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Champawat - चम्पावत

Started by Rajen, January 03, 2008, 12:07:45 PM

Devbhoomi,Uttarakhand


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CHAMPAWAT JILE MAIN JI KYA UTTARANCHAL MAIN HAR JAGAH MAUSAM KE ANUSAAR BAHUT SUNDAR PHOOL KHILTE HAIN !


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गोरिल या गोलू देवता मंदिर

गोलू देवता, जिन्हें गोरिल या ग्वाल देवता भी कहा जाता है, कुमाँऊ के लोकप्रीय देवता हैं जिनके बारे में अनेक गीत लोग सदियों से गाते आ रहें हैं। यह न्याय के देव हैं तथा ये निर्दयता एवं अन्याय से पीड़ित असहाय लोगों को न्याय प्रदान करते हैं। यहां एक शिकायत पटी रखी है, जिसमें लोग न्याय के लिये अपना आवेदन पत्र डालते हैं।




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गोरिल या गोलू देवता मंदिर



माना जाता है कि यह मंदिर चंपावत के राजा कत्यूरी को समर्पित है जो अपने अटल न्याय एवं स्पष्ट तरीकों के लिये प्रसिद्ध थे एवं जो स्वयं ही विमाता के सुनियोजित षड्यंत्र के शिकार थे,

जिसने उन्हें एक एक लोहे के पिजड़े में बंद कर एक नदी में फेंक दिया था। ऐसा भी कहा जाता है कि वे चंपावत के जाने-माने राजा हरीश चंद गोरिल के मामा थे, जिनकी मृत्यु के बाद उनकी पूजा भी लोकदेव हारू के रूप में होती है।



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DEVDAAR KE GHANE JANGLON KE BEECH GHATOTKAKSHA MANDIR



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महाभारतकालीन वीर घटोत्कच्छ मंदिर



माना जाता है कि जब अपने 14 वर्षों के निर्वासित जीवन के दौरान पांडव यहां आये तो हिडिंबा नामक राक्षसी, पांडवों में सबसे शक्तिशाली भाई भीम पर आसक्त हो गयी। वह एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कर विवाह के लिये भीम को मोहित करने लगी। इसी बीच उसका राक्षस भाई आया और उसने देखा कि हिडिंबा भीम को सम्मोहित करने की चेष्टा कर रही थी और उसने युद्ध के लिये पांडव को ललकारा जिसमें वह राक्षस मारा गया।

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महाभारतकालीन वीर घटोत्कच्छ मंदिर



भाईंयों की सहमति पाने पर भीम, हिडिंबा के साथ जाकर उसके साथ रहने लगे। हिडिंबा ने भीम के पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम घटोत्कच्छ रखा गया। यह मंदिर घटोत्कच्छ तथा पांच पांडवों को समर्पित है क्योंकि यह माना जाता है कि इस स्थान के बहुत निकट ही भीम एवं हिडिंबा मिले थे। हिडिंबा को समर्पित एक मंदिर 2 किलोमीटर दूर है जो एक सुरंग द्वारा इस मंदिर से जुड़ा है। कहा जाता है कि घटोत्कच्छ मंदिर में चढ़ाया गया दूध हिडिंबा मंदिर में प्रकट होता है।

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नागनाथ मंदिर,CHAMPAWAT


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