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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ढोल सागर रै होलू
पर अब त
रूढ़ कु सुखु गदेरा सी हयु
दोषी कु
वू सब वू सब सैरु समाज
ज्यु ढोल तै पूजणा रैनि
अर ढोल कलाकारु करना
रैनि तिरस्कार
जौ तै चाणु छौ
प्यार सम्मान दुलार
वू तै दिणा रैना डडवार
ढोल आज भले पौच गिनि
स्टीफन फ्यौल का हात
पर जणगुर लुगू का हात
ह्वै गे गोल
जब रखीनि ऊँकी
अलमोल कला मोल
समझीनि तौल
इन्ना हाल ढोल सागर
कखन हौणु छौ
विथे सुखा गदेरा बनाण मा
सैरु समाज कु दोष ।.............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

लोग सोच्दा निछन,
माटु छ मनखि,
जथैं मिलि पैंसा,
वथैं हि दनकि......
गुजर बसर का खातिर,
खूब पैंसा कमावा,
पर भलु निछ अपणि,
बोलि भाषा बिसरि जावा.....
सदा यीं धरती मा,
हम नि रौला,
ज्युंदा ज्यु संस्कृति कू,
मान बढ़ौला.....
फर्ज छ हमारु,
विरासत तैं बढ़ावा,
नौना बाळौं तैं,
बतावा सिखावा.....
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
दिनांक 16.9.2016, रचना संख्या: 1020

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

घपरोळ परिवार तैं सादर समर्पित
खैलि दौं लठ्याळा तू,
थगोलि फर भात धरयुं,
क्या ह्वै यनु आज भुला,
मुक्क तेरु यनु करयुं.......
लाल दा न सतै तू,
बिष्ट जिन कुछ बोलि,
बबिन भुला यनु निछ,
भण्डारी जिन भेद नि खोलि....
(रचना संख्या 1018)
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
दिनांक 14.9.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुण ल्या बन्धु
मेरु नौ छः सिंधु
पदक त पक्कु वैगे
पर मैं स्वनू चैंदु ☺️☺️

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

त्वै बुड्या को नाक लम्बो ( परिहासदार, मजेदार , हिलोरेदार लोक नृत्य -गीत )
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इंटरनेट प्रस्तुति एवं व्याख्या - भीष्म कुकरेती
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त्वै बुड्या को नाक लम्बो
त्वैकु बुड्या मैं रैंदु नी।
रै जा अ रै जा अअ चूची रै जा अ
कुछ नाक छिलण पड़ली
तब्बी बुड्या त्वै मैं छोड़ू नी !!
त्वै बुड्या का फुल्यां जोंगा
त्वैकु बुड्या मैं रैंदु नी। रै जा अ रै जा अअ चूची रै जा अ
त्वै बुड्या जोंगा मुंडण पड़ला
तब्बी बुड्या त्वै मैं छोड़ू नी ! !
त्वै बुड्या को पेट बढ़यूं च
त्वैकु बुड्या मैं रैंदु नी। रै जा अ रै जा अअ चूची रै जा अ
कुछ पेट घटौण पड़लो
तब्बी बुड्या त्वै मैं छोड़ू नी !!
त्वै बुड्या की लम्बी दाड़ी
त्वैकु बुड्या मैं रैंदु नी। रै जा अ रै जा अअ चूची रै जा अ
कुछ दाड़ी कटण पड़ली
तब्बी बुड्या त्वै मैं छोड़ू नी ! !
त्वै बुड्या को लम्बो कोट
त्वैकु बुड्या मैं रैंदु नी।
बुड्या - रै जा अ रै जा उन्नी करलो
जन्नी तू चांदी रै
नायिका - कुछ कोट काटण पड़लो
तब्बी बुड्या त्वै मैं छोड़ू नी !!
तब्बी बुड्या को छोट्टू सुलार
त्वैकु बुड्या मैं रैंदु नी।
कुछ सुलार बढ़ौण पड़लो
तब्बी बुड्या त्वै मैं छोड़ू नी ! !
बुड्या - रै जा अ रै जा उन्नी करलो
जन्नी तू चांदी रै
नायिका त बुड्या ! त्वै मैं छोड़ू नी !!
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( आभार व गीत सन्दर्भ - डा शिवांनद नौटियाल , गढ़वाल के लोकनृत्य -गीत पृष्ठ 304 )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जू बोनु की यूँ बागयुं का बगदा गाड़ मा फाल मारी दयों
पर डौर लगणी ना कखि बीच मा हि डूबी जौं
ये त लगी जाला कै भी छाला पर मितै कु गाड़ तैरालु...
यूंकि भांडी कूंडी मा कथगा मवास्युं का रसोड़ा पाक पक्यान
युंका लत्ता कपड़ों मा कुजाणि कथगा दलूँ का टल्ला धरयांन
ये त रैइ जाला नांगी गात्युं मा भी पर मितै कु थीगुला पैरालु....
ये त लगी जाला कै भी छाला पर मितै कु गाड़ तैरालु...
सब दलूं का गोठ गोठ्यार मा युंका कील घैटयाँ छन
हर भोटरु की खोलि का देल्युं माँ खुट पसारी बैठयाँ छन
ये त खैई ल्याला मांगी ठगै की
मितै कु मांड पिलालु..
ये त लगी जाला कै भी छाला पर मितै कु गाड़ तैरालु...
Deepak Nautiyal

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गढ़वाली जोड़ा;
पत्नी - ए जी एथै सूणा दूँ , एक बात त बता !
पति - क्या ?
पत्नी - आदमी जब स्वर्गलोक जाँदू त मैन सूणि कि वख स्वर्ग मा वैतै अप्सरा मिलदि !
त औरत जब स्वर्ग जांदि , त वीँतै वख
क्या मिलदु ?
पति - बान्दर ।
पत्नी -

