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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


गुणनिधि जोशी
July 10 at 8:40am
जेड़ज्याए
ददा !
धार के पार तरफ
देख रही थी जेड़ज्या,
सड़क को एक टक
देली में बैठ
गल्फु में हाथ लगाकर
बहुत देर तक
ए ददा !
बीड़ी चूसते हुए
'दिगो दिग' कह रही थी
फिर तिथान के तरफ मुँह मोड़कर
सड़क की तरफ पीठ फेर दी रे
जेड़ज्या ने
ए ददा !
घर कब आएगा तू ?
जेड़ज्या कह रही थी
ह्यून तो थाह दिया है परानी ने
पर चौमास का कोई भरोसा नहीं
पाख सड़ गयी है
पाल का भीता गोठ में गिर रहा
भुर भुर करके
छुन्तुरा धिनाली उजड़ते ही भाग गया है
दुधघर के पास से
मूसों ने बबाल मचा रखा है
तेरे लिए बचाया हुआ
साल जमाल धान
टूंग गये हैं
भकार में घुस कर
कोई चूदानी ला देता तो कितना अच्छा होता!
कह रही थी जेड़ज्या
ए ददा !
उत्तराखंड की तरह ही
खपराखंड हो गया रे गौं-घर भी!
ए ददा !
भौत टैम हो गया
घर भी नहीं तर्छा है
कमेट खोदने वाला कोई नहीं
और
पाल भी नहीं लीपी है रे
जेड़ज्या ने
कह रही थी
लाल माटा कौन लाएगा
ला भी गया कोई तो
कैसे लीपूंगी
कमर चड़क रही
ए ददा !
रिश्तों की गरमाहट वाला मूव का ट्यूब लाने वाला भी कोई नहीं रे
ए ददा!
आब-तीस बची है रे बुढ़िया में अब भी
जमीन को पौरिया रखा है
ओड़ा-बाड़ा सब की फ़िकर अभी है उसे
घोघस्याड़ी वाले
बम्बे आम के पेड़ से
आम किसी को नहीं टीपने देती रे
जेड़ज्या आज भी
मेरे बच्चे आयेंगे तो क्या खायेंगे कहती है.
ए ददा!
अपनी ही तरह उसे भी
एक बार
रियल जूस और माजा मैंगो का रस पीला जाना तो
पप्सी, कैम्पाकोला की बोतल दिखा जाना रे
ए ददा !
दस-दस के कड़कड़ाने नौट
बुढ़िया ने सीरान लुका रखे तेरे लिए
जीभ में दांत काट कर जी रही है
जेड़ज्या अब भी
ए ददा!
किसी दिन क्रेडिट कार्ड, डेविट कार्ड दिखा जाना रे
जेड़ज्या को
ए ददा !
दस-दस के नौट से याद आया
फुल संग्रात है भल रे
भिटोर खिला है
खेत-खेत में लावारिस सा
देली में दो फूल रखने वाला भी कोई नहीं हुआ
जेड़ज्या कह रही थी
अब तो मेरी नातिनी भी ठुल्ली हो गयी होगी
घर होती तो फूल रखती देली में !
फिर कहने लगी
उसको क्या पता ठैरा!
नानछना से तो बाहर ही रही ठैरी
ए ददा !
जेड़ज्या की ह्यांक शिकार में गयी है रे
दांत एक नहीं
मीरी ही मीरी बची है
उनसे ही लूछ रही थी
देवी मंदिर में शिकार का टुकड़ा
खुस्यानी ज्यादा हो रही थी
धो कर खाया
बुढ़िया ने शिकार.
ए ददा !
किसी दिन कम खुस्यानी डाल कर
भौजी के मैत से आये
होकिन्स कूकर में गला हुवा शिकार खवा जाता रे
जेड़ज्या को
ए ददा !
अब तो आंसू भी सूख गये रे बुढ़िया के
दुकान से डायिक्लोजूम की हरी गोली मंगाती है
चड़क,पीड़, बुखार में
धार चड़ नहीं पाती
उलार उतर नहीं पाती
ए ददा!
आना रे इक्की बार घर
अपना लाजम देख जाना
ठोक बजा जाना घर
दिवार दे जाना
चौमास में
खेतों की तिर उधर गयी है
इस हड्डी के ढाँचे को भी
चलते-फिरते देख जाना रे
भूत-प्रेतों जैसी हो गयी है जेड़ज्या!
आएगा तो
मडुवा, भट्ट , गहत भी ले जाएगा
खाना खा जायेगा
न खाना बाँध ले जाएगा
फोटुक भी खींच ले जाएगा
फेसबुक में लगाने के लिए
आना तो सही इक्की बार !
पता नहीं कब
जेड़ज्या
का प्राण हंस उड़ जाए रे
मुझे तो लग रहा
तुझमें ही अटके हैं
शैद उसके प्राण !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखंड म रगण-ब्वगंण हुयूं
मुंगरी भूखौणा छन नेता जी
जनता को ज्यूणो-म्वरनु हुयूं च
हैंसी उड़ोणा छन नेता जी।
2013 की आपदा पीड़ितों को
अज्यों तक सुध नि लेणा नेता जी
केदार पुरम तैं लीपी घुसि कि
अपणी जै-जैकार करवाणा नेता जी।
रस्ता टूट्या छन, सड़क टूटी छन
पुल नि बणनवाणा छन नेता जी
आपदा का नौ फर अपरा ल्वखों थैं
ठ्यका दिलोंणा छन नेता जी।
खेती न पाती, पुंगड़ी बांजी छन
सुध नि लेणा छन नेता जी
पाड़ वलों कु सैं न गुसै क्वी
सैर वालों तैं ब्यलमऔणा नेता जी।
कुर्सी बची रा, सत्ता चलणि रा
जतन कना छन नेता जी
बिसात बिछे कि जतन कना छन
नौट कमौणा छन नेता जी।
तौं का भ्वंआ से म्वार, भाज क्वी
फरक नि प्वडदू नेता जी
वोट बैंक पर कुर्सी बची रा
बाकी भाड़ जवा ब्वना नेता जी। . दिनेश ध्यानी। 5/7/16

