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आयरन वॉल ऑफ इंडिया - Player त्रिलोक सिंह बसेड़ा भंडारी गांव (देवलथल), पिथौरागढ़

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 06, 2014, 08:13:28 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dosto,

We sharing here inform action about a famous Football Player Shri Trilok Singh Bhandwari who was known as "Iron Wall of India.


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ऐसे खेली फुटबॉल कि बने 'इंडिया की आयरन वॉल'
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पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी त्रिलोक सिंह बसेड़ा ने गांव में फुटबॉल खेलने की शुरूआत कपड़े की बॉल बनाकर की और फिर एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने तक का मुकाम हासिल किया।

फुटबॉल में उनका ऐसा जलवा ऐसा चला कि लोग उनके मुरीद होने लगे थे। 'आयरन वॉल ऑफ इंडिया' के खिताब से नवाजे गए त्रिलोक सिंह को मरणोपरांत देवभूमि खेल रत्न सम्मान देकर उत्तराखंड खेल विभाग ने उनको सच्ची श्रद्धांजलि दी है। (Amar Ujala)


M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

'आयरन वॉल ऑफ इंडिया' के खिताब से सम्मानित
किसान परिवार में पैदा हुए त्रिलोक सिंह बसेड़ा 1962 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में भारतीय फुटबॉल टीम के अहम खिलाड़ी थे। भारतीय टीम ने तब दक्षिण कोरिया को 2-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था।

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तब उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 'आयरन वॉल ऑफ इंडिया' के खिताब से सम्मानित किया था। उनके बड़े पुत्र भूपेंद्र सिंह बसेड़ा के अनुसार 16 साल की उम्र में 1950 में ईएमई सेंटर सिकंदराबाद में सेना में भर्ती हुए।

उन्होंने बटालियन एथलेटिक्स में तीन स्वर्ण जीते। जल्द सेना की फुटबॉल टीम में शामिल हो गए। डीसीएम कप, डूरंड कप, एसएन बनर्जी फुटबॉल प्रतियोगिताओं में भी उनकी टीम खिताब जीती।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



खेल के दम पर 1966 में उनको सेना में जेसीओ पद पर पदोन्नति मिली। इस बीच 1962, 1965 और 1971 की लड़ाई में त्रिलोक सिंह ने बंदूक से भी निशाना साधा। मगर मैदान में लगी एक चोट ने उनको असहाय कर दिया। 1979 में मात्र 45 वर्ष की उम्र में ईएमई सेंटर हॉस्पिटल में उनकी मृत्यु हुई।

मरणोपरांत देवभूमि खेल रत्न सम्मान
त्रिलोक सिंह बसेड़ा
पिता : लक्ष्मण सिंह बसेड़ा
माता : कौशल्या बसेड़ा
जन्म स्थान : भंडारी गांव (देवलथल), पिथौरागढ़
जन्म तिथि : 18 अक्तूबर 1934
शिक्षा : प्राथमिक शिक्षा 1945 में अल्मोड़ा, 1947-48 में जूनियर हाईस्कूल देवलथल और हाईस्कूल 1962 में सिंकदराबाद से।
नौकरी : ईएमई (सेना)
मृत्यु : फरवरी 1979

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

लाइफ टाइम अचीवेंट अवॉर्ड
हरिदत्त कापड़ी
राष्ट्रीय पुरस्कार- अर्जुन अवॉर्ड
पिता- वीर देव कापड़ी
माता- मंदोदरी देवी
जन्म स्थान- चिड़ियाखान (मुवानी), पिथौरागढ़
जन्म तिथि- पांच अगस्त 1942
शिक्षा- प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल मुवानी से ली
नौकरी- 29 जून 1957 को 14 वर्ष की उम्र में ब्वॉयज कंपनी बंगाल में भर्ती हुए और 1980 में रिटायरमेंट लिया।
खेल- बास्केटबॉल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 देवभूमि उत्तराखंड द्रोणाचार्य अवॉर्ड
नारायण सिंह राणा
पिता- रतन सिंह राणा
माता- जगो देवी राणा
जन्म स्थान- चिलामू (धनोल्टी), टिहरी गढ़वाल
जन्म तिथि- 15 सितंबर 1951
शिक्षा- ग्रेएजुशन देहरादून, हाईस्कूल उत्तरकाशी से
नौकरी- आईटीबीपी में सब-इंस्पेक्टर
खेल- निशानेबाजी, अंतरराष्ट्रीय कोच

ये है पुरस्कार राशि
उत्तराखंड खेल रत्न - पांच लाख रुपए, स्मृति चिन्ह, ब्लेजर।
देवभूमि द्रोणाचार्य अवॉर्ड - तीन लाख रुपए, स्मृति चिन्ह, ब्लेजर।
लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड- पांच लाख रुपए, स्मृति चिन्ह, ब्लेजर।
(source Amar ujala)

पंकज सिंह महर

 आज मन बहुत हर्षित और प्रफ्फुलित है, क्योंकि सुबह ही अखबार में पढा कि मेरे क्षेत्र के दो महान खिलाडियों का सम्मान हमारी सरकार करने जा रही है, जिन पर आज तक हमें ही गर्व था, अब पूरा उत्तराखण्ड उनको जानेगा और अपने को गौरवान्वित महसूस करेगा। 1962 के जकार्ता एशियाड के फाईनल में साउथ कोरिया को फुटबाल में हराने वाली टीम के सदस्य स्व० त्रिलोक सिंह बसेड़ा, जिन्हें आयरन वाल आफ इण्डिया का खिताब दिया गया, मेरे क्षेत्र बाराबीसी (देवलथल) के भण्डारीगांव के निवासी थे, को उत्तराखण्ड खेल रत्न तथा अर्जुन अवार्डी श्री हरिदत्त कापड़ी जो बास्केटबाल के अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे, को उत्तराखण्ड का खेल हेतु लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया जा रहा है, यह भी हमारे ही क्षेत्र देवलथल के निवासी हैं।
यह क्षण वास्तव में मेरे लिये गौरवमयी हैं, साथ ही एक पीड़ा भी है कि मेरे क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन उनकी प्रतिभा संसाधनों के अभाव में दम तोड़ देती है, जब कि खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिये देवलथल के मध्य में पीपलचौर नामक स्थान पर राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम लायक भूमि है, लेकिन किसी का भी ध्यान उसकी ओर नहीं गया, स्थानीय लोगों ने ही उसे अपने स्तर से खेल-कूद प्रतियोगिता होने योग्य बनाया है, मेरा सुझाव है कि देवलथल के पीपलचौर फील्ड में स्व० त्रिलोक सिंह बसेड़ा जी के नाम पर एक मिनी स्टेडियम का निर्माण किया जाय तथा उनके नाम पर एक राज्य स्तरीय फुटबाल प्रतियोगिता का भी आयोजन होना चाहिये।