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Rajula Malushahi Immortal Love Story - राजुला मालूशाही: अमर प्रेम गाथा

Started by पंकज सिंह महर, March 10, 2008, 05:47:12 PM

g_bisht_2006

STORY OF RAJULA MALUSHAHI HAD AN IRONICAL ENDING COZ THOUGH THEY WERE MARRIED BUT THEY WERE POISENED BY RAJULA'S FATHER  SO THE STORY IS REALY NOT  CORRECT

Mukesh Joshi

राजुला मालुशाई की ये कहानी जागर के रुपमे
डॉ. गोविन्द चातक द्वारा लिखित (गढ़वाली लोक गाथाए ) से ली गई है

हे रंगीली वैराट मा रंद होलो रंगीलो दोलाशाई
अन्न का कोठार होला वैका धन्न का भंडार
सोना की सिरवाणी होली रूपा की पैद्वनी
अणभुक्तो खजानों होलो हीरा मणियोंन भ्रयुन
चार कोणयो चोसठ दिशो मा होलो वैको धधकारो.
नों लाख कैतुरा होला म्हैली -मुसद्दी रेती-मैती .
पर राजा होलो निपूतो जनों डालो -
तब एक दिन वै की राणी कना बैन बोदी :
हे राजा , आग लग्यां तेरा धन का भंडारों .
तेरो यो राजपाट कैन खाण , हम ओती रे गवां
रंगीलो दुलाशाई हवई गैलो बिर्ध-
हे मेरी रन्यो,भाग पर ओलाद नी मेरी .
तब राजा दिन की भूक हरची रात की निंद्रा ,
ओलाद का खातिर अब क्या बुद करुला ?
कै देव पूजला ? कै तीर्थ जौला
तैकि एक राणी होली धर्मावती राणी
तै राणीन दान करे पुन्न तीर्थो गै न्हेणु
देवतों का नों दूँगा पूजीन वीन.
तब राजा थे आधी अध् रात स्वीणो ह्वेगे .
हे राजा मेरी जात्रा आई तू हरी हरद्वार :
हरि हरिद्वार पंचकेदार बागेश्वर बैजनाथ .
                                             जारी है

Mukesh Joshi

तब लीक सज -बज सोल सो कैतुरो चले राजा जात्रा
चले राजा लीक मल्योऊ सी टोली सात दिन सात राती
दैव की रंचना रची ,तब कनो संजोग जुड़े
सुनपति शोंक रंद होलो सौक्याण  देश ,
वो भी बाटा लग्यु छो जातरा का जणुक;
वे दगडी होली गांगुली सौक्याण कज्याण वैकी
वीन भी  देवतों का नों दूँगा पूजीन
गदेरो का नों छुबडुली नहेणी,
बीती गै छै आदी उमर संतान नी जलमी
ओंदी जातरा सुमरदी नंदा देवी
ओंदे बागेश्वर,बागनाथ ,हरी हरिद्वार .
तब दुयो को एक दिन एकी डेरा पड़ी गए
रजा दुलाशाई सुनपति शोक हुवे मुखा मुखी भेट ,
धर्मावती तै मिले सौक्याण गांगुली
दुई बैखू को जोड़ मिले दुई राणी का हिया
हे प्रभु हम दुयो की जात्रा सुफल कराया
                              cont....

खीमसिंह रावत


Mukesh Joshi

तब दुय्ये कना कौल करदीन धरम देंदीन-
सुण बैणी, तेरी होली नौनी मेरो होलो नौनो
या मेरी होली नौनी तरो होलू नौनु -
त हमुन ऊ बिवाई देणंन  दुई बैणी !
दुय्यो की ह्वेगे बात रीत ,पात पीठाई.
जात्रा करीक लगी सि अपनी बाटा.
हे पौछिं गैन अपणा आपणा मुलुक .
दैणा ह्वे गया तब पंचनाम देव ,
राणी धर्मावती को गर्भ रै गए.
एको दूजो मास लैगे राणी दूजो तीजो मास लैगे
दसों मास लै गे राणी ऐंठण्या वेदन लै गए!
रवि भानु कांठो मा उदय ह्वै गे
दुलाशाई को बालक भुई मा ऐगे!
................................cont.

खीमसिंह रावत

Mukesh Joshi ji bahut bahut dhanybad


Quote from: mukesh joshi on November 07, 2008, 10:44:58 AM
तब दुय्ये कना कौल करदीन धरम देंदीन-
सुण बैणी, तेरी होली नौनी मेरो होलो नौनो
या मेरी होली नौनी तरो होलू नौनु -
त हमुन ऊ बिवाई देणंन  दुई बैणी !

................................cont.


Mukesh Joshi

तब बोद राजा करा बरमौ ,तुम लगन विचार .
राजा तब बरमा मुंडली ढकढयौंद .
राजा जलमे यो भौपति भौपाल ,
तेरो नौनो होलो तपस्या को पुरी ;
ये को होलो स्वैणी भाग!
हे राजा एको पंचुला मा ब्यो करण
नितर येका होला अलप्या  जोग .
हे .. राजा सोकानी देश मा सुनपति शौक का घर
जलमी गए नौरंगी राजुला गांगुली का गर्भ !
जै दिन जै घड़ी पैदा हैली वा राजुला ,
शौक का घर उदंकार  हैगे पंचचुली हैगे उजालो;
रैमासी का फूल खिलिन ,पंछी बासण लैगिन!
आनंद बधाई बजनी होली सोक्यानी देश मा .
तब रंगीली वैराट का बरमा पौछी गैन वख
हे राजा तब कना वो बैन बोदा :
हे सुनपति शौक तेरी जलमी नौनी
हमारा राजा दुलाशाई  को नौनो ह्ववैलो मालुशाई .
नौ रंग राजुला होली बौरंग मालुशाई
तेरी जोई गांगुलीन देये छो वचन
हम देऊ धर्म पक्को कनू आया .
तब सुनपति शौक न राजुला की जबान -
दियाले रंगीली वैराट .
मंगल पीठाई लगे खुशी बाजा बजीन.
पर विधाता की लेख देखा -...... cont.
 

पंकज सिंह महर



Malushahi: the ballad of Kumaon
By Mohan Upreti
Published by Sangeet Natak Akademi, 1980
Original from the University of Michigan
Digitized Jun 22, 2006
73 pages

उत्तराखण्ड के महान कलाकार, रंगकर्मी, संगीतकार और लेखक स्व० श्री मोहन उप्रेती जी ने यह पुस्तक लिखी है, यह पुस्तल लिखने के लिये वे स्वयं उन स्थानों पर गये थे, जहां से राजुला और मालूशाही का संबंध रहा है।

Devbhoomi,Uttarakhand

Quote from: हेम पन्त on March 17, 2008, 11:14:10 AM
राजुला मालूशाही की प्रेमकथा में प्यार, नफरत, जादू-टोना और समर्पण सहित सभी तत्व मौजूद हैं. यह कहानी हीर-रांझा, लैला-मजनू की कहानियों की तरह मशहूर हो सकती है...  इसे लेखन अथवा फिल्मों के माध्यम से दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की आवश्यकता है..

HEMJI BILKUL SAHI KAHA HAI AAPNE KI AGAR IS PREM GATHA KO FILM MAIN FILMAYA JAY TO YR PREN GATAH EK ATOOT PREM GATAHA KE ROOP MAIN MASHOOR HO SAKTI HAI

Devbhoomi,Uttarakhand