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Uttarakhand Education System - उत्तराखण्ड की शिक्षा प्रणाली

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, April 10, 2008, 07:31:02 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

तिरपाल तले इंटर कॉलेज

मैदान में अलग-अलग समूह बनाकर बैठे 600 से ज्यादा बच्चे सबक याद करने में जुटे हैं। सिर पर तनी तिरपाल उन्हें छत का आभास करा रही है। ठीक सामने खड़ी स्कूल की जर्जर इमारत बच्चों को बेबसी से निहारती प्रतीत होती है। भवन के कुछ कक्ष जमींदोज हो चुके हैं और शेष ढहने को तैयार। यह है टिहरी जिले के सुदूरवर्ती इलाके मैंडखाल स्थित राजकीय इंटर कॉलेज। कॉलेज में तीन माह से कक्षाएं इसी तरह संचालित हो रही हैं।

सर्दी बढ़ चुकी है और धूप सुहानी लग रही है, लेकिन बच्चों के दिमाग में बरसात के दिनों की याद अभी ताजा है। तब उनका हर पल भगवान को याद कर गुजरा। यह अलग बात है कि जिलाधिकारी भी भवन के चार कमरों को अनुपयोगी घोषित कर चुके हैं। नए भवन के लिए इस्टीमेट भेजा जा चुका है। सरकारी मामला है, देखो कब मंजूरी मिलती है।

विद्या की देवी सरस्वती बेबस है, गुरुजन और छात्र लाचार। थौलधार ब्लॉक के राजकीय इंटर कॉलेजमैंडखाल में इस बेबसी को हर ग्रामीण महसूस कर रहा है। 1961 में बना यह जूनियर हाईस्कूल वर्ष 1989 में उच्चीकरण के बाद इंटर कॉलेज बन गया। विद्यालय के कुल 13 कमरों में से तीन सितंबर 2010 में आई भारी बारिश की भेंट चढ़ गए। तब से दस कमरों में किसी तरह काम चलाया जा रहा था। इनकी हालत भी बेहद नाजुक थी।

इस बार बरसात में अभिभावकों ने अपने लाडलों की जान से समझौता करने की बजाए चंदा कर कुछ तिरपाल खरीदे। अब इन्हीं तिरपालों में स्कूल चल रहा है। सुबह स्कूल पहुंचते ही बच्चे सबसे पहले तिरपाल बांध अपने लिए कक्षाएं तैयार करते हैं। हां! विज्ञान की प्रयोगशाला खंडहर बन चुके कमरों में ही है। इसे कभी-कभार ही खोला जाता है।

अभिभावक संघ के अध्यक्ष प्रेमलाल जुयाल बताते हैं 'वर्ष 2005 से अधिकारियों से लगातार पत्र व्यव
हार किया गया। इसी साल सितंबर में जिलाधिकारी ने स्कूल भवन के चार को अनुपयोगी घोषित कर दिया।' वह कहते है कि जुलाई 2011 अभिभावक संघ के नेतृत्व में ग्रामीणों ने आंदोलन भी किया। एक सप्ताह बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री खजानदास से फोन पर बातचीत हुई। उन्होंने विद्यालय की दशा सुधारने का आश्वासन दिया था। वह जोड़ते हैं 'बाकी आप देख ही रहे हैं।'

प्रधानाचार्य हेमचंद रमोला बताते हैं 'मुश्किल तो है ही। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा फिलहाल दो कमरे बना रही है और विभाग ने शासन को भवन के लिए चालीस लाख का इस्टीमेट भेजा है।' उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही दिन बहुरेंगे।

Dainik Jagran

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


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एक अध्यापक के सहारे है हाईस्कूल गल्ली
 

दन्यां: विकासखंड धौलादेवी के अन्तर्गत राजकीय उमावि गल्ली मात्र एक अध्यापक के भरोसे है। जिससे विद्यालय में अध्ययनरत सवा सौ बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष किशन राम ने बताया कि कक्षा 6 से 10 तक के बच्चों के पठन पाठन का जिम्मा एकमात्र अध्यापक के भरोसे है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में सवा सौ से अधिक बालक बालिकाएं अध्ययन कर रही हैं। उन्होंने बताया कि घाटी में अन्य कोई विद्यालय न होने से मजबूरन बच्चों को यहां प्रवेश दिलाया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि अध्यापकों की तैनाती के बावत विभाग को कई बार अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के भविष्य को देखते हुए शीघ्र रिक्त अध्यापकों की नियुक्ति करने की मांग शिक्षा विभाग से की है।
(Dainik Jagran)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


