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पहाड़ की नारी पर कविता : POEM FOR PAHADI WOMEN

Started by Meena Pandey, January 31, 2008, 10:15:10 AM

Risky Pathak

Meena Ji In Sundar Rachnao ke liye bhot bhot dhanywaad....

Such hi kha hai...

Jhaa naa pahunche Ravi, Wha pahunche Kavi

&

A pen is mighter than sword.

KAILASH PANDEY/THET PAHADI

Great job Pandey jew.....keep it up.

Quote from: M S Mehta on March 03, 2008, 11:45:22 AM

It is our fortune that Meena is our regular member. Definitely she has composed heart touching poems.

All the best to her.. Hope to get many more.

Quote from: M S Mehta on February 28, 2008, 01:33:43 PM




पंकज सिंह महर

गिर्दा उवाच:-

जैंता एक दिन तो आयेगा

इतनी उदास मत हो
सर घुटने मे मत टेक जैंता
आयेगा, वो दिन अवश्य आयेगा एक दिन

जब यह काली रात ढलेगी
पो फटेगी, चिडिया चह्केगी
वो दिन आयेगा, जरूर आयेगा

जब चौर नही फलेंगे
नही चलेगा जबरन किसी का ज़ोर
वो दिन आयेगा, जरूर आयेगा

जब छोटा- बड़ा नही रहेगा
तेरा-मेरा नही रहेगा
वो दिन आयेगा

चाहे हम न ला सके
चाहे तुम न ला सको
मगर लायेगा, कोई न कोई तो लायेगा
वो दिन आयेगा

उस दिन हम होंगे तो नही
पर हम होंगे ही उसी दिन
जैंता ! वो जो दिन आयेगा एक दिन इस दुनिया मे ,
जरूर आयेगा,

Meena Pandey

VIDROH...........a revolution

हेम पन्त

मीना जी!! टुकडों में अपनी कविताओं के दर्शन करवा रहीं हैं!! विद्रोह पर सुन्दर कविता लिखी है... विद्रोह का तात्कालिक असर नजर आये ये जरूरी नहीं! 1857 का संदर्भ खूब लिया है...

पंकज सिंह महर

मीना जी,
        आपने बहुत सुन्दर रचनी की है और आपका कहना भी सही है कि विद्रोह कोख से नही आता, वह तो सामाजिक जरुरतें जब पूरी नहीं होती, हक मांगने से नहीं मिल पाता, सामन्तवादी, फासीवादी लोगों के चंगुल से छूटने के लिये विद्रोह होता है, सही मायने में इसे विद्रोह नहीं "हक की लड़ाई" कहना चाहिये।

और भी रचनायें आपसे अपेक्षित हैं...।

KAILASH PANDEY/THET PAHADI


Meena Pandey

ये सर्दियाँ

इन तपती दोपहरो मे
याद आते है
सोयाबीन के दानो की तरह
तवे पर चट्कते सर्द दिन!

पुराने ऊन की
निमेली स्वटर और
उस पर से पिछली सर्दियों की बू!

अंगीठी की आंच पर से
सरकते ठिठुरते दिन और
रजाई की खींचतान मे गुजरती
लम्बी राते!

ये सर्दियाँ बोझिल है
पुराने दिनों की यादे
पसीना बन के बह रही है!

मीना पाण्डेय

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Pandey Ji..

Great composition..... Thanx.

Quote from: Meena pandey on March 25, 2008, 03:36:30 PM
ये सर्दियाँ

इन तपती दोपहरो मे
याद आते है
सोयाबीन के दानो की तरह
तवे पर चट्कते सर्द दिन!

पुराने ऊन की
निमेली स्वटर और
उस पर से पिछली सर्दियों की बू!

अंगीठी की आंच पर से
सरकते ठिठुरते दिन और
रजाई की खींचतान मे गुजरती
लम्बी राते!

ये सर्दियाँ बोझिल है
पुराने दिनों की यादे
पसीना बन के बह रही है!

मीना पाण्डेय

KAILASH PANDEY/THET PAHADI

छा गये पाण्डेय जी महाराज इसके लिए एक करमा मेरी और से बटोर इनाम आपको दिया जाता है.... :) :) :)

Quote from: Meena pandey on March 25, 2008, 03:36:30 PM
ये सर्दियाँ

इन तपती दोपहरो मे
याद आते है
सोयाबीन के दानो की तरह
तवे पर चट्कते सर्द दिन!

पुराने ऊन की
निमेली स्वटर और
उस पर से पिछली सर्दियों की बू!

अंगीठी की आंच पर से
सरकते ठिठुरते दिन और
रजाई की खींचतान मे गुजरती
लम्बी राते!

ये सर्दियाँ बोझिल है
पुराने दिनों की यादे
पसीना बन के बह रही है!

मीना पाण्डेय