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Kalyan Sundar-Shiv Cave Kanda (Bageshwar) UK कल्याण सुन्दर शिव गुफा कांडा

Started by विनोद सिंह गढ़िया, March 07, 2013, 11:43:58 AM

विनोद सिंह गढ़िया

दोस्तों,
मैं आज आपको उत्तराखण्ड के बागेश्वर जनपद स्थित कांडा के पंगचौड़ा गांव में खोजे गये कल्याण सुन्दर शिव गुफा की जानकारी दे रहा हूँ, जिसकी खोज 4 अप्रैल 2011 को यहाँ के ग्रामीणों  और यहीं के निवासी श्री अर्जुन सिंह माजिला प्रधान सेवक महाकाली मंदिर कांडा द्वारा की गयी थी।

यह गुफा कांडा (बागेश्वर) बाजार से लगभग ढाई किलोमीटर दूर पंगचौड़ा गांव के जोगाबाड़ी-धराड़ी नामक स्थान पर है। मोटर मार्ग से डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर इस गुफा तक पहुंचा जाता है। श्री माजिला बताते हैं कि पिथौरागढ़ स्थित पाताल भुवेनेश्वर की भांति ही इस गुफा में अनेकों आकृतियां उभरी हुई हैं। गुफा के भीतर झरना, सरोवर व अन्य आकृतियां हैं। जिससे प्रतीत होता है कि गुफा पौराणिक काल की है। गुफा के भीतर एक फीट ऊंचा शिवलिंग विद्यमान है जिसे एक 22 मुखी नाग छत्र प्रदान कर रहा है। अन्दर ही एक दर्शनीय पानी का झरना है जो यहीं एक विशाल  कुंड में समा रहा है। इस गुफा को देखने के लिए अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड, हालैंड, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों के शोधकर्ताओं का दल आ चुका है। क्षेत्रीय लोग भी इस अविदित स्थल को पाताल भुवनेश्वर की तर्ज पर धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं।


प्रस्तुत हैं आपके लिए श्री माजिला जी द्वारा प्रेषित कुछ तस्वारें।

धन्यवाद

विनोद सिंह गड़िया



अधिक जानकारी के लिए कृपया इस मोबाइल या ई-मेल पर सम्पर्क करें -

Mobile No (Mr. Arjun Singh Majila) - +91-9411348938

E-Mail : temple.arjunsingh@gmail.com








एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जय शिव शंकर!

उत्तराखंड में कई जगह पौराणिक गुफाये है जैसे पातळ भुवनेश्वर (पिथौरागढ़) और अन्य जगहों पर! उत्तराखंड सरकार को इन गुफाओ के बार में अत्यधिक प्रचार प्रसार करना चाहिए ताकि पर्यटक देश विदेश से यहाँ घूमने आये! जो पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत अच्छा होगा!


Here is also news from Amar Ujala.

बागेश्वर। कांडा के समीप जोगाबाड़ी की खूबसूरत प्राकृतिक गुफा पर्यटकों की नजरों से ओझल है। इसके अंदर बहता सुंदर झरना, छोटी सी झील और वहां बनी मनमोहक आकृतियां प्रकृति की अनूठी धरोहरें हैं। इसके विकास के लिए पर्यटन विभाग ने अब 45 लाख का प्रस्ताव भेजा है।

कांडा बाजार से लगभग तीन किमी नीचे जोगाबाड़ी की इस गुफा का प्रवेश द्वार अत्यधिक संकरा होने के कारण पेट के बल घिसटकर जाना पड़ता है, किंतु अंदर की दुनिया विलक्षण है। गुफा की लंबाई लगभग दस मीटर, चौड़ाई छह मीटर तथा ऊंचाई तकरीबन सात फीट है। गुफा के अंदरूनी छोर से एक झरना बहता है। जिससे गुफा हमेशा ही झील की तरह लबालब भरी रहती है। गर्मियों में भी यहां दो फीट तक पानी रहता है। झरने का यह पानी स्थानीय नाले से होता हुआ भद्रकाली नदी में मिल जाता है। इस गुफा में सबसे हैरत में डालने वाली चीजें सफेद और कुछ अन्य रंगों की चट्टानों पर बनी आकृतियां हैं। गुफा की दीवारें और छत तक ऐसी दर्जनों आकृतियों से भरी पड़ी है। ये आकृतियां ब्रह्मकमल, शेषनाग, शिव, ब्रह्मा, विष्णु तथा अन्य देवी-देवताओं जैसी नजर आती हैं। कुछ लोगों का मानना है कि सदियों से अंदर बहते झरने के पानी से चट्टान की परतें घिस जाने के कारण ऐसी आकृतियां बनी हैं। चार साल पहले इस गुफा को खोजने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन माजिला ने बताया कि इस स्थल के विकास को लगातार मांग की जा रही है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 
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