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मौत के साए में आखर ज्ञान


जागरण प्रतिनिधि, गोपेश्वर: राज्य को शिक्षा हब के रूप में स्थापित करने के तमाम सरकारों के दावों की हकीकत धरातल पर शिक्षा की स्थिति देख कर साफ हो जाती है। राज्य के स्कूलों में कहीं शिक्षक नहीं तो कहीं छात्र नहीं। और जहां छात्र और शिक्षक हैं, भवन ही नहीं। आलम यह है कि मौत के साये में हजारों छात्र आखर ज्ञान ले रहे हैं। अकेले चमोली जनपद में ही 260 स्कूलों को खुद शिक्षा विभाग खतरनाक मान रहा है, हकीकत में यह आंकड़ा इससे कुछ ज्यादा ही होगा। 13 वर्ष से मरम्मत का इंतजार कर रहे इन स्कूलों में आठ हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
चमोली में 1999 में आए विनाशकारी भूकंप और उसके बाद हर वर्ष दैवीय आपदा के चलते 260 विद्यालय भवन जर्जर हैं। इनमें कुछ भवन ऐसे भी हैं जो तीन दशक पुराने हैं इन में कक्षा संचालित करने से शिक्षक भी कतराते हैं। यहां गर्मियों में बरामदे या खुले मैदान में पढ़ाई होती है और बरसात व सर्दियों में अधिकांश समय इन पर ताले लटके रहते हैं। अभिभावक लगातार शिक्षा विभाग से विद्यालयों की स्थिति सुधारने की मांग कर रहे हैं,लेकिन विभाग शासन से पत्राचार करने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा है। स्थिति यह है कि जर्जर भवनों के कारण कई स्कूल पंचायत घरों और विद्यालय के बरामदों में छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2012-13 में 52 विद्यालयों के पुर्ननिर्माण के लिए 3,25,84,000 रुपये समेत तीन प्राथमिक विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए 11.07 लाख व दो जूनियर हाईस्कूल भवनों के नवनिर्माण के लिए 35.02 लाख रुपये स्वीकृत कर चुका है। लेकिन, जीर्ण शीर्ण हालत में शेष 208 स्कूलों की सुध सरकार कब लेगी कहा नहीं जा सरता।
धनराशि हुई मंजूर
-16 प्राथमिक विद्यालयों के पुर्ननिर्माण के लिए 1,52,32,000 रुपये
-तीन जूनियर हाईस्कूल भवनों के पुर्ननिर्माण के लिए 43.20 लाख रुपये
-31 प्राथमिक विद्यालयों के वृहद निर्माण के लिए 1,19,30,000 रुपये
-दो जूनियर हाईस्कूलों के वृहद निर्माण के लिए 11.02 लाख रुपये
विद्यालयों की स्थिति
               कुल विद्यालय जर्जर
प्राथमिक विद्यालय     982     146
जूनियर हाईस्कूल      222      14
हाईस्कूल               83       62
इंटर कॉलेज            98       38   
बरामदे में पढ़ाई
-प्रावि बांजबगड़ कठूड़ा, प्रावि चरबंग, प्रावि बगोली, प्रावि कोल्सों में।
पंचायत घरों में पढ़ाई
-प्रावि डिम्मर, प्रावि लुहां, प्रावि स्यूंण, जूहा कालूसैंण, प्रावि बसंतपुर आदि।
लोनिवि करेगा निष्प्रयोज्य घोषित
अभी तक आरईएस  ही शिक्षा विभाग के भवनों को निष्प्रयोज्य घोषित करने के लिए अधिकृत था। लेकिन, इस वर्ष शिक्षा विभाग ने लोक निर्माण विभाग को यह जिम्मेदारी सौंप दी है। आरईएस में कर्मचारियों की कमी को देखते हुए विभाग ने यह कदम उठाया है।
जिले में सैकड़ों स्कूलों के भवन जर्जर हैं। सरकार नए विद्यालयों की स्वीकृति तो दे रही है, लेकिन जर्जर भवनों को सुधारने को प्रयास नहीं किए जा रहे।
पूर्ण सिंह, विधिक सलाहकार पीटीए महासंघ चमोली।
शिक्षा विभाग ने 260 स्कूलों को चिह्नित किया है, जहां भवन मरम्मत की जरूरत है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में 52 स्कूलों की मरम्मत के लिए लगभग सवा तीन करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई है। इसके अलावा दो नए भवनों का निर्माण व तीन कक्षा कक्षों का निर्माण भी इस वित्तीय वर्ष में होगा। अन्य स्कूलों के लिए आगामी वित्तीय वर्ष में प्रस्ताव भेजे जाएंगे।
एमएस रावत, परियोजना अधिकारी सर्वशिक्षा अभियान चमोली
(source dainik Jagran)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खस्ताहाल भवन से नौनिहालों को खतरा

