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Songs On Seasons & Festivals - उत्तराखंड के त्योहारों व ऋतुओं पर रचित गीत

Started by Mukesh Joshi, June 02, 2008, 09:59:26 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

This is the song based on Rainy Season in Hill area when there is greenery everywhere and singer has very well described the beauty of pahad during this season. He has specially mentioned wording like "Teesali Dharti Ki Tees Bhugege" which means how thrust of Dharti has quenched.   

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THANDU MATHU CHAUMAAS...
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THANDU MATHU CHAUMAAS DANDIYUN MA SORIGEY
THANDU MATHU CHAUMAAS DANDIYUN MA SORIGEY
TEESALI DHARTI KI TEES, TEESALI DHARTI KI TEES BUJHEGE,

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THANDU MATHU CHAUMAAS DANDIYUN MA SORIGEY
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      CHAUMASI HARIYALI KAN SAANI KANI CHA,
      KUNGALI LAGLUYI KI LANTYAAR LAGI CHA,
      HE CHAUMASI HARIYALI KAN SAANI KANI CHA,
      KUNGALI LAGLUYI KI LANTYAAR LAGI CHA,
      LOKHADIN KUYEDI, HE LOKHADIN KUYEDI ROLIYUN MA BAITHIGE
,

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THANDU MATHU CHAUMAAS DNADIYUN MA SORIGEY
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      PAIJAN BATHIGEY KAKHADI MUNGARI,
      ULAAR LAGYAAN CHACHINDA GODADI,
      HE PAIJANI LAGIGEY KAKHADI MUNGARI,
      ULAAR LAGYAAN CHACHINDA GODADI,
      HE ISKULYA, GWAIRUN KI, HE ISKULYA, GWAIRUN KI KAN BAAR
                      PODIGE


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THANDU MATHU CHAUMAAS DANDIYUN MA SORGEY.......
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      LASKARAYA GHASERI GHASAA KU JYAAN,
      ATODI BATHODIYUN MA UDYAAR LUKYANI,
      LASKARAYA GHASERI GHASAA KU JYAANI,
        ATODI BATHODIYUN MA UDYAAR LUKYANI,
      RUJHDA BHIJHDA, ARE RUJHDA BHIJHADA, PATROL PAUCHHIGE
         THUNDU MATHU CHAUMAAS DANDIYUN MA SORIGEY
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THANDU MATHU CHAUMAAS DANDIYUN MA SORIGEY
THANDU MATHU CHAUMAAS DANDIYUN MA SORIGEY
TEESALI DHARTI KI TEES, TEESALI DHARTI KI TEES BUJHEGE,

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Narendra Singh Negi Ji song on 12 month of year and working. Album Burash.

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रूठी  पकी  जवादी  चुना  की , हरी  बोला   जी
हरी  बोला   जी
हरी  बोला   जी
रूठी पकी  जवादी  चुना  की , हरी  बोला  जी
हरी  बोला   जी, हरी  बोला   जी

चैत  का महना , चोरी  न  कियां , चोरी  की  चीज  न  छुइयाँ   -2
प्यारु  छ  महना ,  बैसाख  बिना , बीडी  तम्बाखू  धुवां
कालू  भैसू , कलेजू  बैथालू , खांसी  पडली  भ्वेइआन
हरी  बोला   जी, हरी  बोला   जी

जेठ जेथैयाँ , दें  छ  धनदो , जब  बांट  बतियाँ  -2
महना अशाद , बात  बिगाड़ , जी  तेरी शादी   न  हियाँ
हरी  बोला   जी, हरी  बोला   जी

सौंण भी  सौंण  झादिकी  लागौना , सुधि  नि  सेय्नु  भ्वियाँ  -2
भाग  भदैयां , काग  बिरिया , भाई  भैयुं  मा चुईयाँ
हरी  बोला   जी, हरी  बोला   जी

अशौज  असुज , तू  रेहंदु  बेबूझ , दिन हरी भजिया  -2
प्यारी  छ  रात , कार्तिक मॉस , कलि  कमली  ओढ़ना  बिचैयाँ
हरी  बोला   जी, हरी  बोला   जी

आलू  मंगसीर , रहनु   धन्ग्सीर , उध्मतु  न  हियाँ  -2
पूष  छ  प्यारु , पीयान  ना  दारु , दारु  दरोल्या  ना  हियाँ
हरी  बोला   जी, हरी  बोला   जी

मागु  रे  मागु , रांड  को  लागु , धर  धरून  न  जियान  -2
देख्की की  बहनी , महना  फागुनी , धान  कमानी  नि  लानी  लगनी  नि चुइयाँ
हरी  बोला   जी, हरी  बोला   जीji
दा बोला
हरी  बोला   जी, हरी  बोला   जी

हरी  बोला   जी, हरी  बोला   जी
हरी  बोला   जी, हरी  बोला   जी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Negi Ji songs on Basant Ritu.
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मेर डण्डि कण्ठियों का मुलुक जैल्यु, बसन्त रितु मा जैयि -२
हैर बण मा बुराँसि का फूल, जब बण आग लगाण होला..
पीता पखों थैं फ्योलिं का फूल, पिन्ग्ला रंग मा रंग्याण होला ..
ळाइयां पैयां ग्वीराल फूलु ना-२, होलि धर्ति सजि देखि ऐइ ...
बसन्त रितु म जैयि...
मेर डांडि....

