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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
October 28
मै एक शराबी हूँ

मै एक शराबी हूँ
बस ये ही खराबी है
बस ये ही खराबी है
मै एक शराबी हूँ ......

रहन सहन नवाबी है
मै बिलकुल किताबी हूँ
बस ये ही खराबी है
मै एक शराबी हूँ ......

मय मुझे प्यारी है
मैखाना से दुनियादारी है
सुबह शाम की बीमारी
रातों और मय से ही यारी है
मै एक शराबी हूँ ......

लड़खड़ाते रहे हरदम
अपने ही ये दो कदम
चले हर वक्त वंही पर वो
रिंदों ने जंहा महफील सजायी है
मै एक शराबी हूँ ......

दो घोंट तब भी मारों मै
फिर निकल जाये मेरा दम
निकले जब जनाजा मेरा
तब भी तू साथ रहे वो सनम
मै एक शराबी हूँ ......

मै एक शराबी हूँ
बस ये ही खराबी है
बस ये ही खराबी है
मै एक शराबी हूँ ......

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
October 27
आस्था प्रेम

दो हाथों को
वो जोड़ कर
आँखों से वो
कुछ बोल कर
मन को मन से
वो प्रतीति कर गया

दोषसिद्धि था
ये तन मेरा
धारणा किया था मन मेरा
पर कुछ मेरे लिये वो छोड़ गया
वो अपने आप में रहा कर
मग्न था वो उस राह में

आस्था और उसके
उस विशवास में
विश्व ने रची श्रद्धा
इस दिल की बाहार में
प्रत्यय करता रहा
ईमान से वो कह गया

मत अपना वो दे गया
विश्वास की राह में
निष्ठा को वो ले साथ साथ
भरोसे को वो एक सहारा दे गया
वो आस्था और मेरी भक्ति में
प्रेम का रंग भर गया

दो हाथों को
वो जोड़ कर
आँखों से वो
कुछ बोल कर
मन को मन से
वो प्रतीति कर गया

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
October 26
बस देख उदास तुझ को

बस देख उदास तुझ को
मै उदास हो गया
होना था ना कुछ ओर मुझ को
बस तुझ से स्नेह हो गया
बस देख उदास तुझ को
मै उदास हो गया

चुप थी तुम
चाप था मै भी
पर कैसे ये इकरार हो गया
ना होना था मुझ को
बस तुझ से स्नेह हो गया
बस देख उदास तुझ को
मै उदास हो गया

ना नजरें मिली
ना आंखें चार चार हुयी
ना सांसें बेकरार थी
पर वो फिर भी अधिकार कर गयी
ये क्या हो गया मुझ को
बस तुझ से स्नेह हो गया
बस देख उदास तुझ को
मै उदास हो गया

कल्पना ना थी
ना कोई ऐसा विचार आया
बिना लिये हाथों में हाथ
ना कोई ऐसा ख्याल आया
पर होना था हो गया मुझ को
बस तुझ से स्नेह हो गया
बस देख उदास तुझ को
मै उदास हो गया

ना कोई गीत गूंजा
ना किसी ने मल्हार गया
ना चली कोई हवा भी
बरखा ने भी ना भिगाया
हलचल होनी थी मै हिल गया
बस तुझ से स्नेह हो गया
बस देख उदास तुझ को
मै उदास हो गया

बस देख उदास तुझ को
मै उदास हो गया
होना था ना कुछ ओर मुझ को
बस तुझ से स्नेह हो गया
बस देख उदास तुझ को
मै उदास हो गया
एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
October 26
कुछ मकसद है ?

हर एक पल यंहा भाग रहा है
एक मकसद के लिये
चीरती फाड़ती गिरती पड़ती
इस दौड़ती रोती जिंदगी के लिये
हर एक पल यंहा भाग रहा है

किसी को भी कुछ पता नही है
कोई है वो बस उसे खोजे जा रहा है
कोई मौज में है अभी तक अपने में
मस्त है वो मस्ती में जी रहा पी रहा है
हर एक पल यंहा भाग रहा है

मक से सद के उस मिलन के लिये
सब अनजान से चेहरे लिये सब खड़े हैं
सब इस धरा के मोह विलास में
आत्म के मोक्ष मकसद को बिसरा रहा है
हर एक पल यंहा भाग रहा है

पार ना होगा तू वो सागर
जिस में माया की पतवार लगी है
सब के सब मछली से जाल फंसा है
अपनी नैया खुद डुबो रहा है
हर एक पल यंहा भाग रहा है

हर एक पल यंहा भाग रहा है
एक मकसद के लिये
चीरती फाड़ती गिरती पड़ती
इस दौड़ती रोती जिंदगी के लिये
हर एक पल यंहा भाग रहा है

बालकृष्ण डी. ध्यानी ......................शुभ प्रभात दोस्तों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
October 25
देखो
मेरा उत्तराखंड

देखो पहाड़ों को
कितने शांत कितने निश्चल
अटल है वो अपनी धरा से
देखो
मेरा उत्तराखंड

