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Live Chat With Gajendra Rana(Famous Singer) On 11 Jul 2008 At 11:00AM

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 10, 2008, 04:41:57 PM

पंकज सिंह महर

मेरे कुछ अनुत्तरित प्रश्न

१-राज्य आन्दोलन के शहीदों और आन्दोलनकारियों को श्रद्धांजलि देने वाले एलबम बहुत कम कलाकारों ने निकाले हैं, मेरा आप जैसे सफल और लोक संस्कृति को जानने वाले गायक से करबद्ध अनुरोध है कि एक एलबम आप जरुर निकालें और इसके लिये संस्कृति विभाग भी आपकी वित्तीय मदद कर सकता है। मुझसे और मेरा पहाड़ परिवार से इस पुनीत कार्य के लिये जो भी सहयोग हो सकेगा, हम करेंगे।

२-राणा जी,
         पुराने लोक गीत, जो हमारी दादियां-नानियां गाया करती थीं, उन गीतों का संवर्द्धन भी आवश्यक है, उन गीतों की मिठास घर के बने गुड़ की जैसी होती थी। क्या उन गीतों का संकलन कर नई पीढी को परिचित कराने का आपका कोई विचार है?


३-राणा जी,
        आजकल पहाड़ खाली हो गये हैं, गांव में अब अपनी पैतृक सम्पत्ति के मोह में डूबे बूढे-बाढी ही रह गये हैं, उनके बच्चे भी अब उनकी सुध लेने नहीं आते। बूढी आंखे जो अपने लडके और नाती-पोतों की राह देखते-देखते एक दिन पथरा जाती हैं, इस पीड़ा को लेकर और ऎसे (नालायक) लड़कों, जो अपने मां-बाप की सुध भी नहीं लेते, उनके हृदय को झकझोर कर वापस पहाड़ आने के लिये मजबूर कर देने वाले गीत का बेसब्री से इंतजार रहेगा।



४-लोक गीत, जनजागरण के सशक्त माध्यम होते हैं और गैरसैंण के लिये व्यापक जनजागरण की आवश्यकता है। मेरी उत्तराखण्डी लोक संगीत के कलाकारों से हमेशा अपेक्षा रही है कि वह व्यवसायिक गीतों को गाने की बजाय सामाजिक सरोकारों वाले गीतों को प्राथमिकता दें। ऎसे गीत गाकर आप लोगों को आत्म संतुष्टि भी मिलेगी कि हमने अपने राज्य के लिये यह किया।

५-राणा जी,
      उत्तराखण्डी वाद्य यंत्र विलुप्ति की कगार पर हैं, आप जैसे लोक कलाकारों को उसके संरक्षण के लिये कुछ करना चाहिये, क्योंकि इनका संरक्षण आप लोग अपने गीतों में प्रयोग करके कर सकते हैं। मेरा अनुरोध है कि हुड़का, डौंर, मुरुली, भोंकर, तुतुरी, नारसिंग, मशकबीन आदि वाद्य यंत्रों के साथ आप अपने गीतों का फिल्मांकन करें।
       यदि ये वाद्य यंत्र विलुप्त हो गये तो शादी-ब्याह में तो हम बैंड-बाजे से काम चला लेंगे, लेकिन फिर जागर कैसे लगायेंगे?.........जागर गायेगा कौन? क्योंकि उसे तो औजी/जगरिया ही गा सकता है।


६-राणा जी,
       टिहरी विस्थापितों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि वो अपने आने वाली पीढी़ को अपना पैतृक स्थान नहीण दिखा पायेंगे। आज कोई भी देश-विदेश में रहता है और कभी गांव आता है तो अपने बच्चों से कहता है कि ये हमारा घर है या घर टूटा-फूटा भी हो तो कह सकता है कि यह हमारा घर था। जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ भी दिल्ली आये तो अपने पूर्वजों के मकान को देखने गये, लेकिन टिहरी का आदमी कहां जायेगा और क्या अपने बच्चों को दिखायेगा।
     मेरा अनुरोध है कि इस थीम पर आप गीत लिखकर गांये, क्योंकि यह वास्तविक पीड़ा है।


७-उत्तराखण्ड के लोक संगीत के स्तर से क्या आप संतुष्ट हैं?

