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Kailash Mansarovar - कैलाश मानसरोवर यात्रा:उत्तराखण्ड की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा

Started by पंकज सिंह महर, April 17, 2008, 04:03:44 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

कैलास-मानसरोवर यात्रा एक जून से





  नैनीताल [जासं]। पहली जून से शुरू होने वाली पवित्र कैलास-मानसरोवर यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। कैलास-मानसरोवर यात्रा के लिए इस बार करीब 2400 श्रद्धालुओं ने आवेदन किया था। स्कु्रटनी के बाद विदेश मंत्रालय ने 1750 श्रद्धालुओं की सूची तैयार की। इनमें 16 जत्थों के लिए लॉटरी निकालकर 960 यात्रियों का चयन किया गया। प्रत्येक जत्थे में 60 यात्रियों के अलावा पहली व दूसरी वेटिंग लिस्ट भी तैयार की गई है।



कुमाऊं मंडल विकास निगम [केएमवीएन] प्रबंधन के मुताबिक यात्रा शिविरों पर व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करने का कार्य अंतिम दौर में पहुंच गया है। केएमवीएन के मंडलीय प्रबंधक [पर्यटन] डीके शर्मा के मुताबिक यात्रियों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ ही शुल्क जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।



कैलास-मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले उत्तराखंड के 64 श्रद्धालुओं को तीन साल बाद सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि के रूप में प्रति यात्री 25 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। प्रदेश के संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट के मुताबिक प्रत्येक यात्री को चेक के जरिये राशि भेज दी गई है।
source dainik jagran

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कैलास मानसरोवर यात्रा का पहला पड़ाव सिर्खा रहेगा
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कैलास मानसरोवर यात्रा में इस बार सिर्खा पहला पैदल पड़ाव होगा। जिसे देखते हुए वर्षो से बंद इस पड़ाव की मरम्मत का कार्य शुरू हो चुका है। यात्रा शुरू होने में अब मात्र 17 दिन शेष रह चुके हैं अभी तक मार्ग खुल नहीं सका है। केएमवीएन की महाप्रबंधक 18 मई को धारचूला पहुंच कर यात्रा मार्ग का जायजा लेंगी।

कैलास मानसरोवर यात्रा 2011 के शुरू होने में अब मात्र 17 दिन शेष रह चुके हैं। इस वर्ष यात्रा मार्ग में हल्का परिवर्तन किया गया है। यात्रा धारचूला से वाया पांगला, मांगती के स्थान पर वाया पांगू, नारायण आश्रम होते हुए जा रही है।

अलबत्ता यात्रा के तिब्बत जाते वक्त कालापानी रात्रि पड़ाव नहीं रहेगा। केएमवीएन के सूत्रों से मिली जानकारी पहले दिन की पैदल यात्रा धारचूला से नारायण आश्रम तक वाहन द्वारा उसके बाद सिर्खा तक पैदल मार्ग से होगी। जिसे देखते हुए सिर्खा पड़ाव की मरम्मत का कार्य शुरू हो चुका है। मालूम हो कि कुछ वर्षो पूर्व तक कैलास मानसरोवर यात्रा इसी मार्ग से होती थी।

उस समय यात्री धारचूला से तवाघाट तक वाहन से यात्रा करते थे। तवाघाट के बाद ठाणीधार की चढ़ाई चढ़ने के बाद पांगू पहुंचते थे। पहला पड़ाव पांगू रहता था। दूसरे दिन पांगू से सिर्खा जाते थे। इस बार नारायण आश्रम तक सड़क बन जाने से दल पहले दिन यात्रा सिर्खा पहुंचेगी। दूसरे दिन यात्रा गाला पहुंचेगी। यात्रा शुरू होने में अब मात्र 17 दिन शेष रह चुके हैं। मार्ग की हालत अभी भी खराब है।

गर्बाधार से छियालेख तक मार्ग जगह-जगह खराब है। उसके आगे मार्ग में ग्लेशियर मार्ग में आये हैं। अभी माइग्रेशन में जा रहे ग्रामीण फंसे हुए हैं। अभी तक लोनिवि द्वारा गैंग मार्ग ठीक करने के लिए नहीं भेजी है। दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि मई तीसरे सप्ताह तक मार्ग को ठीक कर दिया जायेगा।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7719418.html


