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Reconsidering Delimitation - उत्तराखंड में परिसीमन पर फिर से हो विचार

Started by पंकज सिंह महर, January 08, 2008, 03:06:30 PM

पंकज सिंह महर

परिसीमन पर भाजपा-कांग्रेस की भूमिका से उक्रांद खिन्न

अल्मोड़ा। परिसीमन मामले पर भाजपा तथा कांग्रेस की चुप्पी से उक्रांद खफा है। उक्रांद के जिला इकाई की बैठक में दोनों राष्ट्रीय दलों से कहा गया कि वे परिसीमन रद्द कराने को सक्रिय पहल करके अपना उत्तराखण्ड हितैषी होने का प्रमाण दें।

उक्रांद नेताओं ने कहा कि भाजपा व कांग्रेस द्वारा परिसीमन के मामले पर चुप्पी साधना गंभीर है। इससे प्रतीत होता है कि इन दोनों दलों को पहाड़ के विकास से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों को परिसीमन के मसले पर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए। उत्तराखण्ड की जनता के हित में दोनों दलों को केन्द्र पर दबाव बनाने के साथ ही प्रदेश सरकार को परिसीमन रद्द करने का प्रस्ताव पारित करना चाहिए। बैठक में अकाली दल के विधायक हरभजन सिंह चीमा के उस बयान की निंदा की, जिसमें उक्रांद को पहाड़ का विरोधी बताया गया है। उक्रांद नेताओं ने कहा कि श्री चीमा भाजपा व कांग्रेस के इशारे पर बयान दे रहे है। प्रदेश सरकार पर भी आरोप लगा कि वह राजधानी, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी व बिजली से संबंधित समस्याओं के प्रति उदासीन बनी है।

पंकज सिंह महर

देहरादून: लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के नए परिसीमन को उत्तराखंड में लागू किए जाने के विरोध में उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने आंदोलन शुरू कर दिया है। राज्य में सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्ष कांग्रेस ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है।

यूकेडी राज्य सरकार में बीजेपी की सहयोगी है। अपने अध्यक्ष डॉ. नारायण सिंह जंतवाल की अगुआई में इस पार्टी ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जंतवाल का कहना है कि नए परिसीमन से राज्य के पर्वतीय जिलों में विधानसभा की 6 सीटें घट रही हैं। इससे पर्वतीय क्षेत्र के विकास में रुकावट आएगी। विधानसभा में पर्वतीय जिलों की आवाज कमजोर पड़ जाएगी। उनकी मांग है कि उत्तराखंड में नया परिसीमन लागू नहीं होना चाहिए। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री का ध्यान यूकेडी इस ओर आकृष्ट कर रही है। बीजेपी और कांग्रेस पर भी यूकेडी नेता निशाना साध रहे हैं।

हेम पन्त

उक्रांद द्वारा किया जा रहा परिसीमन का विरोध सर्वथा उचित है.... पहाडी लोगों के संघर्ष और शहादत के फलस्वरूप बना है उत्तराखण्ड राज्य.... और मैदानी लोग तो नये राज्य में शामिल होने को भी तैयार नहीं थे.... जनसंख्या के आधार पर पहाडी क्षेत्रों की सीटें कम करके मैदानी क्षेत्र की सीटें बढाने वाले इस परिसीमन का हर हाल में विरोध होना ही चाहिये... लेकिन जनहितों को ध्यान में रखते हुए और राजनीतिक महात्वाकांक्षा की सोच से ऊपर उठकर...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


We really suppport the views of UKD.. Govt of Uttarakhand should not play with sentiment of its people.

पंकज सिंह महर

Quote from: Hem Pant on January 22, 2008, 02:42:36 PM
उक्रांद द्वारा किया जा रहा परिसीमन का विरोध सर्वथा उचित है.... पहाडी लोगों के संघर्ष और शहादत के फलस्वरूप बना है उत्तराखण्ड राज्य.... और मैदानी लोग तो नये राज्य में शामिल होने को भी तैयार नहीं थे.... जनसंख्या के आधार पर पहाडी क्षेत्रों की सीटें कम करके मैदानी क्षेत्र की सीटें बढाने वाले इस परिसीमन का हर हाल में विरोध होना ही चाहिये... लेकिन जनहितों को ध्यान में रखते हुए और राजनीतिक महात्वाकांक्षा की सोच से ऊपर उठकर...

