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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
वो मेरा प्यार
शुभ प्रभात दोस्तों
*******************************
उस के प्यार की आहट
आती जाती रही इस दिल के चौखट
पर मेरे प्यार की रौनक से
उस दिल की कली ना खिल सकी
**********************************

बालकृष्ण डी. ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सात समोदर

सात समोदर पार ग्याँ बाबाजी सात समोदर
हम थै यकुली छोड़ ग्याँ बाबाजी सात समोदर
सात समोदर पार ग्याँ बाबाजी सात समोदर.........

जाज मा बैठी की वै पार ग्याँ बाबजी सात समोदर
इजा थै छोड़ीकी कै धाम ग्याँ बाबजी सात समोदर
सात समोदर पार ग्याँ बाबाजी सात समोदर.........

दादा दादी हम सात भै भैन बाबजी सात समोदर
इक बी आंखी नी रुलै आप थै बाबजी सात समोदर
सात समोदर पार ग्याँ बाबाजी सात समोदर.........

गौं गोठ्यार चौक दार बाबाजी सात समोदर
कूड़ा मा सन्घुला नी मारू आप थै तालू बाबाजी सात समोदर
सात समोदर पार ग्याँ बाबाजी सात समोदर.........

रामी बौ राणी गाथा परचित छ पाड़े बाबाजी सात समोदर
वीं नी भी द्याई आप थै शिक्षा बाबाजी सात समोदर
सात समोदर पार ग्याँ बाबाजी सात समोदर.........

उकालू उन्दारू का छन बांटा बाबाजी सात समोदर
बार तियोहार स्बुका बाबाजी घर रहंद बाबाजी सात समोदर
सात समोदर पार ग्याँ बाबाजी सात समोदर.........

कैल बोली मीथै मेरा घार आयां बाबाजी सात समोदर
ये कंडों की खुशी मा चैत की ब्यार बाबाजी सात समोदर
सात समोदर पार ग्याँ बाबाजी सात समोदर.........

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ बोलो राम

दो सांसों की डोर है राम
इस सुबह की भोर है राम

राम नाम में इतना सुख है
जप निरंतर बस राम ही राम

आँखों के बोल है राम
अधरों के छोर है राम

खो जा इतना इसके अंदर
इनके अंदर ही मिलेंगे राम

दो सांसों की डोर है राम
इस सुबह की भोर है राम
 
बालकृष्ण डी. ध्यानीबोलो राम दो सांसों की डोर है राम इस सुबह की भोर है राम राम नाम में इतना सुख है जप निरंतर बस राम ही राम आँखों के बोल है राम अधरों के छोर है राम खो जा इतना इसके अंदर इनके अंदर ही मिलेंगे राम दो सांसों की डोर है राम इस सुबह की भोर है राम बालकृष्ण डी. ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी

मी लिक्द गयुं

मी लिक्द गयुं
वा लिखाणी छ
मेरा सप्नियुं मा
वा रोज आंदी जांदी छ
मी लिक्द गयुं
वा लिखाणी छ.....................

माया का ढाई आखर
वो पड़ाणी छ
निंदी मेरी मैसे
वा लुची जाणी छ
मी लिक्द गयुं
वा लिखाणी छ.....................

वों आंखी मा
कंणी माया दडी
ईं आंखी वों दगड
आँखी मिलाणी छ
मी लिक्द गयुं
वा लिखाणी छ.....................

पिरती का गेड
वा मारी जाणी छ
वा अग्ने अग्ने
मीथै पिछणे ...२ बोलाणी छ
मी लिक्द गयुं
वा लिखाणी छ.....................

मी लिक्द गयुं
वा लिखाणी छ
मेरा सप्नियुं मा
वा रोज आंदी जांदी छ
मी लिक्द गयुं
वा लिखाणी छ.....................

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
डौंडियाखेड़ा और हम

आज फिर वो नाच रहा है
इंसान से ज्याद सोना बोल रहा

कोई धरातल खोद रहा
बस अपने अपने सपनों में तोल रहा

चक्कर गोल का घूम ऐसे
घनचक्कर सिर फोड़ रहा है

एक एक पीछे एक रेला पड़ा है
सोना मेले में अकेला खड़ा है

कंही समोसे कंही जलेबी
दुनिया ना इतनी सीधी ना अकेली

बना लेती है किसी को भी ये सहेली
ये तो बस अनसुलझी एक पहेली

डौंडियाखेड़ा और हम
कल खड़े थे जंहा वंहा ही हम

युक्ती एक लगाऊं
सोने का ही अपना दिल बनाऊं

डौंडियाखेड़ा ही नही
सारे विश्व को ही सोने सा बनाऊं .....................३

बालकृष्ण डी, ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी

मोहब्बत को दूंगा दुहाई

फिलहाल मोहब्बत की उम्मीद नही है
कोई आये ना आये शाम गमगीन नही है

कोई जहाँ सपना अपना वो चुनता होगा
वो किसी दूजे छोर पर बसेरा करता होगा

मुश्किल है मगर पूरा कर लूंगा
इस मोहब्बत के बिना मै भी जी लूंगा

किसी के ना होने पर भी ये साँसे तो चलेगीं
फिर भी ये सुबह और शाम तो आती जाती रहेगी

देखो वो अचानक अंधेरा ऊजाला हो गया
दिल कहता है मेरा ये वक्त भी गुजर जायेगा

देखो चलता पानी अब संग संग मेरे
उसने भी शायद मेरे पग की आहट सुन लिया हो जैसे

कौन हंस रहा है रात के सन्नाटे मे अकेले
शायद उसका भी मोहब्बत से दूर किनार होगा

अब तो मुझे भी किसी का इन्तज़ार नही है,
अच्छा है खुदा मुझको मोहब्बत बुखार नही है

ऐ ज़िन्दगी तेरे नाम संग खुदा अब बीत जायेगी
ग़र ये खेल होगा दोबारा फिर दूंगा मै इस मोहब्बत को दुहाई

