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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरा खाली पन्ना

आपने भावों को बाँधना नही चाहता
बीच राह पर उन्हें भी मै छोड़ना नही चाहता

मोड़ आये तो मोड़ लूंगा उनको भी
सुंदर स्वप्न देख रहा हूँ उस कल्पना को तोड़ नही सकता

सोचा था खुद सो कर मै तुम्हे जगाऊंगा
इस बार खाली पन्ने मेरे तुझ पर मै कुछ लिख जाऊंगा

कितनी सांसे बर्बाद की तुझे आबाद करने में मैंने
ये गजल ये कविता ये छंद मेरे मै तुम बिन कैसे रहा पाऊंगा

कुछा ना दे सका ये पुष्प और ना कुछ मीला तुझको मुझसे
काँटों पर खिलाकर भी हंसा हैं तू पुष्प तुझको मै ना भूल पाऊंगा

दर्द कसक तड़प भी देखी इन आँखों में भीगे भीगे
पर मेरा वादा तुझसे ये दोस्त मेरे तेरा चेहरा हंसता छोड़ जाऊंगा

याद रखने के काबिल मै बिलकुल ही नही हूँ
पर कभी ना कभी तुम्हरे होंटों पर आकर गुनगुनाऊंगा

दुआ है मेरी तू सलामत रहे जैसे सलामत है ये गगन
मग्न रहे फूलों सा सदैव खिलता हंसता रहे मेरा ये चमन

लेखनी की अविरल बहती है धारा जो कोई लिख जायेगा
जो सोते सोते देखा था मैंने स्वप्न तब जाकर पूरा हो जायेगा

आपने भावों को बाँधना नही चाहता
बीच राह पर उन्हें भी मै छोड़ना नही चाहता

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
लालू और उसके आलू

लालू और उसके आलू
कुछ भी नही रहे अब चालु

चारा घोटाला में सुन बालू
जेल चले गये हैं आज लालू

लालटेन आज उदास है
डंडा किसी कोने मी पडा आज है

राजा था कभी बिहार का
अहम में गया वो राज-पाटा है

आस थी दोस्तों के साथ की
ना समझ वो राजनीती की बिसात थी

भ्रष्ट तंत्र का जो भी हो वो स्वामी
एक दिन खुद की लुटिया खुद डुबोनी

लालू और उसके आलू
कुछ भी नही रहे अब चालु

बालकृष्ण डी. ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरी दीदी

वो सबसे अलग
वो सबसे जुदा
उसके रूप में
मुझे दिखता है खुदा

बस एक राह
उसका एक लक्ष्य
कैसे करूँ उन
जरूरतमंदों को मदद

उसकी वो छवी
बड़ी अति न्यारी
आती है अनवार
उसमे मेरे माँ की

जन्म दिन है
दोस्तों आज मेरी दीदी का
बधाई  दुओं का मौक
तुम भी ना छोड़ो

वो सबसे अलग
वो सबसे जुदा
उसके रूप में
मुझे दिखता है खुदा

दीदी जी आपको आपके जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई

बालकृष्ण डी. ध्यानी — with राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' and 49 others

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

याद ऐगे नी 
फिर वा बीती बाट

आच छा वा काली रात 
पाड़ अब बी रुना मेरु साथ छा

बस जाणी छे दिल्ली का बाट वा
मुजफरनगर मा घटी  काली रात

२ अक्टूबर अहिंसा मा हिंसा कू  वार
म्यारों वों को कया बिगाडू छा

अब बी ना मिली गढ़ थे न्याय
वों पितरों कु प्राण अतृप्त बी आच छा

चल खुटा वै दिल्ली बाटा
अपरों  बाण  तू उठाले आवाज आच

वो माशल पेट्नी रहाली
हमरु लड़ा लगे रालों   


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

२ अक्टूबर को मुजफरनगर काण्ड-९४ के दोषियों को सजा न दिये जाने के विरोध में उत्तराखण्डी संसद की चैखट जंतर मंतर पर विरोध स्वरूप काला दिवस — with Geeta Chandola and 48 others.Photo: चलो दिल्ली याद ऐगे नी फिर वा बीती बाट आच छा वा काली रात पाड़ अब बी रुना मेरु साथ छा बस जाणी छे दिल्ली का बाट वा मुजफरनगर मा घटी  काली रात २ अक्टूबर अहिंसा मा हिंसा कू  वार म्यारों वों को कया बिगाडू छा अब बी ना मिली गढ़ थे न्याय वों पितरों कु प्राण अतृप्त बी आच छा चल खुटा वै दिल्ली बाटा अपरों  बाण  तू उठाले आवाज आच वो माशल पेट्नी रहाली हमरु लड़ा लगे रालों एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित २ अक्टूबर को मुजफरनगर काण्ड-९४ के दोषियों को सजा न दिये जाने के विरोध में उत्तराखण्डी संसद की चैखट जंतर मंतर पर विरोध स्वरूप काला दिवस

