊं कमिश्नरी के अलमोड़ा जिले से सम्ब( किया। - सुदर्शनशाह ने भागीरथी एवं भिलंगना के संगम पर स्थित स्थान टिहरी को अपनी रियासत की राजधानी बनाया।

1839 - गढ़वाल जिले की अलग से स्थापना। 1940 में मुख्यालय श्रीनगर से पौड़ी लाकर स्थापित किया।

1857 - गदर के दौरान ब्रिटिश गढ़वाल में पूर्ण शान्ति। रियासत टिहरी नरेश सुदर्शनशाह ने ब्रिटिश शासन का साथ दिया।

1864 - डिप्टी कमिश्नर बेकेट ने 1864 में अपनी ओर से 1840 भू-व्यवस्था में 'शिक्षा कर' लगाकर गढ़वाल में आधारिक विद्यालयों की स्थापना की।

(Courtesy -Regional Reporter Magazine Gahrwal)

M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कब क्या हुआ ?

1864 - पौड़ी के समीप चोपड़ा में अमेरिकन मिशनरी थोवर्ण ने मिशन शाखा खोली ।

1868 - 'समय विनोद' पत्र का नैनीताल से प्रकाशन

1870 - अल्मोड़ा में 'डिबेटिंग क्लब' की स्थापना।

1871 - 'अल्मोड़ा अखबार' का अल्मोड़ा से प्रकाशन
आरम्भ।

1875 - टिहरी नरेश प्रतापशाह द्वारा रियासत में प्रथम स्कूल की स्थापना। कीर्तिशाह के शासनकाल में यह प्रताप हाईस्कूल कहलाया।

1877- गढ़वाल में भीषण अकाल पड़ा, इससे पूर्व भी गढ़वाल में अन्न संकट आया था, जिसको'बावनी' कहा जाता है।

1879 - कान्धार के यु( में विशेष वीरता एवं सूझ-बूझ दिखाने पर बलभद्रसिंह नेगी को 'ऑर्डर ऑफ मैरिट' का सम्मान दिया गया। यह सम्मान बहुत कम भारतीयों को मिला था। इन्हें ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश इण्डिया' नामक पदक भी मिला। पांच वर्ष तक इन्हें भारत के जंगीलाट (रक्षासचिव) के अंगरक्षक के पद पर रखा गया। सन् 1885 में रिटायर होने पर इन्हें पेंशन तथा उल्लेखनीय सेवाओं के पुरस्कार स्वरूप भाबर में 1600 एकड़ भूमि की मुआफी जागीर प्रदान  की गई।

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कब क्या हुआ ?

1880- बलभद्र सिंह नेगी के निवेदन पर भारत के जंगीलाट रॉबर्टस ने गढ़वालियों के लिए पृथक पल्टन खड़ी करने की संस्तुति प्रदान की।

1882- सम्पूर्ण उत्तराखण्ड एवं टिहरी राज्य में जन स्वतंत्रता की पहली बगावत। टिहरी नरेश के आदेशानुसार रियासत के हर परिवार पर प्रतिवर्ष एक बोझ घास, चार पाथा चावल, दो पाथा गेहूं, एक सेर घी और एक बकरा राजमहल में पहुंचा कर उसकी रसीद लेने का नियम बना। रसीद न होने पर दण्ड का प्रावधान रखा गया। लक्ष्मणसिंह द्वारा राजा से शिकायत करने पर राजा ने उसे टिहरी से निकाल दिए जाने की आज्ञा जारी की। लक्ष्मण सिंह ने वायसराय को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया। इसका परिणाम यह हुआ कि टिहरी नरेश ने लक्ष्मण सिंह के घर पहुंच कर 'पाला विसाढः' के नाम से ली जाने वाली बेगार समाप्त करने की घोषणा की एवं नरेश प्रतापशाह द्वारा लक्ष्मण सिंह को राजसी वस्त्र पहना कर सम्मानित किया।

1896- चोपड़ा के पास गडोली में मिशन के आधारिक विद्यालय की स्थापना।

1901- लैंसडौन में लेफ्टिनेन्ट कर्नल एबट की अध्यक्षता में गढ़वाली रेजीमेन्ट की दूसरी बटालियन खोली गई, जिसका नाम 39वीं गढ़वाल रायफल्स ऑफ बंगाल इनफेंटरी रखा गया।