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बरखा चुप व्हैजा
स्वर प्रीती रणाकोटी, गुंजन डंगवाल
गीत शांति भूषण
धन्यवाद अमित सागर
संगीत सुमंत पंवार
एल्बम गंजो मेरा गोँ कि
लेबल MGV DIGITAL

बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैजा
बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैजा

ना बारखि बरख ना बारखि
ना बारखि रणुमणुम झणुमणुम कैकि चुप व्हैजा

बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैजा
बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैजा

भौल सुबेर मिल दूर चली जाण
ऊँकी अनवर मिल कै मा खोजाण

भौल सुबेर मिल दूर चली जाण
ऊँकी अनवर मिल कै मा खोजाण

मेल्दी आँखि मेल्दी आँखि आंसूधारा बगेना

बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैजा
बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैजा

ऊँ का बाना करर्युं साज सिंगार र
थोत ख्याल जरा बरखा रिसाड

ऊँ का बाना करर्युं साज सिंगार र
अरे थोत ख्याल जरा बरखा रिसाड

परीत माया परीत माया अध बाटा छुपै ना

बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैजा
बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैजा

ईकुली बिंदूल सुर मा पंधेर बगीगे
खिलियु खिलियु रूप रंग और सजीगे

कुंगली गात स्युंदी फूंदी रुझिगे
जल्मो जल्मो की तिस बुझिगे

रणुमणुम झणुमणुम
रणुमणुम झणुमणुम लगि रै रुकी ना

बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैना
बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैना

बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैना
बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैना

उत्तराखंडी गीत है
बरखा हाथ जोड्यां मेरी दगड्या चुप व्हैना
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
चल चित्र के निचे गीत लिखा है बस
उत्तराखंड मनोरंजन तुम थै कंण लग जी?
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Vishweshwar Prasad Silswal
June 26 at 11:17am
"पहचाण"
यू तुमहरू
खंदवार कूड च,
अर् ऊ उज्यड़याँ
पुगड़ छन,
जू अब भ्याल
बॅनी गेयन I
रंग बहादुर मिते
पहचहाण करानु छे,
म्यार कूडी-पुंगड़ी कI
द्वि चार साल बाद त,
वेन भी नि पह्चन मिते,
और व्वालूल की कुच्छे तूI
अंग्रेज भी इन्नि ये छे
पह्लि हिन्दुस्तान मँ,
अर् उत्तराखंड मॅ इतिहास

