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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तिमल पक्यां छन डाल्युं मा
ककडी लगीं च लगुल्युं मा
लुंण पिस्युं च मुर्या कु तुमकुन
नौ नवांणी कुन चाखी जा
लम्यंड गुदडी तुमडी लगीं च
सवदी भुज्जी की रस्यांण अयीं
द्योर गगडाणु सिंगान च जमणु
दिल्ली की मसरुम भूली जा
सर बर अयीं फल्यंडु की
आम क छन यख गरक लग्यां
कुई नी च यख मनखी दिखेंणु
गुंणी बांदर छन सुदी मिस्यां
तिमल पक्यां छन डाल्यूं मा
ककडी लगीं च लगुल्युं...
फजल की सेवा सौंली क दगड लेख@सुदेश भट्ट"दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चुनौ क पितर्वडु सी
बाट लग्यां छन नेता
हल्या मल्या मेरी तनां सब
सब कुन रुवांणा छन नेता
खैरी बिपदा कीसा मा युंकी
जग जगा सुणांणा छन नेता
गाड खाड धार रौल्युं मा
सब जगा जम्यां छन नेता
रोज घोषंणा नयी नयी हुंदी
जनी चुनौ की ड्यारादूंण मा
लुमकी लमकी छोडी छाडी की
अटकंण बैठी गेन पाड मा
बोतल सिरयीं च ज्यूंदाल बखुर मा
मुर्गों की अब खैर नी
चुनौ क हथकंडों क अभियंता
नेता बंणी गेन पाड मा
मार मार कैकी द्वास लग्युं च
चुनौ नेतों पर सत्रह कु
डौंड्या नारसींग सी छन पुजंणै
जगरी खुजणा छन चम्मचों तै
चुनौ क पितर्वड सी
बाट लग्यां छन नेता
हल्या मल्या मेरी तनां सब
सब कुन रुवांणा छन...
चुनौ क ताजा हालातों क गगडाट देखीक सिंगान सी जमीं रचना@सुदेश भट्ट "दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मौत का जागर ( ल्वैखतरी करता व्यंग्य )
रचना -- मधुसूधन थपलियाल ( जन्म 1970 , बैगवाडी , नांदलस्यूं , पौड़ी गढ़वाल )
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Poetry by - Madhusudan Thapliyal
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( गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग - 157 )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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मौत का जागर लग्युं छ आज ब्याळी
जिन्दगी ह्वै ग्यायि डौंर -थाळी।
आग चुल्लौं नांघी कोठार पौंछी
पाणी धैरी की नजीकु छिल्ला बा ळी।
तीस माणी , भूख पाथी, सात जीवन
पुंगड़ी पटुळी सेरा सारी पांच नाळी।
बाघ का जजमान बणगिन घ्वीड़ -काखड़
मनख्या -मनिख चैरिगे सरा हर्याळी।
.
धगुला देखिक रौंस नि खै कागजूं मां
दस्तखत त असली छन पण हाथ जाळी।
बौग्दु पाणी हेरी की निरसे ना गैल्या
तेरी गंगा होली त त्वैमा ही आली
(Ref-Angwali)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Vinod Pant
August 8 at 11:43pm
नानछनां -
बचपन हर आदिम क बड़ हंसीन हुंछ . चाहे गरीब हो या
अमीर बच्च सबनाकै बचपनाक याद ताउम्र वीक दगाड़
रूनी .
हमार जमान में तो अमीर लोग हुनै नी छी . तब डबलन
वाल लोग ले अमीर नि हुछी . मतलब इतुक भाईचारा
और सीधपन छी कि अमीर गरीब में कोई ले फरक नी
हुंछी . हमार पैन्टा क पछिल ले टाल हुछी और डबल
वालनाक नानतिनाक पैन्ट में ले टालै हुछी . चाहे
ब्या काज हो या कोइ और प्रोग्राम सब लोगना क
यां सब कार्यक्रम सादगी साथ हुनेर भै . कैकै यां
मेहमान ऐ या कैकै घर परदेश बटी बाबु ताऊ ऐ सार
पड़ोस में मिठाई या जो ले चीज आई भै सब बांटी
जांछी . कैली नई पैन्ट सिणै या कैकी ईजैलि फेरी
वाल छैं नई धोती खरीदी .. सबन बताई जांछी . हम
लोग जब ले नई कपड़ पैरनेर भयां तो ईज कूनेर भै जा
सबन छैं नमस्कार कैबेर आ . और हम पाल भितर ताई या
पड़ौस में जैबेर सबन छैं नमस्कार कूनेर भयां और हनन कैं बेर
फाड़ि तरोड़ पाये ( जल्दी फाड़ लेना और नया
प्राप्त करना ) क आशीर्वाद मिलनेर भै .
आजकल तो नई कपड़ कबै ले बण जानी . पर हमार टैम में
साल में एक द्वि बारै बणनेर भै . एक द्वि जोड़ी क
फाटि फुटी जास रोजाक पैरणी और एक जोड़ी क नई
वाल भीतेरी कति उण जाण में पैरी जाणी वाल भै ..
कति उण जाण मतलब ब्या बरेति . मन्दिरन या
नजदीकी बागेश्वर अलमाण आदि शहर तक .. तब हमार
लिजी दुन्नि यदुकै भै . दिल्ली लखनऊ तो आज क
लन्दन अमेरिका जस भै . तब लोगनाक परिवार गौं में ई
रूनेर भै . जनमभर भ्यैर नौकरी करबेर आदिम रिटायर हैबेर
घरै उनेर भै . रिटायर हैबेर घर आई आदिम एकाद म्हैण तक
साफ साफ जस दुसैरी दुन्नी बटी आई जस लागनेर भै .
और म्हैणेक बाद फिर घरपना कै जस कालपट्ट हैबेर हम
लोगन में मिक्स है जानेर भै . रिटायरमेन्ट बाद कुछ
समय तक कुछ लोगन कैं शहर क हैंगओवर जस ले रूंछी .
जसिके बीच बीच में हिन्दी क छौक लगूण . गौं घर
नैकि हर बात में शहर या आपुणी नौकरीक किस्स
घुसेरण आदि . गौं क कई सीद साद बुजुर्ग भ्यैर बटी आई
मैस छैं ज्यादा प्रभावित जास ले रूछी और उनन छैं
शहराक बार में विशेष पूछताछ जस ले करनेर भै . कुछ सच
और कुछ अतिशयोक्ति मिलबेर महफिल जम जानेर भै .
परदेश बटी आई मैसाक यां चाख में या आंगण में अक्सर
ह्वाक चिलम क दौर म्हैण चार पांचेक तक चलछी .
फिर एकनसै फसक रोज रोज सुणिबेर मैस निमुची
जानेर भै और महफिल उजणन बैठ जांछी .
क्रमश.............अगले अंक में जारी .......... विनोद पन्त ( हरिद्वार )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Bhishma Kukreti