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14 साल बाद गूंजा बागेश्वर में हर-हर महादेव
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बागेश्वर: अल्मोड़ा- दन्या-पिथौरागढ़ मोटर मार्ग बंद होने से कैलाश मानसरोवर यात्रियों के छठे दल को बागेश्वर होते हुए धारचूला रवाना किया गया। शनिवार को बागेश्वर पहुंचने पर यात्रियों का स्वागत किया गया। 14 साल बाद बागेश्वर होते हुए मानसरोवर यात्री कैलाश को रवाना हुए।

गौरतलब है कि वर्ष 1997 के बाद से कैलाश मानसरोवर यात्रियों का रूट परिवर्तित कर दन्यां होते हुए धारचूला कर दिया गया था। उसके बाद बागेश्वर- चौकोड़ी मार्ग से मानसरोवर यात्रियों को नहीं भेजा गया।

विगत दिनों हुई मूसलाधार बरसात के कारण दन्यां-पिथौरागढ़ मार्ग बंद होने के कारण कैलाश यात्रियों को बागेश्वर से भेजा गया। 52 सदस्यीय छठे दल में डा राजेश्वरी कापड़ी संपर्क अधिकारी हैं।

बागेश्वर पहुंचने पर यात्रियों का भव्य स्वागत किया गया। दल में 70 वर्षीय अहमदाबाद के कांति भाई हैं जबकि 27 वर्षीय हरियाणा के उत्सव शामिल हैं। यात्रियों ने एक घंटा स्थानीय पर्यटक आवास गृह में विश्राम किया तथा नाश्ते के बाद धारचूला को रवाना हुए।

पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक उत्तम सिंह बिष्ट, जानकी गढि़या व इंद्र सिंह बिष्ट ने स्वागत किया।

Jagran News

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कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग दसवें दिन भी बंद रहा
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सोमवार को जिले के विभिन्न स्थानों पर भारी वर्षा हुई। वहीं कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग दसवें दिन भी नहीं खुल सका है। तवाघाट-सोबला मार्ग में चार स्थानों पर मलबा आ चुका है। तवाघाट-गर्बाधार मार्ग के शीघ्र खुलने के आसार नहीं हैं। डीडीहाट-भागीचौरा मार्ग मलबा आने से कई घंटे बंद रहा। मार्ग बंद रहने से दारमा क्षेत्र में खाद्यान्न सहित अन्य वस्तुओं का अभाव बन चुका है।

सोमवार को जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में हल्की वर्षा हुई। वहीं धारचूला, डीडीहाट, बेरीनाग और मुनस्यारी क्षेत्रों में भारी वर्षा हुई। भारी वर्षा से डीडीहाट और भागीचौरा मार्ग में मलबा आने से मार्ग कई घंटे बंद रहा।

मालूम हो कि यह मार्ग पच्चीस वर्षो में पहली बार बाधित हुआ है। मार्ग बंद होने के कारण वाहन फंसे रहे। वहीं धारचूला से मिली जानकारी के अनुसार कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग खड़ीधार के पास दसवें दिन भी बंद रहा। इस स्थान पर लोनिवि मार्ग ठीक करने में जुटी है।

लोनिवि के अनुसार मंगलवार को मार्ग खुलने की संभावना है। विदित हो कि मंगलवार को इस मार्ग से वापस लौट रहे चौथे यात्रा दल को गुजरना है। तवाघाट-गर्बाधार मार्ग के शीघ्र खुलने के आसार नहीं हैं। मार्ग में तीनतोला, वर्तीगाड़, गस्कू आदि स्थानों पर पहाड़ की तरफ से लगातार मलबा गिर रहा है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7998238.html

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कैलास यात्रियों को रोकने की चेतावनी
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कनालीछीना को तहसील बनाने की मांग को लेकर क्रमिक अनशन गुरुवार को भी जारी रहा। संघर्ष समिति द्वारा कैलास यात्रा दल को रोकने की चेतावनी के बाद उपजिलाधिकारी ने अनशन स्थल पहुंचकर वार्ता की और मांग को शासन स्तर पर रखने का आश्वासन दिया।