सही कहा हेम दा.....!
उक्रांद ने परिसीमन के खिलाफ आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया है, दो दिन पहले पार्टी ने सभी जिला मुख्यालयों पर परिसीमन के खिलाफ प्रदर्शन किया था और इसी क्रम में उक्रांद के वरिष्ठ नेता श्री त्रिवेन्द्र पंवार शहीद स्थल, देहरादून में ७२ घंटे के अनशन पर आज २२ जनवरी से बैठे हैं।
    यह एक ज्वलंत विषय है, हमारे आन्दोलनकारियों ने जिस प्रदेश की कल्पना की थी, इस परिसीमन के बाद उसका स्वरुप ही बदल जायेगा। आज इस विषय पर पूरे प्रदेश को एकजुट होकर फिर से संघर्ष करना होगा, भौगोलिक परिस्थिति हमारे प्रदेश की इतनी विषम है कि पर्वतीय क्षेत्रों में वैसे ही विकास की कमी हो रही है। ऎसे में  यदि पर्वतीय क्षेत्रों से विधान सभा की सीटें कम हों तो फिर अलग प्रदेश का क्या फायदा?

पंकज सिंह महर

परिसीमन के विरोध में उक्रांद ने दिया धरना  Jan 19, 03:10 am

पिथौरागढ़। पूर्वोत्तर राज्यों के साथ ही झारखण्ड की तरह उत्तराखण्ड को परिसीमन से मुक्त रखे जाने की मांग को लेकर उत्तराखण्ड क्रांति दल ने शुक्रवार को जिले भर में धरना-प्रदर्शन किया। पिथौरागढ़ समेत गंगोलीहाट, बेरीनाग, डीडीहाट समेत जिले के अन्य स्थानों पर धरना दिया।

शुक्रवार को उक्रांद के प्रांतीय नेतृत्व के आह़वान पर दल के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन कर धरना दिया। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नये परिसीमन से उत्तराखण्ड की मूल अवधारणा समाप्त हो जायेगी। वक्ताओं का कहना था कि परिवार कल्याण कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी के कारण राज्य के पर्वतीय क्षेत्र की जनसंख्या कम हुई है। इस कारण पर्वतीय क्षेत्रों की विधान सभा सीटें कम करना अन्यायपूर्ण है। वक्ताओं ने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान शहीदों के चलते उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण किया गया। आरोप लगाया गया कि परिसीमन उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। धरना-प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया गया। ज्ञापन में पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा झारखण्ड की भांति उत्तराखण्ड को भी परिसीमन से मुक्त करने की मांग की गयी है।

पंकज सिंह महर

पाँच राज्यों को परिसीमन से छूट

भारत सरकार ने कहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव नए परिसीमन यानी संसदीय क्षेत्रों के दायरे में फ़ेरबदल करने के बाद कराए जाएंगे लेकिन पाँच राज्यों को इससे छूट रहेगी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरूवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पूर्वोत्तर भारत के चार राज्यों असम, मणिपुर, अरूणाचल प्रदेश और नागालैंड के अलावा झारखंड राज्यों को परिसीमन से चुनाव कराने की छूट देने का फ़ैसला किया गया. केंद्र सरकार ने इन राज्यों में आदिवासी कोटा सहित आरक्षित सीटें बढ़ने की बजाय कम होने की चिंताओं के कारण यथास्थिति बरक़रार रखने के लिए अध्यादेश लाने के फ़ैसले को मंज़ूरी दी है.

बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने पत्रकारों को बताया कि पूर्वोत्तर के असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड तथा झारखंड में सीटों को लेकर यथास्थिति बरक़रार रखी जाएगी.


यदि इन राज्यों को परिसीमन में छूट दी जा सकती है तो उत्तराखण्ड को क्यों नहीं?

पंकज सिंह महर

परिसीमन पर बिफरे कांग्रेसी सीएम से की मुलाकात    Jan 22,

देहरादून। उक्रांद के बाद अब कांग्रेसियों ने भी परिसीमन के मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। कांग्रेसी विधायकों ने मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी से मुलाकात कर उत्तराखंड में परिसीमन यथावत रखने को शीघ्र केंद्र को प्रस्ताव भेजने की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री की तरफ से उन्हें सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला।