रन्गील फागुन होल्येरोन कि टोलि, डांडि कांठियों रंग्यणि होलि...
कैक रंग म रंग्युं होलु क्वियि, क्वि मनि-मन म रंग्श्याणि होलि..
किर्मिचि केसरि रंग कि बाढ-२, प्रेम क रंगों मा भीजि ऐइ...
बसन्त रितु म जैयि....
मेर डांडि....

बिन्सिरि देय्लिओं मा खिल्दा फूल, राति गों-गों गितेरुं का गीत...
चैता का बोल, ओजियों का ढोल, मेरा रोंतेला मुलुके कि रीत...
मस्त बिग्रैला बैखुं का ठुम्का-२, बांदूं का लस्सका देखि ऐइ....
बसन्त रितु म जैयि...
मेर डंडि....

सैणा दमला र चैतै बयार, घस्यरि गीतों मा गुंज्दि डांडि...
खेल्युं मा रंग-मत ग्वेर छोरा, अट्क्दा गोर घम्डियंदि घंडि..
वखि फुन्डे होलु खत्युं मेरु भि बच्पन, -२ ऊक्रि सक्लि त ऊक्रि कि लैयि...
बसन्त रितु म जैयि...

मेर डण्डि कण्ठियों का मुलुक जैल्यु, बसन्त रितु मा जैयि -२

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


गोपाल बाबु गोस्वामी जी यह गाना जो साल के ऋतुओ पर बना है !
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बर्ष का बार बारो मासा
कोनी छः ऋतू छबीला रंग रंगीला .... २

जेठ बैसाख गर्मी दिन
दिन दोपरी आख मे नीना... २
काफिल किरमड़ पाकनी डाना
रस रसीला हिसालू खूना

बर्ष का बार बारो मासा
कोनी छः ऋतू छबीला रंग रंगीला .... २

सौ भादो बरखा झडी, हरिया डान हरिया झाडी
डान कानो मे मुरूली बाजी,
हौ सिया मेरी घरती लागी ...

बर्ष का बार बारो मासा
कोनी छः ऋतू छबीला रंग रंगीला .... २

अशौज कार्तिक धान पाकनी
देवी देवो के भोग लागनी
साग पातो की हैछो बहार
हाथ नी छो काकडी रैता..

बर्ष का बार बारो मासा
कोनी छः ऋतू छबीला रंग रंगीला .... २

उदासी दिन फागुन चैता
डाई बोटी मे फुलाछो फूला
काफुआ नियोली बासी घुघूती
बिरही मन जान उडेखी

बर्ष का बार बारो मासा
कोनी छः ऋतू छबीला रंग रंगीला .... २

मगसिर पुष गियों की धुश
दियो  पूजनी गौ का लोग...२
माघ महिना खिचडी खानी.

बर्ष का बार बारो मासा
कोनी छः ऋतू छबीला रंग रंगीला .... २


हेम पन्त

आई रितु सुणमुणिया रे,
आई गयो बालो बसन्त रे
फ़ुलण लैगी गाडू फ़्योलड़ी
फ़ुली ग्योलो डांडू बुरांस
बुरांस दादू तू बड़ो ऊतौलू रे,
औरु फ़ूल तू फ़ुलण नी देन्दो
तू जाति को खास ठकरौल
पर बास तेरी कै देवन हरी?

यह एक ऋतुतुरैण गीत है. बसन्त ऋतु में फ्योंली और बुरांश के जैसे मनमोहक फूल खिल उठते हैं. गायक बुरांश फूल को उलाहना देते हुए कह रहा है कि हे बुरांश तू ढीठ है, अपने आसपास तू किसी अन्य फूल को खिलने नहीं देता, ऐसा लगता है तू जाति का कट्टर ठाकुर है. लेकिन एक बात बता अन्य फूलों की भांति तुझमें कोई गंध क्यों नहीं है. तेरी गंध किस देवता ने छीन ली?


Devbhoomi,Uttarakhand


Devbhoomi,Uttarakhand


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


गजेन्द्र राणा का यह गाना बसंत ऋतू पर
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ऋतू बसंत ये मौलियारी
एगे फूलो में फुलार झुमेलो 
 
[youtube]http://www.youtube.com/watch?v=EximUhmM4XM