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रसिद्ध गढ़वाली कहानीकार स्वर्गीय श्री भगवती प्रसाद जोशी "हिमवंतवासी "जी तैं
सादर......... एक गीत
जै बोलो बेमान की
----------------------------
जै बोलो बेमान की, जै बोलो बेमान की ।
सच तैं सच बथाणू मुश्किल, घळचाघंड ईमान की ।।
पर्या बांठु फर नेथ धरींच, काणा -गरूडौं कि बार प्वडी़ंच ।
पुजै कु ब्वगठ्या गोळ ह्वै ग्याई, बाक्यूं कि अपुड़ि गिच्चि छ्वड़ींच ।।
बाड़ उज्याड़ खाण लगींच, देखो! आँखा ताण की...
जै बोलो बेमान की, जै बोलो बेमान की............
मतलब सिंह जी स्वाँग रचै की, इज्जत -आदर पाणा छन।
धरम -करम सिंह बेळि निकळणौ देळ्यूँ ट्वकरा खाणा छन ।।
झूठा की जैकार हुयीं च, सच्चा कू बदनाम जी....
जै बोलो बेमान की, जै बोलो बेमान की...........
अखबारों मा खबर छपीं च, माटु -सिमट की जोड़ी मिलींच ।
बोचर -बिल सब पास हुयाँ छन, बजट चपाणकि देर हुयीं च ।।
साबुत सरिया सिमट पचै गिन हमरा हजमाराम जी............
जै बोलो बेमान की, जै बोलो बेमान की..........
हमरा हकौं की बरखा हैंका मुलक मा बरखी ग्याई जी ।
अपुड़ो पराण सौण स्वाति मा चोळि सि तरसी ग्याई जी।
भुयाँ मा ऐकि ग्वळदंगि कैगे यो निरभै असमान भी... ....
जै बोलो बेमान की... जै बोलो बेमान की....
बरमस्या खरदूषण यख जी हम फर दाँत पळ्याणा छन।
जात -पात का मुछ्यळा जगैकी, परदूषण फैलाणा छन ।।
धन गढ़ माँ का फुंड्यानाथौ ! तुम खुण च परणाम जी......
जै बोलो बेमान की..... जै बोलो बेमान की.....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरी जल्मभूमि मेरो पहाड़

मेरी जल्मभूमि मेरो पहाड़ ... २
गंगा जमोना यखी बद्रीकेदार
मेरी जल्म भूमि मेरो पहाड़... २

फूल खिलन्दी न फूलों की घाटी
रौंस जगांदी न हिवंली कंठी ... २
नंदा की छ्या ....... अ . अ ..आ जगेशवर धाम
नंदा की छ्या जगेशवर धाम
पञ्चप्रयाग यखी हिमकुंड साहब
अौली को मुख यखी हरि-हरिद्वार

मेरी जल्मभूमि मेरो पहाड़ ... २

लाम मा दटया छन हमरा लाल
राण का जितार छन बैरियों का काल ... २
सुमन माधोसिंग ....... अ . अ ..आ तुमरो बलिदान
सुमन माधोसिंग तुमरो बलिदान
केसरी चन्द्रसिंग देश की शान
रमी गौर और्र तिलो जनि नार

मेरी जल्मभूमि मेरो पहाड़ ... २

ग्वैनि घसैनियों को मायलु पारण
बन मा ग्वैरों की बसुंली की तान ... २
थड्या झुमैलो ....... अ . अ ..आ गीत खुदेड
थड्या झुमैलो गीत खुदेड
हुड़की मस्क ढोल दमु की ताल
नैनीताल यखी मसूरी बजार

मेरी जल्मभूमि मेरो पहाड़ ... २

औ हो हो औ हो हो ला ल ला ला ल ला ल ल ला
हो हो औ औ हो हो औ औ ला ल ला ला ल ला ल ल ला