जागरण प्रतिनिधि, नई टिहरी: राजकीय इंटर कालेज छापराधार का जर्जर भवन दुर्घटना को न्यौता दे रहा है। भवन कब ढह जाए कुछ कहा नही जा सकता है। विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों के ऊपर हमेशा खतरा बना हुआ है। बरसात के समय तो स्थिति और भी खराब हो जाती है। छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को भारी दिक्कतों से जूझना पड़ता हैं।
प्रखंड चम्बा के अंतर्गत राइंका छापराधार के भवन को करीब 40 साल हो चुके हैं। मरम्मत के अभाव में विद्यालय का भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है। इसमें पढ़ने वाले करीब 350 बच्चों की जिंदगी खतरे में है। बावजूद इसके विद्यालय की सुध लेने वाला कोई नहीं है। छत की सरिया पूरी तरह से गल चुकी है। छत से बजरी व रेत गिरता रहता है। बरसात में स्थिति और भी अधिक खराब हो जाती है। ऐसी स्थिति में शिक्षण कार्य कैसे होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामलाल डबराल का कहना है कि नए भवन बनाने की मांग अभिभावकों व शिक्षकों की ओर से लगातार की जाती रही है लेकिन इस ओर ध्यान नही दिया जा रहा हैं।
-'विषम परिस्थिति में शिक्षण कार्य करना पड़ रहा है। भवनों की हालत खस्ताहाल है जर्जर भवन में कक्षाएं संचालित होने से दुर्घटना का भय बना रहता है। विभागीय अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया है।'
गबर सिंह चौहान
प्रधानाचार्य
  -'विद्यालय भवन  जर्जर हो चुका हैं। पुराने भवन को निष्प्रयोजित घोषित कर नया भवन बनाने की कार्यवाही चल रही है। इस संदर्भ में उच्चाधिकारियों को भी रिपोर्ट भेजी गई है।'
उपेंद्र पंडित
खंड शिक्षा अधिकारी
http://www.jagran.com/uttarakhand/tehri-garhwal-10338049.html

Devbhoomi,Uttarakhand

कास उत्तराखंड के राजनेताओं  के बच्चे इस तरह के स्कूल-कोलेजों में पड़ते तो सायद इन स्कूलों की हालात इतने खराब नहीं होती !
राजनीति के इन कुकर्मोयों को इन जगहों इन रास्तों पर भागना चाहिए वो भी नगें पैर तब पता चलें इन भ्रष्टाचारियों आटे-चावल का भाव,किस हालत में उत्तराखंड के गांवों बच्चे अपनी पड़ी करते हैं !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

राज्य का नाम सौंग, प्रदेश की राजधानी जम्मू

कपकोट : विकास खंड की प्राथमिक शिक्षा के साथ ही माध्यमिक शिक्षा भी बदहाल है। जब बीईओ आकाश सारस्वत ने राइंका सौंग का निरीक्षण किया व बच्चों से सवाल पूछे तो कक्षा 8 के बच्चों ने प्रदेश का नाम सौंग व राजधानी जम्मू बताया। विद्यालय में उपलब्ध नौ कम्प्यूटर धूल फांक रहे थे। साथ ही अभिलेख भी अपूर्ण थे। बीईओ ने दो सप्ताह का समय देते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी। साथ ही कड़ी फटकार लगाई।

बीईओ आकाश सारस्वत ने शुक्रवार को राइंका सौंग में बच्चों से सवाल पूछे जिसका उत्तर नहीं बच्चे नहीं दे पाए। पाया कि विद्यालय में नौ कम्प्यूटर हैं परंतु इसका प्रयोग बच्चे से नहीं कराया जाता है कम्प्यूटर प्रभारी कंप्यूटर रूम में ताला लगाकर अवकाश पर हैं। साथ ही विद्यालय में अभिलेख अपूर्ण है। उन्होंने वहां तैनात स्टाफ को फटकार लगाते हुए कहा कि दो सप्ताह के भीतर व्यवस्थाएं सुधारें अन्यथा संपूर्ण स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने पाया कि कई विद्यालयों द्वारा एनआरएचएम के तहत बच्चों को पिलाई जाने वाली आयरन फोलिक की दवाइयां नहीं पिलाई जा रही है तथा दवा खंड कार्यालय में हैं उन्होंने दो सप्ताह के भीतर दवा न उठाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।  http://www.jagran.com/uttarakhand/bageshwar-10851397.html