1901 - गढ़वाल यूनियन संस्था की स्थापना, जिसका दूसरा नाम गढ़वाल हित प्रचारिणी सभा था।

1902 - देहरादून से गढ़वाली पत्र का प्रकाशन

1905 - लैंसडौन से गढ़वाल समाचार (मासिकद्) का प्रकाशन।
1905- टम्टा सुधार सभा की अल्मोड़ा में स्थापना, जो 1913 में शिल्पकार सभा में बदल दी गई।

1906-7- मथुरा प्रसाद नैथानी के प्रयत्नों से गढ़वाल भातृमण्डल की लखनऊ में स्थापना।

1908- 24,26 दिसम्बर तक श्रीनगर गढ़वाल भ्रातृमण्डल का प्रथम सम्मेलन। समाज सुधार के कई बिन्दुओं पर चर्चा।

1910 - कोटद्वार से लैंसडौन तक प्रथम बार बैलगाड़ी सड़क बनी ।

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कब क्या हुआ ?

1910 - गढ़वाल की समस्त संस्थाओं को 'गढ़वाल सभा' में सम्मिलित कर लिया गया।

1911 - ब्रिटिश हुकूमत द्वारा नए कानून बना कर वनों पर से जनता के अधिकारों को समाप्त कर दिया गया।

1912 - गिरिजा दत्त नैथानी ने दुगड्डा में अपना समाचार पत्र 'गढ़वाल समाचार' मुद्रित करने के लिए प्रेस लगाया। प्रेस का नाम तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर के नाम पर 'स्टोवेल प्रेस' रखा।

1912 - पौड़ी सहित 10 स्थानों पर कुली एजेन्सी की स्थापना, इसका पूरा नाम ''ट्रांसपोर्ट एण्ड सप्लाई को आपरेटिव एसोसिएशन'' था।


1914 - फ्रांस के यु( में अद्वितीय वीरता का प्रदर्शन करने पर गबर सिंह नेगी तथा दरबान सिंह नेगी को विक्टोरिया क्रास से सम्मानित किया गया। इस सम्मान को प्राप्त करने वाले ये पहले  भारतीय थे।

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कब क्या हुआ ?

1916 - कुमाऊं परिषद का गठन।

1918 - कुमाऊं परिषद का हल्द्वानी में द्वितीय अधिवेशन, जिसमें बेगार समाप्त करने व जनता को वनाधिकार लौटाने सम्बन्धी प्रस्ताव पारित किएगए।

1918 - 15 अक्टूबर को देशभक्त प्रेस अल्मोड़ा से बदरीदत्त पाण्डे के संपादन में राष्ट्रवादी विचारधारा के पत्र 'शक्ति' का प्रकाशन।
हरगोविन्द पन्त, मोहनसिंह मेहता, हरिकृष्ण पन्त अन्य सहयोगी।

1919 - बैरिस्टर मुकन्दीलाल एवं अनुसूया प्रसाद बहुगुणा के प्रयत्नों से गढ़वाल में कांग्रेस की स्थापना।

1919 - दिसम्बर में कुमाऊं परिषद के कोटद्वार सम्मेलन में कुमाऊं गढ़वाल के 500 लोगों ने हिस्सा लिया।

1920 - ब्रिटिश गढ़वाल के नगरीय क्षेत्रों से कुली बेगार समाप्त।

1920 - देहरादून में पहला राजनीतिक सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में जवाहरलाल नेहरू एवं लाला लाजपतराय के अलावा कई प्रमुख लोगों की भागीदारी रही। सम्मेलन में भाग लेने के लिए चमोली एवं पौड़ी गढ़वाल के दूर दराज के इलाकों के अलावा नजीबाबाद, मुरादाबाद, सहारनपुर जौनसार बाबर से लोग पहुंचे।

1921 - 12 जनवरी को अनुसूयाप्रसाद बहुगुणा के नेतृत्व में बेगार और बर्दायश के विरोध में दशज्यूला पट्टी में 72 गांवों से आए युवकों ने जनपदचमोली के ककोड़ाखाल में गढ़वाल के डिप्टी कमिश्नर पी.मैसन के सम्मुख उनके शिविर में पहुंचाई जाने वाली रसद दूध, दही, घी आदि सभी सामग्रियों को मार्ग में ही रोक दिया गया। बेगारियों द्वारा अमले के प्रयोग के लिए निर्मित छप्परों को उखाड़कर उनमें आग लगा दी गई।

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कब क्या हुआ ?