उत्तराखंडी गीत है
मेरी जल्मभूमि मेरो पहाड़
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
चल चित्र के निचे गीत लिखा है बस
उत्तराखंड मनोरंजन तुम थै कंण लग जी?
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखंड म रगण-ब्वगंण हुयूं
मुंगरी भूखौणा छन नेता जी
जनता को ज्यूणो-म्वरनु हुयूं च
हैंसी उड़ोणा छन नेता जी।
2013 की आपदा पीड़ितों को
अज्यों तक सुध नि लेणा नेता जी
केदार पुरम तैं लीपी घुसि कि
अपणी जै-जैकार करवाणा नेता जी।
रस्ता टूट्या छन, सड़क टूटी छन
पुल नि बणनवाणा छन नेता जी
आपदा का नौ फर अपरा ल्वखों थैं
ठ्यका दिलोंणा छन नेता जी।
खेती न पाती, पुंगड़ी बांजी छन
सुध नि लेणा छन नेता जी
पाड़ वलों कु सैं न गुसै क्वी
सैर वालों तैं ब्यलमऔणा नेता जी।
कुर्सी बची रा, सत्ता चलणि रा
जतन कना छन नेता जी
बिसात बिछे कि जतन कना छन
नौट कमौणा छन नेता जी।
तौं का भ्वंआ से म्वार, भाज क्वी
फरक नि प्वडदू नेता जी
वोट बैंक पर कुर्सी बची रा
बाकी भाड़ जवा ब्वना नेता जी। . दिनेश ध्यानी। 5/7/16

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बीठा पाखों खिलिगे वा फ्योंली
धरती बणी च देखा दूँ ब्योंलि
ऋतु वसन्त बौड़िक ऐगै
बणो -बणो तें धद् याण लेग्ये
डाळ्युं -डाळ्युं मां ललांगा बुराँस
बोड़ीगे आज फेर भौंरों की आस
उड्यारु -उड्यारु खुसबू च बासा
फिर से जगीगे पोतळ्युं की आसा
इन मां लठ्याळी तू कख लुकिं च
बाँज की डाळी बी कलबलि हुँयिं च
न जादा जाड़ो न जादा ताप
सर्ग कू बादळ बि सेळू सीं लाँप
उमेलू समौ च उमेली च बार
अ दूँ बन्दोड़ा अब धोरा -धार
उताळू सरील वनि क्वांसु पराण
तू आँखा बूजिक हुयीं च अजाण
मोळ्यारि बगत रमेलि डांडी-काँठी
रुग बुग्या ह्वेगिन घ्वीडों की चांठी
द्वि मासी वसन्त सुआ सदानि नी रैणी
ऐजा मेरी चकोर तू सरगे सीं गैणी
( @ उमा भट्ट @)
उड्यारु - गुफाएँ
पोतळ्युं - तितलियों की
उमेलू - सुहावना
बन्दोड़ा - सुन्दरी
उताळू - उतावला या दीवाना
क्वांसू - कोमल
रमेलि - मनोहर या रमा देने वाली
रुग्बुग्या - मखमली

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मां की कुखली मा सैरा
गम भूली जांदु मी
उमर छत्तीस ह्वै ग्या मेरी
फिर भी बाल बणी जांदु मी
त्यार सिवा दुख दर्द
कुई नी जांणी सकदु मां
जनि मुंड मलसदी मेरु
सैली मी चितांदु मां
होटल कु खांणु हुयुं
ये बिरण मुलुक मा
त्यार हथ की बाडी पल्यो
मेरी गिची टपरांणी मां
खैरी खैनी मांजी तीन
उकाली उंदार्युं मा
कुबलांणा रौं रुझंणा रे तु
बत्वांणी कुदड्या धांण्युं मा
तेरी कुखली मा मांजी
सैरा गम भूली जांदु मी
उमर छत्तीस ह्वेग्या मेरी
फिर बी बालु बंणी जांदु.....
सर्वाधिकार सुरक्षित @सुदेश भट्ट "दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

लोक भाषा के चिंतन रात दिन डूबे रहने वाला शब्दो के संत व्यंग सम्राट नरेन्द्र कठैत जी एक रचना का अंश अबारी तबरी काव्य संग्रह से ऐसी रचना ब्वे और इजू बोलने वाले ही ऐसी रचना रच सकते मम्मी बोलने वाले हम जैसे इस कविता पढ़ और समझ ही सकते है रच नहीं सकते है !
भैर भित्र तौंकू राज
भाषा हमारि लाचार चा
लुस्ये लुस्येकी
हिटणी च ब्वे
पर जिकुडिम लग्यु तैकु
धक् धक् धकध्याट चा
हैंको सट फट फट
पर औलाद अपडी ब्वेकि दौ
लाटी चा
जणणी न तणणी
न बिंगणी ब्वल्नी
सरू कठमलि हिसाब चा.................नरेन्द्र कठैत