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Champawat - चम्पावत

Started by Rajen, January 03, 2008, 12:07:45 PM

सुधीर चतुर्वेदी

                           Night Time at Champawat


Rajen

चम्पावत में मुख्य बाजार के पास एक प्राचीन मंदिर समूह है.  क्या कोइ इस बारे में जानकारे दे सकते हैं?

Devbhoomi,Uttarakhand

Quote from: सुधीर चतुर्वेदी on September 24, 2009, 02:00:43 PM
                                               बालेश्वर मंदिर


प्राचीन बालेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है तथा इसकी देखभाल यहां कई पीढ़ियों से रहे पुजारी गिरि परिवार द्वारा होती रही है। कहा जाता है कि मूल शिवलिंग की स्थापना बली द्वारा की गयी थी (वह दानव जिसे भगवान विष्णु ने अपने वामन अवतार में नरक भेज दिया था) और उसी के नाम पर यह मंदिर है। 10वीं से 12वीं सदी के बीच भगवान शिव के भक्त चंद राजाओं ने इस मंदिर का निर्माण एवं विस्तार किया। यहां की नक्काशी एवं कलाकारी में खजुराहों तथा महाबालेश्वर मंदिर के अवशेषों की झलक मिलती है। एक पहाड़ी मंदिर में हाथी की नक्काशी का होना एक असामान्य बात है तथा यह दक्षिण-भारतीय प्रभाव के कारण है। कभी मंदिर में सूक्ष्म ढ़ांचागत विशिष्टता थी तथा यहां एक मंडप भी था। मंदिर की स्थापत्य कला को बरेली के रोहिलखंडों द्वारा धूमिल कर दिया गया है जिन्होंने बार-बार कुमाऊं के मंदिरों पर आक्रमण किया।    

बालेश्वर, रत्नेश्वर एवं चंपावती दुर्गा के मंदिर समूहों के इसके पास होने के भी प्रमाण है जिन्हें चंद वंश के प्रारंभिक राजाओं ने निर्मित कराया था। अब यह परिसर भारत के पुरातात्विक सर्वेक्षण के संरक्षणाधीन है तथा यहाँ स्थापित चंपावती की मूर्ति की ही पूजा आम लोगों द्वारा होती है।  

इस वास्तुकला की सुंदरता इस तथ्य से प्रमाणित होती है कि इसमें तीन विशिष्ट शैलियों का मिश्रण है। ये हैं, होयसाला एवं चालुक्य शैली का दोहरी केंद्रीय भारतीय शैली का सजावटी तथा ऊंचाई योजना एवं विचारधारा तथा कुमाऊं के बहुबुजी आकृति वाली मंदिरों की ऊंचाई योजना। इन मंदिरों की छतों पर की सूक्ष्म नक्काशी इसके प्राचीन गौरव तथा कलात्मक उत्तमता के प्रतीक हैं।






बालेश्वर महादेव मंदिर


सुधीर चतुर्वेदी

                             View of Champawat Valley


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आध्यात्मिक रसधारा में डूबा अद्वैत आश्रम मायावती

लोहाघाट(चम्पावत): अद्वैत आश्रम मायावती में मां शारदा का 158वां जन्म दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान हुए वैदिक मंत्रोच्चार व भजनों से आश्रम परिसर आध्यात्मिक रंग में सराबोर हो गया। बाद में विशाल भंडारे का आयोजन भी हुआ।



एक शताब्दी पूर्व जिस कक्ष में स्वामी विवेकानंद जी ने एक पखवाड़े तक विश्राम कर भारत माता की दुर्दशा पर गहन चिंतन किया था उसी कक्ष में मंगलवार को उनकी गुरू माता मां शारदा का जन्म दिवस समारोह मनाया गया। मुख्य वक्ता प्रबुद्ध भारत पत्रिका के सम्पादक स्वामी सत्य स्वरूपा नंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपना जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित करना चाहिए।

