• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
मन भजले राम

मन तू
कब तक छलेगा
मन तू
कब तू समझेगा
मन भजले राम राम सीता राम

जिंदगी एक धोखा है
राम नाम का बस भरोसा है
ले उठाले गागर मेरे श्याम की
चल अब उस रहा उस पावन धाम की
मन भजले राम राम सीता राम

मन तू
एक रहा आनी है
मन तू
एक रहा जानी है
मन भजले राम राम सीता राम

नन्हे पंख हैं तेरे
और कितना तू उड़ेगा
तनिक ले छाया मेरे प्रभु राम की
तब मिलेगा बसेरा तुझे उसके गाँव में
मन भजले राम राम सीता राम

मन तू
अब तू कहेगा
मन तू
कब तू कहेगा
मन भजले राम राम सीता राम

जब आयेगी ये शाम
प्राण पखेरू करने वाले होंगे प्रस्थान
फिर जपकर क्या पायेगा
व्यर्थ था तेरा ये जीवन जायेगा
मन भजले राम राम सीता राम

मन तू
कब तक छलेगा
मन तू
कब तू समझेगा
मन भजले राम राम सीता राम


बालकृष्ण डी. ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फिर बाटा बिरडीगे तू
फिर बाटा बिरडीगे तू

हे मेरी माया कू थैलू
भोर भोरिक निस्डू रै तू
बाँझ जीकोड़ी कू रै गेल्या
टाक्कों दगडी अल्जी गै तू

गढ़ हरलू छोड़ीकी हे जीयु
नोटों हरलू मा हर्ची गै तू
बोल्या मेरा गढ़देश कू
फिर बाटा बिरडीगे तू

दिन सरेना रात गैन
तेरा गैना अबी भी णी गढ़ेण
सुप्नीयु का वहैगैणी तेरा छेलू
भूलीगै तू अब अपरू पितरू

कंण दिशा भुला व्हगै तेरु
कंडा ये देशा का खुठी घुसैनी
देबता भी अब रूठी णी तै कू
फिर बाटा बिरडीगे तू

हे मेरी माया कू थैलू
भोर भोरिक निस्डू रै तू
बाँझ जीकोड़ी कू रै गेल्या
टाक्कों दगडी अल्जी गै तू

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अपने पहाड़ों में
अपने पहाड़ों में

मै
अपने पहाड़ों में
खोया ही हुआ हूँ
मै
अपने


दूर हूँ उससे ...२ आज मै
बैठ हूँ उसकी याद में
अकेले अकेले
रोया ही रहा हूँ
मै
अपने पहाड़ों में...
खोया ही हुआ हूँ
मै
अपने

एक कसक...२ एक उदासी
कुरेदती है वो बारी बारी
दिल छलनी ये करनी ...२
मेरी ही है
मै
अपने पहाड़ों में
खोया ही हुआ हूँ
मै
अपने

यूँ ना पूछो..२ मुझको तुम
क्यों सताता है मुझको गम
बस मै और ये आंखें नम
मेरी ही है
मै
अपने पहाड़ों में
खोया ही हुआ हूँ
मै
अपने

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

करवा चौथ

ना जल होगा ना अन्न होगा
सजना बस आज तेरा संग होगा

खिलता चाँद में चेहरा तेरा
आँखों से छलनी में तेरा दर्शन होगा

प्रेम की ये मधुमास में प्रीतम
कृष्ण पक्ष चतुर्थी में संगम होगा

मेरा तू मन मेरा तू जीवन
आस्था और साँसों का घर्षण होगा

तपेगा साथ अपना सात जन्मों का
हर जीवन में तू मेरे संग होगा

करवा चौथ की देहली में सजना
चांदनी सिंदूर सुहाग से मिलन होगा

ना जल होगा ना अन्न होगा
सजना बस आज तेरा संग होगा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

लकृष्ण डी ध्यानी October 21करवा चौथ

ना जल होगा ना अन्न होगा
सजना बस आज तेरा संग होगा

खिलता चाँद में चेहरा तेरा
आँखों से छलनी में तेरा दर्शन होगा

प्रेम की ये मधुमास में प्रीतम
कृष्ण पक्ष चतुर्थी में संगम होगा

मेरा तू मन मेरा तू जीवन
आस्था और साँसों का घर्षण होगा

तपेगा साथ अपना सात जन्मों का
हर जीवन में तू मेरे संग होगा

करवा चौथ  की देहली में सजना
चांदनी सिंदूर सुहाग से मिलन होगा

ना जल होगा ना अन्न होगा
सजना बस आज तेरा संग होगा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित 1Like ·  · Share

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
तेरी भक्ती रहे

बहके ना
ये मेरे कदम
तेरी भक्ती रहे
बस मेरे संग

चलों उस पथ मै
जिस पथ राम चलाये
देखों उस जग को
जो राम दिखाये

बहके ना
ये मेरे कदम
तेरी भक्ती रहे
बस मेरे संग

ना मिथ्या जागे
अहंकार कोसों दूर भागे
आजा भागी
सेवा करने मेरे राम की

बहके ना
ये मेरे कदम
तेरी भक्ती रहे
बस मेरे संग

बालकृष्ण डी. ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुन बंदे

जीवन एक बहता सागर
भरले तू बस एक प्रेम की गागर
आयेंगे प्रभु मन के द्वार तेरे
तू अपने मुख के किवाड़ तो खोल दे
बस राम नाम तू एक बार बोल दे
जिव्हा में ये अमृत घोल जायेगा
तेरा ये जीवन संवार जायेगा
जीवन एक बहता सागर
भरले तू बस एक प्रेम की गागर

