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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अजाद्यो पचासों दसक
रचना -- वीणा पाणी जोशी ( जन्म - 1937 देहरादून )
Poetry by - Vina Pani Joshi
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला -68)
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती
सबसे अच्छी फसल ?
आयोगों कि
सबसे अच्छी उपज ?
नेतों कि घिमसाण ,
सबसे अच्छी झड़त?
विदेशी कर्ज
सर्वोत्तम विकास ?
उद्घाटन , सेमीनार, राहत कार्य ,
सबसे बढ़िया बीज ?
आश्वासन ,
सबसे सस्तो ?
मनखी I
देश कि दसा ?
पखदौं ! जगवाळणा रा !
जगवाळणा रा !,

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Bhishma Kukreti
August 3 at 8:11pm
म्यरा गौं की पंद्यरी (वाह ! तो निकलेगा आपके मुंह से )
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रचना -- गिरीश सुन्दरियाल ( जन्म 1969 , चुरेड़ गौं , चौंदकोट , पौड़ी गढ़वाल )
Poetry by - Girish Sundariyal
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( गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग - 151 )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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तिन सुणिने
बेटी -ब्वारीयूं की खैरीs छ्वीं
तिन फूजिने
सासू सतइं ब्वार्यूं की अंसधरि
तिन चखिने
नण्दा भाभ्यूं की खट्टी -मिट्ठी छ्वीं
तिन द्यखिने
द्यूरा - भौज्यूं की चळकी -बळकी
तिन बिंगिने
रंगीली रांत्यूं की टपकारी
तिन सुळझैने
द्यूराणि -जिठाण्यूँ की अळझीं गेड़ी
तिन पेनि
नै नै ब्योल्यूं की भुक्कि
तिन दमकैने
बिगरैलि बांदूं की मुखड़ी
तिन रूझैने
ननि -ननि छोरियूं की झुलड़ी
तिन भ्वरीने
रीति भांडि -कूंडी
तिन धितैने
बाटा का बटोई
म्यरा गौं का पंद्यरी
तु कबि नि बिसिगि।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Ramesh Hitaishi
August 3 at 8:32pm
रमेश हितैषी
मि वखकु छों
जख हरियूं भरयूँ बौण, डाली बोटी घास लखडू,
सुख चैन अपणु पर्या, मी व खकु छौं।
काकी बोड़ी दीदी भूली, सुख दुःख की खबर सार,
नि लगदु छै कबि यकुलू, मी वखकु छौं ।
न रोग न व्याद छालु छट पटु, मुल मुल हैसदी मुखडी,
बडु छ्वटकु लिहाज, मी वखकु छौं ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Bhishma Kukreti
August 3 at 11:45am
अब मेरी टीरी डुबणु च !
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रचना -- स्व. डा उमाशंकर 'सतीश ' ( जन्म - 1937 -2011 ) , नागपुर , चमोली )
Poetry by : Dr. Uma Shankar 'Satish '
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला -67 )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती
s =आधी अ
-
यो पापी पराणि उबणु च
अब मेरी टीरी डुबणु च !
भिलंगना तू गाडs बाचs
जिकुड़ी मा गरुड़ रिटुणु च
अब मेरी टीरी डुबणु च !
मनसा क्या होण मेरी
द्यखलु तुमारी दिलेरी
फजलै मा घाम बूडणु च
अब मेरी टीरी डुबणु च !
माई का लाल को मातम
मातमी मरदू को जनम
पितरु को परसाद रूठणु च
अब मेरी टीरी डुबणु च !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



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Bhishma Kukreti
August 2 at 6:20pm
बथौ (गढ़वाली कविता )
रचना -- दिनेश जुयाल ( जन्म 1969 , जिवई , बैजरों , पौड़ी गढ़वाल )
Poetry by - Dinesh Juyal
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( गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग - 150 )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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बोडी प्रणाम
काकी प्रणाम
दाजी प्रणाम
बुबा कत्ती छुट्टी ?
बस द्वी दिन की !
अच्छा बोडी प्रणाम
अच्छा काकी प्रणाम
अच्छा दाजी प्रणाम।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Bhishma Kukreti
August 1 at 7:05pm
आम आदिम नि बणि (झस्कान्दी गढ़वाली कविता )
रचना -- शशि भूषण बडोनी 'राजा' ( जन्म 1969 , भिंगवाली , अंजनी सैण, टिहरी गढ़वाल )
Poetry by - Shashi Bhushan Badoni 'Raja'
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( गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग - 149 )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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दाजी !
मि क्य बणु ?
बड़ो आदिम , या भौत बड़ो आदिम !
दाजीन बोले
ब्यटा !
सब कुछ बणि
बड़ो आदिम /छ्वटो आदिम
पर आम आदिम नि बणि
किलैकि /आम आदिम तैं लोग
चूसी दींदन