विनोद सिंह गढ़िया

आज प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की दशा बड़ी दयनीय है। जिस विद्यालय में देखो शिक्षकों की कमी। हमारे प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा का स्तर बहुत नीचे चला गया है। कक्षा 1 से लेकर कक्षा 5 तक के बच्चे या तो एक शिक्षक के सहारे हैं या इन्हें आंगनबाड़ी बहिन जी संभाल रही हैं। ऐसा ही एक उदाहरण है उत्तराखण्ड का एक गांव पोथिंग (बागेश्वर) का रा.प्रा.विद्यालय। इस विद्यालय में मुझे ये भविष्य के कर्णधार इसी तरह मौज करते हुए मिले और आंगनबाड़ी बहिन जी धूप लेते हुए।
-: विनोद गढ़िया




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उत्तराखंड में उच्च शिक्षा की सूरत बदलने जा रही है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान(रूसा) के तहत न केवल कॉलेजों को मोटी ग्रांट मिलेगी बल्कि उन्हें कॉलेज से विवि और मॉडल महाविद्यालय बनने का भी मौका मिलेगा।

शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव
रूसा का मकसद पूरा हुआ तो अगले पांच वर्षों में कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा।

दून विवि में गुरुवार को रूसा की बैठक में भावी योजनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में सभी संस्थानों से रूसा के लिए प्रस्ताव भी मांगे गए।

दून विवि के सीनेट हॉल में आयोजित बैठक में उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल पंत ने रूसा के तहत आने वाली ग्रांट और कॉलेजों व विवि में होने वाले सुधारों के बारे में बताया।

सहायक निदेशक सतपाल सिंह साहनी ने बताया कि रूसा को अमल में लाने के लिए सभी कॉलेजों का डाटा बैंक तैयार किया जा रहा है। हालांकि, निर्धारित तिथि तक राजकीय महाविद्यालय रिखणीखाल, बेदीखाल, गुप्तकाशी, कोटद्वार और बड़कोट के अलावा डीएवी, डीबीएस व एमकेपी कॉलेज ने अपना डाटा नहीं दिया है।

सभी कॉलेजों से जल्द से जल्द डाटा मांगा गया। साथ ही कॉलेज व विश्वविद्यालयों से कहा गया कि वह अपनी जरूरत के मुताबिक एक प्रस्ताव तैयार कर 20 दिसंबर तक उच्च शिक्षा विभाग को भेज दें।



इसके बाद शासन स्तर पर एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार कर 26 दिसंबर तक केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा जाएगा। अपर सचिव उच्च शिक्षा राधिका झा ने सभी कॉलेजों के बीच से ही दस सदस्यीय दल बनाते हुए रूसा को परवान चढ़ाने की बात कही।

उन्होंने कहा कि कॉलेज रूसा के संबंध में उपाय सुझा सकते हैं। बैठक में दून विवि के कुलसचिव डॉ. बीएम हरबोला, श्रीदेव सुमन विवि के कुलसचिव प्रो. एके तिवारी, डीएवी प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन, डीबीएस प्राचार्य डॉ. ओपी कुलश्रेष्ठ, एसजीआरआर प्राचार्य प्रो. वीए बौड़ाई, एमकेपी प्राचार्य डॉ. इंदु सिंह सहित भारी संख्या में शिक्षक व प्राचार्य शामिल रहे।

बनेगी उच्च शिक्षा परिषद
रूसा का लाभ प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को पहुंचाने के लिए उच्च शिक्षा परिषद का गठन किया जाएगा। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।



इसके अतिरिक्त संबद्धता संबंधित कुल 26 शासनादेशों को खत्म करते हुए जल्द ही एक शासनादेश जारी करने की योजना बनाई जा रही है। इससे कॉलेजों को संबद्धता मिलने में आसानी हो जाएगी।

समिति का गठन

उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। दून विवि के कुलपति प्रो. वीके जैन इसके अध्यक्ष होंगे। कुमाऊं विवि और उत्तराखंड मुक्त विवि के कुलपति इसमें सदस्य होंगे।

निदेशक उच्च शिक्षा को समिति का सदस्य सचिव नामित किया गया है जबकि निदेशक द्वारा नामित एक अधिकारी को सदस्य बनाया जाएगा। इस समिति को राज्यपाल ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।

सचिव उच्च शिक्षा मनीषा पंवार ने बताया कि यह समिति दो माह में अपनी आख्या प्रस्तुत करेगी।अन्य अपटेड लगातार हासिल करने के लिए अमर उजाला फेसबुक पेज ज्वाइन करें.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