भरोसा कू अकाळ ( कविता बड़ाई लैक च दगड्यों)
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रचना -- धनेश कोठारी ( जन्म 1970, देवप्रयाग , टिहरी गढ़वाल )
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Poetry by - Dhanesh Kothari
-
( गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग - 158 )
-
इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
-
जख मा देखि छै आस कि छाया
वी पाणि अब कौज्याळ ह्वेगे
जौं जंगळूं कब्बि गर्जदा छा शेर
ऊंकू रज्जा अब स्याळ ह्वेगे
घड़ि पल भर नि बिसरै सकदा छा जौं हम
ऊं याद अयां कत्ति साल ह्वेगे
सैन्वार माणिं जु डांडी-कांठी लांघि छै हमुन्
वी अब आंख्यों कू उकाळ ह्वेगे
ढोल का तणकुला पकड़ी
नचदा छा जख द्‍यो-द्‍यब्ता मण्ड्याण मा
वख अब बयाळ ह्वेगे
जौं तैं मणदु छौ अपणुं, घैंटदु छौ जौं कि कसम
वी अब ब्योंत बिचार मा दलाल ह्वेगे
त अफ्वी सोचा समझा
जतगा सकदां
किलै कि
अब,
दुसरा का भरोसा कू त
अकाळ ह्वेगे

