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What Changes Have Occured In Our Culture? - क्या बदलाव आया है हमारी संस्कृति मे?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, December 05, 2007, 01:10:18 PM

पंकज सिंह महर

Quote from: हेम पन्त on December 05, 2007, 03:03:15 PM
हमारी भाषा में भी काफी बदलाव आ रहे हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि गढवाली-कुमाऊनी बोली का प्रचलन आम लोगों के बीच कम होता जा रहा है. इसके साथ ही हिन्दी अंग्रेजी के शब्दों का बोली में समावेश हुआ है और कुछ पुराने शब्द अब प्रयोग से हट गये हैं....
बिल्कुल सही, हेम दा.....
अभिवादन का तरीका भी बदल रहा है, पहले उम्र या रिश्ते के अनुसार अभिवादन किया जाता था, पैलाग  का उत्तर ठाकुर लोग पैलाग से कहते थे और पंडित लोग पैलाग का उत्तर आशीर्वाद हो महाराज कह कर देते थे, लेकिन आज तो लोग सीधे मुह ही बात नहीं करते हैं........अभिवादन के बाद लोग पूछते थे, "नान्तिन भल छनी? ठुल च्योलो कां छू? चेली की कुशल-वाद की छः" आदि फिर "धिनाली-पानी कि छू" उसके बाद गांव की आदली-कुशली पूछी जाती थी, लेकिन अब सब खत्म हो गया.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हमारी संस्कृति मे एक अचानक बदलाव यह आया है कि लोग एक दिवशीय शादी को महत्व दे रहे है.

In gone days, marriages used to be conduced mostly in two days.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Biradari. (Fratinity) has badly affected in our society now-a-days. People can be seen drunked any fuction and nobody wants to help anyone.

Rajen

माना कि परिवर्तन कुदरत का नियम है किन्तु जिस तेजी से हमारी संस्कॄति में बदलाव आ रहा है वह वास्तव में बिस्मित कर देने वाला है।  एक वर्ष के अन्तराल पर जब गांव जाता हूं तो देखता हूं कि वहां न केवल बच्चों व नवयुवकों के बल्कि बडे-बूढों के आचार बिचार व ब्यवहार में भी काफ़ी बरिवर्तन आचुका है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Rajen JI,

The changes are really drastic. It really gives us pain when a lot of old cutlural values are disappearing.



Quote from: Rajen on December 17, 2007, 11:06:13 AM
माना कि परिवर्तन कुदरत का नियम है किन्तु जिस तेजी से हमारी संस्कॄति में बदलाव आ रहा है वह वास्तव में बिस्मित कर देने वाला है।  एक वर्ष के अन्तराल पर जब गांव जाता हूं तो देखता हूं कि वहां न केवल बच्चों व नवयुवकों के बल्कि बडे-बूढों के आचार बिचार व ब्यवहार में भी काफ़ी बरिवर्तन आचुका है।

Risky Pathak

बहुत दुःख का विषय है  कि थोड़े से समय के अंतराल मे हमारी संस्कृति मे बहुत बदलाव आ गया है|
आज बाहर गया हर व्यक्ति अपने को गाँव के लोगो से कुछ ऊपर समझने लगा है| वो ये भूल गया है कि जो रक्त उसके अन्दर है     
वो उसको उसी गाँव कि मिट्टी ने दिया है|
आदर व भाई चारा नाम कि कोई चीज़ नही रह गयी है| पहले वर्ष मे १ बार अपने इष्ट-देवता को पूजने कि जो विधि थी वो भी अब गायब सी हो गयी है|
गाँव अब सूना सूना सा हो गया है| अभिवादन का तरीका महर जी ने जैसे बताया अब वो ना के बराबर है| यज्ञो-पवीत (जनेयु ) संस्कार अब लोग करते ही नही है| या फ़िर औपचारिकता हेतु  विवाह से कुछ समय पहले करते है और विवाह के बाद उतार कर रख देते है|
खाने के बारे मे जैसा मेहता जी ने बताया, पहले रिसया होती थी.... १ वस्त्र मे पहनकर खाने का  प्रचलन होता था| वो गायब हो गया है|


Risky Pathak


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Cultural dress has almost disappeared now. Hardly any women wear Ghaghara and other cultural ornaments.