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श्री पूरन चंद कांडपाल, उत्तराखंड मूल के प्रसिद्ध साहित्यकार एव कवि : PC Kandpal

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, June 09, 2008, 11:24:29 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dear Friends,

Sh. Pooran Chandra Kanpal ji has been given "Baal Ev Kishore Sahiyta Hindi Academy" award for his book "Vachpan Ki Buniyaad". This is for year 2007-08.

He is the first person from Uttarakhand who has recieved this award.

Earlier Mr Kanpdal ji was given "Akhil Bharteey Sahitya Prishad Karti Samman" (Aacharya Chatursen Award) in 2004 for his book "Kargkil ke Ranbakure".

Many-2 contragulations to Mr Kandpal JI and there may be many more such awards for him in coming future.

It is Definitely a matter of pride for all of us.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



Friends.

Kandpal Ji has relased another Book called

"Jindagi Ki Kahani"
(Kahani Sangrah)


The Book is worth to read with many interesting articles.

Pooran Chandra Kandpal

                                           ' कुमाउनी गीत गंगा ' 

        कुमाउनी भाषा में एक कवि सम्मलेन का आयोजन २१ फ़रवरी २०१०  को हरदेवपुरी
     दिल्ली में कूर्माचल समाज की ऑर से किया गया. इस सम्मलेन में कुमाउनी मूल के
     कई कवि आये थे.  समाज के प्रधान श्री गिरीश मठपाल और महासचिव श्री चंद्रमणि
     चन्दन का इस सम्मलेन में अच्छा समन्वयन रहा.  कुमाउनी बोली भाषा को पुष्पित
     पल्लवित करने का यह एक अच्छा प्रयास था.  इस कवि सम्मलेन में सर्वश्री डा. उप्रेती,
        आचार्य फुलोरिया, गौर जी, दयाल पाण्डेय, नीरज बवारी, चन्दन, चारू दा और मैंने कविता
      पुष्प चढ़ाये. कुमाउनी भाषा को जीवित रखने के प्रयास के लिए डा. जी डी भट ने
      कूर्मांचल समाज को धन्यवाद दिया.  पूरन चन्द्र कांडपाल.

Pooran Chandra Kandpal

                                         १२६ वर्ष से हो रही है उत्तराखंड में रेल सर्वे 

            सीमान्त पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में १८८४ में काठगोदाम अंतिम रेलवे स्टेशन बना था.
        तब से १२६ वर्ष हो गए हैं और देश को आजाद हुए ६३ वर्ष हो गए हैं.  राज्य की जनता
     और कलमकार लगातार रेल के लिए पुकार लगाते रहे क्योंकि उत्तराखंड एक सीमावर्ती
     राज्य होने के कारण सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है.  उधर चीन ने १९५९ के बाद
     रेल को तिब्बत की भारत के साथ लगी सीमा के आखिरी छोर तक पहुंचा दिया है.
       रेल निर्माण का महत्व  सैन्य दृष्टि के साथ ही रोजगार और पलायन से भी जुडा हैं.
       प्रतिवर्ष उत्तराखंड कें एक ही आवाज सुनाई देती हैं कि 'सर्वे होने वाली है.'

          अंग्रेजों के ज़माने से सर्वे होते होते १२६ वर्ष में भी यह सर्वे पूरी नहीं हो सकी.
         इसका मुख्य कारण था सभी विधायकों ,सांसदों ,बुद्धिजीवियों और ग्राम सभापतिओं
      का एकजुट होकर आवाज बुलंद नहीं करना.  जनता भी इस पुकार को आन्दोलन का
      रूप नहीं दे सकी.  आन्दोलन नहीं होने का मुख्य कारण पलायन से पहाड़ में युवाओं
      कि रिक्तता .  २०१०-११ के रेल बजट में ममताजी ने तीन परियोजनाओं --टनकपुर-
         बागेश्वर , टनकपुर-जौलजीवी तथा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के आरंभ करने कि घोषणा
      कर दी है.   देरी से ही सही काम आरंभ तो करो.  उत्तराखंड में तो रेल सपने में ही
      रह गयी .  दृढ इच्छाशक्ति से कश्मीर,उधमपुर,शिमला,जोगिन्देरनगर, दार्जिलिंग, उटी,
         धरमनगर, अगरतल्ला सहित कई दुर्गम स्थानों तक रेल पहुँच गयी परन्तु उत्तराखंड
      अधिक महत्वपूर्ण और कम दुर्गम होने के बावजूद भी रेल के लिए तरसता रह गया.
         पूरन चन्द्र कांडपाल.  ०१.०३.२०१० , मोबा ९८७१३८८८१५.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Friends,

Watch Out a TV interview of Shri Pooran Chand Kandpal Ji

on

28 Apr 2010 from 7 am to 8 pm

On Pragya Channel

Programme Name = Utho Jago

Don't miss this interview.
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


साहित्यकार पूरन चन्द्र कांडपाल को साहित्य सम्मान
 
" हिंदी अकादेमी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार ने हिंदी साहित्य की विविध विधाओं पर ११ मई २०१० को दिल्ली सरकार  सचिवालय सभागार दिल्ली में कई साहित्यकारों को सम्मानित किया.  सभी साहित्यकारों को दिल्ली की संस्कृति मंत्री डा. किरण वालिया, सरस्वती सम्मान विजेता साहित्यकार डा. जे.पी दास , हिंदी अकादेमी के उपाध्यक्ष प्रो.अशोक चक्रधर के सानिध्य में दिल्ली की मुख्य मंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने सम्मानित किया. 
 
  उत्तराखंड के मूलनिवासी साहित्यकार पूरन चन्द्र कांडपाल को बाल एवं किशोर साहित्य सम्मान वर्ष २००७-२००८ के लिए सम्मानित किया गया.  यह सम्मान उन्हें उनकी पुस्तक 'बचन की बुनियाद' के लिए प्रदान किया गया.  इस अवसर पर कई जाने माने साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार तथ बुद्धिजीवी उपस्थित थे."


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

011/9/14 Pooran Kandpal <kandpalp@yahoo.com>

    हिंदी अपने राष्ट्र की भाषा, पढ़ लिख नेह लगाय
    सीखो चाहे और कोई भी, हिंदी नहीं भुलाय,
     हिंदी नहीं भुलाय , आया चौदह सितम्बर देखो
    जन जन की यह  भाषा हे राष्ट्र प्रेमी जागो,
    कह 'पूरन' कार्यालय में बनी यह चिंदी
    बीते चौसठ बरस , अपनाई नहीं हिंदी.
     
    पूरन चन्द्र कांडपाल