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रदीप सिंह रावत खुदेड़
August 9 at 9:55am
जिन्दगी की दौड़ मा,
जिन्दगी की दौड़ मा,
अंग्रेजी की सौर मा
मि अपड़ी भाषा बिसरदी ग्यों,
हैंके की संस्कृति उखरदी ग्यों
रूप्यो का पैथर,
झूठी शान की एैथर
मि अपड़ा संस्कार छोड़दी ग्यों
मुखौटा झूठू सुख कू ओड़दी ग्यों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखंड मनोरंजन तुम थै कंण लग जी?
August 7 at 6:22am
जा जा बेटी नगणि बाजार दैजा दीयूल रुपयों हजार

जा जा बेटी नगणि बाजार दैजा दीयूल रुपयों हजार
ना ना बाबा मै नि जांदू नि जांदू बाबा नगणि बाजार

जा जा बेटी नगणि बाजार दैजा दीयूल रुपयों हजार
ना ना बाबा मै नि जांदू नि जांदू बाबा नगणि बाजार

जा जा बेटी नगणि बाजार त्वै जा दीयूल नगणि बाजार
जा जा बेटी नगणि बाजार त्वै जा दीयूल नगणि बाजार

तख जो बाबा क्या खाणु खांदा तख जो बाबा क्या लाणू लांदा
तख जो बाबा क्या खाणु खांदा तख जो बाबा क्या लाणू लांदा

खांदा बेटी फाफरा पोळीलांदा बेटी ऊना की चोळी
खांदा बेटी फाफरा पोळी लांदा बेटी ऊना की चोळी

तख्त बाबा कतै नि जांदू ना ना बाबा जुगै नि जांदू
तख्त बाबा कतै नि जांदू ना ना बाबा जुगै नि जांदू

जा जा बेटी उंदा गंगाडु त्वै जा दीयूल उंदा गंगाडु
जा जा बेटी उंदा गंगाडु त्वै जा दीयूल उंदा गंगाडु

तख जो बाबा क्या खाणु खांदा तख जो बाबा क्या लाणू लांदा
तख जो बाबा क्या खाणु खांदा तख जो बाबा क्या लाणू लांदा

खांदा बेटी झंगोरू जाणु लांदा बेटी पछनडू लाणू
खांदा बेटी झंगोरू जाणु लांदा बेटी पछनडू लाणू

तख्त बाबा कतै नि जांदू ना ना बाबा जुगै नि जांदू
तख्त बाबा कतै नि जांदू ना ना बाबा जुगै नि जांदू

जा जा बेटी फन्डेसा लाणा त्वै जा दीयूल फन्डेसा लाणा
जा जा बेटी फन्डेसा लाणा त्वै जा दीयूल फन्डेसा लाणा

तख जो बाबा क्या खाणु खांदा तख जो बाबा क्या लाणू लांदा
तख जो बाबा क्या खाणु खांदा तख जो बाबा क्या लाणू लांदा

लांदा बेटी मडुआ साडी खांदा बेटी कोदा को बाड़ी
लांदा बेटी मडुआ साडी खांदा बेटी कोदा को बाड़ी

तख्त बाबा कतै नि जांदू ना ना बाबा जुगै नि जांदू
तख्त बाबा कतै नि जांदू ना ना बाबा जुगै नि जांदू

तख्त बाबा कतै नि जांदू ना ना बाबा जुगै नि जांदू
जा जा बेटी नगणि बाजार त्वै जा दीयूल नगणि बाजार

तख्त बाबा कतै नि जांदू ना ना बाबा जुगै नि जांदू
जा जा बेटी उंदा गंगाडु त्वै जा दीयूल उंदा गंगाडु

तख्त बाबा कतै नि जांदू ना ना बाबा जुगै नि जांदू
जा जा बेटी फन्डेसा लाणा त्वै जा दीयूल फन्डेसा लाणा

