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Development Survey Of Uttarakhand - उत्तराखंड राज्य के विकास का सर्वेक्षण

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, February 13, 2008, 04:13:02 PM

How do you rate Uttarakhand progress during these 9 yrs ?

Below 25 % Development
21 (46.7%)
25 % Development
11 (24.4%)
50 % Development
4 (8.9%)
75 %- Development
0 (0%)
Poor Performance
12 (26.7%)

Total Members Voted: 45

Voting closes: February 07, 2106, 11:58:15 AM

सत्यदेव सिंह नेगी

    राह से भटकी सड़क                Jun 20, 11:37 pm        पौड़ी गढ़वाल। सरकारी महकमे 'सर्वशक्तिमान' हैं। वे राई को पहाड़ बना सकते हैं और पर्वत को राई। पौड़ी जिले में महकमो की इस 'ताकत' का अहसास किया जा सकता है। कहीं सूखे तालाबों में मछलियां तैर रही हैं तो कहीं तेरह साल पहले 'बनी' सड़क गायब है। अब इसी कड़ी में एक और कारनामा जुड़ गया है। मामला उसी इलाके का है जहां सड़क 'लापता' है। लोनिवि की 'मेहरबानी' से एक सड़क रास्ता 'भटक' गई है। सड़क जानी थी कांडई मल्ली, पहुंच गई मासौं। मामला खुलने पर अफसर पैंतरेबाजी दिखा रहे हैं। तरह-तरह के तर्क ढाल के रूप में अपनाए जा रहे हैं, लेकिन यह क्यों हुआ, इसका जवाब किसी के पास नहीं।
पौड़ी गढ़वाल में लोक निर्माण विभाग के कारनामों की फेहरिस्त लम्बी है। इसी फेहरिस्त में शामिल है साल 2006 में स्वीकृत हुई एक सड़क। इस साल कांडई मल्ली गांव के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से सड़क स्वीकृत हुई। आसपास के ग्रामीणों को लगा कि अब जाकर वर्षो पुराना सपना साकार हुआ। चार किलोमीटर लंबी यह सड़क परसुंडाखाल से कांडई मल्ली तक जानी थी। ग्रामीणो की यह खुशी तब काफूर हो गई, जब लंबे समय तक सड़क बनी नहीं। महकमे में जाकर दरियाफ्त की तो पता चला कि सड़क मासौं पहुंच चुकी है। हैरत यह है कि परसुंडाखाल से काडई की दूरी मात्र चार किलोमीटर है, जबकि मासौं की दूरी छह किलोमीटर। मासौं तक बनी सड़क पर 1 करोड़ 39 लाख 45 हजार रुपए खर्च किए गए, वहीं अनुरक्षण पर 10 लाख 96 हजार रुपए खर्च आया।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6507696.html

Devbhoomi,Uttarakhand

स्वास्थ्य सेवाएं ठप, भटकते रहे मरीज



उत्तरकाशी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पर मारपीट का आरोप लगाते हुए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महासंघ ने कार्यबहिष्कार किया। संघ की मांग है कि सीएमएस का स्थानांतरण किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग न मानी गई तो 24 जून से बेमियादी हड़ताल की जाएगी। इससे दूरदराज से आए मरीजों को परेशानी का सामना करना पडा।

स्वास्थ्य कर्मियो के कार्य बहिष्कार के कारण मरीज इधर से उधर भटकते रहे। यहा तक कि मरीजों को पर्ची तक नहीं मिली। उधर एएनएम के के हड़ताल के बाद तो लोगों को अपने नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य की चिंता सता ही रही है।

चार दिनों से अस्पताल प्रशासन के बीच चल रहे आपसी विवाद के चलते आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उधर महासंघ को स्टाफ नर्सो ने भी अपना समर्थन दिया है।

इससे भर्ती मरीजों को भी परेशानियों से जूझना पड़ा। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरएस रावत ने बताया कि महासंघ को वार्ता के लिए बुलाया गया है। कार्य बहिष्कार के दौरान चिकित्सा एंव परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष महिपाल सिंह राणा, जोगेन्द्र पडियार, गिलासी देवी, मदन सिंह डोगरा, विमल सेमवाल, पदम सिंह आदि शामिल थे।



