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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नवरात्र पर, आइए जानें कब और कैसे शुरू करें विधिवत पूजन

शक्ति की देवी मां दुर्गा का नौ दिनों तक चलने वाला पूजन शनिवार, पांच अक्टूबर से शुरू हो रहा। नवरात्रि के इस पूजन के लिए कौन सा समय शुभ है, किस समय में घट स्थापना करना सही है और पूजा विधि क्या हो, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

घट स्थापना- घट स्थापना का समय 05 अक्टूबर 2013, शनिवार को अश्रि्वन शुक्ल प्रतिपदा के दिन प्रात:काल 08 बजकर 05 मिनट से 09 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात दोपहर 12 बजकर 03 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक के मध्य में भी घट स्थापना की जा सकती है।

1.   पहला नवरात्र- प्रथमा तिथि, 5 अक्टूबर 2013, दिन शनिवार, 3:35 तक।

2.   दूसरा नवरात्र- द्वितीया तिथि, 6 अक्टूबर 2013 दिन रविवार, 3:17 तक।

3.   तीसरा नवरात्र- तृतीया तिथि, 7 अक्टूबर 2013, दिन सोमवार, 1:58 तक।

4.   चौथा नवरात्र- चतुर्थी तिथि, 8 अक्टूबर 2013 , मंगलवार, 12:05 तक।

5.   पांचवां नवरात्र- पंचमी तिथि, 9 अक्टूबर 2013, बुधवार, 10:01 तक।

6.    छठा नवरात्र- षष्ठी तिथि, 10 अक्टूबर 2013, गुरुवार, 07:51 तक।

7.    सातवां नवरात्र- सप्तमी तिथि, 11 अक्टूबर 2013, शुक्रवार, 05:39 तक।

8.   आठवां नवरात्र, अष्टमी तिथि, 12 अक्टूबर 2013, शनिवार, 03:27 तक।

9.   नौवां नवरात्र- नवमी तिथि, 13 अक्टूबर 2013, रविवार, 01:18 तक।

10. दशहरा- दशमी तिथि, 13 अक्टूबर 2013, रविवार, 01:18 से आरंभ और 14 अक्टूबर को प्रात:काल 11:16 तक

देवी की अराधना इंस मंत्र से करें-

देवी आराधना मंत्र -

. शैलपुत्री- वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रा‌र्द्वकृतशेखराम्। वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥

2. ब्रह्मचारिणी- दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

3. चंद्रघंटा- पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

4. कूष्माण्डा- सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे।

5. स्कंदमाता- सिंहसनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥

6. कात्यायनी- चज्जद्रहासो"वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

7. कालरात्रि- एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

8. महागौरी- श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदया॥

9. सिद्धिदा˜"ी- आप"िसद्धगन्धर्वयक्षाघरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानीposted toउत्तराखंडी लेखन प्रतिभाएं !
देख उसे इस बार हल्के में ना लेना

झटक लगेगा
अभी सर घूमेगा
अपना तो अपना
पराया छलेगा

सोच लेना उसे परख लेना उसे
देख उसे इस बार हल्के में ना लेना

घोषणाओं का पुलिंदा
वो पास बुनेगा
माया बिछाकर
तुझको फिर ठगेगा

सोच लेना उसे परख लेना उसे
देख उसे इस बार हल्के में ना लेना

सफेद धारी है
विषधर काला नाग है वो
पंच वर्ष में वो दिखता
प्रेम से एक ही बार है वो

सोच लेना उसे परख लेना उसे
देख उसे इस बार हल्के में ना लेना

नन्हे पंख तेर
तू कब तक उड़ेगा
थक कर कभी ना कभी
उस डाल तू बैठेगा

सोच लेना उसे परख लेना उसे
देख उसे इस बार हल्के में ना लेना

झटक लगेगा
अभी सर घूमेगा
अपना तो अपना
पराया छलेगा

बालकृष्ण डी. ध्यानी ...............शुभ प्रभात दोस्तों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
मुकदमा

मुकदमों में उलझी है
जवानी आज की
प्यासा भी मांगे अगर
कंहा मिलता है उसे पानी
मुकदमों में उलझी है
आज ये जवानी................