तख्त बाबा कतै नि जांदू ना ना बाबा जुगै नि जांदू

उत्तराखंडी गीत है
जा जा बेटी नगणि बाजार दैजा दीयूल रुपयों हजार
गायक नरेंद्र सिंग नेगी जी
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
चल चित्र के निचे गीत लिखा है बस
उत्तराखंड मनोरंजन तुम थै कंण लग जी?
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बरखा बत्वांणी से
भूला तु डैरी ना
दुश्मनु की गोली से
पिछने तु ह्वैई ना
मट्यल ह्वै जा भले जिकुडी
पिछने तु देखी ना
गडवाल की शान छे तु
बैर्युं तै तु छोडी ना
तोप टैंक बैर्युं क तु
कुणज सी तोडी दे
बंकर बैर्युं क भूला
तिमलु सी तु फोडी दे
बिकराल भैरों बंण जा भूला
डौंड्या नरसिंग बंण जा तु
भीयुं बण जा बैर्युं क बीच
जडफती तौं उपाडी दे
बद्री बिशाल धै लगांणु
गडवली बीर सिपैयुं तै
जिकुडी ह्वै जा मट्यल भूला
पर बैर्युं तै तु छोडी ना
गडवली कुमौं क बीर
उत्तराखंड की शान छ्या
बोडर मा भारत क
डांड्यू जन खड छ्या
बैरी आलु रस्ता मा तु
कीडु सी पतेडी दे
गडवली खुन छे तु
बैर्युं तै जतई दे
बरखा बत्वांणी से
भूला कबी डैरी ना
दुश्मनु की गोली से
पिछने कबी.....
स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सीमा पर तैनात सैनिकों को समर्पित पंक्तियां लेख..@सुदेश भट्ट"दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
August 15 at 12:05pm ·
'नीति' कुछ नी 'राज' फुल (दिशाहीन नीति विषयक झकझोरती , गढ़वाली कविता )
रचना -- डा प्रीतम अपछ्या ण ( जन्म ,1974, गढ़कोट, चमोली गढ़वाल )
Poetry by - Dr Pritam Apachhyan
-
( गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग - 164 )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
-
पाणि पट्ट बिजलि गुल 'नीति' कुछ नी 'राज' फुल
ये देशा का ये उत्तराखंड का
नेतौं की जै सरकारौं की जै जै
क्वी बणौणु डाम यख क्वी लगौणु डाम
हे जनता तेरा नाम
बिजलि पाणि भैर जालि घरकुडी डुबै की
दे मुवाजो हे राम
नौला पंदेरा सुरंगो मा, गाड गदेरा सुरंगों मा
ये देशा का...
कंपन्यूं को द्वौष लग्यूं मटितेल पिटरोल
हे सब्सिडि ह्वे गोल
लखडा झ्याडा सलिण्डर मुकदमा कै जाणा
अब ग्यूं को पिस्यूं छोल
राजा लाटो राणि चुप, दिल्ली देरादूण टुप
ये देशा का...
लूण तेल आटो चौंल मैंगाई का दोब
हे मुनाफा का लोभ
फल फरोट साग सब्जि भौ चढ्या असमान
यो दिल्ली वलों खोप
ध्याडि मजुरि बजट नी, तनखा पिनशन बजट नी
ये देशा का...
जंगल भसम फुके देखदरो क्वी नी च
हे सुणदरो क्वी नी च
घूस दे कि नौकरि बदलि न्यौ अन्यौ कि बात
हे सुणदरो क्वी नी च
नौकर्युं वला बीपीएल, गाडि कोठि बीपीएल
ये देशा का...
सुर्ज घुरौणू च आँखा सर्ग रुसायूं चा
हे अकाल आयूं चा
बेरोजगारुं जनान्युं की फतडापट्ट असंद
नेता तराई जायूं चा
पाणि नी ल्या दारू प्या, दवै नी ल्या दारू प्याये
Poetry Copyright@ Poet

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
August 4 at 7:04am ·
जू बोनु की यूँ बागयुं का बगदा गाड़ मा फाल मारी दयों
पर डौर लगणी ना कखि बीच मा हि डूबी जौं
ये त लगी जाला कै भी छाला पर मितै कु गाड़ तैरालु...
यूंकि भांडी कूंडी मा कथगा मवास्युं का रसोड़ा पाक पक्यान
युंका लत्ता कपड़ों मा कुजाणि कथगा दलूँ का टल्ला धरयांन
ये त रैइ जाला नांगी गात्युं मा भी पर मितै कु थीगुला पैरालु....
ये त लगी जाला कै भी छाला पर मितै कु गाड़ तैरालु...
सब दलूं का गोठ गोठ्यार मा युंका कील घैटयाँ छन
हर भोटरु की खोलि का देल्युं माँ खुट पसारी बैठयाँ छन
ये त खैई ल्याला मांगी ठगै की
मितै कु मांड पिलालु..
ये त लगी जाला कै भी छाला पर मितै कु गाड़ तैरालु...
Deepak Nautiyal