ग्रामीणों के अनशन के 68वें दिन पूर्व प्रधान प्रेमसिंह बिष्ट के नेतृत्व में कृष्ण सिंह भंडारी, आनंद बल्लभ पांडेय और देवेन्द्र सिंह बिष्ट बैठे। जबकि कामू राम, सुंदर सिंह धामी, मनोहर बिष्ट, श्रीकृष्ण पांडेय, पवन धामी आदि ने समर्थन में धरना दिया। इस मौके पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि शासन द्वारा लगातार उपेक्षा की जा रही है। इस उपेक्षा को बर्दास्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर डीडीहाट से यहां पहुंचे उपजिलाधिकारी बीएल राणा ने अनशनकारियों से वार्ता की और मांग को शासन स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया। संघर्ष समिति के अध्यक्ष कै.गोपाल सिंह ने इस संबंध में अन्य पदाधिकारियों के साथ 22 जुलाई को वार्ता कर अंतिम निर्णय लेने की बात कही। इस अवसर पर तहसीलदार अवधेश कुमार, नायब तहसीलदार गोपीराम, एसओ आरसी लोहनी आदि मौजूद थे।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_8051888.html

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कैलास मानसरोवर की परिक्रमा पूरी कर 8वां दल भारत लौटा
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कैलास मानसरोवर की परिक्रमा पूरी कर आठवां यात्रा दल भारत लौट आया है। वहीं दसवां दल तिब्बत में प्रवेश कर चुका है। वापस लौटे 8 वें दल में नवें दल का एक बीमार यात्री भी शामिल है।

सातवीं वाहिनी आइटीबीपी मिर्थी से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार की प्रात: दसवें दल के यात्रियों ने लिपूलेख दर्रा पार कर तिब्बत में प्रवेश किया। इस मौके पर आठवां दल भारत लौटा। इस दल में तिब्बत में यात्रा के दौरान बीमार पड़ा नौंवे दल का यात्री अमर बंधोपाध्याय भी शामिल है। दल वापसी में गुंजी पहुंचा है। वहीं नौंवा दल मानसरोवर की परिक्रमा के दौरान जौंगरेफ पहुंचा है। दसवां दल तकलाकोट में है। यह दल बुधवार को तकलाकोट में प्रवास करने के बाद गुरुवार से मानसरोवर की परिक्रमा को रवाना होगा। यात्रा में जा रहा 11वां दल प्रथम पैदल पड़ाव सिर्खा पहुंचा है। दल प्रात: आधार शिविर धारचूला से चलकर अपराह्न को सिर्खा पहुंचा।

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16वां दल बूंदी पहुंचा
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धारचूला: कैलास मानसरोवर यात्रा का 13वां दल वापसी में गाला पहुंच गया है। इस दल के दस यात्री बिना एलओ के अनुमति के धारचूला रवाना हो गये हैं। वहीं अंतिम 16वां दल तीसरे पैदल पड़ाव बूंदी पहुंचा है। 14वां दल मानसरोवर की और 15वां दल कैलास की परिक्रमा कर रहे हैं। सूचना के अनुसार कैलास मानसरोवर परिक्रमा पूरी कर वापस लौट रहा 13वां दल शनिवार की सायं गाला पहुंचा। जहां से दस यात्री बिना लाइजन आफीसर की अनुमति के धारचूला को रवाना हो गये हैं।

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कैलाश यात्रियों का दल कौसानी पहुंचा, भव्य स्वागत
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कैलाश मानसरोवर यात्रियों का पहला दल शनिवार की सुबह कौसानी पहुंचा। दल के कौसानी पहुंचने पर सदस्यों का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान यात्रियों ने पौधरोपण भी किया। दल के कौसानी पहुंचने पर पर्यटक नगरी कौसानी हर हर महादेव के गूंज से गूंज गई। दल का जिलाधिकारी डा वी षणमुगम आदि ने भी स्वागत किया।

कैलाश मानसरोवर यात्रा का 47 सदस्यीय दल शनिवार की सुबह यहां पहुंचा। दल के सदस्यों के यहां पहुंचने पर पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक तारा दत्त तिवारी व तारा दत्त भट्ट ने स्वागत किया साथ ही राइंका कौसानी, कन्या जूहा कौसानी के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए व एनसीसी के कैडेटों ने सलामी देकर स्वागत किया।

दल का नेतृत्व कर रहे लाइजनिंग आफिसर कुंवर पाल सिंह ने बताया कि दल बैजनाथ मंदिर समेत बागनाथ मंदिर के दर्शन के बाद रात्रि विश्राम चौकोड़ी में करेगा। कौसानी के पर्यटक आवास गृह में भोजन करने के बाद दल बैजनाथ को रवाना हो गया।


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