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Sher in Garhwali Language - गढ़वाली भाषा में शेर

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 15, 2015, 08:24:44 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुनीता शर्मा‎


एक छोटी गढ.वाली ग.ज.ल
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सैं गुसैं जि हूंदो
आज क्यांकु रूंदो ।

एक धार करगंड
हैंक धार ब्यूंदो ।

भलु मिसैक छांदो
त, तर इन नि चूंदो ।

नी होंदी तमसगेर
फट नि फुटदो स्यूंदो ।

चलणी छ सांस अबि भी
छैं छ छ्वारा ज्यूंदो ।

....नेत्रसिंह असवाल, कविता संग्रह 'ढांगा से साक्षात्कार' बटि ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur


आज का अनुबादित गढ़वाली शेर

वींथै देखा लेकि म्यारु दिल , *कतका * बौलणीच वा
* चीज़ मेरी , अर, मेरी चीज़ पर * अकडीणी च वा
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*कतका = कितना * बौलणीच = इतराना , खुश होना !
* चीज़ मेरी = मेरा दिल* ! अकडीणी = इतराना , एठना , रौब

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur
July 24 at 10:22

आज का अनुबादित शेर गढ़वाली में

खाणु त खैनी, कतकै बगत म्यारा * सौं वींन
अब त्यारा सौं की मी , कुई *प्रतीत नी
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* सौं = कसम ! *प्रतीत = भरोसा , यकीन

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur
July 15 at 

आज का अनुबादित गढ़वाल शेर

*बणाणु त * बणये द्यु , जर सी बात बड़ी
*छुयूँ से ना , *छुयलू से लगद *छुयलू dair मी
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*बणाणु = कहने को , ,लगाना ! * बणये = बनना , मिसाना !
*छुयूँ = बातो से ! *छुयलू = कान फ्यूसी करने वाले ! dair = डर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज का अनुबादित गढ़वाली शेर

देकि चोटमा चोट , हैसुणुच कुई
हैंसी हैंसी की लुकाणुच अपणु दर्द कुई !
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'प्रतिबिम्ब' बर्थवाल जी का एक शेर का अनुबाद

(दर्द की बिछा कर बिसात, मुस्करा रहा है कोई
मुस्करा कर 'प्रतिबिम्ब' गम छुपा रहा है कोई -