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Jhoda Chachari Baaju Band - चाचारी झोडा बाजु बन्द: लोक संस्कृति की पहचान

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, April 15, 2008, 08:37:10 PM

हेम पन्त

एक और ऋतु रैण

बैण ओ बैण आई ऋतु रैण
कस छन इजा मेरा कसा छन बौज्यू?
कस छन भुलु मेरा कस धन चैन?

आयो चैत को मैण बैण ओ बैण
भल छन इजा बौज्यू भल छन भाई बैण
भल छह्न डाना-काना, भल छन सरग गैण

बैण ओ बैण आई ऋतु रैण
फूली गये दैण, बागसरा का सैण

हेम पन्त

बाजूबन्द
यह ऐसे गीत हैं जो प्रश्नोत्तरी के रूप में गाये जाते हैं. अर्थात बाजूबन्द गीत स्त्री-पुरुष के बीच होने वाले तात्कालिक उत्तर-प्रत्योत्तर के संवाद-गीत हैं. जंगल-पर्वतों में दूर-दूर रहकर ऊंची आवाज में गाये जाने वाले इन प्रणय गीतों में पहली पंक्ति का प्रयोग केवल तुक मिलाने के लिये होता है.

फूली जाई जई,
बांज कांटदार छोरी तू कैई गौऊं की छैई

बावला की कूंची
कै भी गौं की हौलूं मैं तू क्या करदूं पूछी

गिजाला की गांज,
सरकारी छ जंगल, केकू काटदी बांज!

थकुला की थरी,
रजा कौंकू मडू मरे बन्द जंगल करी.

घमकाई त घण,
तू इनी जाणदी छई, त केकू आई बण?

पंकज सिंह महर

हुड़्किया बोल- हुड़की बौल कृषि गीतों का सबसे प्रमुख प्रकार है, मुख्यतः यह रोपाई के समय गाया जाता है। "बौल" का अर्थ है श्रम, हुड़्की के साथ श्रम करने को हुड़की बौल नाम दिया जाता है। हुड़के की थाप पर हुड़किया काम करने वाले स्त्री-पुरुषों को प्रोत्साहित करने का काम करता है। यह एक मनोवैग्यानिक प्रयोग है, जिसे हमारे पुरखो ने अपनाया, काम करते-करते थकान का अनुभव भी न हो और काम भी हो जाय।
        इन गीतों में कृषि के देवता "भूमिया" से अच्छी खेती होने की कामना की जाती है, इसके पश्चात गायक आकाश, पृथ्वी और स्वर्ग के देवताओं को आमंत्रित करता है और फिर लोक कथायें सुनाता है। अंत में कार्य समाप्ति के साथ कृषकों की मंगल कामना करते हुये उन्हें आशीर्वाद देकर गीत खत्म होता है।

पंकज सिंह महर

कुछ-----

भूमि का भूमिका, भूमियां हो वरदेणा होया,
पांच भाई पाण्डव हो वरदेणा होया।


भूमि के देवता "भूमियां" से अनुकूल एवं वरदायी बने रहने की प्रार्थना की जा रही है।

२- खोलिका गणेशा, हां रे हां,
गणेशा देवा-देवा!
सफल है जाये हां रे हां,
गणेशा हां रे हां।
धार का चमुंवा देवा हो,
चमुवा देवा-देवा।
सुफल है जाये हां रे हां,
चमुंआ देवा-देवा,
ओ भूमि का भूमियाला देवा हां,
भूमियाला देवा-देवा,
सफल है जाया, हां रे हां,
भूमियाला देवा-देवा।


खेत में काम करने से पहले कार्य सिद्धि के लिये गणेश जी तथा स्थानीय देवों की पूजा गीत के माध्यम से की जा रही है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




मुझे याद है गाव मे लोगो रोपाई या मडुवा गोडाई के समय मे हुन्किया बौल गाया करते थे ! एक आदमी हुनका बजाता है और गाने गाता है और अन्य लोग काम करने के साथ साथ गाने मे उसका साथ भी देते है .

कुछ लाइन

": द रे बाट लागी गैया
 जी रैया जमुका ...

