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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नि बिसरलो नि बिसरलो

नि बिसरलो नि बिसरलो
द्वि अक्टूबर ये मेरु उत्तराखंड

कन बिसरलो कन बिसरलो
मातृ जननी को लाज मेरु खंड

कैल बिसरण देन कैल बिसरण देन
निर्दोष मनखी पर ये अत्त्याचार

ऐग्याई ऐग्याई फिर कलो दिन
जिकडो च सबकु खिन -भिन

नई चेनु हम थे तुमरी शोक सभा
मुलायम मायवती थे तू दिला सजा

नि बिसरलो नि बिसरलो
द्वि अक्टूबर ये मेरु उत्तराखंड

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Sudesh Bhatt

पाटी...पुत्या

घुट्या पुत्या पाटी अर बुखल्या
कम्यडु खडिया हरचिन दगडया
कच्ची एक पक्की एक धारों धारी गेन
एल.के जी यू.के.जी नर्सरी ह्वेन
ईमला निबंध हरची सुलेख
अंग्रेजी क जमन मा हरची आलेख
पहाडा बैराखडी हरची सिलेट
बुये बाब ह्वेगेन मम्मी डैड
चटाई हरची यैगेन कुर्सी
बगदी हवा मा मौडर्न गुरजी
गुणा भाग क कठिन सवाल
मौबेल मा हल करना छन गुरजी
हरची पंद्रह अगस्त २६ जनवरी
गांधी जयंती की प्रभात फेरी
शहीदों की हुंदी छै गौं गौं मा जय जयकार
गौं गौं मा घुमदी छे स्कूल्यों की टोली
पैली निशुल्क शिक्षा लालटेन बाली क
रात मा भी पढांद छ्या गुरजी
अब त चंट छात्र भी तबी पास ह्वालु
जब ट्युसन पढण कुन गुरजी म जालु
घुट्या पुत्या पाटी बुखल्या
कम्यडु खडिया हरचैन दगडया
कच्ची एक पक्की एक धारों धारी गेन
एल.के जी यू.के.जी नर्सरी.......

सर्वाधिकार सुरक्षित @लेखक सुदेश भटट(दगडया) की प्रकाशनाधिन पुस्तक "धै"बिटी साभार

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

श्री भरत सिंह नेगी पहाड़ी मित्र.....

कांधी मा काखड़ि,
मुंड मा अमेर्थ,
कख होलु जाणु भुला,
प्‍यारा पहाड़ मा.......

मन मा ऊलार छ,
पहाड़ सी प्‍यार छ,
खाणु वख की सब्‍बि धाणि,
पेणु छोया ढुंग्‍यौं कू पाणी,
किलैकि पहाड़ सी प्‍यार छ......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 29.9.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
September 23 at 3:46pm · Edited ·

भटट भुजेंण लग्‍यां था....

तवा मा भटट भुजेंण लग्‍यां था,
ह्युंद कू मैनु लग्‍युं थौ,
तवा मा तिड़ तिड़ होण लग्‍युं थौ,
कोन्‍ना मा लम्‍पु जग्‍युं थौ.....

एक भग्‍यान देळि मा आई,
भूत छौं यनु बताई,
दादिन गाळी भौत दिनिन,
वे जथैं भटट की मुटट चलाई....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
रचना सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनांक 23.9.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज उतराखंडी फिल्म तरीका कुसुम चौहान जी और भगवान चंद जी लघु फिल्म देखी हिमालयन न्यूज़ पर उनके शानदार अभिनय और मार्मिक विषय को देख ये कविता तैयार हो गयी है
घाम मा जनानो की छु लगणी च हे दीदी
दिल्ली ब्वारी दिल्ली मा खप सक्दीन
अगर मजबूरी मा उत्तराखंड ऐगिन त
दिल्ली का ही गीत गांदीन
वी फर कैकु अड़ायु नि लगदु
बस गिच्चा एक छवी चा
मम्मीजी iam वर्किंग वोमन
मि आप जनु बैकवर्ड नि छो
अपणा अगने पिछने
सब्भु तै गवाणया समझदिन
अफु तै इत्गा मोर्डेन समझदिन
कबि किटी पार्टी त कभि ब्यूटीपार्लर खुटी रंदीन
स्येंदी दा बि लिपस्टिक पतोडी स्येदीन
म्येरा छोरा तै बि उत्तराखंड मा आकाल छो पडियु
ज्यू ब्वारी निहोणया दिल्ली मा खुजे
चला फण्डफुका दीदी भूलियो हौर छवी लांदा
दिल्ली ब्वारियु तै दिल्ली छोड़ा
अर घाम तापा ..............................................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
September 17 at 9:07pm · Edited ·

जै दिन सैरी दुनिया मायादार ह्वै जाली
जात पात धरम करम कुटुंब कबीला से
ऐंच बात होली वी दिन
दुनिया एक ह्वै जाली ....शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दाल मैंगी चौल सस्तु
इन्नी बक्की बात
हूँण राली
वू दिन दूर नि अब
दाल भात से दूर हवे जाली................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नि बिसरलो नि बिसरलो

नि बिसरलो नि बिसरलो
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कन बिसरलो कन बिसरलो
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कैल बिसरण देन कैल बिसरण देन
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

भुल्दा मनखी

जिकोड़ो दियू ये माया संभाले ना
जुनि थे ये बाटा भाये ना ...... २

दूर बाटा खूब भागी ये सहेरा कू ...... २
मन नि लागि यख अखेरा कू

उड़ दा चखुला बल उड़ा दा जा
तिल संसार कथये न समझी पायो रे

भुल्दा मनखी बल तू भुल्दा जा
तिल अपरू परायु नि जनि पायो रे ...... २

द्वि दिना की ये दुनिया रे ...... २
फिर बी अक्ल दाढ़ तेरी नि आये रे

बगदा पानी बल बगदी जा
कैल तेथे यख ना समझी पायो रे

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

व्हैग्याई डिजिटल

व्हैग्याई डिजिटल
देश व्हैग्याई डिजिटल
फेसबुक अपरा मुखडी
मुखडी देख रंग ग्याई
व्हैग्याई बल डिजिटल ... २

पाणी नि मिल्नु
बिजली नि अब तक ऐई
बांज पौड़ी गे सारी पुंगड़ी
बल कैल चरण ये मा हैल
व्हैग्याई बल डिजिटल ... २

भूख नंगा अब भी छिन
रोजगार क्ख्क च जरा बोल्दिन्
बेरोजगारों की फौज खड़ी
स्मार्ट मोबाईल हौस बड़ी
व्हैग्याई बल डिजिटल ... २

मिल त कुछ नि बोलण
अब त डिजिटल ही चलण
देखा मुखडी अपरी अपरी सजै
कन देखेणु भुलु मि भी बतै
व्हैग्याई बल डिजिटल ... २

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