चला जा रहा है वो
अपने को तराजू सा तौलता
रिश्तों में अपनों के बीच
वो बस तनावों को खोदता
मुकदमों में उलझी है
आज ये जवानी................

आंख में पट्टी है
इनकी अब कंही नही पटती है
अभियोग गहरा सा गया है
अपना अपने से वो गैर हो गया है
मुकदमों में उलझी है
आज ये जवानी................

विधि-निर्णय की रस्सी
बस इस गले में झूलती मिलेगी
निर्णय जो भी निकला हो वंहा
बस वो अपनों को तोड़ती निकलेगी
मुकदमों में उलझी है
आज ये जवानी................

इससे ना तूने कुछ पाया है
ना तो इससे तू कुछ पायेगा
रिश्ता मीठा मीठा सा
बस वो खारा सा रह जायेगा
मुकदमों में उलझी है
आज ये जवानी................

बालकृष्ण डी. ध्यानी ..............................शुभ प्रभात दोस्तों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
देख उसे इस बार हल्के में ना लेना

झटक लगेगा
अभी सर घूमेगा
अपना तो अपना
पराया छलेगा

सोच लेना उसे परख लेना उसे
देख उसे इस बार हल्के में ना लेना

घोषणाओं का पुलिंदा
वो पास बुनेगा
माया बिछाकर
तुझको फिर ठगेगा

सोच लेना उसे परख लेना उसे
देख उसे इस बार हल्के में ना लेना

सफेद धारी है
विषधर काला नाग है वो
पंच वर्ष में वो दिखता
प्रेम से एक ही बार है वो

सोच लेना उसे परख लेना उसे
देख उसे इस बार हल्के में ना लेना

नन्हे पंख तेर
तू कब तक उड़ेगा
थक कर कभी ना कभी
उस डाल तू बैठेगा

सोच लेना उसे परख लेना उसे
देख उसे इस बार हल्के में ना लेना

झटक लगेगा
अभी सर घूमेगा
अपना तो अपना
पराया छलेगा

बालकृष्ण डी. ध्यानी ...............शुभ प्रभात दोस्तों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऊँ चप्लों का जोड़
ऊँ चप्लों का जोड़

टूटा फुट्या
चप्लों का जोड़
घिसरड़ी ....२ की
बाबाजी गै ....कै छोरा
ऊ टूटा फुट्या
चप्लों का जोड़

रचक छ्च्क
ऊँ का ऊ शोर
पल्या डंड तल्या डंड
हुणा छिन भाव विभोर
ऊ टूटा फुट्या
चप्लों का जोड़

उकालो फंदी
कबी उन्दरू दौड़ी कि
पुंगडी मा कबी हौलो जोती की
लेणु च धेसाण डाला तौली जी
ऊ टूटा फुट्या
चप्लों का जोड़

गौं मा कबीत
कबी बजार मा
आंदा जंद अब बी ऊ
मेरा ख्याला मा
ऊ टूटा फुट्या
चप्लों का जोड़

मेरा बाबाजी
ऊ मेरा मुल्क
क्ख्क छोंटीयुं होलो अब
ऊँ का ऊ चप्लों का जोड़
ऊ टूटा फुट्या
चप्लों का जोड़

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मी तेरु सहर छोड़ी कू
मी तेरु सहर छोड़ी कू

मी तेरु सहर छोड़ी कू.... अ
पाड़ पाड़ अ अ जाणू छों

परायूँ थे छोड़ी कि
अब अपरूं कू पास पास जाणू छों
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

जीयु नी लगी मेरु यख
सजा मील पाये अपरी नजर मा
धोखा मील खाये यख अब ये धोखा छोड़ी कि जाणू छों मी
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

क्वी नी यख कैका क्वी
टाक्का यख अब बस बोल्दा छुंईं
ई झूठी छुंईं छोड़ी कि मी पाड़ जाणू छों मी
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