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हीरो बणी गए हम, भैजी की बरात में!
धूपि चश्मे पहने थे,हमने आधी रात में !
अक्षर काँठो कु कपाल पर, रेशमी रुमाल था !
अर ढोंढ़ों से तौळ तक, निकलदा सुलार था!!
बंडी नि छे बदन पर, कमीज़ थी कांध में!
नांग बणयां छाती से, एक पव्वा हाथ में !!
लीड कोचि कान में, म्यूजिक अंग्रेजी था !
देशी आत्मा के भैर, शरीर विदेशी था!!
अर पहाड़ी की पछाण से, शकल ऐसी झाड़ी थी!
कि तैल्या हुन्ठ बीच मुड़ी,माखु जैसी दाड़ी थी!!
बैंड वालू ने ,पंजाबी गीत क्या मिसा दिया !
संटुले जैसी धौण को, हमने भी हिला दिया !!
प्यार के कीटाणु जब, जिकुड़ी नोचने लगे!
डांस करते करते हम चांस खोजने लगे!!
भारी भीड़ में घुसे ,भीतर गोत्राचार में!
क्लीन बोर्ड हुवे हम, पैले-पैले प्यार में!!
अर,स्याली एक कुण से, हमें घूर रही थी !
दूध की भदोली में, हमें चूर रही थी!!
हाय ! हेलो ! बाय बाय, क्या कमाल हो गया !
भैजी की बरात में क्या धमाल हो गया!!
गर्ल फरेंड का रूप ऐसा, हमें सुहाया !
गिच्चु बटी घुंड तक, लालु हमने चुंवाया !!
कुचे-कुचे स्याली के ,बगल में खड़े हुए!
पुट्की में घपचट था, फिर भी तडतड़े हुए!!
धूपि चश्मा प्याट से मैं, चुळ चुळ हेरता !
हेरता तो हेरता, हरी भैजी क डैर था!!
रूप देखि स्यालि का, आँखि मेरी घैल थी!
पैले पैले प्यार की, क्या अखंड झैळ थी!
चाँद जैसे फेस पर, मीर्ग जैसी आँखि थी !
क्या पथ्ली कमर थी, क्या बारीक सांकी थी !!
नाँगणि धमेली से, छ:स डंक मारती!
कैड़ी सांकी कैरी की, दिल में आग बाळ दी!!
गोरी गोरी चोंठि पे, काला काला तिल था!
तिल नि था वो हमारा फुका हुआ दिल था!! (क्वील बण ग्या)
नौण की गुन्दकि थी वो, सान्दणे की गिन्दकि थी!
पूस जड्डों की रात मा भ्युन्लाकी की फिन्डकी थी!!
बाय गॉड, भाई साहब, क्या गज़ब की चीज़ थी!
क्या गज़ब का माल था, क्या गज़ब की पीस थी!!
क्यूट क्यूट स्यालि ने, मेरी जिकुड़ी छिन ली!
हमने दाड़ किट के, उसकी खुटी मिंड दी!!
उस हसीन योवना का, मूड कुछ बितड गया!
जैसे डालु औडल से, जड़ फ़ति उखड़ गया!!
झटम जटा बिखेर के, आ गयी वो आन पर !
चड़म चढ़े चक्षु उसके सात आसमान पर!!
करड करड दन्त,परदंत को बजाती थी!
आँखी ऐसी चढ़ गयी की, द्यबली लुकाती थी!
क्रोध से ललाट पर, भाव भिन भिना उठे!
कराल काल कर करी कै, नोज़ फ़िन फिना उठे******

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मुक फरकै ....
***
काम नि आया बागी संहार !
सिवा/ धौंण कटंणा / भ्यालुंद लमडाणा !
गरूड़ कांणौं / स्याल कुक्करू पुटगा भ्वरंणा !
सिरैंया खाडू / पुज्यां सिरफला कुछ काम नि आया!
भाज त गीं डंवरि वीर ढुंगीयू मूड़ि बतुला बालिक !
सुनिंदी रैं द्यबता नमान / कौंपंणा रैं धुपंणा खुंणि
रयड़ि की रयड़ि पोड़ गीं / बोग गीं
अर रयूं सयूं पाड़ फुके ग्या ऐंसु
हणक न फणक कैफर ....
!!!
सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नरेन्द्र सिंह नेगी का नया ताजा तरीन राजनितिक व्यंग अब तुमी बथा !
भै बन्दू !
मै खुणि नेता ना , जन सेवक बोला
सेवक छौं मि तुमारी सेवा को ब्रत लियु छ मेरो
मिन सदानी तुमारो दुख दरद सुणी समझी
तुम भले ही मैथे आज चुनो टैम देखणा होला
पर मिल तुमारो दगड़ो कभि नि छोड़ी
खैरि तुमुन खै होली आंसू मिन बगैनी
ठोकर तुम पर लागि होली त पीड़ा मै फर हवे
कांडा तुम पर चुभिनी अर जिकुडु मेरो घुपे
बिना पाणी तीसा तुम रयाँ
पर कंठ मेरा सुखनी
बिना बिजलि अँधेरा मा तुम छा
अर जब्का जब्कि मैकू हवे
राशन पाणी टरकिणि तुमू रै त
भूको कबलाट मैकू हवे
बिना डाक्टर बिना द्वै दारू अस्पतालूमा
मोर्दा तुमरा मोरिनी अर अबाजू मेरो राई
अब तुमी बथा !
तुमारी सेवा मा क्या कमि कसर राखि मिन.............नरेन्द्र सिंह नेगी