1921- 13 जनवरी को मकर संक्रान्ति के दिन बेगार प्रथा के विरोध में किए गए आह्वान पर बागेश्वर में बदरीदत्त पाण्डे के नेतृत्व में त्रस्त जनता ने कुली बेगार के रजिस्टरों को सरयू में बहाया।

1921 - इलाहाबाद से शिक्षा प्राप्त कर पिथौरागढ़ लौटे प्रयागदत्त पंत व उनसे प्रेरित नवयुवक कृष्णानन्द उप्रेती के साथ मिलकर पिथौरागढ़ के ग्राम हुडे़ती में कांग्रेस कार्यालय के माध्यम से गांधीवादी विचार धारा का प्रचार-प्रसार किया।

1921 - हर्षदेव ओली द्वारा कालीकुमाऊं के खेतीखान में कांग्रेस कार्यालय की स्थापना।

1922 - 'क्षत्रिय वीर' पाक्षिक समाचार पत्र का पौड़ी से प्रकाशन। प्रतापसिंह नेगी प्रथम संपादक।

1924 - दूरस्थ पिथौरागढ़ के पुराने चौक में कांग्रेसियों की सभा में दो लोगों जमन सिंह वल्दिया एवं लक्ष्मण सिंह महर ने गांधी टोपी पहनकर कांग्रेस की सदस्यता ली।

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कब क्या हुआ ?

1924 - रजवारों के अत्याचार के विरोध में पिथौरागढ़ क्षेत्र के नेताओं प्रयागदत्त पंत एवं कृष्णानन्द उप्रेती के आग्रह पर बड़े नेताओं हरगोविन्द पन्त, बद्रीदत्त पाण्डे, गोविन्द बल्लभ पन्त द्वारा अस्कोट में आकर जनजागरण।

1928 - साइमन कमीशन के विरोध में 22 अक्टूबर को बद्रीदत्त पाण्डे, प्रयागदत्त पंत व इनके सहयोगियों द्वारा कालिंका गंगोलीहाट मेले में जनसभा में बड़ी उपस्थिति।

1929- 16 जून से 2 जुलाई तक गांधी जी का कुमाऊं भ्रमण। ताड़ीखेत प्रेम विद्यालय के वार्षिकोत्सव में भाषण। 12 दिनों तक अनाशक्ति आश्रम कौसानी में प्रवास। यात्रा के दौरान जवाहरलाल नेहरू, आचार्य कृपलानी, मीरा बहन, कस्तूरबा गांधी भी मौजूद रहीं।

1929- 16 अक्टूबर को गांधी जी का देहरादून आगमन। बैरिस्टर दर्शनलाल द्वारा दी गई 5 बीघा जमीन पर श्र(ानन्द अनाथ आश्रम की आधारशिला रखी। परेड ग्राउन्ड में सभा सम्बोधित। 6 हजार रु.की थैली भेंट। अन्य संगठनांे द्वारा भी लगभग 20 हजार की राशि दी गई।

1930- क्रान्तिकारी भवानीसिंह रावत के आग्रह पर चन्द्रशेखर आजाद हथियार प्रशिक्षण हेतु दुगड्डा के नाथोपुर ग्राम आए।

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कब क्या हुआ ?