सत्यदेव सिंह नेगी

खतरे में पौड़ीवासियों की जिंदगी   
   पौड़ी गढ़वाल। अब बारिश से शहर के जर्जर आवासीय भवनों में रह रहे लोगों की जिंदगी खतरे में हैं। ऐसे भवनों की संख्या 165 है, जबकि 18 सरकारी भवन खतरे में हैं।
पौड़ी शहर की भौगोलिक स्थिति पर नजर दौड़ाए तो यहां भूस्खलन की संभावनाएं नहीं हैं, लेकिन शहर के पुराने आवासीय भवनों ढहने से बड़ा हादसा हो सकता है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन जी रहे परिवारों के 85 भवन अभी भी ऐसे हैं जो जीर्ण-शीर्ण स्थिति में हैं और इन भवनों पर दरारों का जाल उभरा हुआ है। पालिका की सर्वे के मुताबिक जीर्ण-शीर्ण भवनों की संख्या 178 हैं। इनमें से 93 भवनों की मरम्मतीकरण के लिए 1 लाख 80 हजार रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। अभी 85 भवन शेष हैं, जिनकी हालत पस्त है। पालिकाध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद कहते हैं कि इन भवनों के लिए धनराशि मंजूर होते ही आवंटित कर दी जाएगी। पालिका गरीब परिवारों को मरम्मत के लिए धनराशि जारी करती है, लेकिन गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन कर रहे परिवार पालिका के नियंत्रण से बाहर नजर आ रहे हैं। शहर में एपीएल परिवारों के 80 भवन ऐसे हैं जो जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है। इन भवनों को मरम्मत करवाने के नोटिस थमाए गए हैं लेकिन अभी तक भवनों की मरम्मत नहीं हुई है। शहर में 18 पुराने जीर्णशीर्ण भवन भी हैं। अंग्रेजों के जमाने के ट्रेजरी भवन में सब रजिस्ट्रार आफिस में पानी टपकने लगता है। दीवारों पर दरारें हैं और यह भवन कभी भी मिट्टी में मिल सकता है। स्वास्थ्य विभाग का नर्स हास्टल की हालत तो बेहद संवेदनशील हैं। अंदर और बाहर दोनों ओर दरारें पड़ी है। भवन खाली करवा दिया गया है, लेकिन यदि यह बारिश में गिरता है तो इसके आसपास स्थित आवासीय भवन में रह रहे लोगों को खतरा हो सकता है। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. एलके गुसांई ने बताया कि भवन को ध्वस्त करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
जिलाधिकारी दिलीप जावलकर का कहना है कि संबंधित विभागों ने निदेशालय स्तर पर प्रस्ताव भेजे हैं और प्रस्तावों को स्वीकृति मिलते ही भवनों का निर्माण होगा।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Now. what kinds of BJP Govt is trying to convey to the public. See this news.


घर-घर पहुंचाएंगे सरकार की उपलब्धियां
Jan 04, 10:21 pm
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अल्मोड़ा: भाजपा नगर मंडल की एक बैठक भाजपा कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में सरकार के चार वर्षो के कार्यकाल की उपलब्धियां जन-जन तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। जिले के सभी न्याय पंचायत व वार्ड स्तर पर बैठक आयोजित करने की बात कही गई। 15 से 25 जनवरी तक नगर के सभी वार्डो में प्रपत्र के जरिये सूचना एकत्र करने की बात कही गई। घर-घर जाकर सूचना एकत्र करने के लिए कार्यकर्ताओं का आह्वान किया गया। नए सदस्य भी बनाने की बात कही गई। बैठक में अरविंद बिष्ट, हरीश पंत, पंकज जोशी, महेश बिष्ट, राजीव गुरूरानी, अजय वर्मा, एलके पंत, कैलाश गुरूरानी, रवि रौतेला, धर्मेद्र बिष्ट, अंकुर कांडपाल, निर्मला जोशी, गोविंद पिलख्वाल, कविंद्र पांडे, राजेंद्र मेहता, अजीत कार्की, दीपा बिष्ट सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7132832.html

Anil Arya / अनिल आर्य

दो साल में शुरू होगा
उत्तराखंड का एम्स
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि उत्तराखंड को अगले दो साल के अंदर एम्स की सौगात मिल जाएगी। गढ़वाल के सांसद सतपाल महाराज को एक पत्र के जरिए आजाद ने एम्स का निर्माण कार्य दो साल में पूरा करने का लक्ष्य बताया है।
http://epaper.amarujala.com//svww_index.php

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Anil Arya / अनिल आर्य

देहरादून-हरिद्वार-नैनीताल 'मिशन टाउन'
जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत तीनों शहरों में ही होंगे प्रमुख रूप से कार्य
देहरादून। जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन योजना (जेएनएनयूआरएम) नगर विकास मंत्री मदन कौशिक के जिले में सबसे तेज दौड़ रही है। आश्चर्य दून जिले की स्थिति पर है। चार वर्षोँ में यहां करीब 50 फीसदी ही खर्च हो पाया है। हरिद्वार की बात करें तो यहां खर्च की स्थिति करीब 80 फीसदी है।
सदन में कांग्रेस विधायक दिनेश अग्रवाल के अतारांकित सवाल के जवाब में मिशन योजना की यह हकीकत सामने आई। अग्रवाल ने पिछले चार वर्षों में मिशन योजना की ए-टू-जेड स्थिति के बारे में पूछा है। मिशन योजना में तीन शहर देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार को मिशन टाउन माना गया है।
यानी इन शहरों में ही प्रमुख रूप से कार्य होंगे। मगर सब मिशन टाउन बतौर तीस से ज्यादा शहरों को लिया गया है। इन जगहों पर मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं की लागत 69678.64 लाख है। चार सालों में अभी तक 30630 लाख ही रिलीज किया गया है। खर्च की स्थिति देखें, तो यह सिर्फ 18338.75 लाख है।
जेएनएनयूआरएम: जिले में कहां क्या स्थिति
जनपदस्वीकृत लागत   अवमुक्तखर्च (लाख क्व में)
नैनीताल     9644.52  3605.08      1425.75
ऊधमसिंहनगर 5839.00  2917.87      2216.00
पिथौरागढ़    1096.02    548.01        428.00
चंपावत       381.15    190.58           3.00
अल्मोड़ा       833.32   416.66        154.00
देहरादून     38574.98 15093.28     7798.00
हरिद्वार      12724.21   7565.81     6102.00
पौड़ी          585.44     292.71       212.00
30 से ज्यादा शहरों को माना गया सब मिशन टाउन
खर्च में हरिद्वार सबसे आगे, देहरादून की स्थिति आश्चर्यजनक
http://epaper.amarujala.com