आयोग ने पूर्वोत्तर के चार राज्यों समेत झारखंड में परिसीमन को यथावत रखा है, जबकि शेष राज्यों में लोस व विधान सभा चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराने के निर्देश दिए हैं। सूबे में अभी तक उक्रांद ही इसके खिलाफत में सड़कों पर उतरा था, लेकिन अब कांग्रेस ने चुप्पी तोड़ते हुए विरोध शुरू कर दिया है। कांग्रेस के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष हरीश रावत के नेतृत्व में पार्टी के कई विधायकों ने पिछले दिनों दिल्ली में इस मसले के लिए बनी कैबिनेट कमेटी के अध्यक्ष प्रणव मुखर्जी से मुलाकात की थी। विधायक किशोर उपाध्याय के अनुसार जिन राज्यों में परिसीमन को यथावत रखा गया है वहां की प्रांतीय सरकारों ने इस बाबत केंद्र को प्रस्ताव भेजा था। इसी आधार पर वहां इसे यथावत रखा गया। श्री मुखर्जी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि यदि उत्तराखंड सरकार प्रस्ताव भेजती है तो उस पर जरूर गौर किया जाएगा। विधायक किशोर उपाध्याय के नेतृत्व में सोमवार को कांग्रेस विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री खंडूड़ी से मिला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और झारखंड एक ही साथ अस्तित्व में आए थे। जब आयोग झारखंड में परिसीमन यथावत रख सकता है तो यहां क्यों नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से परिसीमन यथावत रखने के संबंध में विस से प्रस्ताव पारित करा कर केंद्र को प्रस्ताव भेजने का आग्रह किया। श्री उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं दिया। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यमंत्री अजय टम्टा पर लगे आरोप की जांच कर उन्हें बर्खास्त करने की भी मांग की।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Mahar ji, this is a hot topic on political gallery of UK. The point raised by UKD is quite valid.

Quote from: पंकज सिंह महर on January 23, 2008, 11:56:22 AM
परिसीमन पर बिफरे कांग्रेसी सीएम से की मुलाकात    Jan 22,

देहरादून। उक्रांद के बाद अब कांग्रेसियों ने भी परिसीमन के मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। कांग्रेसी विधायकों ने मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी से मुलाकात कर उत्तराखंड में परिसीमन यथावत रखने को शीघ्र केंद्र को प्रस्ताव भेजने की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री की तरफ से उन्हें सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला।

आयोग ने पूर्वोत्तर के चार राज्यों समेत झारखंड में परिसीमन को यथावत रखा है, जबकि शेष राज्यों में लोस व विधान सभा चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराने के निर्देश दिए हैं। सूबे में अभी तक उक्रांद ही इसके खिलाफत में सड़कों पर उतरा था, लेकिन अब कांग्रेस ने चुप्पी तोड़ते हुए विरोध शुरू कर दिया है। कांग्रेस के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष हरीश रावत के नेतृत्व में पार्टी के कई विधायकों ने पिछले दिनों दिल्ली में इस मसले के लिए बनी कैबिनेट कमेटी के अध्यक्ष प्रणव मुखर्जी से मुलाकात की थी। विधायक किशोर उपाध्याय के अनुसार जिन राज्यों में परिसीमन को यथावत रखा गया है वहां की प्रांतीय सरकारों ने इस बाबत केंद्र को प्रस्ताव भेजा था। इसी आधार पर वहां इसे यथावत रखा गया। श्री मुखर्जी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि यदि उत्तराखंड सरकार प्रस्ताव भेजती है तो उस पर जरूर गौर किया जाएगा। विधायक किशोर उपाध्याय के नेतृत्व में सोमवार को कांग्रेस विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री खंडूड़ी से मिला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और झारखंड एक ही साथ अस्तित्व में आए थे। जब आयोग झारखंड में परिसीमन यथावत रख सकता है तो यहां क्यों नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से परिसीमन यथावत रखने के संबंध में विस से प्रस्ताव पारित करा कर केंद्र को प्रस्ताव भेजने का आग्रह किया। श्री उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं दिया। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यमंत्री अजय टम्टा पर लगे आरोप की जांच कर उन्हें बर्खास्त करने की भी मांग की।


पंकज सिंह महर

नये परिसीमन के लागू होने से पर्वतीय जनपदों के निम्न विधान सभा क्षेत्र कम हो जायेंगे
१- जिला चमोली से एक सीट (नन्दप्रयाग)
२- पौड़ी गढ़्वाल से दो सीटें (१- धूमाकोट २- बीरोंखाल)
३- पिथौरागढ़ से एक सीट (कनालीछीना)
४- बागेश्वर से एक सीट (कांडा)
५- अल्मोड़ा से एक सीट (भिकियासैंण)
पर्वतीय जनपदों से कुल ६ (छ्ह) सीटें कम होंगी, जो मैदानी जनपदों में जोड़ी जायेंगी निम्नानुसार-
१- देहरादून जनपद में एक सीट
२- हरिद्वार जनपद में दो सीट
३- नैनीताल जनपद में एक सीट
४- उधम सिंह नगर जनपद में दो सीट

शेष टिहरी, चम्पावत, रुद्रप्रयाग तथा उत्तरकाशी जनपदों में विधान सभा क्षेत्र यथावत रखे गये हैं।