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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat
February 7 at 4:33pm ·
दुन्या म दुसरू,त एशिया म पैलु नाम
देवभूमी तेरी शरण,बन्यु च पैलु डाम।
हिवलि कांठ्यो कतना गदनो कु काम
पौंचाणु च पाणी,माँ गंगा तेरू ए धाम।
अमर बणि मनखी,तेरी हाथ्यो कु काम।
अमर इतिहास म,टिहरी गढ़वाल डाम।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
7 mins ·
जग्वाल मा छन यी,
ह्वोला कैका भाग मा,
कुछ दिन की बात छ,
छन यी जाग मा.....
जगमोहन सिंह जयाड़ा ज़िग्यांसू
11/2/2017

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
12 hrs ·
टीरी डाम पतरोल जी,
जैकी भारी हाम छ,
तैका परताप सी,
तुमकु तख काम छ.....
आप उत्तराखण्ड की धर्ती मा,
खूब खाणा कमौणा,
निपल्टदा होयां छौं हम,
किलै कुतग्यालि लगौणा ......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा ज़िग्यांसू
10.2.17

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat

रोटि चंद वंशजो की,माणा ए ब्वलदी।
आटु चौंलो कु,देशी घ्यू लगैक पकंदी।
विरासत संभली च,त्योहार म बनंदी।
गूड़ साग लूण दूध,दगड़ी ए परसोंदी।
धन्य ओ वंशज, आज भी ए निभंदी।
आण देवभूमि, पुरणी गाथा मिलंदी।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat

खूबसूरत गैना गाँव, सरल हृदय मनखी।
सुखी संसार दुन्या म, त च बस्यू यखी।
मवसा भरपूर छिन,शान्त चित रैंदु यखी।
जिन्दगी जीण अपणी,त भै आई जाणु यखी।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat
February 10 at 8:03pm
·
खुबसूरत पिथौड़ागढ की दिखेणी सुंदर शाम।
भटेड़ी गाँव समणी, पर्वतराज कु हिम धाम।
काली गंगा बटणि, नेपाल अर देवभूमि नाम।
हर गंगे कनी च, मुल्को की तीस बुझाणो काम।
स्वर्ग यखी दगड़्यो,बटुंणु च इंसानो कु काम।
नमन प्रकृति कु च,निर्विवाद करणी अपणु काम।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat
February 10 at 12:43pm ·
घिरयु डांड्यो सी,पवित्र गदेरा कु जल।
माछा भात कु प्रसिद्ध, शहर यु च थल।
मेजबानी च भली,गंगाजी की कल कल।
उत्तरणी कु कौथिग, बुलेंद यख म्यल।
शान पहाड़ो की च,देवतो कु च सुफल।
आण जरूर कभि, भेटणा कु खुणी थल।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat
February 9 at 11:31pm ·
क्वी देघाट बटि अयु,क्वी अयू पिथौड़ागड़ सी।
भलु लगणु भै आज,एक दुसर थै मिलण सी।
देणु भी कुछ जरूरी, तुम थै पुरणी याद सी।
छ्यूती देणु तुम थै,धरयां स॔म्भाली सैंधण सी।
छ्वटी भेंट दगड़्यो,जुड़ी पुराणी कुछ याद सी।
रोज आंदु दिन इनु,ऑदु पहाड़ क्वी अपणु सी।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat

झूलाघाट आखिरी बजार भारत कु।
पिछने तस्वीर म,राज च नेपाल कु।
झूलापुल आसरा,वार पार जाणा कु।
मनख्यू न बटि,मनखी राज कना कु।
अजि भी पिछनै,क्षेत्र यो द्वी देशों कु।
पुल पर बन्यु मंदिर,रक्षा करदु सबकु

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 

Darsansingh Rawat

80 साल का धैरयाल, जवां डीबीचंद।
यूकेडी खातिर भै, हुई जनता रतमंद।
उत्तराखण्ड सुंदरी भी लगी नेहाचंद।
उठो भै बंदो होओ, तुम सब लामबंद।
अपणी पार्टी च, अयु च भलु यु छंद।
जिताण यूकेडी,बोलो जय उत्तराखण्ड।