बहते बहते बह जायेगा
ये रस्ता ये भी कट जायेगा
कल कल की धुन में राम बसे
ये पल वो पल हर पल राम चलें
छु ले तू इस धड़कन की तार को
जोडले सांसों की झंकार राम से
अब इनसे ही तेरा कम बनेगा
जीवन एक बहता सागर
भरले तू बस एक प्रेम की गागर

सुरतहै ना मूरत है उसकी
कंही धुप है कंही छांव है उसकी
कण कण में बसे हैं मेरे स्वामी
हर जन में दिखेंगे वो अन्तर्यामी
अब अंनंत के मार्ग अपने तू खोल दे
इस पथ तो एक पग तो धर दे
बाकी काम बस मेरे राम का
जीवन एक बहता सागर
भरले तू बस एक प्रेम की गागर

जीवन एक बहता सागर
भरले तू बस एक प्रेम की गागर
आयेंगे प्रभु मन के द्वार तेरे
तू अपने मुख के किवाड़ तो खोल दे
बस राम नाम तू एक बार बोल दे
जिव्हा में ये अमृत घोल जायेगा
तेरा ये जीवन संवार जायेगा
जीवन एक बहता सागर
भरले तू बस एक प्रेम की गागर

बालकृष्ण डी. ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
वो सवेरे की चाय और माँ

वो सवेरे की चाय की प्याली
याद आती माँ मुझे अब भी मेरी प्यारी
बड़े प्रेम से उठाती थी
माथा मेरा चूम कर कहती थी
मेरा राजा बेटा अब उठेगा
दूध की चाय वो पियेगा
वो सवेरे की चाय ...................

उठा जा सवेरा हो गया
दूर सूर्य देबता भी जाग गया है
घोसलों से पंछी उड़ गये
और मेरा बेटा राम
अब तक सोया है
उठा जा अब तो ना साथ माँ को
चाय प्याली संग क्या नश्ता करेगा
वो सवेरे की चाय ...................

अब वो सवेरा कंहा
माँ मुझसे खो गयी कँहा
पर अब भी वो आ जाती है
वो सपना बनकर
मीठी सी लोरी गाने
सूरज के संग जगाने मुझे
फिर दूध और चाय की प्याली पिलाने
आज मन खोजता है उसे
माँ कंहा हो मेरी और मेरी वो सवेरे की चाय

बालकृष्ण डी. ध्यानी ......दोस्तो शुभ प्रभात जी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तिल नि समझी मेरी माया

तिल नि समझी मेरी माया
मेरी माया मी दगड रेगे अपुरी
जै जै बाटों मा अट्गी छे तू....२
मी वै बाटूँ कु कंडू थे सराया
तिल नि समझी मेरी माया ....

कैल नी समझी यख सच्ची माया
सबुल सच्ची माया थे बिसराया
सबेरे भातिक ब्योखंन तक ...२
मील और्री मेरु जीयूं ने तेरु ही बाटू हेरा
तिल नि समझी मेरी माया ....

मन और्री मी अब तेथे ही अब देखन छों
तू कंन खुश राली दिन राती सोचण छों
तेरु बाटों मा क्वी पीड़ा ना ऐई...२
मी आपरू बाटों दूर भतिक मोड़ण छों
तिल नि समझी मेरी माया ....

तेरा आँखों मा आंसूं नि देख सकदु मी
तेरी बस मिल हसदी मुखडी दिखी छा
खुश छे तू वै घर छुचि माया मेरी तू ...२
मी थे ऐमा बी मिली ख़ुशी चा
तिल नि समझी मेरी माया ....

तिल नि समझी मेरी माया
मेरी माया मी दगड रेगे अपुरी
जै जै बाटों मा अट्गी छे तू....२
मी वै बाटूँ कु कंडू थे सराया
तिल नि समझी मेरी माया ....

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरे डंडियों कंडीयों कू

मेरे डंडियों कंडीयों कू मुल्का
अब हरचण लगे
गदिनियों जनी मेरा मुल्की
अब बोग्ण लगे
मेरे डंडियों कंडीयों कू मुल्का ...............

ऊ दीणों कि छुई नी राई
रैंदा छा कबी एक मैका बाण ऊ
भै बंद कबि मिल्की दगड़ी कि
वीं दगड़ी आच क्ख्क हार्ची ग्याई
मेरे डंडियों कंडीयों कू मुल्का ...............

बीरड़्या आच ऊ बाटा दिंख्या
साम सुम हेरदा आँख्यां दिंख्या
पसरयूँ वहालू मरघट जनी
छोड़ी कि गयु वहलू अप्रू कुई
मेरे डंडियों कंडीयों कू मुल्का ...............

मील नी ईनी चुप चाप नी रैन
मिल बोलण मिल इनी बोल्दी रैन
ऐ सब देखिकी जीयु मेरु दुःखणू छे
मिल य्क्ली नी रुन तुम थे भी रूलेण
मेरे डंडियों कंडीयों कू मुल्का ...............

मेरे डंडियों कंडीयों कू मुल्का
अब हरचण लगे
गदिनियों जनी मेरा मुल्की
अब बोग्ण लगे
मेरे डंडियों कंडीयों कू मुल्का ...............

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित