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REMARKABLE ACHIEVEMENTS BY UTTARAKHANDI - उत्तराखंड के लोगों की उपलब्धियाँ

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 09, 2007, 10:38:24 AM

पंकज सिंह महर

पद्म श्री विजय प्रसाद डिमरी जी पिता जी श्री घनश्याम डिमरी जी चमोली से विधायक भी रहे हैं, उनकी प्रारंभिक शिक्षा गोपेश्वर और कर्णप्रयाग में हुई, उच्च शिक्षा धनबाद में हुई। श्री डिमरी का संदेश है-

"गोपेश्वर और पिथौरागढ़ का नाम जिस दिन राष्ट्रीय मानचित्र में आ जायेगा, उस दिन समझ लो यह राज्य आत्मनिर्भर हो जायेगा।"

पंकज सिंह महर

दीप जोशी जी का जन्म १९४७ में पिथौरागढ़ जिले के पुडि़यांग गांव में  श्री हरिकिशन जोशी जी के घर में हुआ था, मोतीलाल नेहरु इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग कालेज, इलाहाबाद से बीटेक करने के बाद श्री जोशी ने एम०आई०टी०, अमेरिका से एम०टेक किया। वर्ष १९८३ में प्रदान संस्था की स्थापना की। वर्ष २००९ में इन्हें मैगसेसे पुरस्कार से नवाजा गया और २०१० में पद्म श्री पुरस्कार दिया गया।

श्री दीप जोशी जी का उत्तराखण्ड के लिये संदेश-


सरकारी योजनाओं की समीक्षा जरुरी है, आम आदमी का सशक्तिकरण करना है तो उससे एक बार योजनाओं के बारे में जरुर पूछ लें। आन्दोलन से बने उत्तराखण्ड राज्य में पिछड़े गांवों को अनसुना किया जा रहा है।

Devbhoomi,Uttarakhand

यूनेस्को ने डा. मैखुरी को बनाया विशेषज्ञ

नंदा देवी वायोस्फियर रिजर्व के उचित प्रबन्धन और उसके संरक्षण सुदृढ़ीकरण करने के लिए यूनेस्को ने ग्लोबल चेंज एवं माउंटेन रिजन-रिसर्च स्ट्रैटजी (ग्लोचामोर कार्यक्रम) योजना के तहत गोविंद बल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान की गढ़वाल इकाई के वैज्ञानिक प्रभारी डा. आरके मैखुरी को विशेषज्ञ के रूप में चयनित किया है।

नंदादेवी वायोस्फियर रिजर्व पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अध्ययन में डा. मैखुरी यूनेस्को के विशेषज्ञ के रूप में शामिल रहेंगे। डा. आरके मैखुरी ने कहा कि भारत में 15 वायोस्फियर रिजर्व क्षेत्रों की स्थापना की जा चुकी है।

यह ऐसे क्षेत्र होते हैं जो स्थलीय, पर्वतीय और तटीय जैविक, अजैविक कारकों के अध्ययन में आने वाली समस्याओं का निदान करने के साथ ही सामाजिक विकास को बढ़ावा देते हैं। यूनेस्को के ग्लोचामोर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पूरे विश्व के पर्वतीय वायोस्फियर रिजर्वो को ग्लोबल वार्मिग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने के साथ ही उनका उचित प्रबन्धन करना है।

पंकज सिंह महर

देहरादून। इस आम बजट में वित्तमंत्री प्रणब मुखर्र्जी ने जिस डायरेक्ट टैक्स कोड को देश में अप्रैल 2011 से लागू करने की घोषणा की, उसके पीछे उत्तराखंडी दिमाग है। जी हां, उत्तराखंड के लोग गर्व कर सकते हैं कि पिछले पांच साल से जिस प्रत्यक्ष कर कोड को केंद्र सरकार गुपचुप विकसित कर रही थी उसे ड्राफ्ट करने में उत्तराखंड के मूल निवासी आयकर आयुक्त डॉ. डीपी सेमवाल ने अहम योगदान दिया है।

