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Chachari, Jhode on social issues, location, love, fair etc- मेलो, आदि पर चाचरी

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 19, 2011, 02:51:54 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



बागेश्वर के दानपुर एव नैनीताल पर बना यह  चाचरी  ------------------------------------
ओ हो नैनीताल की रूणी नीमा, कैसकी रौलू दानपुर!
ओहो ओ लुडा हरीशा लुडा, गाडी चला  ले कानपुर! 

ओहो कांठहै का भड़काट,  कैसकी रौलू दानपुर

ओहो मेरी अठ्या अठ्या भेर लुडा, गाडी चला दे कानपुर !

ओहो मेरी माया धरी दिए,  कैसकी रौलू दानपुर!

ओहो गठ्या गठ्या भेर लुडा, गाडी चला दे कानपुर!

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बागेश्वर जिले के गरुड़ चाचरी :

हिट कौसला म्येरा गाडी में, घूमी अआली गरुड़ ला!

गरुड़ लेना टूटी गै ला, छ्वोड़ी कौसला छुटी गे ला!
गाई को गुबर ला,
तोर बाटी पुर आयूँ,  मै तेरी उम्र ला!
अस्याई को रेट ला,
उदासिये झन सुवा हई जाली भेट ला !
पाथनी लगड़ ला,
तलि रैगियो राम गंगा, मलि राछु भेव ला!
गाई को गुबर ला,
तोंर बटी पूर आयूँ, मै तेरी उबर ला!
असेली को रेट ला,
उदासिये झन सुवा, हैई जाली भेट ला!
पथनी लगड़ ला,
समजणो हुंछ सुवा, पुरान दबड़ ला!
पाकी गया मेव ला,
तलि चादू राम गंगा, मलि चंदू भेव ला!
मुरूली मुरेद ला,
दुःख छाडी दुःख हैजो, नै लिहया कुरेद ला!
भाड़री को बोट ला,
मुखडी देखनु कनु, तवील लाई ओट ला!


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



यह एक बहुत पुराणी चाचरी है उत्तराखंड के कुमाऊ क्षेत्र की! जहाँ एक नायक नायिका से कहता है! तू घास काटने आयेगी तो मै ग्वाला बनुगा! ध्यान देना, मै तेरे मार्ग पत्थर बनकर दबा हूँ !


मार झपैका, सिल्गुड़ी का पाला चाला

मार झपैका, ते होये हिसालू तोप!
मार झपैका, मै उड़न्या चड़ो सुआ!
मार झपैका, चिट्टी लिखी मालू पात में!
मार झपैका, सिणुक ले गोदि सुवा!
मार झपैका, मै आरुलो ज्ञ्वाला सुआ!
मार झपैका, तू ये जाए घास काटना!
मार झपैका, मै ला रुल गुवाल मिसिरी
मार झपैका, बाटी बाटी कटक सुआ..

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यह जुगल बंदी देखिये झोडे में.
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Male :
तवे कैले दियाना,  सौझन को फुना !
मै मैता गैयु, सौझन को फुना ,

Female :

इजू ले दियाना, सौझन को फुना !
जो तेरी इजू, सौझन को फुना !
वो मेरी सासू, सौझन को फुना !
नै दियो कौनी, सौझन को फुना !
त्वे कैले दियाना, सौझन को फुना !

Male:

मै मैता गियु, सौझन को फुना !
बाज्यू ले दियाना, सौझन को फुना !
जो त्यार  बाज्यू सौझन को फुना !
उ म्यार सौरा, सौझन को फुना
तवे कैले दियाना,  सौझन को फुना !
बेत की छोरी, सौझन को फुना !

Female :

मैतुड़ा गोयु, सौझन को फुना !
भौजी ले दियाना, सौझन को फुना !

Male :

जो तेरी भौजी, सौझन को फुना !
वो मेरी दीदी , सौझन को फुना !
नै दियो कौनी, सौझन को फुना !
तवे कैले दियाना,  सौझन को फुना !


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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


नायक नारायण ठाकुर और नायिका कुसुमा कॉलिन का प्रेमगीत भी हमें बताता है की प्रेम के लिए जातियां की संकीर्ण दीवारे कही बहुत छोटी पद जाती है! वो प्रेम ही है जिसने जाति और संप्रदाय की विभेदकारी दीवारों को इतिहास में ढहाया है और आज भी इस दीवारों को नकारता है!


छोड़ धौपेली, धौपेली को हाथ

तू बोनो ठोकर, मी छऊ कोलीण!
मेरी कोली सुनालो, ठोर मारी देला!
तू मगरी कोलीण, कई सेवा निला दि!
छोड़ छोटी को,  छोटी का हाथ!