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Bal Krishana Dhyani's Poem on Uttarakhand-कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 08, 2014, 08:15:59 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कया भुल व्हैगे मैसे
कया भुल व्हैगे मैसे
तू में दगडी किलै बोल्दि ना
कया भुल व्हैगे मैसे
ये माया को बुखार चडैकि
किलै वैथे अब दवाई पिलैदी ना
कया भुल व्हैगे मैसे
ये आँखा आँखा से मिलैकी
किलै अब ऊंथे चोरैन्दी तू
कया भुल व्हैगे मैसे
उजालों दिन दिखेकि मिथे
यखुलि अंधरों बाटा किलै छोड़ देंदी तू
कया भुल व्हैगे मैसे
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऐजा मेरो साथि
कदगा कदगा बोलो मि तैथे
ऐजा मेरो साथि
जेठ बैसाख बीती गैनी
बल अब आषाढ़ की बाती
कदगा कदगा ........
मन मेरो नि लगदो साथी
बल ऐकि दबाई तू कैजै
बुरांस फूली काफल पाकि यख
हिंसोल यूँ हाथों न खैजै
कदगा कदगा ........
तेर मेर प्रित ईनि च
जनि मि उकाली तू उंदारी
बारी बारी ऐगे सबी रितू यख
तैर ही बस अब ऐने की बारी
कदगा कदगा ........
ऐ फूलों की घाटी च तै बना
ये उजाड़ पहाड़े की ऐ दाती
बूढरि व्हैजण सै पैली साथी
ऐजा तू मिथे भेंटि
कदगा कदगा ........
ऐ जुनेली राता थे अब तू
बल इतगा ऐकि अब समजा दे
आँख्युमा थे आंसू भूले की
ईनकी ऊ निंदी तू पैठे दे
कदगा कदगा ........
बालकृष्ण डी ध्यानी
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किलै किलै मिथे तू.
किलै किलै मिथे तू
अब अपरि लगणि छे
जदगा बारी मि हेरौं ति थे
वदग और्री मि ति थे हेरनू छों
अध्याँरोमा मा रात बगत
अब गैणा पिछने रिटनु छों
जून की जुन्याली मा
युँ उजळू की बुकि लेनु छों
किलै किलै मिथे तू
अब अपरि लगणि छे
यकलु छे ऊ ठाव मेरो
तू दगड्या बणी की मेरो ऐजै
अदा रात को यु सुपनिया मेरो
सिरना मा ऐकि तू मेरो बुनिजै
सुबेर को .... सुबेर को
जबै जबै ऐ उषा आणि छे
मेरो मनको झझल्कोमा
पैल झल्की बस तू छे
किलै किलै मिथे तू
बालकृष्ण डी ध्यानी
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ईंनि जनि तनि वनि कनि व्हाली वा
ईंनि जनि तनि वनि कनि व्हाली वा
मुक भतिकि किलै मिथे दिनी व्हली गाली वा
अब त मिथे लगनि लगि किलै कि इतगा प्यारी वा
लस्का दस्का कैरी कि हीटनी च सारि स्यारी वा
सुन ऐजा जा सुपन्य बणी कि ऐजा मेर खैल मा
द्वीई द्वीई बैथिकि अब माया लगोंला मेर खैल मा
ना बिसरि जै मिथे मि त ना बिसरयुं द्यूंला तिथे
भेंट हुँई च तेरी मेर आच अचणचक पौड़ी बाजार मा
ईंनि जनि तनि वनि कनि व्हाली वा
ब्योली अब कबैर बनेली मेरी वा
बालकृष्ण डी ध्यानी
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अब बौल्या मि बणीग्युं छों
अब बौल्या मि बणीग्युं छों ,अब तू बी बौल्या बनै जैली कया ?
मेरो जिकोडो की ई पीड़ा थे , तै थे को बथे देलो कया ?
मि देख्दु तैथे सुपनिया मा , वैथे देख्दु मि आँखा खोली की
जै मि बोललो लाटा बणीकी वा आख़र मा रंगीजला कया ?
ये खेल छया क्षण को तरही घैल मि तेरो व्हैग्युं
जै जग्यां छन मेरो मन मा तेरो चित मा बी जगला कया ?
मेरो जियु थे मिल आज भ्तिक मिन तेरो नौ कैदे
सबै मि मेरो तै थे देकी तैथे वैकि कबि थाहा लगल कया ?