डीपी सेमवाल उत्तराखंड में आयकर आयुक्त हैं। वह आजकल देहरादून स्थित मुख्य आयकर आयुक्त कार्यालय में आयुक्त हैं। मूलरूप से कर्णप्रयाग के पास के सेम गांव के रहने वाले 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी डॉ. डीपी सेमवाल 2001 से 2008 तक रेवेन्यू विभाग के निदेशक रहे हैं। उन्होंने स्रोत पर आयकर कटौती (टीडीएस-टैक्स डिडक्शन ऐट सोर्स ),अग्रिम कर और वसूली के नियम और उपनियम ड्राफ्ट किए हैं। यह टैक्स कोड संसद की मंजूरी के बाद आयकर अधिनियम 1961 के बदले लागू होगा। टैक्स कोड दरअसल 2004 में वर्तमान गृह मंत्री पी. चिदंबरम के वित्त मंत्री बनने के बाद ही तैयार होना शुरू हुआ। चिदंबरम जब 1996-97 में वित्तमंत्री थे तभी वह इस तरह का कोड तैयार करवाना चाहते थे लेकिन यह काम उनके दूसरी बार वित्त मंत्री की पारी में शुरू हो सका। वैसे इस कोड को बनाने में देश के पांच आईआरएस अधिकारियों ने योगदान दिया है। रोचक बात तो यह है कि टैक्स कोड बनाने में केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड को शामिल नहींकिया गया। कोड विकसित करने में मुख्य योगदान देने वाले 1981 बैच के आईआरएस अरबिंद मोदी जहां कर नीति विधान के संयुक्त सचिव हैं। कोर टीम के अन्य विशेषज्ञ अधिकारियों में कानपुर की 1978 बैच की आईआरएस अनिता कपूर वर्तमान में रेवेन्यू डिपार्टमेंट के विदेशी कर डिवीजन में हैं। 1987 बैच की आईआरएस प्रज्ञा सहाय सक्सेना और वित्त मंत्रालय की टैक्स पॉलिसी लेजिस्लेशन (टीपीएल) विभाग के पूर्व निदेशक शरत चंद्रा शामिल हैं।

समांतर अर्थव्यवस्था को खत्म करेगा टैक्स कोड

डायरेक्ट टैक्स कोड लागू होने से देश में काले धन की समांतर अर्थव्यवस्था नष्ट होने की उम्मीद है। इस कोड में कर अदायगी को और ज्यादा सरल और सहज बनाया गया है। सूत्रों के मुताबिक टैक्स कोड लागू होने के बाद लोगों को हाल में घोषित आयकर स्लैब से भी ज्यादा लाभ होगा और उन्हें कम से कम टैक्स अदा करना पड़ेगा। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि डायरेक्ट टैक्स कोड लागू होने से देश में कर चोरी रुकेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग कर अदा करेंगे जिससे काले धन की अर्थव्यवस्था को खत्म किया जा सकेगा।

पंकज सिंह महर

पंकज की रचना पाठ्य पुस्तक में

सोमेश्वर (अल्मोड़ा): तहसील क्षेत्र के बूंगा चनौदा के युवा रचनाकार पंकज सिंह भाकुनी की हिंदी रचना अमर शहीद सरदार भगत सिंह को एससीईआरटी उत्तराखण्ड द्वारा कक्षा आठ की हिंदी पाठ्यपुस्तक में सम्मिलित किया गया है। यह रचना बच्चों के लिए शिक्षण की दृष्टि से विशिष्ट और महत्वपूर्ण मानी गई है।