परै अखैर परै ही हुंदा
बात ई समझी मिल यख
जिकोड़ी मारी गेड अब व्ख खोली जाणू छों मी
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

मी तेरु सहर छोड़ी कू.... अ
पाड़ पाड़ अ अ जाणू छों

परायूँ थे छोड़ी कि
अब अपरूं कू पास पास जाणू छों
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी

मी तेरु सहर छोड़ी कू
मी तेरु सहर छोड़ी कू

मी तेरु सहर छोड़ी कू.... अ
पाड़ पाड़ अ अ जाणू छों

परायूँ थे छोड़ी कि
अब अपरूं कू पास पास जाणू छों
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

जीयु नी लगी मेरु यख
सजा मील पाये अपरी नजर मा
धोखा मील खाये यख अब ये धोखा छोड़ी कि जाणू छों मी
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

क्वी नी यख कैका क्वी
टाक्का यख अब बस बोल्दा छुंईं
ई झूठी छुंईं छोड़ी कि मी पाड़ जाणू छों मी
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

परै अखैर परै ही हुंदा
बात ई समझी मिल यख
जिकोड़ी मारी गेड अब व्ख खोली जाणू छों मी
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

मी तेरु सहर छोड़ी कू.... अ
पाड़ पाड़ अ अ जाणू छों

परायूँ थे छोड़ी कि
अब अपरूं कू पास पास जाणू छों
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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मी तेरु सहर छोड़ी कू

मी तेरु सहर छोड़ी कू.... अ
पाड़ पाड़ अ अ जाणू छों

परायूँ थे छोड़ी कि
अब अपरूं कू पास पास जाणू छों
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

जीयु नी लगी मेरु यख
सजा मील पाये अपरी नजर मा
धोखा मील खाये यख अब ये धोखा छोड़ी कि जाणू छों मी
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

क्वी नी यख कैका क्वी
टाक्का यख अब बस बोल्दा छुंईं
ई झूठी छुंईं छोड़ी कि मी पाड़ जाणू छों मी
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

परै अखैर परै ही हुंदा
बात ई समझी मिल यख
जिकोड़ी मारी गेड अब व्ख खोली जाणू छों मी
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

मी तेरु सहर छोड़ी कू.... अ
पाड़ पाड़ अ अ जाणू छों

परायूँ थे छोड़ी कि
अब अपरूं कू पास पास जाणू छों
मी तेरु सहर छोड़ी कू.............

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हीट खुटा

हीट खुटा
चल जोंला
हे भुला
कया खोंलों
हीट खुटा.............

ज्या मिळाली
रुखी सुखी
खोलों भेजी
ना जी दुकी
हीट खुटा.............

पीड़ा खैरी
समझ कि फेरी
दूनिया बड़ी गैरी
सुण दीदा
हीट खुटा.............

अपरा परै जाणी ले तू
सैंण छोड़ी कि
उकालू बाटों बौडी ले तू
चल दीदा
हीट खुटा.............

हरु को हैरल छे तू
मौल्यार ना छुंईं बका
गढ़ की ज्वाणी छे तू
परदेश मा ना बोगाग .....चल दीदा
हीट खुटा.............

हीट खुटा
चल जोंला
हे भुला
कया खोंलों
हीट खुटा.............

ज्या मिळाली
रुखी सुखी
खोलों भेजी
ना जी दुकी
हीट खुटा.............

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक

एक था
अकेला था
कोई और था दूर था
वो भी अकेला था

प्रति थी
जो छपी जा रही थी
इकाई से वो
दहाई में ढली जा रही थी

थोड़ा सा
वो अविवाहित था
इकलौता था वो अब भी
पर वो भी पृथक था

बिलकुल वो
अमिश्रित सा था
विलक्षण है ये सब मगर
पर अनोखा अपूर्व सा है बस वो एक

बालकृष्ण डी. ध्यानी..................शुभ प्रभात दोस्तों