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Haridutt Bhatt Shailesh Passed Away

Started by कमल, September 19, 2011, 07:49:03 AM

कमल

Veteran and Noted Writer Dr. Haridutt Bhatt Shailesh passed away today at Dehradun.

More about him.

http://www.apnauttarakhand.com/haridutt-bhatt-shailesh/

He was the father of famous Singer Sapna Awasthi.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरापहाड़ कम्युनिटी की तरफ से श्रधांजली!

डॉ हरी भट्ट " शैलेश" जी आत्मा को भगवान् शांति प्रदान करे. 

Very Sad news.. May God departed soul rest in peace!

This is a great loss but the rule of nature that everybody has to leave universe one day!. The contribution of Dr Hari Bhatt "Shailesh" will always be remembered.

One of the books written by Dr Hari Bhatt Shailesh ji was

Haridutt Bhatt 'Shailesh'- "Garhwali bhasha aur uska sahitya", Hindi Samiti, UP, 1976.


पंकज सिंह महर

बहुत ही दुःखद समाचार है, शैलेश जी के निधन से उत्तराखण्ड साहित्य जगत को भारी नुकसान हुआ है। परमपिता परमेश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति भी प्रदान करे।

मेरा पहाड़ परिवार की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

विनोद सिंह गढ़िया

बहुमुखी प्रतिभा के धनी 'शैलेश जी' आज हमारे बीच नहीं रहे  ।भगवान शैलेश जी की आत्मा को शान्ति दे।

Devbhoomi,Uttarakhand

शिक्षाविद्, भाषा विशेषज्ञ एवं मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. हरिदत्त भट्ट 'शैलेश' नहीं रहे। वे 81 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से शिक्षा, साहित्य, संस्कृति एवं रंगकर्म के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को हरिद्वार में खड़खड़ी घाट पर उनका अंतिम संस्कार होगा। डॉ. शैलेश अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं।

साहित्यकार डॉ. शैलेश लंबे समय से गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थे और दिल्ली के वेदांता हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। तीन दिन पूर्व तबीयत बिगड़ने पर उन्हें हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट भर्ती कराया गया, जहां सोमवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन की खबर से साहित्य, संस्कृति व कला जगत में स्तब्धता छा गई। मुंबई से उनकी अभिनेत्री बेटी हिमानी शिवपुरी भी दून पहुंच गई। मंगलवार को हरिद्वार में उनका अंतिम संस्कार होगा।

15 जून 1930 को उत्तराखंड के ग्राम भट्टवाड़ी में जन्मे श्री भट्ट वर्तमान में दून स्कूल में अपनी बहू मालविका भट्ट एवं बेटे हिमांशु भट्ट के पास रह रहे थे। दून स्कूल में हाउस मास्टर और हेड ऑफ द हिंदी लैंग्वेज रहते हुए 32 वर्ष तक अध्यापन करने वाले डॉ. शैलेश पांच वर्ष एसएन कॉलेज में भी प्रिंसिपल रहे।

हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और गढ़वाली पर समान रूप से कमांड रखने वाले डॉ. शैलेश की 400 से अधिक कहानियां, उपन्यास, एकांकी, संस्मरण, यात्रावृत्त और लेख हिंदी-अंग्रेजी की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए।

Devbhoomi,Uttarakhand

पंचतत्व में विलीन हुए डा. शैलेश
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प्रख्यात साहित्यकार, भाषा विशेषज्ञ और शिक्षाविद्् डा. हरिदत्त भट्ट 'शैलेश' का पार्थिव शरीर मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गया। हरिद्वार के खड़खड़ी शमशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। सैकड़ों नम आंखों ने दिवंगत शैलेश को अश्रुपूर्ण अंतिम विदाई दी। साहित्य, कला, शिक्षा, संस्कृति एवं रंगमंच से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

लंबे समय से गुर्दे की बीमारी से पीड़ित चल रहे डा. शैलेश का हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट में सोमवार को निधन हो गया था। मंगलवार को उनके पार्थिव शव को अंतिम संस्कार के लिए हरिद्वार लाया गया और यहां खड़खड़ी शमशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। दिवंगत डा. शैलेश के पुत्र हिमांशु भट्ट ने पिता को मुखाग्नि दी।

मुखाग्नि देते वक्त हिमांशु भट्ट फूट-फूट रो पडे़। इस मौके पर साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा एवं रंगमंच से जुडे़ सैकड़ों लोग मौजूद थे। बेहद भावुक अंदाज में दिवंगत डा. शैलेश की पुत्री हिमानी ने पिता की विरासत को अक्षुण्ण रखकर आगे बढ़ाने की बात कही।

उन्होंने कहा कि दिवंगत पिता ने भाषा, साहित्य और शिक्षा जगत में उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके व्यक्तित्व और कृतत्व से बहुत सीखने को मिलता है। उनके पढ़ाए गए छात्र आज भी भाषा, साहित्य, शिक्षा क्षेत्र में समर्पित भाव के साथ कार्य कर रहे हैं।

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