दूर बहते झरनों संग
कल कल बहते स्वर संग
खींचती वो एक रेखा वसुंधरा पर
देखो
मेरा उत्तराखंड

रंग बिखेरती आयी वो छटा
नया रूप नया नित लेती वो घटा
भौंरों और कभी वो फूलों संग
देखो
मेरा उत्तराखंड

लिख दिया हो
किसी ने स्वर्ग इसे
देवों की नगरी है मेरी ये देवभूमि
देखो
मेरा उत्तराखंड

हर एक पटल पर यंहा
इन्द्रधनुष की छटा अंकित
हर मन हर जन को मोहित करता
देखो
मेरा उत्तराखंड

आ जाओ तुम भी कभी
विचरण करने ले अपना मन
मेरे इस अड़िग खंड में
देखो
मेरा उत्तराखंड

बालकृष्ण डी. ध्यानी ...... शुभ प्रभात दोस्तों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
तेरी तस्वीर देख कर

दिल से
ये शब्द उभर आये
तेरी तस्वीर देख कर
जब सामने आये तू
तो क्या होगा इसको
तुझको देख कर
दिल से
ये शब्द उभर आये

माना अभी तू बेजुबां है
पर इसमें भी तेरी जुबां है
बांते करती है वो मुझसे से अकेले में
ये ही तू तेरी वो अदा है
जब वो बात करेगी मुझसे सामने
तो क्या होगा इसको
दिल से
ये शब्द उभर आये

आईना है एक ये
कागज का बना हुआ
देखाता हूँ तुम को मै
खुद से यूँ जुडा हुआ
जब आईने तू निकल आयी
तू क्या होगा मुझको
दिल से
ये शब्द उभर आये

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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मै एक शराबी हूँ

मै एक शराबी हूँ
बस ये ही खराबी है
बस ये ही खराबी है
मै एक शराबी हूँ ......

रहन सहन नवाबी है
मै बिलकुल किताबी हूँ
बस ये ही खराबी है
मै एक शराबी हूँ ......

मय मुझे प्यारी है
मैखाना से दुनियादारी है
सुबह शाम की बीमारी
रातों और मय से ही यारी है
मै एक शराबी हूँ ......

लड़खड़ाते रहे हरदम
अपने ही ये दो कदम
चले हर वक्त वंही पर वो
रिंदों ने जंहा महफील सजायी है
मै एक शराबी हूँ ......

दो घोंट तब भी मारों मै
फिर निकल जाये मेरा दम
निकले जब जनाजा मेरा
तब भी तू साथ रहे वो सनम
मै एक शराबी हूँ ......

मै एक शराबी हूँ
बस ये ही खराबी है
बस ये ही खराबी है
मै एक शराबी हूँ ......

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालकृष्ण डी ध्यानी
बस बहते जाते है

बस बहते जाते है पल
वो कल कल ......२

वो कह जाते हैं
मै रह जाता हूँ
बहते बहते छोड़ जाते हैं
रह जाते छूटे पल
वो कल कल ......२

अब रोज कि बात है
वो अब भी साथ है
घटा था जो कुछ बँटा था
टूटा जो वो मेरे पास है
वो कल कल ......२

माना मैंने
कि मै काबिल ना था
पर गिला है मुझको
कि मै क्यों चुप रहा
वो कल कल ......२

अब भी वो
बहते रहते बीते पल
समंदर कि लहरों समान
मेरे ख्यालों में
वो कल कल ......२

बस बहते जाते है पल
वो कल कल ......२

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी

बरस रहा हूँ

बरस रहा हूँ
मै दुवाओं कि तरह
कभी फटाकों कि तरह
तू कभी आंसूं कि तरह
माँगा था सबने ख़ुशी
मिली किसी को हंस के
और किसी को मिली रो के
बरस रहा हूँ मै
मै झिलमिल कभी
कभी घुलमिल सी
सितारों कि तरह
तू कभी अंधियारे तरह
चम चम करके
या किसी कोने
में चुपचाप रहके
बरस रहा हूँ
बस बरस रहा हूँ

बालकृष्ण डी. ध्यानी
शुभ प्रभात और शुभ दीपावली दोस्तों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


रैगे समलौणया

रैगे समलौणया
तू इन आँखियों मा
रैगे तू रैगे तू रैगे तू

ऐई क्वी ना यख
बस जांद रैगे ऊ बिराणो मा
ऊ बिराणो मा तू
ऊ उंदारूं का बाटों मा तू

रैगे समलौणया
तू इन आँखियों मा
रैगे तू रैगे तू रैगे तू

हराले छोडिकि
मौल्यार दौड़ीकी
अटकेगी भागी गै तू
आपरो दगड मुख मोडिकी

रैगे समलौणया
तू इन आँखियों मा
रैगे तू रैगे तू रैगे तू

धार ईं गांगजी कु
आंसूं मा बगी गे तू
अल -पल छाला सुखेनी
बंजा अब करिगे तू

रैगे समलौणया
तू इन आँखियों मा
रैगे तू रैगे तू रैगे तू

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