खुले आसमान के नीचे बांच रहे 'आखर'

संवाद सहयोगी, कर्णप्रयाग: सरकार भले ही आपदा पीड़ितों को सहायता देने का दावा करे, लेकिन आपदा के आठ महीने बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में आपदा जैसे ही हालात हैं। इसी की बानगी है प्राथमिक विद्यालय नौली हिडोली। आपदा में क्षतिग्रस्त हुए इस विद्यालय में बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ रहे हैं तो स्कूल का सामान आंगनवाड़ी सहायिका के घर में रखा हुआ है। आठ महीने से सरकार व शिक्षा विभाग इस पर मौन हैं। विद्यालय भवन की मरम्मत नहीं हुई, लेकिन जैसे-तैसे यहां पढ़ाई हो रही है।

ग्रामीण प्रेमबल्लभ पंत, राकेश पंत बताते हैं कि कई बार प्राथमिक विद्यालय नौली हिडोली की स्थिति से जिला शिक्षाधिकारी को अवगत कराया गया, लेकिन आगणन की बात कहकर लोगों को चुप करा दिया। आपदा को आठ महीने बीत चुके हैं, सरकार व विभाग क्षतिग्रस्त स्कूल भवनों तक की मरम्मत नहीं करवा पाएं हैं। ग्रामीण राकेश पंत कहते हैं कि पंचायत व लोकसभा चुनाव को लेकर जनप्रतिनिधियों के दौरे शुरू हो गए हैं, जनता की समस्या से इनका कोई लेना-देना नहीं है। कई स्कूलों के साथ ही क्षेत्र के कंडारा, सोनला में पेयजल की समस्या है। पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन इस पर कार्रवाई को कोई तैयार नहीं है।

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उत्तराखंडः स्कूलों से 'गायब' म‌िले 25 हजार बच्चे

स्कूलों के औचक निरीक्षण में गुरुजी ही नहीं, हजारों छात्र भी गायब मिले। अनुपस्थित छात्रों के मामले में ऊधमसिंह नगर अव्वल रहा। यहां 8229 बच्चे स्कूलों से गैरहाजिर थे।

प्रदेश के कुल 1208 स्कूलों में 25483 छात्र अनुपस्थित पाए गए। शुक्रवार को मौसम साफ होने के बावजूद छात्रों के स्कूल न पहुंचने की जानकारी ने विभागीय अधिकारियों को हैरत में डाले रखा।

कहीं फर्जी संख्या तो नहीं
विभागीय सूत्रों की मानें तो इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का गैरहाजिर होना अफसरों को पच नहीं रहा है। बताया जा रहा है कि कई बार स्कूल बंद होने से बचाने और अपने स्थानांतरण की आशंकाओं को दूर करने के लिए शिक्षक छात्रों की फर्जी संख्या कागजों में दिखा देते हैं। ऐसे में हो सकता है कि इन स्कूलों में भी शिक्षकों ने संख्या अधिक बताई हो। जनपद ----- स्कूल --- अनुपस्थित बच्चे
अल्मोड़ा------ 117 ------ 1565
बागेश्वर------- 25 ------ 425
चमोली------- 69 ------- 4257
चंपावत------- 18 ------- 261
देहरादून------ 98 ------- 2263
हरिद्वार------- 88 ------- 5161
नैनीताल----- 223 ------ 2188
पौड़ी -------- 120 ------ 1058
पिथौरागढ़---- 55 ------- 763
रुद्रप्रयाग----- 41 ------- 359
टिहरी-------- 165 ------ 1736
ऊधमसिंहनगर- 132 ----- 8229
उत्तरकाशी----- 39 ------ 520

165 स्कूल जर्जर, एक भवनविहीन
प्रदेश भर में स्कूलों के औचक निरीक्षण के दौरान 165 स्कूल जर्जर मिले हैं। बागेश्वर में एक स्कूल भवनविहीन मिला। चमोली जिले में सर्वाधिक जर्जर 64 स्कूल मिले। नैनीताल में 50, अल्मोड़ा में चार, बागेश्वर में 10 (एक स्कूल भवनविहीन), देहरादून में 14, पौड़ी में एक, पिथौरागढ़ में चार, रुद्रप्रयाग में सात, टिहरी में नौ और उत्तरकाशी में दो स्कूलों के भवन जर्जर पाए गए। बरसात में इन भवनों में कक्षाओं का संचालन छात्रों के लिए हादसों का सबब बना हुआ है। (source amar ujala)