जानता हूँ अकेला ठीक ठाक हूँ
मोहब्बत नही तो क्या मै उदास हूँ ?

बालकृष्ण डी. ध्यानी।............... शुभ प्रभात दोस्तों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गाजुलु की आँखा

गाजुलु की बड़ा बड़ा आँखा
जीयु बसी गै ईं न ... जिकोड़ी मा

कैमा बुलों अं....... कैल बिगंण
ईं आंखी आंखी कि भास मा

गाजुलु की बड़ा बड़ा आँखा
जीयु बसी गै ईं न ... जिकोड़ी मा

हेर्दी रै...गे देहली मा बैठी
आंखी चूल आंसूं की रेघा मा

गाजुलु की बड़ा बड़ा आँखा
जीयु बसी गै ईं न ... जिकोड़ी मा

माया लगी माया का बाणा
स्वामी बैठ्याँ परदेशा मा

गाजुलु की बड़ा बड़ा आँखा
जीयु बसी गै ईं न ... जिकोड़ी मा

दिन बीति दिन बित जाला
खुदेणु छों मी ईं आसा मा

गाजुलु की बड़ा बड़ा आँखा
जीयु बसी गै ईं न ... जिकोड़ी मा

एक उत्तराखंडी

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छुंईं मा

छुंईं मा दाड़ी
कया वीं की छुंईं चा
छुंईं मा गिज्यूं
अब मेरु पहाड़ा चा
ये छुंईं मा दाड़ी ...............

एकली बी छे वा
छुंईं वीं का पास चा
कै मा ल्गाणी व्हाली वा
वीं छुंईं कि हाक चा

छुंईं मा दाड़ी
कया वीं की छुंईं चा
छुंईं मा गिज्यूं
अब मेरु पहाड़ा चा
ये छुंईं मा दाड़ी ...............

जख बी रै वा
छुंईं हिटे वीं का साथ चा
सींण उठा दा बैठा दा
वीं का ही रैबार चा

छुंईं मा दाड़ी
कया वीं की छुंईं चा
छुंईं मा गिज्यूं
अब मेरु पहाड़ा चा
ये छुंईं मा दाड़ी ...............

ईनी च्ल्दी रालो
वीं कि छुंईं कू गोंगाट चा
भली लगदी वा मीथे
जबैर छुंईं ल्गंदी मेरु साथ चा

छुंईं मा दाड़ी
कया वीं की छुंईं चा
छुंईं मा गिज्यूं
अब मेरु पहाड़ा चा
ये छुंईं मा दाड़ी ...............


एक उत्तराखंडी

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मोहब्बत को दूंगा दुहाई

फिलहाल मोहब्बत की उम्मीद नही है
कोई आये ना आये शाम गमगीन नही है

कोई जहाँ सपना अपना वो चुनता होगा
वो किसी दूजे छोर पर बसेरा करता होगा

मुश्किल है मगर पूरा कर लूंगा
इस मोहब्बत के बिना मै भी जी लूंगा

किसी के ना होने पर भी ये साँसे तो चलेगीं
फिर भी ये सुबह और शाम तो आती जाती रहेगी

देखो वो अचानक अंधेरा ऊजाला हो गया
दिल कहता है मेरा ये वक्त भी गुजर जायेगा

देखो चलता पानी अब संग संग मेरे
उसने भी शायद मेरे पग की आहट सुन लिया हो जैसे

कौन हंस रहा है रात के सन्नाटे मे अकेले
शायद उसका भी मोहब्बत से दूर किनार होगा

अब तो मुझे भी किसी का इन्तज़ार नही है,
अच्छा है खुदा मुझको मोहब्बत बुखार नही है

ऐ ज़िन्दगी तेरे नाम संग खुदा अब बीत जायेगी
ग़र ये खेल होगा दोबारा फिर दूंगा मै इस मोहब्बत को दुहाई

जानता हूँ अकेला ठीक ठाक हूँ
मोहब्बत नही तो क्या मै उदास हूँ ?

बालकृष्ण डी. ध्यानी।............... शुभ प्रभात दोस्तों

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बालकृष्ण डी ध्यानी

कुछ भी मिले दोस्तों जी लूंगा ......................शुभ प्रभात

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अगर मिले यादें तो दिल से लगाकर रखूंगा
अगर मिले तन्हाई तो तस्वीर सजाकर रखूंगा
पर रखूँगा दोनों को एक साथ ही मै ध्यानी
एक एक कर उन में किसी एक के साथ जी लूंगा
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बालकृष्ण डी. ध्यानी