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Darma Valley - दारमा

Started by हलिया, March 14, 2008, 02:43:44 PM

पंकज सिंह महर

       धारचूला तहसील में शौका अर्थात भोटिया जनजाति दारमा (धौली नदी की उपत्यका) व्यास (काली नदी की उपत्यका) और चौदास में निवास करती है। मुनस्यारु तहसील में शौका क्षेत्र जौहार के उत्तर में, तिब्बत से पश्चिम में चमोली (गढ़वाल) से दक्षिण में और डीडी हाट से पूर्व में पंचमूली की श्रेणियाँ दारमा से निली हुई है। मल्ला जोहार और गोरीफाट के १५ गाँव शौका जनजाति के गाँव हैं। इस क्षेत्र का अन्तिम और सबसे बड़ा गाँव मिलम है, मिलम ग्लेशि यर को नाम देने का श्रेय इसी गाँव को है। गोरी गंगा का उद्गम इसी ग्लेशियर से हुआ है।

पंकज सिंह महर

                                      गबलादेव का मेला: दारमा
            दारमाघाटी अपने नैसर्गिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है । तेरह हजार फुट से अधिक की ऊँचाई पर रहने वाले लोग प्रकृति की दुरुहता को झेलते हुए भी किस प्रकार जीते हैं, गबलादेव के मेले में देखा जा सकता है । तिब्बत-नेपाल दारमा घाटी से लगे हुए हैं । इस दारमा घाटी का सबसे बड़ा मेला है - गबलादेव का मेला । गबलादेव चूँकि शौकाओं का इष्टदेव है, इसलिए यह आयोजन धार्मिक जीवन से जुड़ा है । दारमा घाटी के जन-जीवन पर तिब्बत की संस्कृति की गहरी छाप है । इसलिए गबलादेव भी बौद्ध 'शाक्यमुनि' तथा हिन्दू महादेव शिव का समन्वयात्मक रुप हैं । अगस्त के तीसरे सप्ताह में मनाये जाने वाले इस मेले की तिथि का निर्धारण सीमान्त के अन्तिम दाँत और बुगत नामक ग्राम करते हैं । जो गाँव इस मेले में भाग लेते हैं वे हैं - दाँत, गो, बौन, मार्छा, दुग्त, सेला, चल, किंग, सिव, तिदांग, सोन, डाकर, बालिंग तथा नागलिंग ।

परम्परागत वाद्ययन्त्रों से सजे-धजे, छोलिया नर्तकों की अगुवाई में शौका उमंग के साथ इस मेले में भाग लेते हैं ।

पंकज सिंह महर


पंकज सिंह महर

Pancaculi view from Darma


हलिया

पंकज जी,

जानकारी और फ़ोटू लिजि थैंक्यू हो महाराज।

kripal


almoraboy

www.rungmung.net

this website is about the ppl staying in darma, chaudans and kuthi valleys.


Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Thanks Prashant bhai for these links.

almoraboy

In 1897, Arnold Henry Savage Landor had tried to do a trip from Nainital to Hundesh's (Tibet's) capital Lhasa.
He later wrote a book on the same. Now, its copyright has expired and it is on project guttenberg.

This is the link:

http://www.gutenberg.org/files/22210/22210-h/22210-h.htm