जीवन में सदैव त्याग व समर्पण भाव से कार्य करने वालों की मां पग पग में रक्षा करती है। उन्होंने मां शारदा की जीवनी पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुए कहा कि मां त्याग, सेवा व समर्पण की मूर्ति हैं। इस दौरान भागवत कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि बाराही शक्ति धरती में मनुष्य के उत्थान के लिए अवतरित हुई थी।

वैदिक पाठ व भजनों के दौरान स्वामी हंसा नंद, प्रबंधक स्वामी त्रैलोक्या नंद, अस्पताल के संचालक स्वामी विज्ञेया नंद के अलावा श्री राम कृष्ण सेवा समिति के धन सिंह देव, त्रिभुवन पुनेठा, रूप सिंह बोहरा आदि थे। बाद में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

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बालेश्वर महादेव मंदिर

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण चांद शासन ने करवाया था। इस मंदिर की वास्तुकला काफी सुंदर है। ऐसा माना जाता है कि बालेश्रवर मंदिर का निर्माण 10-12 ईसवीं शताब्दी में हुआ था।












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                                    टैम्पल सिटी के नाम से भी मशहूर है चम्पावत
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ऐतिहासिक, धार्मिक व पौराणिक स्थलों के साथ नैसर्गिक सौंदर्यता को अपने  में समेटे चम्पावत को टैम्पल सिटी के नाम से भी जाना जाता है। जनपद में  देवी मॉ के शक्तिस्थल के रुप में मंदिरों की बहुतायत है। जहां विश्व  विख्यात बग्वाल मेले के लिए प्रसिद्घ मां बाराही धाम है, वहीं उत्तरभारत  का प्रसिद्घ पूर्णागिरी धाम और ब्यानधूरा मंदिर जो हर एक की मनोकामना  पूर्ण करते है। 

चम्पावत की ऊंचीं चोटी में क्रांतेश्वर, हिंग्लादेवी और मानेश्वर  मंदिर स्थापित है। गंडक नदी के समीप डिप्टेश्वर, ताड़केश्वर, महाभारतकालीन  घटोतकच्छ मंदिर तथा कुमाऊं के आराध्य देव गोरलदेव का मंदिर स्थापित है।
नगर के बीचों बीच बालेश्वर, नागनाथ मंदिर श्रद्घालुओं की मनोकामना पूर्ण  करने के साथ ही प्राचीन व अनूठी शिल्पकला के लिए प्रसिद्घ है। इसके अलावा  मांदली गांव में ज्वालादेवीमंदिर, शिवमंदिर, खर्ककार्की में विष्णुमंदिर,  कलेक्ट्रेट परिसर में गजारबाबा का मंदिर और चैकुनी गांव में सूर्यमंदिर  अपने कला शिल्प के साथ ही भक्तों की आस्था का केंद्र बने है।

तल्लादेश  क्षेत्र के मंच कस्बे में स्थापित गुरूगोरख नाथ मंदिर अपनी त्रियुगी धूनी  के अलावा निसंतान दंपत्तियों की मनोकामना पूर्ण करने के लिए प्रसिद्घ है।  जिम कार्बेट द्वारा इस क्षेत्र में नरभक्षी बाघ के आतंक से निजात दिलाने  के कारण भी यह पर्यावरण प्रेमियों के साथ विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का  केंद्र है।
रीठासाहिब में स्थापित गुरुद्वारा सिख धर्म के अनुयायियों के लिए  पवित्र तीर्थस्थल के रूप में विख्यात है। इसके अलावा जनपद के ओर छोर में  तकरीबन दो हजार से ज्यादा छोटे बड़े मंदिर है।


जिनमें पंचेश्वर शिवमंदिर,  सुई का आदित्यमंदिर, खेतीखान और पऊ मोस्टा का सूर्यमंदिर, भिंगराड़ा  ऐड़ीमंदिर, फटकशिला मंदिर गहतोड़ा, पूर्णागिरी मंदिर बापरू और मानेश्वर,  झूमाधूरी मंदिर, देवीधार मंदिर, पम्दा का भगवती मंदिर विशेष रूप से लोगों  की आस्था का केंद्र बने हुए है। जनपद के हरएक गांव में कम से कम आधा दर्जन  ईष्टदेवी देवताओं के मंदिर स्थापित है।