दिनेश मन्द्रवाल

भैजी आप हमारे फोरम में आये बहुत खुशी की बात है। आपका बहुत-भौत धन्यवाद।

हेम पन्त

पंकज दा! राणा जी अब देहरादून ही रहने लगे हैं. आप उनसे वहां मुलाकात करके विस्तार में अपने विचारों से अवगत कराइयेगा.

मुझे पूर्ण विश्वास है कि राणा जी इन सभी विषयों पर जरूर काम करेंगे.

पंकज सिंह महर

प्रिय राणा जी,
         यह हमारा सौभाग्य है कि आप अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर हमारे फोरम में आये और हमारे सदस्यों को अमूल्य जानकारी प्रदान की। कुछ सुझाव आपको भी प्राप्त हुये होंगे और फोरम का यही उद्देश्य है कि उत्तराखण्ड को समझने वाले लोगों को एक मंच के नीचे लाकर, कुछ ठोस कार्य करना।
    आपका आगमन ने हमारे फोरम को गौरवान्वित किया है। मै मेरा पहाड़ परिवार की ओर से आपका पुनः हार्दिक धन्यवाद व्यक्त करता हूं।


जय उत्तराखण्ड।

हेम पन्त

आज की चैटिंग को सफल बनाने के लिये मैं मेहता जी और अनुभव दा को विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहूंगा.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




दोस्तों,

मुझे उम्मीद है यह लाइव चैट श्री गजेन्द्र राणा जी के साथ आपको अच्छा लगा होगा ! यदिप यह कार्यक्रम कुछ जल्दी मे जिसकी सूचना बहुत से लोगो को नही पहुच पायी होगी! इसके लिए क्षमा चाहते है !

हमें उम्मीद है कि भविष्य मे भी आप लोग इसी सहयोग देते रहंगे !  और हमारी तरफ़ से कोशिश रहेगी कि हम आप लोगो से इसी तरह उत्तराखंड के व्यकित विशेषो से आपकी लाइव चैट कराते रहंगे !

अंत मै अनुभव जी, हेम जी, मोहन दा, कैलाश दा, महर जी, राजन दा, मीना जी, हिमांशु जी धन्यवाद अदा करना चाहूँगा और खासतौर से हमारे वरिष्ठ सदस्य शैलेश उप्रेती जी ( संजू पहाडी) जी जिहोने ने amercia से रात मै log इन होकर इस चैट को सफल बनाया !

धन्यवाद

एस एस मेहता

KAILASH PANDEY/THET PAHADI

Rana ji, merapahad team ke liye samay nikalane ke liye ham sabhi team members apka sukriya ada karte hain...aur aasha karta hu ki aap ishi tarah se ham logo ka margdarshan karte rahenge....

Jai Uttarakhand

पंकज सिंह महर

इस कार्यक्रम को संयोजित करने के लिये हमारे परिवार के वरिष्ठ सदस्यों श्री महिपाल सिंह मेहता जी, हेम पंत जी, अनुभव उपाध्याय जी का विशेष सहयोग रहा। सभी सदस्यों की ओर से इन्हें कोटिशः धन्यवाद।
   विशेष रुप से अनुभव दा को सभी सदस्यों की ओर से हार्दिक धन्यवाद कि उन्होंने छुट्टी लेकर इस आयोजन को सफल बनाया।
   सभी सदस्यों का भी मैं आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जिन्होने अपने व्यस्ततम क्षणॊं में से समय निकाल कर इस आयोजन को सफल बनाने में अपना सहयोग प्रदान किया।

Rajen

गजेन्द्र राणा जी से सीधी बात-चीत कराने हेतु "म्यर पहाड़" के Core Team  को