1930- कण्डोलिया, पौड़ी में डिप्टी कमिश्नर ईबटसन का घेराव। 18 लोग गिरफ्तार कर जेल भेजे गए।

1930- 23 अपै्रल को चन्द्रसिंह गढ़वाली के नेतृत्व में पेशावर में सेना में बगावत।

1930- अपै्रल 23 को अल्मोड़ा में महिला सम्मेलन। गोविन्द बल्लभ पन्त के द्वारा महिलाओं की भागीदारी का प्रण लिया।

1930- 7 मई को गांधीजी की गिरफ्तारी पर नैनीताल में माल रोड़ पर विराट प्रदर्शन, गाड़ी पड़ाव में जनसभा व विदेशी वस्त्रों की होली जलाई।

1930- 25 मई को नैनीताल में नमक सत्याग्रह की घोषणा के सिलसिले में गोविन्द बल्लभ पन्त की गिरफ्तारी।

1930 - अल्मोड़ा नगर पालिका भवन पर धारा 144 के बावजूद तिरंगा फहराने की कोशिश करते पुलिस के हमले में विक्टर मोहन जोशी व शान्तिलाल घायल। मोहन जोशी की रीढ़ में आई चोट के कारण वे एकदम ठीक न हो सके। 1940 में कष्ट झेलते हुए मृत्य

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कब क्या हुआ ?

1930- 30 मई को रियासत टिहरी में वन कानूनों का विरोध करने आई जनता पर तिलाड़ी में गोलीबारी। कई लोगों की मौत।

1930- अगस्त में अल्मोड़ा के सल्ट में आन्दोलन दबाने के लिए सरकारी मुलाजिमों का अत्याचार। खुमाड़ में चार नौजवान गोली का शिकार।

1930 - अक्टूबर में दुगड्डा में दलितो(ार सम्मेलन। डोला पालकी के प्रश्न पर विचार विमर्श।

1930 - नमक सत्याग्रह पर नमक कानून तोड़ने को लेकर अनेक लोगांे गिरफ्तारी।

1931 - ब्रिटिश गढ़वाल में अनुसूया प्रसाद बहुगुणा सर्वप्रथम छपाई मशीन लाए एवं पौड़ी से 'स्वर्ण भूमि' एवं 'उत्तर भारत' नामक समाचार-पत्रों का प्रकाशन किया।

1931 - महिला आन्दोलनकारियों की सक्रियता। हल्द्वानी में विदेशी वस्त्रों की दुकानों पर धरना। आन्दोलन में भाग लेने के कारण कुन्ती देवीवर्मा, मंगला देवी, जीवन्ती देवी सहित आदि अनेक महिला आन्दोलनकारी गिरफ्तार।

1931 - यमकेश्वर में नरदेवशास्त्री की अध्यक्षता में विशाल राजनीति सम्मेलन।

1931 - 21 मई को नैनीताल में गांधी जी व पुरुषोत्तम दास टण्डन की उपस्थिति में राजनीतिक सम्मेलन।

1932 - नरदेवशास्त्री को आन्दोलन में भाग लेने के कारण देहरादून से जिला बदर।

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कब क्या हुआ ?

1932 - नेहरू जी व गोविन्दबल्लभ पन्त देहरादून जेल भेजे गए।

1932 - सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान संयुक्त प्रान्त के लाट मैलकम हेली को 7 सितम्बर को पौड़ी की अमन सभा द्वारा सम्मानित करने को बुलाया गया, जिसमें इनमें सरकारपरस्त रायबहादुर, रायसाहबान, वकील, ठेकेदार, थोकदार व सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। सम्मान पत्र पढ़ने के बाद अचानक जयानन्द भारती द्वारा इसमें तिरंगा फहराते हुए हैली गो बैक के नारे लगाए। उनको तुरन्त गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके लिए उनको 1 साल की जेल हुई।

1932 - महिला नेत्री चन्द्रावती लखनपाल को धारा 144 का उल्लंघन करने व जनता को भड़कानेके आरोप में 1 साल की जेल

1934-35 - नेहरु जी को कलकत्ता में मजिस्ट्रेट ने धारा 124-ए, आई.पी.सी. के 2 साल की सजा दी। उनका यहां 28 अक्टूबर 1934 को जेल में प्रवेश हुआ और 3 सितम्बर, 1935 को रिहाहुए। जबकि खान अब्दुल गफ्फारखान भी इसमें दिसम्बर 1934 से अगस्त 1936 तक बन्द रहे।

1936 - नवम्बर में दुगड्डा में राजनैतिक सम्मेलन, मुख्य अतिथि जवाहरलाल नेहरू थे।