संयुक्त निदेशक राम अवध प्रसाद द्वारा इस होनहार व ग्रामीण परिवेश के 20 वर्षीय युवा रचनाकार जो कि वर्तमान में सोमेश्वर आईटीआई में प्रशिक्षण ले रहा है, रचना स्वीकृति का पत्र प्रेषित करते हुए पारिश्रमिक के रूप में बैंक ड्राफ्ट भी भेजा गया है। स्पष्ट किया है कि इस रचना का उपयोग नितांत अव्यवसायिक उद्देश्य से विद्यालयी शिक्षा में बच्चों की क्षमता को समृद्ध करने में किया जाएगा। पंकज भाकुनी के पिता मित्रा भाकुनी कृषि व्यवसाय से जुड़े हैं तथा अपनी इस सफलता का श्रेय पंकज ने अपने मार्गदर्शक गुरु डा.कपिलेश भोज, पूर्व प्रधानाचार्य नारायण सिंह कैड़ा व अपने माता-पिता के सहयोग को दिया है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6303383.html

Devbhoomi,Uttarakhand

                          प्रो. शर्मा को राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मान मिला
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श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष प्रो. रमेशचंद्र शर्मा को जूलाजिकल सोसाइटी आफ इंडिया ने अमृता देवी विश्नोई अवार्ड व स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

उन्हें यह सम्मान पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय शोध पर दिया गया है।

अल्मोड़ा के सांसद प्रदीप टम्टा और गुरुकुल कांगड़ी विवि हरिद्वार के कुलपति प्रो. स्वतंत्र कुमार ने विवि परिसर में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रो. शर्मा को यह सम्मान प्रदान किया। यह पुरस्कार वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए जोधपुर, राजस्थान में सन् 1737 में प्राण न्यौछावर कर देने वाली अमृता देवी विश्नोई के नाम पर दिया जाता है।

प्रो. शर्मा को इससे पूर्व इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पर्यावरण पुरस्कार, राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी स्वर्ण पदक, इंडियन एकेडमी इनवायरमेंटल बायोलाजी स्वर्ण पदक के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। प्रो. शर्मा केंद्र सरकार की ओर से उत्तराखंड राज्य पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण में भी नामित किए गए हैं।


हेम पन्त

ओबामा प्रशासन में मुख्य कृषि व्यापार वार्ताकार  के महत्वपूर्ण पद पर नवनिर्वाचित श्री इस्लाम सिद्दीकी हल्द्वानी के मूल निवासी हैं और इन्होंने पन्तनगर कृषि विश्वविद्यालय से कृषि क्षेत्र की पढाई की है.



Washington, March 28 (Coal Geology) After waiting for months for the Senate to act, President Barack Obama has announced he would bypass a vacationing senate to make recess appointments of 15 nominees, including an Indian American agricultural scientist Islam A. Siddiqui as chief agricultural negotiator in trade talks.
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Since 2004, Siddiqui has also served on the US Department of Commerce's Industry Trade Advisory Committee on Chemicals, Pharmaceuticals, and Health/Science Products & Services, which advises the US Secretary of Commerce and USTR on international trade issues related to these sectors.

Between 2001 and 2003, Siddiqui was appointed as Senior Associate at the Centre for Strategic and International Studies (CSIS), where he focused on agricultural biotechnology and food security issues.

Before joining USDA, Siddiqui spent 28 years with the California Department of Food and Agriculture. He has MS and PhD degrees in plant pathology, both from the University of Illinois at Champaign-Urbana.

Read full news here:

http://coalgeology.com/obama-names-indian-american-islam-a-siddiqui-to-key-agricultural-post/3723/


हेम पन्त

श्रोत : दैनिक जागरण


जागरण संवाददाता, हल्द्वानी: प्रतिभा पहचान की मोहताज नहीं होती, यह साबित कर दिखाया है शहर के इस्लाम अहमद सिद्दीकी ने। हल्द्वानी की तंग गलियों में पले-बढ़े इस शख्सियत को अमेरिका में मुख्य कृषि वार्ताकार बनाया गया है। नयी जिम्मेदारी से यहां उनके परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गयी है। शहर के किदवईनगर में रहने वाले इस्लाम अहमद सिद्दीकी ने यहां के एमबी स्नातकोत्तर महाविद्यालय से ग्रेजुएशन के बाद पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से एग्रीकल्चर में परास्नातक किया। पढ़ाई में मेधावी रहे सिद्दीकी आगे की पढ़ाई के लिए वर्ष 1964 में अमेरिका चले गये। वहां कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में पीएचडी की, तो उनकी काबिलियत के दम पर यूनिवर्सिटी ने उन्हें प्राध्यापक के पद पर नियुक्त कर लिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ ही साल बाद उन्हें कैलिफोर्निया प्रांत का एग्रीकल्चर डायरेक्टर भी बनाया गया, बेहतर परफार्मेस रहने पर उन्हें बिल क्लिंटन सरकार में डिप्टी मिनिस्टर एग्रीकल्चर यूएसए बनाया गया। अब 23 सितंबर को उन्हें मुख्य कृषि वार्ताकार की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। हल्द्वानी से निकलकर अमेरिका में कृषि वार्ताकार बनने के सिद्दीकी के सफर से क्षेत्रवासी खासे उत्साहित हैं। सिद्दीकी के परिवार में पत्‍‌नी तबस्सुम के अलावा दो पुत्रियां व एक पुत्र है। जबकि सिद्दीकी के भाई रईस अहमद सिद्दीकी हाइकोर्ट नैनीताल में अधिवक्ता हैं। दूसरे भाई मशकूर अहमद शहर की लाइन नंबर आठ में शू मर्चेट हैं। श्री मशकूर बताते हैं कि गुरुवार को जब भाई के अमेरिका में कृषि वार्ताकार बनने की खबर मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

हेम पन्त

Source : Dainik Jagran

थल(पिथौरागढ़): सीमांत जिले की एक ओर मेधा ने जिले का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। कस्बे के निकटवर्ती धारगांव के रहने वाले डा.मोहन सिंह मेहता को अमेरिका के प्रसिद्ध मेलोन विश्वविद्यालय ने फैलोशिप के लिए चुना है।

डा.मेहता मेलोन विश्वविद्यालय में प्रकाश एवं अणुओं के बीच इंट्रेक्शन और इससे पैदा होने वाली स्थितियों पर शोध करेंगे। इस शोध से कई नई तथ्यों के सामने आने की उम्मीद है। अमेरिका के मेलोन विश्वविद्यालय से फैलोशिप पाने वाले डा.मेहता कुमाऊं के पहले वैज्ञानिक हैं। डा.मेहता के अब तक 39 शोध पत्र अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के शोधग्रन्थों में प्रकाशित हो चुके हैं। डा.मेहता को इससे पूर्व जापान सरकार जापान सोसाइटी फॉर द प्रमोशन आफ साइंस अवार्ड 2005, भारत सरकार के यंग साइंटिस्ट फैलोशिप, अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी द्वारा रिसर्च फैलो, उत्तराखण्ड सरकार के यंग साइंटिस्ट अवार्ड और जापान की होकोइडो यूनिवर्सिटी द्वारा पोस्टडाक्टरोल फैलोशिप से सम्मानित हो चुके हैं।

डा.मेहता बचपन से ही मेधावी रहे हैं। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा प्राइमरी पाठशाला अल्काथल, इंटर तक की शिक्षा राइका थल से प्राप्त की। बीएससी की शिक्षा उन्होंने पिथौरागढ़ महाविद्यालय से और एमएससी की शिक्षा अल्मोड़ा महाविद्यालय से प्राप्त की। एमएससी के बाद उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त की। अमेरिकी विश्वविद्यालय द्वारा डा.मेहता को फैलोशिप दिये जाने पर पिथौरागढ़ महाविद्यालय में रसायन विज्ञान के प्राध्यापक डा.विपिन जोशी सहित तमाम लोगों ने उन्हें बधाई दी है।