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Rare Photographs of Uttarakhand - उत्तराखंड की दुर्लभ तस्वीरे

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, April 01, 2012, 11:52:37 PM

विनोद सिंह गढ़िया



मौन पालन का गौरवशाली इतिहास


ये हैं दो साल के मास्टर हेमंत कुमार। मधुमक्खी पालन केंद्र ज्योलीकोट के एक कर्मचारी का यह होनहार बेटा मात्र छह महीने की उम्र से ही मधुमक्खियों के बीच रहा। मधुमक्खियों की देखरेख का हुनर तभी सीख लिया जब पैरों पर खड़ा होना और चलना सीखा। दावा है कि ये विश्व के सबसे छोटे मधुमक्खी पालक हैं। जुलाई 1952 में लिए गए इस चित्र में मधुमक्खियों के बक्से के साथ हैं हेमंत।



नैनीताल में वर्ष 1952 में 4 अक्तूबर से 11 अक्तूबर तक आयोजित 14वीं मधुमक्खी प्रदर्शनी में अखिल भारतीय मधुमक्खी पालक संघ के महासचिव आरएन मुट्टो, अध्यक्ष एमडी चतुर्वेदी तथा सीएल साह।



इसी सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे पहुंचे सांसद डा. सीडी पांडे का प्रदर्शनी हाल में स्वागत करते हुए संघ के सदस्य।

सभी फोटो और विवरण 'द इंडियन बी जर्नल' से साभार लिए गए हैं। इस जर्नल से ये भी पता लगता है कि 1950-60 के दशक और उससे पहले मौन पालन को प्रोत्साहन देने और प्रचार-प्रसार के लिए प्रदर्शनी लगती थी, जिसमें बड़े-बड़े नेता, अधिकारी आते थे। मौन पालन पर ज्ञानवर्धक साहित्य का प्रकाशन होता था।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




Corbett was an avid photographer and after his retirement, authored the Man-Eaters of Kumaon, Jungle Lore and other books recounting his hunts and experiences, which enjoyed much critical acclaim and commercial success. Corbett spoke out for the need to protect India's wildlife from extermination. The Jim Corbett National Park in Kumaon was named in his honour in 1957."







विनोद सिंह गढ़िया