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Nauling Devta Mandir Sangad, Bageshwar-नौलिंग देवता मंदिर सनगाड़, बागेश्वर

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 12, 2013, 11:14:00 AM









एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नौलिंग देवता को इस बार भी नहीं दी जाएगी पशुबलि

धरमघर। नौलिंग मंदिर में मंदिर कमेटी और क्षेत्रवासियों की बैठक में इस बार भी नवरात्र पर बकरों की बलि नहीं देने का फैसला किया गया। क्षेत्रवासियाें ने कहा कि पिछले साल इस व्यवस्था में सुधार हुआ है। इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। बैठक में दो दिवसीय मेले की तैयारियों पर चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसडीएम रेखा वक्ताआें ने कहा कि नौलिंग देवता के मंदिर में पशु बलि देने की परंपरा काफी पुरानी है। दो साल पहले तक यहां देवता को तकरीबन डेढ सौ बकरों की बलि दी जाती थी। बाद में उच्च न्यायालय ने मंदिरों में पशुबलि पर सख्ती के साथ रोक लगाने के निर्देश दिए। इस पर पिछले साल से अमल हो रहा है। इस बार भी पशुबलि नहीं होगी। बैठक में तय हुआ सात्विक तरीके से भगवान नौलिंग देवता की पूजा होगी। मेले को और अधिक आकर्षक बनाने के प्रयास किए जाएंगे। बैठक में मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र महर, दरबान सिंह, प्रताप सिंह, गोपाल सिंह, चंद्र सिंह, मथुरादत्त पंत, लालमणि पंत, किशोर पंत, केवलानंद पंत, प्रयाग दत्त पंत आदि उपस्थित थे।
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विनोद सिंह गढ़िया

अखंड दीये जलाने से मिलता है संतान सुख

बागेश्वर जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी दूर सनगाड़ गांव स्थित श्री 1008 नौलिंग देव का मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। लोगों का विश्वास है कि यदि कोई संतानहीन महिला मंदिर में 24 घंटे का अखंड दीया जलाती है तो उसे संतान सुख की प्राप्ति होती है। चैत्र और आश्विन माह में यहां मेला भी लगता है।
मान्यता है कि शिखर पर्वत स्थित श्री 1008 मूल नारायण भगवान की पत्नी सारिंगा से बज्यैंण देवता का जन्म हुआ। पांचवें दिन के स्नान के लिए वह पचार गांव स्थित धोबीघाट के नौले में गईं। स्नान के बाद नौले से एक बच्चा प्रकट हो गया। सारिंगा ने बालक को बंज्यैण देवता समझकर उसे पीठ में रखकर शिखर पर्वत ले आईं। बंज्यैण को डलिया में देखकर वह हैरत में पड़ गई। उन्होंने इस घटना की जानकारी मूूल नारायण भगवान को दी। नौले से प्रकट बालक का नाम मूल नारायण ने नौलिंग रखा। बड़े होने पर दोनों को काशी पढ़ने के लिए भेजा। पढ़ाई के बाद दोनों शिखर पर्वत लौटे। तब भनार गांव में चनौल ब्राह्मण का आतंक था। मूल नारायण जी ने बड़े बेटे बंज्यैण को भनार भेजा। चनौल ब्राह्मण के वध के बाद वह भनार गांव में ही स्थापित हो गए। इधर, सनगाड़ गांव में सनगड़िया राक्षस ने आतंक मचाया था। तब वह नर बलि लेता था। मूल नारायण जी ने नौलिंग को सनगाड़ भेजा। सनगाड़ जाकर उन्होंने सनगड़िया राक्षस का वध कर दिया। पूर्व में यहां छोटा सा मंदिर था। करीब 20 साल पहले पंजाब के जूना अखाड़ा के श्री महंत बद्री गिरी महराज के मार्गदर्शन में मंदिर का भव्य निर्माण हुआ। यहां हर वर्ष चैत्र और आश्विन माह में नवरात्र पर मेला लगता है। मंदिर के पुजारी महोली गांव के धामी परिवार हैं, जबकि पूजा-अर्चना कराने की जिम्मेदारी गोंखुरी के पंत लोगों की है।
मंदिर के पुजारी प्रेम सिंह और आन सिंह धामी बताते हैं कि नौलिंग देवता को षटरस भोजन का भोग लगता है। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु घंटी घड़ियाल, चांदी के छत्र, पूजा के काम आने वाली वस्तुओं के अलावा अपने पूर्वजों की स्मृति में धर्मशाला का भी निर्माण करते हैं।


गणेश उपाध्याय
Amar Ujala