बालकृष्ण डी ध्यानी
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मिल अखबार ख्वलि बल
मिल अखबार ख्वलि बल
बस नेतों न ब्वालि
छप छपी खबरी देकि की
ना उड़ मेर तिबरी ना डंडाली
नौ बागीयों को बाग मा
देरादून को काज मा
एक बी डाली उपटि ना स्की
नौछमियों को राज मा
घ्वाड को बल खुटा टूटे
राजनीतियों न चूसा चूसे
खींच तानी सींच तानी
कैल रची हुलि ये करस्तानी
ऐगे फिर उमा उमाल जी
नि व्हाई कुच बी कमाल जी
हम जन् छय ऊनि रैग्युं
नेता वहैगैनि मालामाल जी
मिल अखबार ख्वलि बल .......
बालकृष्ण डी ध्यानी
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सुणी ले तू मेरो माया गीत
सुणी ले तू मेरो माया गीत
तै थे हरा मिले या ऐमे जीत
निस्चल कोरी माया बणी की
तू गईले ....गईले तू बल ये माया गीत
कन माया तू बाँधी लेलो
कन विन्थे अपरामा लूछी ले लु
ईं थे माया ना बोलदन
बल बोलदन ईं थे ज्वानी को तिस
सुणी ले तू मेरो माया गीत
माया बल करें नि जांदी
सुदी सुदी कै दगडी जुड़ै नि जांदी
आंक्युं की भासा च या
ये भासा कख पढ़े नि जांदी
सुणी ले तू मेरो माया गीत
अपरा अपरि ही उमजै जांदो
सुबेर च की रात जबै समज नि आन्दु
समझी जा तै थे वहैगे प्रीत
मिल त थिक ना मिली तबै बी थिक
सुणी ले तू मेरो माया गीत
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ये बाटो मा हिटदा हिटदा
ये बाटो मा हिटदा हिटदा
यो बाटो बी बल अब कटै जालो ...... २
ज्योति जिंदगी को यो यात्रा मा
दुक सदनि अब इन कने रालो
ये बाटो बाटो मा हिटदा हिटदा........
ये आँखा थे कबि वा हंसे देंदी
कबि यूँ थे वा रुवै जांदी
सुक की खोज करणा कोन
ये खुटा सदनि अब मिथे हिटे देंदी
ये बाटो मा हिटदा हिटदा........
सुबेर भतीक ब्योखनी काज बल
रात सैरी गुजरी सिरना गैणा गिनि बल
ऎना फिर बी कुच ऐ हात बल
सुदी सुदी यु जिंदगी को सारो कामकाज बल
ये बाटो मा हिटदा हिटदा........
बिशरा देंदी वा सब अपरा परया
बाटो न हम परी इनि कया टोटका कया
बिशरी गै मि हर्चि गै मि कख
निच मेरो खबर निच कूच अब मेरो पता
ये बाटो मा हिटदा हिटदा........
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यूँ उट्ठरयु मा
यूँ उट्ठरयु मा माया बसीच
विं पतळी अधरों देकदा देकदा
कदगा ये बाटा बिरडया छन
यूँ उट्ठरयु मा
बैठ्युं छों कलम और कागद लेकि
तेरा रूप की जबै मिल वा गागर देकि
भूली ग्युं बिसरि ग्युं कै बाण यख मि अयुं छों
यूँ उट्ठरयु मा
तेर उट्ठरयु न इन मै परी जादू कयाई
हर्चि गै सब मेरो मैसे कुच बी न राई
यखुली नि छों मि अब तू बस साथ मैमा
यूँ उट्ठरयु मा
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मि त अपरा गौं मुल्क जानू छों
मि त अपरा गौं मुल्क जानू छों
तू बी ऐजा भुला
अपरि ईं जिकुड़ी थे
तू इन और्री ना रुला
बुरांस फ्योंली फूली गेली
तै थे च क्या च पता
मस्त बसंत पहाड़ों पसरयों गे हुलो
तै थे च क्या च पता
अप्रि जल्म भूमि देख हाक देणी
तू बी विन्थे हाक देकि बथा
मि त अपरा गौं मुल्क जानू छों
तू बी ऐजा भुला
अपरि ईं जिकुड़ी थे
तू इन और्री ना रुला
मि दोल दामों बोलणो
मास्को बाजा मि रिझानु
धिगतालो वा मेरी दगडी लगाणो
ईं मेरी जिकुड़ी थे जी ऊ नचानु
तू बी ऐकि चल मेरो दगड़
विन्थे दुंला वख जैकी नचा
मि त अपरा गौं मुल्क जानू छों
तू बी ऐजा भुला
अपरि ईं जिकुड़ी थे
तू इन और्री ना रुला
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