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

माया मा कटी जालो

कोरस : रिखणीखाल कू बाजारा जाणी रे माया 
पिछणे पिछणे आणू  रै यू माया कू गेडा .......२
ईं उकाली बाटा धीरे धीरे जा रे माया
धीरे धीरे जा

नौनो :संसारो को बाटों उकाली अणी उंदारी
समणु हाथ माया की मिलले
माया की मिलले
 
हो अ
नौनी:संसारो को बाटों उकाली अणी उंदारी
समणु हाथ माया की मिलले

नौनो :सिस्काणु हाल ने मौल्यारी अणी हेरली
दिन ये कटे जाला साथ माया की मिलले

नौनो :बाकि छे ह्युंदो बाकि छे बरखा
बस हमरु बोलणु बाकि छा

कोरस : माछा मरणा बाकि छा जी
जालों फेंकी ईं माया कू  गदनियुं मा .......२
ईं जालों मा धीरे धीरे जा रे माया
धीरे धीरे जा

नौनी:पिरती का बाटों  पीड़ा अणी खैरी 
समणु कटी लिंयुन्ला हाथ माया की मिलले
माया की मिलले

हो अ
नौनो :पिरती का बाटों  पीड़ा अणी खैरी 
समणु कटी लिंयुन्ला हाथ माया की मिलले
माया की मिलले

नौनी:सिस्काणु हाल बंजा पुंगडी अणी भूकी पोटी
दिन ये कटे जाला साथ माया की मिलले

नौनी:बाकि छे अपरा बाकि छे पराया
बस उन्थे साथ लाणा बाकि च 

कोरस : रिखणीखाल कू बाजारा जाणी रे माया 
पिछणे पिछणे आणू  रै यू माया कू गेडा .......२
ईं उकाली बाटा धीरे धीरे जा रे माया
धीरे धीरे जा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षितPhoto: माया मा कटी जालो कोरस : रिखणीखाल कू बाजारा जाणी रे माया पिछणे पिछणे आणू  रै यू माया कू गेडा .......२ ईं उकाली बाटा धीरे धीरे जा रे माया धीरे धीरे जा नौनो :संसारो को बाटों उकाली अणी उंदारी समणु हाथ माया की मिलले माया की मिलले हो अ नौनी:संसारो को बाटों उकाली अणी उंदारी समणु हाथ माया की मिलले नौनो :सिस्काणु हाल ने मौल्यारी अणी हेरली दिन ये कटे जाला साथ माया की मिलले नौनो :बाकि छे ह्युंदो बाकि छे बरखा बस हमरु बोलणु बाकि छा कोरस : माछा मरणा बाकि छा जी जालों फेंकी ईं माया कू  गदनियुं मा .......२ ईं जालों मा धीरे धीरे जा रे माया धीरे धीरे जा नौनी:पिरती का बाटों  पीड़ा अणी खैरी समणु कटी लिंयुन्ला हाथ माया की मिलले माया की मिलले हो अ नौनो :पिरती का बाटों  पीड़ा अणी खैरी समणु कटी लिंयुन्ला हाथ माया की मिलले माया की मिलले नौनी:सिस्काणु हाल बंजा पुंगडी अणी भूकी पोटी दिन ये कटे जाला साथ माया की मिलले नौनी:बाकि छे अपरा बाकि छे पराया बस उन्थे साथ लाणा बाकि च कोरस : रिखणीखाल कू बाजारा जाणी रे माया पिछणे पिछणे आणू  रै यू माया कू गेडा .......२ ईं उकाली बाटा धीरे धीरे जा रे माया धीरे धीरे जा एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित6Like ·  · Share

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फिर वे बाट हम

मी थे तू बथे ... .दे
क्ख्क नीच खैरी
मी थे तू बथे ... .दे
क्ख्क नीच पीड़ा
तू वे बाटो अब मी थे तू हिटे दे ......२
क्ख्क नीच खैरी
मी थे तू बथे ... .दे

यु जिन्दगी मा
छेंच उदासी
यु जिन्दगी मा
रुनु च भागी
खुशी क्ख्क हसदी
वख मी थे हसदे ते बाटो मी थे अब तू हिटे दे ......२
क्ख्क नीच खैरी
मी थे तू बथे ... .दे

छोड़ीकी आयूँ
वो तेरु छुटपन
छोड़ीकी आयूँ
वो तेरु बालपन
चल गेल्याँ जोंला फिर व्खी आच हम
वख नीच पीड़ा वख नीच खैरी
वख नी रुंदी आंखी ईं उदासी
चल गेल्या जोलां फिर वे बाट हम ...५



एक उत्तराखंडी

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दूर तुत्यो

दूर तुत्यो तारा आकाशा मा
सरगा मा रेघ पौड़ी गे
तुत्यो जिकोड़ी माया मा
आंखी मा पाणि चौलिगे
दूर तुत्यो तारा आकाशा मा
सरगा मा रेघ पौड़ी गे ............