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चल रूपा बुरांस बण जौंला (दाद देना बनता है जी )
रचना -- महेशा नन्द गौड़ 'चन्द्र ' ( जन्म 1938 , अजमेर पट्टी , पौड़ी गढ़वाल )
Poetry by - Mahesha Nand Gaur 'Chandra '
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( गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग - 71 )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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चल रूपा बुरांस का , फूल बणि जौंला
छमछम हिट छँछड्यूं को पाणी पेइ औंला।
चमचम हिमालै को चांदी सी बरफ
झिलमिल झिलमिल झिलमिल छाया चौ डांड्यूं तरफ
हिलांस की जोड़ी बणी , उड़ि उड़ि जौंला।
धरति का ओर छोर कन सजीला -छबीला
रंग -रंगीला काया द्याखो , फ्यूंळि का फूल पीला
बाँसुरी का स्वर सरगम मा गीत बणि जौंला।
घस्यर्यूं के मन मा टीस। उदास उदास
तिसळि आंख्यूं मा झणि कैकि होली आस
ऊंठड़ियूं कि तीस बुझौला , आस बणि जौंला।
छळछळ - छळछळ मन प्राणु की छळकदी सि धार
कैई जल्मूं की प्रीत मेरी , कइ जल्मूं को प्यार
अगास क बीच कखी , दूर लुकि जौंला।
(Ref-Angwal, Shailvani)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज फेसबुक अर ब्हाटसप मा
तुमतै खुज्यांणा छौं हे दगड्यों
कभी स्कूल क बाट दगडी
मी तुमर लुक्युं रौं दगड्यों
गोर चरैंन जौंक दगड
तौंक बी नी बल अता पता
फेसबुक मा ख्वजदु जब
तब छुंयी लगदीन अर खैरी ब्यथा
बचपन्या दिन आज
समलौंण रैगेन दगड्यों
मेरी आंखी तुमतै खुजंणा कुन
रोज रगर्यांणा छन दगड्यों
मल माट मा लपोड्यां दिन ऊ
याद आंणा छन दगड्यों
सुदेश भट्ट कुन त रोज फ्रैंडसिप डे
तुमतै रोज खुजंणा छौं दगड्यों
आज फेसबुक अर ब्हाटसप मा
तुमतै खुज्यांणा छौं हे...
दगड्या दिवस पर म्यार अपंण सभी दगड्यों तै समर्पित @सुदेश भट्ट"दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

छ्वाया फुट्यां ह्वाल बसकल्या
कुयडी लगीं होली डांड्यूं मा
रुजदी भीगदी दीदी भूली मेरी
धाण कना होली सार्युं मा
गोर भैंस्यूं क दगडी भग्यानी
दुर जयीं होली छान्यूं मा
गाड गदन्युं क ह्वालु सुंस्याटु
खुद्यांणी होली डांड्यूं मा
मैत बिना खुदेंणी होली
दीदी भूली मेरी छान्यूं मा
लोट पोट के घनघोर कुयडी
घुघती घुना होली डाल्यूं मा
पापी बसकल्या घुघती ना घुर
मां बैंण्युं की जिकुडी ना झूर
खुद लगदी मैत की ऊंतै
सुणी तेरी खुदेडी घुर
छ्वाया फूट्यां ह्वाल बसकल्या
कुयडी लगीं होली डांड्यूं मा
रुजदी भीगदी दीदी भूली मेरी
धांण कना होली सार्युं.....

सर्वाधिकार सुरक्षित @.सुदेश भट्ट "दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गढवाल मा पलायन कु दाग लगीगे
हर क्वी गौं छोडी भागण लगीगे
कुडी पुंगडी तौंकी बांज व्हेगे
मोड सिगांड सब खंद्वार व्हेगे
क्वी अपणी मजबूरी मणदू
क्वी नौन्यालूं का बाना फुर्र व्हेगे
नी रैण चाणु क्वी पहाड मा
सब दिल्ली देरादून जोग व्हेगे
कतगा ही लोग त खुश छिन
कतगा ही भैर रैकी दुखी छिन
आजकल की नौनी भी चकडेत व्हेगे
नौना दिखण से पैली बुनीं
तुमरी उन्द बी जमीन लीं है
पलायन -2 हर क्वी च चिल्लाणु
येकु हल कै सी नी होणु
सब पलायन पर लिखणा पीडा अपणी
ऊंकी लैन मा `अमोली' भी शामिल व्हेगे ।
सर्वाधिकार सुरक्षित @ प्रदीप अमोली