इस प्रकार इस में कथा जुड़ती जाती है

Quote from: धौंसिया.....! on September 24, 2008, 02:27:27 PM
हुड़्किया बोल- हुड़की बौल कृषि गीतों का सबसे प्रमुख प्रकार है, मुख्यतः यह रोपाई के समय गाया जाता है। "बौल" का अर्थ है श्रम, हुड़्की के साथ श्रम करने को हुड़की बौल नाम दिया जाता है। हुड़के की थाप पर हुड़किया काम करने वाले स्त्री-पुरुषों को प्रोत्साहित करने का काम करता है। यह एक मनोवैग्यानिक प्रयोग है, जिसे हमारे पुरखो ने अपनाया, काम करते-करते थकान का अनुभव भी न हो और काम भी हो जाय।
        इन गीतों में कृषि के देवता "भूमिया" से अच्छी खेती होने की कामना की जाती है, इसके पश्चात गायक आकाश, पृथ्वी और स्वर्ग के देवताओं को आमंत्रित करता है और फिर लोक कथायें सुनाता है। अंत में कार्य समाप्ति के साथ कृषकों की मंगल कामना करते हुये उन्हें आशीर्वाद देकर गीत खत्म होता है।


पंकज सिंह महर

जिरि झुमका द रे चांदी खेता मांजा रे,
जिरि झुमका रुपाई है रे, छे रे,
जिरि झुमका दरे रुपाई करला रे,

जिरि हो झुमका यूं दिन यूं मास हो,
जिरि हो झुमका भेटन लै जाया हो॥


खेत में धान की रोपाई लगाते समय यह गीत गाया जाता है। भूमिया देवता से उपहार स्वीकार करने की प्रार्थना की जा रही है।

ए जिमि का जिमिदार, भूमि का भूमिदार,
तुमरि सेरि बौल, होलो, तुमि, दैणा होया हो,
धरती धरम राजा, तुमि सुफल है जाया हो।

यो गगन की सेरि होली रोपार-तोपारा हो,
हलिया-बल्द आया हे भूमि-भूमियां हो,
श्येला बिदौ दिन दिए हाथ दिए छाया हो॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



महिलाये :

भूख रैगेचो रौली का सुनार दाजू
भूख रैगेचो ..

घाम घाम........ घाम.

पुरूष :

भूख रैगेचो रौली का सुनार दाजू
भूख रैगेचो ..

जोड़ : तिमुली पात दाजू तिमुली पात

( अब से जोड़े तिमुली पात हो तिमुली पात ) को  भूख रैगेचो रौली का सुनार दाजू मे फिट करना है :

महिलाये :
तिमुली पात दाजू, भूख रैगेछो ..
भूख रैगेचो रौली का सुनार दाजू
भूख रैगेचो ..

इस प्रकार जोड़ पड़ते रहते है और झोडा आगे बढता जाता है !



पंकज सिंह महर

Quote from: एम् एस मेहता /M S Mehta on September 24, 2008, 02:36:28 PMमुझे याद है गाव मे लोगो रोपाई या मडुवा गोडाई के समय मे हुन्किया बौल गाया करते थे ! एक आदमी हुनका बजाता है और गाने गाता है और अन्य लोग काम करने के साथ साथ गाने मे उसका साथ भी देते है .
कुछ लाइन
": द रे बाट लागी गैया
 जी रैया जमुका ...

इस प्रकार इस में कथा जुड़ती जाती है

मेहता जी,
         गुड़ाई और खास तौर पर मडुवे की गोड़ाई के समय गाये जाने वाले गीतो को "गुडौल" कहा जाता है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



भगवान् नौलिंग जी के मेले ( सन गाड़) मे कहा जाता है की एक समय मे यह झोडा बहुत प्रसिद्ध था !


पुरूष :

सनगाड़ की रुमुली दीदी
बकरा पाठा छान क्या ला


महिलाये :

ओह श्याम धुर प्रताप दाज्यू
जाठी ले घुघुर छान क्या ला


बीच मे जोडो के माध्यम से ये झोडे आगे बड़ते रहते है !

Mukesh Joshi

के मासी को फुललो  कविलास
के महिना फुललो फूलो कविलास ...4
                          चेत मा फुललो फूलो कविलास ..२
कै डांडा फुललो फूलो कविलास ...४
              हियु चुलो फुललो फूलो कविलास
कु ल्यालु कु ल्यालु फूलो कविलास ..४
              वे नीला कविलास फूलो कविलास ;..4
कै देवा चडालो फूलो कविलास ..४
               महादेवा चडालो फूलो कविलास .....4