भैर भि णि रायुं मि
णि रयुं भितर भि मि
कै कि मि छौल पौड़ी गे
य्खुलि कै मि रौड़ी गे
दूर तुत्यो तारा आकाशा मा
सरगा मा रेघ पौड़ी गे ............

जीयु मेरु जीयु आच भारि
कैल दि मि ये बिमारि
अजार यूं छु यूँ ल्ग्यू पूराणू
कैल णि समझ मेरु रुवाणू
दूर तुत्यो तारा आकाशा मा
सरगा मा रेघ पौड़ी गे ............

णि कै थे शोर सुणाई
णि ऐल कै थे बोल्याई
य्क्ली य्क्ली बौल्या बणी
ऐल जोगी रूप धैर्याली
दूर तुत्यो तारा आकाशा मा
सरगा मा रेघ पौड़ी गे ............

दूर तुत्यो तारा आकाशा मा
सरगा मा रेघ पौड़ी गे
तुत्यो जिकोड़ी माया मा
आंखी मा पाणि चौलिगे
दूर तुत्यो तारा आकाशा मा
सरगा मा रेघ पौड़ी गे ............

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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तू आना बस एक कविता बनके

किसी ना किसी बहाने
तू आयेगी ये मौत मेरे पास तू चलके
ये मौत मेरी
आना तू बस पास मेरे तो एक कविता बनके

आरजू है बस मेरी इतनी सी 
जब भी आना तू पास मेरे चलके
ये मौत मेरी
आना तू बस पास मेरे तो एक कविता बनके

ना डर के आना तू
ना तू डरा के आना पास मेरे
ये मौत मेरी
आना तू बस पास मेरे तो एक कविता बनके

देख दर्द ना हो तुझको जरा सा भी
ना हो दर्द हो मुझको जरा सा भी
ये मौत मेरी
आना तू बस पास मेरे तो एक कविता बनके

उन चंद पंक्तियों में मै  जी लूंगा
उन चंद पंक्तियों बाद तू मुझे ले जाना तू साथ तेरे
ये मौत मेरी
आना तू बस पास मेरे तो एक कविता बनके

एक उत्तराखंडी

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चलो दिल्ली

याद ऐगे नी 
फिर वा बीती बाट

आच छा वा काली रात 
पाड़ अब बी रुना मेरु साथ छा

बस जाणी छे दिल्ली का बाट वा
मुजफरनगर मा घटी  काली रात

२ अक्टूबर अहिंसा मा हिंसा कू  वार
म्यारों वों को कया बिगाडू छा

अब बी ना मिली गढ़ थे न्याय
वों पितरों कु प्राण अतृप्त बी आच छा

चल खुटा वै दिल्ली बाटा
अपरों  बाण  तू उठाले आवाज आच

वो माशल पेट्नी रहाली
हमरु लड़ा लगे रालों   


एक उत्तराखंडी

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२ अक्टूबर को मुजफरनगर काण्ड-९४ के दोषियों को सजा न दिये जाने के विरोध में उत्तराखण्डी संसद की चैखट जंतर मंतर पर विरोध स्वरूप काला दिवसPhoto: चलो दिल्ली याद ऐगे नी फिर वा बीती बाट आच छा वा काली रात पाड़ अब बी रुना मेरु साथ छा बस जाणी छे दिल्ली का बाट वा मुजफरनगर मा घटी  काली रात २ अक्टूबर अहिंसा मा हिंसा कू  वार म्यारों वों को कया बिगाडू छा अब बी ना मिली गढ़ थे न्याय वों पितरों कु प्राण अतृप्त बी आच छा चल खुटा वै दिल्ली बाटा अपरों  बाण  तू उठाले आवाज आच वो माशल पेट्नी रहाली हमरु लड़ा लगे रालों एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित २ अक्टूबर को मुजफरनगर काण्ड-९४ के दोषियों को सजा न दिये जाने के विरोध में उत्तराखण्डी संसद की चैखट जंतर मंतर पर विरोध स्वरूप काला दिवस5Like ·  · Share

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बुरंस खिल्याँ

बुरंस खिल्याँ नौ डंडा पारा
मेरु पहाड़....अ कुमो गढ़वाल
मेरु पहाड़....अ कुमो गढ़वाल

लाल रंग बिख्र्याँ गौं-गोठ्यार
ग्लुड़ी कू उल्यार ऊ वार पार
मेरु पहाड़....अ कुमो गढ़वाल

बेटी-ब्वारी मेर धन्य मेरु पहाड़
हरेल मौल्यार फुल्याँ दैली-दार
मेरु पहाड़....अ कुमो गढ़वाल

निशाणी मेरी वा ऊ मेरु भागा
भगवाती इणी बती जगोंदी रै
मेरु पहाड़....अ कुमो गढ़वाल

बुरंस खिल्याँ नौ डंडा पारा
मेरु पहाड़....अ कुमो गढ़वाल
मेरु पहाड़....अ कुमो गढ़वाल

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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